कक्षा 6 हमारा इतिहास और नागरिक जीवन class 6 hamara itihaas aur nagrik jivan

इतिहास क्रम संख्या पाठ्य 1. कैसे पता करें कब क्या हुआ था (इतिहास जानने के स्रोत) 2. पाषाण काल (आखेटक संग्राहक एवं उत्पादक मानव) 3. नदी घाटी की सभ्यता – हड़प्पा सभ्यता 4. वैदिक काल 5. छठी शताब्दी ईसा पूर्व का भारत धार्मिक आंदोलन 6. महाजनपद की ओर 7. मौर्य साम्राज्य 8. मौर्योत्तर काल में … Read more

पाठ -12 दक्षिण भारत Dakshin Bharat

दक्षिण भारत “दक्षिण भारत की प्रारम्भिक जानकारी हमें सम्राट अशोक के अभिलेखों तथा संगम साहित्य से प्राप्त होती है। संगम साहित्य में हमें दक्षिण के तीन राज्यों चेर, चोल तथा पांड्य राज्यों का वर्णन मिलता है। छठी से ग्यारहवी शताब्दी के मध्य दक्षिण भारत में कुछ नवीन राज्यों का उदय हुआ।” विंध्य पर्वत तथा नर्मदा … Read more

पाठ -11राजपूत काल (सातवीं से ग्यारहवीं शताब्दी)Rajput kal

“सम्राट हर्ष की मृत्यु के बाद भारत में एक शक्तिशाली केन्द्रीय शक्ति का अभाव हो गया। केन्द्रीय शक्ति के अभाव में छोटे-छोटे राज्यों का अभ्युदय हुआ। इन सभी राज्यों के संस्थापक प्रायः राजपूत थे। राजपूत सत्ता के लिए आपस में संघर्ष करते रहते थे। राजपूतों की उत्पत्ति-राजपूत राजवंशों का उदय सातवीं शताब्दी से ही दिखाई … Read more

पाठ 10 पुष्यभूति वंश Pushyabhuti vansh

संगम नगरी इलाहाबाद (प्रयागराज) में माघ के महीने में माघ मेला, कुम्भ एवं महाकुम्भ का पर्व मनाया जाता है। इसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पूर्व हर्षवर्धन नाम के राजा भी यहाँ प्रति पाँचवें वर्ष आकर धर्म सभा करवाते थे। यहाँ वह अपनी पाँच वर्ष की संचित सम्पत्ति का … Read more

पाठ 9 गुप्तकाल guptkal

गुप्तकाल “दिल्ली में स्थित मेहरौली लौह स्तम्भ में चन्द्र नामक शासक की विजयों का वर्णन है। इस चन्द्र नामक शासक की पहचान इतिहासकार गुप्तवंश के शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय से करते है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आज लगभग 1600 साल बीत जाने के बाद भी इस लौह स्तम्भ में जंग नहीं लगा है। इससे गुप्तकाल … Read more

पाठ 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से संपर्क Maurya Uttar kal

हम अपने परिचितों, रिश्तेदारों आदि के घर जाते हैं। प्रायः हम इनसे रहन-सहन, तौर-तरीके, भोजन आदि सम्बन्धी अच्छी बातें सीख लेते हैं। इसी प्रकार एक देश से दूसरे देश को जाने वाले लोग भी एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख लेते हैं। भारत में भी जब विदेशी लोग आए और यहाँ शासन किया तब उनसे हमने … Read more

पाठ 7 मौर्य साम्राज्य Maurya samrajya

मौर्य साम्राज्य आप आजकल के प्रचलित सिक्कों को ध्यान से देखिए । इसके एक ओर पीठ से पीठ सटाए हुए चार सिंह बैठे हैं। ये सिंह अशोक के सारनाथ स्तम्भ से लिए गए हैं। अशोक जिस वंश का शासक था वह वंश था- मौर्य वंश । बौद्ध स्रोतों के अनुसार नन्द वंश के शासक धननन्द … Read more

पाठ 6 महाजनपद की ओर mahajanpad

आप जानते हैं कि आपका जनपद (जिला) कई तहसीलों से मिलकर बना है। कई जनपदों से मिलकर आपका प्रदेश बना है। इसी प्रकार प्राचीन काल में छोटे-छोटे जनपद मिलकर महाजनपद बन गए। जन से जनपद वैदिक काल में किसी कुल, जनजाति या लोगों के समूह को जन कहा जाता था । प्रत्येक जन का राजा … Read more

पाठ 5 छठी शताब्दी ई0 पू0 का भारत धार्मिक आन्दोलन Bharat dharmik aandolan

छठी शताब्दी ई०पू० में छोटे-छोटे जनपद बड़े राज्य बनने की होड़ में संघर्ष करते रहते थे। इससे प्रजा अपने को असुरक्षित महसूस करने लगी थी। पुराने समय में जन के लोग एक दूसरे की मदद एवं आपस में भरोसा करते थे। ऐसी बातें अब समाप्त हो चली थीं। अब ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के … Read more

पाठ -4 वैदिक काल (1500 ई0 पू0 से 600 ई0पू0) Vaidik kal

वैदिक काल “पशु सदैव से हमारे लिए उपयोगी रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि भारत में पशुओं को पालने की परम्परा कब से चली आ रही है ? प्रारम्भिक आर्य भी पशुपालक थे। आर्यों के रहन-सहन के तरीके तथा परम्पराओं का पालन आज भी भारतीय समाज में देखने को मिलता है। वैदिक काल से … Read more

पाठ 3 नदी घाटी की सभ्यता- हड़प्पा सभ्यता hadappa sabhyata

हड़प्पा सभ्यता आज कुछ लोग गाँवों में रहते हैं तो कुछ नगरों (शहरों) में। दोनों ही जगह के रहन-सहन में कुछ-कुछ समानताएँ होती हैं तो कुछ अन्तर भी । क्या आपको पता है कि आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भी भारत में नगर थे। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन प्राचीन नगरों … Read more

पाठ-2 पाषाण काल(आखेटक संग्राहक एवं उत्पादक मानव) pashan kal

पाषाण काल घर हमें जाड़े से, गर्मी से, तथा बारिश से सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें रहकर हम अपने सभी कार्यों को भली-भाँति कर लेते हैं किन्तु एक समय ऐसा भी था जब मनुष्य घर बनाना नहीं जानते थे। तब वे जंगलों में रहते थे। जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा तथा उनका शिकार करने के … Read more

पाठ 1 कैसे पता करें कब क्या हुआ था (इतिहास जानने के स्रोत) itihaas janne ke strot

इतिहास जानने के स्रोत परिवार की पुरानी बातें हम दादा-दादी, नाना-नानी की बातों से जानते हैं। समाचार पत्र, पत्रिका टी०वी० और रेडियो से भी हमें जानकारी मिलती है। सोचो! अगर हमें आज से हजारों वर्ष पहले के लोगों के रहन-सहन के बारे में जानना हो तो हम कैसे जानेंगे ? हजारों वर्ष पहले के लोगों … Read more

भारत का संविधान उद्देशिका uddeshika

उद्देशिका uddeshika हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथ-निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने केbलिए तथा उसके समस्त नागरिकों कोःसामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए,तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा औरराष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली … Read more

संस्कृत सुरभि:कक्षा -4 Sanskrit Surabhi class-4

विषय सूची क्रमांक पाठ नाम 1. वन्दना prayer 2. प्रभातबेला morning Time 3. मूर्खाय उपदेशो न दातव्य: (Don’t Teach the Follish) 4. स्वतन्त्रता दिवस: (Indeper dence Day) 5. त्रयो धूर्ता: (Three Cunnings) 6. कृषका: (The Farmers) 7. नीति श्लोकाः (Ethical Shlokas) 8. विज्ञानस्य आविष्काराः (Inventions of Science) 9. चित्रग्रीव-हिरण्यक-कथा (Story of Chitragreeva & Hirnyak) 10. … Read more

पाठ 20 संस्कृत व्याकरण Grammar

शब्द रुप विभक्तियों का प्रयोग-संस्कृत में अनुवाद करते समय हिंदी के कारक चिन्ह के आधार पर विभक्तियों का प्रयोग होता है यह कारक चिन्ह है और विभक्तियां निम्नलिखित हैं। विभक्तिः कारक चिन्ह प्रथमा कर्ता ने द्वितीया कर्म को तृतीया करण से (सहायतार्थ) के द्वारा चतुर्थी सम्प्रदान के लिए पञ्चमी अपादान से (अलग होने में ) … Read more

पाठ 19 वन्दे मातरम् Salutation to motherland

पाठ 19 वन्दे मातरम् अस्माकम् देशः भारतं महान् देशः अस्ति। प्राचीनकाले दुष्यन्तः नाम राजा आसीत्। तस्य पुत्र भरतस्य अभिधानेन एव आर्यावर्तस्य नामीरतम् अभवत् । एषः देशः प्रकृतेः क्रीडास्थली अस्ति। उत्तरस्यां दिशि गिरिराजः हिमालयः अस्ति। सः अस्य उत्तरे मुकुट मणिः इव शोभते । दक्षिणस्यां दिशि विशालः जलनिधि रत्नाकरः अस्य चरणौ प्रक्षालयति । ब्रह्मपुत्र-गंगा-यमुना-सिन्धु-नर्मदा महानद्याः अस्य हृदयम् … Read more

पाठ 18 विद्याया: बुद्धिरुत्तमा Intellect is greater than learning

विद्याया: बुद्धिरुत्तमा कस्मिंश्चिद् जनपदे चत्वारो ब्राह्मणपुत्राः वसन्ति स्म। ते परस्परं मित्राणि आसन् । तेषु त्रयः शास्त्रेषु निष्णाताः परन्तु बुद्धिरहिताः आसन् । एकस्तु शास्त्रपराङ्मुखः परं बुद्धिमान् आसीत् । अथ तैः एकदा मन्त्रितम् – ” को गुणो विद्यायाः येन देशान्तरं गत्वा भूपतीन् परितोष्य अर्थोपार्जनं न क्रियते। अतः एतद् वरं यदिवयं देशान्तरं गत्वा अर्थोपार्जनं कुर्याम ।” मार्गे किञ्चद् … Read more

पाठ 17 चतुर: वानर: A clever monkey

चतुर: वानर: एकस्मिन् नदीतीरे एकः जम्बूवृक्षः आसीत्। तस्मिन् एकः वानरः प्रतिवसति स्म। सः नित्यं तस्य फलानि खादति स्म । कश्चित् मकरोऽपि तस्यां नद्यामवसत्। वानरः प्रतिदिनं तस्मै जम्बूफलान्ययच्छत् । तेन प्रीतः मकरः तस्य वानरस्य मित्रमभवत् । एकदा मकरः कानिचित् जम्बूफलानि पत्न्यै अपि दातुम् आनयत्। तानि खादित्वा तस्या जाया अचिन्तयत् अहो । यः प्रतिदिनमीदृशानि मधुराणि फलानि खादति … Read more

पाठ 16 हास्यालापा: A talk of jokes

पाठ 16 हास्यालापा: (अनेके बालकाः बालिकाः च उपविष्टाः हास्यालाप कुर्वन्ति ।) प्रमोद :-कमला ! किमपि हास्यं व्यंग्यं वा कथय ।कमला-श्रुणुत-कमला कमले शेते, हरः शेते हिमालये ।क्षीराब्धौ च हरिः शेते, मन्ये मत्कुण – शंकया।। (सर्वे हसन्ति ।) कमला- प्रमोद ! अधुना त्वं कथय ।प्रमोदः-उष्ट्राणां विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभाः ।परस्परं प्रशंसन्ति अहो रूपम्, अहो ध्वनिः।। (सर्वे पुन: … Read more

पाठ 15 भागीरथी महिमा Dignity of bhagirathi

भागीरथी महिमा गंगा भारतस्य सर्वासु नदीषु पवित्रतमा श्रेष्ठा च नदी अस्ति। इयं हिमालयस्य गंगोत्री-स्थानात् निर्गच्छति । तदा अस्याः स्रोतः लघुः भवति । पश्चात् अनेके निर्झराः अस्यां नद्याम् आमिलन्ति, यैः गंगायाः जलस्य प्रवाहः तीव्रः भवति । पर्वतस्य प्रान्तेभ्यः निःसृत्य गंगा हरिद्वार-नामके स्थाने समतलं भूभागं प्रविशति, तत्र हरिद्वारतीर्थे प्रतिवर्षं लक्षाणि पुरुषाः गच्छन्ति, गंगायाः शीतले जले स्नानं कुर्वन्ति। … Read more

पाठ 14 आदर्श नगरम् Ideal city

आदर्श नगरम् अद्य अहम् आदर्श नगरम् अवलोकयिष्यामि ।इदं नगरम् अस्माकं ग्रामात् नातिदूरे वर्तते। ग्रामीणाः जना: नगरात् आवश्यक- वस्तूनि क्रेष्यन्ति । अस्मिन् नगरे एकः विशालः शर्करा- उद्योगः अस्ति । ग्रामीणाः जनाः स्वकीयानि इक्षु-दण्डानि विक्रेयन्ति । विक्रय- मूल्येन आपणात् उपयोगी वस्तूनि संग्रहिष्यन्ति । अन्नम् उत्पादयित्वा मण्डीस्थलं गमिष्यन्ति अद्य वयमपि मण्डीस्थले गमिष्यामः । मम क्षेत्रे विपुलम् अन्नम् उत्पन्नं … Read more

पाठ 13 जननी जन्मभूमिश्जश्च Mother and motherland

जननी जन्मभूमिश्जश्च संसारे सर्वे जनाः स्वर्ग-सुखं सर्वोत्तमं मन्यन्ते; किन्तु तत्सुखं केवलं काल्पनिकं वर्तते। जन्मदात्री जननी अथ च जन्मभूमिः अस्मभ्यं यानि सुखानि यच्छति तानि स्वर्गादपि गुरुतराणि सन्ति । अतएव उक्तम्- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी । भो मातः! अहम् त्वाम् वन्दे ! संसारे त्वत्समः अन्यः कोऽपि शुभचिन्तकः नास्ति । जननी स्वयं कष्टानि सोढ्वा अस्मान् सुखयति । वयं … Read more

पाठ 12 सुभाषितानि Eloquently

सुभाषितानि हस्तस्य भूषणं दानं, सत्यं कण्ठस्य भूषणम् । श्रोत्रस्य भूषणं शास्त्रं, भूषणैः किं प्रयोजनम् ।।1।। सर्वनाशे समुत्पन्ने अर्द्धं त्यजति पण्डितः। अर्द्धेन कुरुते कार्यं सर्वनाशो हि दुःस्सह ।। 2 ।। अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।।3।। येषां न विद्या तपो न दानम्, ज्ञानम् न शीलम् गुणो न धर्म। ते मर्त्य लोके … Read more

पाठ 11संवाद Conversation

संवाद जनक: – पुत्र ! एषः कः गच्छति ? पुत्रः – तात ! एषः भिक्षुकः गच्छतिजनक: – तम् आकारय ।पुत्रः बाढम्, अहम् भिक्षुकम् आकारयामि । जनक: – भिक्षुकेण सह अन्यः कः अस्ति ? पुत्रः तेन सह तस्य पुत्रः अस्ति । जनक: – किम् सः भिक्षुकः पुत्रम् विना चलितुम्, न समर्थ: ?पुत्रः – आम् तात ! … Read more

पाठ -10 रमणीय: आश्रम Delightful hermitage

रमणीय: आश्रम भारतस्य उत्तरे हिमालयः नाम गिरिः अस्ति। पुरा हिमगिरौ ऋषीणाम् आश्रमाः आसन्। एकस्मिन्! आश्रमे एकः मुनिः अवसत् सः आश्रमस्य कुलपतिः आसीत् । तत्र अनेके शिष्याः अपि अवसन्। ते मुनिम् अनमन्। ते मुनेः विद्याम् अपठन्। ते मुनिना सह भ्रमणाय अगच्छन्। ते मुनये पुष्पाणि फलानि च आनयन्। मुनिः स्नेहेन तेभ्यः शिक्षाम् अयच्छत् । सः कुलपतिः प्रातः … Read more

पाठ -9 चित्रग्रीव- हिरण्यक- कथा Story of chitragreeva hirnyank

चित्रग्रीव- हिरण्यक- कथा महिलारोप्य नाम एकं नगरं आसीत्। नगरे एकः विशालः वटवृक्षः आसीत्। एकदा तत्र एकः व्याधः आगच्छत् । सः वटवृक्षस्य अधः एकं जालं प्रसारयत्। जालस्य उपरि तण्डुलान् अक्षिपत्। सः तत्र निभृतः अतिष्ठत्। तस्मिन्नेव काले चित्रग्रीवः नाम कपोतराजः स्वपरिवारेण सह आकाशे उदपतत् । तस्य परिवारे शतम् कपोताः आसन्। ते तण्डुलान् भक्षयितुम् अधः आगच्छन्। ते सर्वे … Read more

पाठ 8 विज्ञानस्य आविष्कारा: Inventions of Science

विज्ञानस्य आविष्कारा: एतद् ध्वनिविस्तारकं यन्त्रमस्ति । अस्य सहायतया वयं प्रतिदिनं विविधं कार्यक्रमं श्रोतुं समर्थाः भवामः । एतेन स्वदेशस्य विदेशानां च नवीनान् समाचारान् विविधानां जनानां भाषणानि, क्रीडाक्षेत्रस्य समाचारं, विविधाः वार्ता: संगीतं च आकर्णयामः । एतद् दूरदर्शनमस्ति । अस्य साहाय्येन गृहे स्थिताः जनाः अपि देशस्य विदेशानां च दृश्यसहितान् नवीनान् विविधान् च समाचारान्, चलचित्राणि अनेकान् च अन्यान् मनोरंजकान् … Read more

पाठ-7 नीति -श्लोका: Ethical shlokas

विदेशेषु धनं विद्या, व्यसनेषु धनं मतिः । परलोके धनं धर्मः शीलं सर्वत्र वै धनम् ।। 1 ।। उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः । षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं प्रसीदति ।।2।। पुस्तकस्था तु या विद्या परहस्तगतं धनम् । कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम् ।।3।। धर्मो जयति नाधर्मः सत्यं जयति नानृतम् । क्षमा जयति … Read more

पाठ 6 कृषका: The farmers

कृषका: अस्माकं भारतवर्षे अनेकाः कृषकाः निवसन्ति । बलिवर्दी योजयित्वा क्षेत्रं कर्षन्ति । विपुलम् अन्नम् उत्पादयन्ति ।कूल्या जलेन क्षेत्रं सिञ्चन्ति । कृषकाः सूर्योदयात पूर्वं एव शैय्यात्यागं कुर्वन्ति । पशूनाम् आहारस्य व्यवस्थां कुर्वन्ति । गोदोहनं कृत्वा दुग्धं गृहे आनयन्ति । क्षेत्रे गत्वा खरपतवारं क्षेत्रात् निस्सारयन्ति । अधिकांशाः भारतीयाः ग्रामेषु कृषिकार्यं पशुपालनं च कुर्वन्ति । कृषकाः आधुनिकैः यन्त्रैः … Read more

पाठ 5 त्रयो धूर्ता: Three cunnings

त्रयो धूर्ता: कस्मिश्चिद् नगरे मित्रशर्मा नाम एकः ब्राह्मण अवसत्। सः एकदा एकम् अजं स्कन्धे धृत्वा गृहं प्रति अगच्छत्। तदा धूर्ताः मार्गे तं ब्राह्मणम् अपश्यन् अचिन्तयन् च-“एतस्मात् ब्राह्मणात् एष: अजः अस्माभिः येन केन उपायेन प्राप्तव्यः ।” अथ तेषु धूर्तेषु एकः धूर्त: वेषपरिवर्तनं कृत्वा तस्य ब्राह्मणस्य सम्मुखे आगच्छत् अपृच्छत् च-“भो ब्राह्मण! त्वम् एतं कुक्कुरं किमर्थं वहसि ?” … Read more

पाठ 4 स्वतन्त्रता दिवस: Independence day

अस्माकं देशः 1947 ई० तमे अगस्तमासस्य पञ्चदशः दिनाङ्के स्वतन्त्रः अभवत् अतः प्रतिवर्षम् अस्मिन् दिनाङ्के स्वतन्त्रतादिवसस्य विद्यालयस्य उत्सवः भवति । सर्वे छात्राः प्रात: काल विद्यालयं गच्छन्ति ।विद्यालयस्य प्रधानाचार्य :राष्ट्रध्वजम् आरोहयति। छात्राः राष्ट्रगीतं गायन्ति । ततः प्रधानाचार्यः संदेशान् पठति ।अध्यापकाः छात्राः सेवकाः च स्वतन्त्रता-दिवसस्य महत्त्वं वर्णयन्ति । सभायाः अनन्तरं छात्राः क्रीडास्थलं गच्छन्ति । तत्र विविधानि क्रीडायाः आयोजनं … Read more

Geography One Liner Questions

1. भूमध्य रेखा पर दो देशान्तरों के बीच की दूरी लगभग कितनी होती है ?Ans ➺  111 KM 2. फूलों की घाटी कहाँ स्थित है ?Ans ➺  उत्तराखंड 3. ग्रेट बैरियर रीफ कहाँ स्थित है ?Ans ➺  प्रशांत महासागर में 4. अंकोरवाट मंदिर कहाँ स्थित है ?Ans ➺  कंबोडिया 5. भारत में भाखड़ा बांध किस … Read more

विटामिन के नाम और रासायनिक नाम

1. विटामिन – ए     रासायनिक नाम – रेटिनॉल 2. विटामिन – बी 1   रासायनिक नाम – थायमिन 3. विटामिन – बी 2    रासायनिक नाम – राइबोफ्लेविन 4. विटामिन – बी 3    रासायनिक नाम –  निकोटिनैमाइड 5. विटामिन – बी 5    रासायनिक नाम –   पैन्‍टोथेनिक    अम्ल 6. विटामिन – बी 6    रासायनिक नाम – पाइरीडॉक्सिन 7. … Read more

विश्व के देश और उनके राष्ट्रीय खेलों की सूची

1. भूटान का रष्ट्रीय खेल कौन-सा है ?Ans ➺ तीरंदाजी  2. स्कॉटलैंड का राष्ट्रीय खेल क्या है ?Ans ➺  रग्बी फुटबॉल  3. बुल फाइटिंग’ किस देश का राष्ट्रीय खेल है ?Ans ➺ स्पेन  4. तुर्की का राष्ट्रीय खेल क्या है ?Ans ➺ कुश्ती  5. ‘टेबल टेनिस’ किस देश का राष्ट्रीय खेल है ?Ans ➺  चीन … Read more

पाठ 3 मूर्खाय उपदेशों न दातव्य:Don’t teach the foolish

नर्मदातीरे एकः विशालः वृक्षः आसीत् । तत्र अनेके खगाः नीडानि रचयित्वा सुखेन अवसन् ।एकदा महती वृष्टिः अभवत् । तस्मिन्नेव काले कश्चित् वानर: वृष्टिजलेन आर्द्रः कम्पितश्च सन् तत्र आगच्छत्। सः तस्य वृक्षस्य अधः उपाविशत् । शीतेन कम्पमानं तं वानरं दृष्ट्वा खगाः कष्टमन्वभवन्। ते तं वानरं करुणया अवदन्-“भो वानर ! त्वं कष्टम् अनुभवसि । त्वं किमर्थं स्वगृहं … Read more

पाठ-2 प्रभातवेला Morning Time

प्रभातवेला अतीतायां रजन्यां समायाति प्रभातवेला । प्रातःकालिकी सुषमा अतीव रमणीया भवति। प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त बेलायां चतुर्वादनसमयात् आरभ्यते। सूर्योदयं यावत् च प्रभातवेला एव उच्यते। इयं वेला चतुर्विंशति: होरासु सर्वश्रेष्ठा परमोत्तमा च वर्तते । प्रभातवेलायां प्रकृतेः शोभाः अपि अति मनोहारिणी भवति । एकत्र सूर्योदयकाले खे: रक्तः बिम्ब: मनोहरति अपरतश्च शुप्तोत्यिताः पक्षिणः मधुरेण फलखेण शान्तं भूमण्डलं संगीतमयं कुर्वन्ति । … Read more

पाठ 1.वन्दना Prayer

वन्दना गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरू: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।1।। मूकं करोति वाचालम्, पङ्कं लङ्घयते गिरिम् । यत्कृपा तमहं वन्दे, परमानन्द – माधवम् ।। 2 ।। विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम् । पात्रत्वाद् धनम् आप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम् अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः । चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ।।4। अपूर्वः कोऽपि … Read more

पाठ 13 पृथ्वी का परिक्रमण और ऋतुएंँ Prithvi ka parikraman

परिक्रमण करती पृथ्वी – पृथ्वी अपनी निश्चित कक्षा में सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है। यह एक चक्कर या परिक्रमा 365 दिनों में पूरा करती है। सूर्य के चारों ओर घूमते समय पृथ्वी की गति 30 किलोमीटर प्रति सैकण्ड होती है। इसके साथ-साथ पृथ्वी अपनी धुरी पर भी घूमती रहती है। पृथ्वी की इस … Read more

पाठ 12 सौरमंण्डल saur mandal

रात्रि में आकाश का निरीक्षण बहुत पुराने समय से ही लोग आकाश की ओर आश्चर्य, उत्सुकता तथा रुचि से देखते चले आ रहे हैं। भारत के खगोलविदों ने सूर्य, चन्द्रमा और अन्य आकाशीय पिण्डों की गति का बहुत सूक्ष्मता से निरीक्षण किया है। वे उनका वर्ष भर का निकलने (और) छिपने का समय (और ग्रहण … Read more

पाठ 11 वाष्पीरण और संघनन vashikaran aur sanghanan

वाष्पीरण हम देखते हैं कि वर्षा ऋतु में तालाबों, नदियों तथा नालों इत्यादि में काफी जल इकट्ठा हो जाता है। कुछ समय पश्चात् जल वहाँ पर दिखाई नहीं देता है। यह कहाँ चला जाता है ? इसका क्या कारण है ? हम यह सोचते हैं कि यह जल पृथ्वी में नीचे चला गया होगा। यह … Read more

पाठ 10 जल jal

जल सभी सजीव वस्तुओं को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है। जल ही जीवन है। जल के बिना कोई भी कार्य सम्भव नहीं हैं। पेड़-पौधों और सभी जीव-जन्तुओं का जीवन ही जल के ऊपर निर्भर है। पशुओं का नहाना-धोना, पानी पीना, कपड़े-धोना, खाना बनाना आदि सभी कार्य जल पर ही आधारित हैं। … Read more

पाठ -9 सूर्य और मौसम Surya aur Mausam

सूर्य और मौसम सूर्य एक ग्रह है। यह दिन में चमकता है। यह पूरब सेनिकलता है और पश्चिम में अस्त हो जाता है। यह पृथ्वी को गर्मी प्रदान करता है। सूर्य के कभी अधिक और कभी कम गर्मी प्रदान करने से हम सब सर्दी और गर्मी का अनुभव करते हैं। सूर्य की किरणें, पृथ्वी पर … Read more

पाठ 8 प्राथमिक चिकित्सा, prathmik chikitsa

प्राथमिक चिकित्सा दुर्घटनाएँ किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी समय और कहीं भी हो सकती हैं। घर हो या सड़क, स्कूल हो या खेल का मैदान। यदि सावधानी रखी जाये, तो इन दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। अधिकतर दुर्घटनाएँ लापरवाही के कारण होती हैं। दुर्घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा के नियमों का … Read more

Vigyan class 4

विषय सूची इकाई -1 संजीव जगत 1. जीवन के लिए आवश्यक तत्व 2. पौधों एवं जन्तुओं के उपयोग 3. पौधों में जन्तुओं की सुरक्षा 4. जीव जन्तुओं में प्रजनन 5. जीव जन्तुओं का वर्गीकरण एवं अनुकूलता है इकाई -2 स्वास्थ और स्वास्थ विज्ञान 6. भोजन और पाचन 7. सूक्ष्म जीव एवं संक्रामक रोग 8. प्राथमिक … Read more

इतिहास History

प्राचीन भारत का इतिहास मानव विकास का क्रम प्रागैतिहासिक काल पुरापाषाण काल मध्य पाषाण काल नव पाषाण काल ताम्र पाषाणिक संस्कृतियाँ प्रमुख मृदभाण्ड संस्कृतियाँ ■ हड़प्पा (सिंधु) सभ्यता.5-10विविध.11-17• सामान्य तथ्यात्मक विवरण प्रस्तर मूर्तियाँ, मृण्मूर्तियां, मोहरें एवं लिपि आर्थिक एवं धार्मिक जीवन शवाधान विधियाँ सिन्धु सभ्यता से प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्य • हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल … Read more

पाठ 7 सूक्ष्म जीव एवं संक्रामक रोग sukshm jeev avn sankramak Rog

सूक्ष्म जीव एवं संक्रामक रोग सूक्ष्म जीव बहुत छोटे प्राणी हैं, जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। सूक्ष्म का अर्थ है कि उन्हें केवल आँखों से नहीं देखा जा सकता। वे प्रत्येक स्थान, वायु, जल, मिट्टी, भोजन एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर और शरीर पर पाये जाते हैं। सूक्ष्म … Read more

पाठ 6 भोजन और पाचन bhojan aur pachan

भोजन और पाचन जिस प्रकार भोजन हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है, उसी प्रकार भोजन का पाचन शारीरिक क्रियाओं में एक महत्वपूर्ण क्रिया है। हम जो भोजन खाते हैं, उसे उसी रूप में शरीर उपयोग में नहीं ला सकता है। पाचन द्वारा भोजन का सही उपयोग होता है। शरीर के विभिन्न अंग भोजन को … Read more

पाठ 5 जीव जंतुओं का वर्गीकरण एवं अनुकूलताएं jeev jantuon ka vargikaran

जीव जंतुओं का वर्गीकरण एवं अनुकूलताएं हमारे ग्रह पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जन्तु रहते हैं। हमारे देश भारत में 70000 जातियों के जन्तु पाये जाते हैं। ये जन्तु भिन्न-भिन्न वातावरण में रहते हैं। कुछ भूमि पर रहते हैं, कुछ वृक्षों पर और कुछ जल में। अन्य कुछ परजीवी हैं। उन्हें अपने वातावरण में निवास, … Read more

Jeev jantuon mein prajanan जीव जन्तुओं में प्रजनन पाठ 4

जीव जन्तुओं में प्रजनन प्रकृति का नियम है कि कोई भी जीवधारी सदैव जीवित नहीं रहता है। वह संसार में जैसा आता है, एक दिन वैसा ही चला जाता है। सभी जीवधारियों में अपने वंश को बढ़ाने की क्षमता होती है। सभी प्राणी अपनी जाति की निरन्तरता बनाये रखने के लिए प्रजनन करते हैं। मनुष्य … Read more

Paudhon Jantuon ki Suraksha पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ 3

पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ -3 सुरक्षा की आवश्यकता – इस आश्चर्यचकित जीव संसार को पैदा और विकसित होने में लाखों वर्ष लगे हैं। घरों, खेतों और वनों में अनेक प्रकार के पौधे और जन्तु पाये जाते हैं। उनसे हमें बहुत-सी उपयोगी वस्तुएँ मिलती हैं। यही कारण है कि वे हमारी प्राकृतिक सम्पत्ति कहलाते … Read more

पाठ 2 पौधों एवं जन्तुओं के उपयोग paudhon AVN jantuon ke upyog

पौधों एवं जन्तुओं का उपयोग मनुष्य अनेक प्रकाश की उपयोगी वस्तुओं के लिए पौधों और जन्तुओं पर निर्भर है। पौधों के उपयोग पौधे हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। उनसें हमें ऑक्सीजन, भोजन, पेय पदार्थ, दवाइयाँ, कपड़ों के लिए तन्तु एवं फर्नीचर इत्यादि प्राप्त होते हैं। ऑक्सीजन – सभी प्राणी जगत के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता … Read more

पाठ 1 जीवन के लिए आवश्यक तत्व jivan ke liye avashyak tatv

सजीव-वर्ग में सभी पेड़-पौधे, जीव-जन्तु एवं मनुष्य आदि सभी जीवित प्राणी आते हैं। हमारे सौरमण्डल में केवल पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन है। जीवन के लिए निम्नलिखित आठ तत्वों का होना अत्यन्त आवश्यक है; जिनमें से किसी भी एक तत्व के बिना जीवन असम्भव है -हैं। 1.ऑक्सीजन 2.नाइट्रोजन 3.ऊष्मा 4.खनिज … Read more

Buddhi ki prakriti बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप बुद्धि एवं योग्यता

बुद्धि की प्रकृति या स्वरूपNature of Intelligence मनोविज्ञान की उत्पत्ति से लेकर आज तक ‘बुद्धि का स्वरूप निश्चित नहीं हो पाया है। समय-समय पर जो परिभाषाएँ विद्वानों द्वारा प्रस्तुत की जाती रहीं, वह इसके एक पक्ष या विशेषता या क्षमता से सम्बन्धित थीं। अत: आज तक उपलब्ध सामग्री के अधार पर बुद्धि का स्वरूप तथा … Read more

Buddhi ke Siddhant बुद्धि के सिद्धांत

बुद्धि के सिद्धांतTheories of Intelligence विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि को निश्चित करने और इसकी पर्याप्त व्याख्या करने के विभिन्न प्रयत्न किये हैं, लेकिन हम यहाँ पर गणितीय विश्लेषण कर सर्वमान्य सिद्धान्तों का वर्णन करेंगे। इससे पहले बुद्धि किन बातों पर निर्भर करती है? यह देखना होगा। बुद्धि का निर्धारण Assessment of intelligence शिक्षाशास्त्री मन(Munn ने … Read more

Mansik Aayu मानसिक आयु

मानसिक आयु बिने Binet ने बुद्धि परीक्षा के आधार पर मानसिक आयु की सार्थकता को स्पष्ट किया है। उनके कथनानुसार – मानसिक आयु किसी व्यक्ति के द्वारा विकास की सीमा की वह अभिव्यक्ति है, जो उसके कार्यों द्वारा जानी जाती है तथा किसी आयु विशेष में उसकी अपेक्षा होती है। बुद्धि परीक्षा के आधार पर … Read more

Buddhi labdhi – बुद्धि लब्धि एवं बुद्धि का मापन

इस लेख के माध्यम से आज हम जानेंगे बुद्धि लब्धि क्या है? एवं बुद्धि का मापन कैसे होता है?, बुद्धि का विभाजन, बुद्धि का मापन और बिने के बुद्धि-लब्धि परीक्षा प्रश्न आदि के बारे में | Buddhi Labdhi निकालने के लिये मानसिक आयु को वास्तविक आयु से भाग दिया जाता है। बुद्धि लब्धि एवं बुद्धि … Read more

Srijanatmak Arth सृजनात्मकता – अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ,विकास, पहचान एवं मापन

{सृजनात्मकता/रचनात्मकता} सृजनात्मकता Creativity सामान्य रूप से जब हम किसी वस्तु या घटना के बारे में विचार करते हैं तो हमारे मन-मस्तिष्क में अनेक प्रकार के विचारों का प्रादुर्भाव होता है। उत्पन्न विचारों को जब हम व्यावहारिक रूप प्रदान करते हैं तो उसके पक्ष एवं विपक्ष, लाभ एवं हानियाँ हमारे समक्ष आती हैं। इस स्थिति में … Read more

Vyaktitva ke Vikas व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करने वाले कारक

व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करने वाले कारकFactors Influencing to, Development of Personality रैक्स एवं नाइट Rex and Knight के शब्दों में, मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करने वाले कारकों से भी है। इनमें से कुछ कारक शारीरिक रचना सम्बन्धी और जन्मजात एवं दूसरे पर्यावरण सम्बन्धी है। Psychology is also concerned with … Read more

Vyaktitva nirdharan व्यक्तित्व निर्धारण – तत्त्व एवं सिद्धान्त, विधियाँ

व्यक्तित्व के निर्धारक तत्त्व एवं सिद्धान्तTraits and Theories of Personality व्यक्ति का बाह्य आचरण उसकी जन्मजात तथा अर्जित वृत्तियाँ, उसकी आदतें और स्थायी भाव, उसके आदर्श और जीवन के मूल्य,ये सभी मिलकर एक ऐसे प्रमुख स्थायी भाव Master sention या ‘आदर्श-स्व’ Ideal-self को जन्म देते हैं, जो मानव के व्यक्तित्व का प्रमुख आधार है।इस प्रकार … Read more

Raksha tantra kavach रक्षातन्त्र कवच या रक्षा युक्ति – परिभाषा, प्रकार एवं कारक- विविध समायोजन

विविध समायोजन /,रक्षातन्त्र कवच या रक्षा युक्तिDifferent Adjustment , Deffence Mechanism मैन, 1976 Coleman, 1976 के अनुसार– यह व्यक्तियों की प्रतिक्रिया के वह विचार हैं, जिनसे व्यक्ति में उपयुक्तता की भावना बनी रहती है तथा इनकी सहायता से व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से दबावपूर्ण परिस्थितियों से सामना करता है, बहुधा परिक्रियाएं चेतन तथा वास्तविकता को विकृत … Read more

भग्नाशा या कुण्ठा Frustration – परिभाषा, अर्थ और कारण

भग्नाशा या कुण्ठा Frustration संसार के समस्त प्राणी दिन-रात क्रियाशील रहते हैं। मनुष्य, बौद्धिकता में श्रेष्ठ होते के कारण अधिक चिन्तनशील क्रियाओं को मानता है। उसकी सहज क्रियाओं को छोड़कर अन्य सभी क्रियाएँ प्रेरकों पर आधारित होती हैं। प्रेरक व्यक्ति की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करने में संलग्न हो जाता है। वह जब विभिन्न रुकावटों … Read more

Mansik tanav मानसिक तनाव परिभाषा और‌ अर्थ, लक्षण, बचने के उपाय

मानसिक तनाव Mental Tension मानसिक तनाव, शारीरिक एवं मानसिक असामान्यता के कारण उत्पन्न होता है। तनाव की परिस्थिति में व्यक्ति इतना अधिक उत्तेजित हो जाता है कि वह परिस्थिति का सामना उचित प्रकार से नहीं कर पाता है। जैसे- थॉर्नडाइक ने बिल्ली को भूखा रखा तो उसमें क्रिया के प्रति उत्तेजना बढी और शीघ्रातिशीघ्र लक्ष्य … Read more

Mansik Sangharsh मानसिक संघर्ष परिभाषा और अर्थ, प्रकार

मानसिक संघर्ष Mental Conflict मानसिक संघर्ष को मानसिक द्वन्द्व के नाम से भी पकारा जाता है। यह संघर्ष पूर्ण रूप से मानसिक होता है और व्यक्ति जब तक किसी निश्चित उद्देश्य का चुनाव नहीं कर लेता यह मानसिक या विचारों का संघर्ष समाप्त नहीं होता। मानसिक संघर्ष विरोधी भावनाओं के कारण उत्पन्न होता है; जैसे- … Read more

Samayojan समायोजन – समायोजन का अर्थ, परिभाषा, कारण, प्रकार एवं विकास

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अन्त समय तक समाज में ही रहना चाहता है । वह उसी समय अधिक प्रसन्न दिखायी देता है, जबकि वह स्वयं की रुचि, पसन्द और अभिवृत्तियों वाले समूह को प्राप्त कर लेता है। इस व्यावहारिक गतिशीलता का ही नाम समायोजन है। जब व्यक्ति अप्रसन्न दिखायी देता है तो यह … Read more

Lit lakar लिट् लकार परोक्ष भूत काल ,-वाक्य, उदाहरण, अर्थ – संस्कृत

लिट् लकार परोक्षेलिट् – ‘परोक्ष भूत काल’ में लिट् लकार का प्रयोग होता है। जो कार्य आँखों के सामने पारित होता है, उसे परोक्ष भूतकाल कहते हैं। उत्तम पुरुष में लिट् लकार का प्रयोग केवल स्वप्न या उन्मत्त अवस्था में ही होता है; जैसे- सुप्तोऽहं किल विलाप । मैंने सोते में विलाप किया। या जो … Read more

Aashirwad ling lakarआशीर्लिग लकार आशीर्वादात्मक, उदाहरण, अर्थ – संस्कृत वाक्य,

आशीर्लिन्ग लकार नाशी:- आशीर्वाद के अर्थ में आशीलिङ् लकार का प्रयो किया जाता है, जैसे- रामः विजीयात् । राम विजयी हो । —आशीर्लिन्ग लकार का प्रयोग केवल आशीर्वाद अर्थ में ही होत । महामुनि पाणिनि जी ने सूत्र लिखा है आशि लिङ्लोटौ । अर्थात् आशीर्वाद अर्थ में आशीर्लिङ् लकार औ नोट् लकार का प्रयोग करते … Read more

Liring lakar ऌङ्ग लकार – हेतु हेतुमद भूतकाल, वाक्य, उदाहरण,- संस्कृत अर्थ

ऌङ्ग लकार लिङ निमित्ते लृङ्ग् क्रियातिपत्तौ – क्रियातिपत्ति में लृङ् लकार होता है। जहाँ पर भूतकाल की एक क्रिया दूसरी क्रिया पर आश्रित होती है, वहाँ पर हेतु हेतुमद भूतकाल होता है। इस काल के वाक्यों में एक शर्त सी लगी होती है; जैसे- यदि अहम् अपठिष्यम् तर्हि विद्वान अभविष्यम्। यदि मैं पढ़ता तो विद्वान् … Read more

Let lakar ,ऌट् लकार- सामान्य भविष्यत काल, वाक्य, उदाहरण,अर्थ – संस्कृत

ऌट् लकार लृट् शेषे च – सामान्य भविष्यत काल में ‘लुट् लकार’ का प्रयोग किया जाता है। क्रिया के जिस रूप से उस भविष्य में सामान्य रूप से होने का पता चले, उसे ‘सामान्य भविष्यत काल’ कहते हैं; जैसे- विमला पुस्त पठिष्यति। विमला पुस्तक पढ़ेगी। ऌट् लकार धातु रूप उदाहरण हस् धातु पुरुष एकवचन द्विवचन … Read more

Adhigam chakra अधिगम वक्र – अर्थ, विशेषताएँ, प्रकार – सीखने के वक्र

अधिगम वक्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ Meaning and Definitions of Learning Curves अधिगम वक्र का अर्थ हम अपने जीवन में अनेक नयी बातें, नये कार्य एवं नये विषय सीखते हैं; जैसे कार चलाना, अंग्रेजी पढ़ना तथा चित्र बनाना आदि। किन्तु हमारी इन सबको सीखने की गति आरम्भ से अन्त तक एक सी नहीं होती। वह … Read more

Adhigam sikhane ke niyam अधिगम /सीखने के नियम –

अधिगम (सीखने) के नियम Laws of Learning विभिन्न खोजकर्ताओं ने सीखने को सरल और प्रभावशाली बनाने के लिये कुछ बातों पर बल दिया है। इनके पालन से अधिगम में शीघ्रता होती है और अपेक्षाकृत समय एवं शक्ति की बचत होती है। अतः हम अधिगम / सीखने के नियमों एवं प्रभावशाली कारकों को निम्न रूप में … Read more

Sikhane ke niyam सीखने के नियमों का शैक्षिक महत्त्व -अधिगम

सीखने के नियमों का शैक्षिक महत्त्वEducational Importance of Laws of Learning सीखने या अधिगम से सम्बन्धित सभी प्रयोगों से स्पष्ट होता है कि मानव बार-बार प्रयत्न करके एवं भूलों में सुधार करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। बालक जैसे-जैसे बड़ा होता है, सीखने के क्षेत्र में उन्नति करता है। विद्वानों ने सीखने की क्षमता … Read more

Thorndike ke sikhane ke niyam थार्नडाइक के सीखने के नियम और सिद्धान्त

थार्नडाइक के सीखने के नियम Learning Laws of Thorndike प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोगों के आधार पर सीखने में उत्पन्न होने वाले परिवर्तनों के प्रति कुछ निष्कर्ष निकाले, जिन्हें सीखने के नियम माना जाता है।थॉर्नडाइक का मत है कि जब उद्दीपक और प्रतिचार सीखने वाला और क्रिया के बीच सम्बन्ध उत्पन्न होने लगता है … Read more

Janmjaat prerak जन्मजात प्रेरक अर्थ, परिभाषा और प्रकार – अधिगम

जन्मजात प्रेरक Innate Motives या जैविकीय प्रेरकPhysiological या शारीरिक प्रेरक या प्राथमिक प्रेरकये प्रेरक मनुष्य में जन्म से ही पाये जाते हैं। इसी कारण इनको जैविकीय प्रेरक Physiological या शारीरिक प्रेरक या प्राथमिक प्रेरक भी कहते हैं। मनुष्य जीवित रहने के लिये इन प्रेरकों की पूर्ति करता है। यह कहना उचित ही है कि जन्मजात … Read more

Arijit prerak अर्जित प्रेरक – अर्थ, परिभाषा और प्रकार – अधिगम

अर्जित प्रेरक Acquired Motives वे प्रेरक जो बालक में जन्मजात नहीं होते हैं, वरन् वातावरण के सम्पर्क में आने पर वह अर्जित करता है, अर्जित प्रेरक कहलाते हैं। अर्जित प्रेरक दो प्रकार के होते हैं- 1 व्यक्तिगत प्रेरक 2 सामान्य सामाजिक प्रेरक व्यक्तिगत प्रेरकPersonal motives प्रत्येक व्यक्ति की रुचियाँ, उसके उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। उसमें … Read more

Prerak प्रेरक – अर्थ, परिभाषा, वर्गीकरण एवं प्रकार अधिगम-

प्रेरक और इसका अर्थMotive and Its Meaning प्रेरक क्या है इस विषय में सभी विद्वान् एक मत नहीं हैं। कुछ विद्वान् इनको जन्मजात या अर्जित शक्तियाँ मानते हैं। कुछ विद्वान् इनको व्यक्ति की शारीरिक या मनोवैज्ञानिक दशाएँ मानते हैं। यहाँ पर हम प्रेरक का अर्थ तथा इसकी प्रमुख परिभाषाएँ प्रस्तुत करेंगे। प्रेरक का अर्थ Meaning … Read more

Vishay vastu विषय-वस्तु विश्लेषण के सिद्धांत, शिक्षण बिन्दुओं का निर्धारण

विषय-वस्तु विश्लेषण के सिद्धान्त Principles of Contents Matter Analysis विषय-वस्तु का निर्माण करते समय सामान्यतया शिक्षक, शिक्षार्थी से सम्बन्धित मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना आवश्यक है। इन्हीं बिन्दुओं से सम्बन्धित कतिपय सिद्धान्तों का विवरण इस प्रकार से है- पर्यावरण केन्द्रीयता का सिद्धान्त Principle of environment centredness समाज केन्द्रीयता का सिद्धान्त … Read more

Vishay vastu ya vishay samagri विषय-वस्तु या विषय – सामग्री स्वरूप, विश्लेषण एवं सिद्धांत

विषय – सामग्री का स्वरूप Form of Subject Matter पाठ्य-वस्तु विश्लेषण में प्रमुखतः दो शब्द हैं- पाठ्य-वस्तु एवं विश्लेषण। यहाँ पाठ्य-वस्तु से अभिप्राय उस पठनीय सामग्री से है, जो लिखित रूप में हमारे सामने है तथा कक्षा में जिसका शिक्षण करना है। यह लिखित इकाई एक सम्पूर्ण पाठ के रूप में हो सकती है, इकाई … Read more

Thakan थकान – परिभाषा, प्रकार, लक्षण, सीखने पर प्रभाव, कारण और दूर करने के उपाय

थकान जब बालक आवश्यकता से अधिक कार्य करने लगता है तो वह थकान का अनुभव करने लगता है। थकान के आने पर वह पाठ को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाता और उसकी क्षमता भी अवरुद्ध हो जाती है। और उसका अधिगम प्रभावित होता है। थकान की परिभाषाएँ ड्रेवर के अनुसार, थकान का अर्थ है … Read more

Karke sikhana vidhi करके सीखना – विधि, प्रभाव शीलता, दोष, शिक्षक एवं विद्यालय की भूमिका

करके सीखना Learning by doing सामान्यतः यह देखा जाता है कि छोटा बालक अपने हाथों द्वारा विविध प्रकार के कार्यों को सम्पन्न करता है जो कि सार्थक एवं निरर्थक दोनों रूपों में होते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो कार्य करके सीखा जाता उसका अधिगम स्थायी रूप से बना रहता है। यह विधि अधिगम … Read more

Anukaran dwara sikhana अनुकरण – अनुकरण द्वारा सीखना, विधि, प्रभावशीलता, दोष

अनुकरण शब्द यूनानी भाषा के Mimesis मिमेसिस के समानार्थी रूप में प्रयुक्त हुआ है। मिमेसिस का अंग्रेजी अनुवाद है – Imitation’ | हिन्दी में अनुकरण अंग्रेजी के Imitation शब्द से रूपान्तर होकर आया है। अनुकरण का सामान्य अर्थ है- नकल या प्रतिलिपि या प्रतिछाया, जबकि अधिगम के सन्दर्भ में अनुकरण का अर्थ है- किसी पाठ … Read more

Nirikshan vidhi निरिक्षण विधि – निरीक्षण द्वारा सीखना, प्रभावशीलता,गुण, दोष

निरीक्षण विधि Observation Method निरीक्षण विधि को भी एक प्रभावशाली अधिगम विधि के रूप में स्वीकार किया जाता है। बालक में जितनी अधिक गहन एवं व्यापक निरीक्षण की क्षमता होगी बालक उतनी ही तीव्र गति से सीखने का प्रयास करेगा। जैसे- जेम्सवाट ने चाय की केतली के ढक्कन के ऊपर-नीचे गिरने की प्रक्रिया का गहन … Read more

Parikshan vidhi परीक्षण विधि – परीक्षण करके सीखना, प्रभावशीलता गुण, लाभ, दोष

परीक्षण विधि Experiment Method परीक्षण विधि का आशय उस विधि से लिया जाता है, जिसमें विविध प्रयोगों एवं खोजों के माध्यम से किसी नियम या सिद्धान्त की सत्यता का मापन किया जाता है। सामान्य रूप से बालक भी परीक्षण का कार्य अपने प्रारम्भिक जीवन से ही कर देता है। वह अपनी माता के प्रति अधिक … Read more

Samuhik vidhiyon dwara sikhana सामूहिक विधियों द्वारा सीखना, प्रमुख सामूहिक विधियाँ -अधिगम

सामूहिक विधियों द्वारा सीखना Learning by group methods सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि छात्रों को समूह में कार्य करने में आनन्द का अनुभव होता है। बालक को अपने साथियों के साथ खेलना अच्छा लगता है। कक्षा में पढ़ते समय भी छात्र अपने साथियों से बातें करते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि … Read more

Sammelan pravidhi dwara sikhana सम्मेलन प्रविधि सम्मेलन विधि द्वारा सीखना या अधिगम

आधुनिक समय में सम्मेलन प्रविधि का महत्व प्रत्येक क्षेत्र में व्याप्त है। सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा शैक्षिक आदि क्षेत्रों में सम्मेलन प्रविधि का उपयोग किया जाता है। प्रजातन्त्र के मूल्यों तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये सम्मेलन प्रविधि का विशेष महत्त्व है। अंग्रेजी में सम्मेलन को अनेक शब्दों से सम्बोधित किया जाता है। जैसे- कॉन्फ्रेन्स … Read more

Vichar goshthi pravidhi विचार गोष्ठी प्रविधि विचारगोष्ठी विधि द्वारा सीखना

विचार गोष्ठी प्रविधि Seminar Technique विद्यालय एवं महाविद्यालयों का शिक्षण तथा अनुदेशन स्मृति स्तर तक ही सीमित रहता है, अधिक से अधिक बोध स्तर पर सम्भव हो पाता है जबकि महाविद्यालयों तथा शोध संस्थाओं में अनुदेशनात्मक परिस्थितियाँ ऐसी होनी चाहिये, जो चिन्तन स्तर की अधिगम परिस्थितियों को प्रोत्साहित कर सकें। ऐसी परिस्थितियों में मानवी अन्तः … Read more

Sahpathi samuh adhigam सहपाठी समवयस्क समूह अधिगम सहयोगी अधिगम

सहपाठी समूह अधिगम समवयस्क या सहयोगी अधिगम के अन्तर्गत सीखने वालों को विभिन्न समवयस्कबाँट लिया जाता है। समवयस्क शब्द के शाब्दिक अर्थ से ही स्पष्ट होता है कि इसमें सीखने वाले अपने स्तर पर समान योग्यता एवं आयु वर्ग के समूहों में सम्मिलित होकर स्वतन्त्र रूप से प्रजातान्त्रिक वातावरण में परस्पर समस्याओं का निवारण करते … Read more

Prayatn aur bhul ka Siddhant प्रयत्न और भूल का सिद्धांत

प्रयत्न और भूल का सिद्धांत Theory of Trial and-Error किसी कार्य को हम एकदम से नहीं सीख पाते हैं सीखने की प्रक्रिया में हम प्रयत्न करते हैं और बाधाओं के कारण भूलें भी होती हैं। लगातार प्रयत्न करने से सीखने में प्रगति होती है और भूलें कम होती जाती हैं। अतः किसी क्रिया के प्रति … Read more

Adhigam ki prabhavshali vidhiyan अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ –

अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ Effective Methodsof Learning बालक के सीखने की प्रक्रिया निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। इसको बालक द्वारा विविध रूपों में सम्पन्न किया जाता है। बालक विद्यालय में आने से पूर्व बहुत सी बातें जानता है, जिन्हें वह अपने परिवार एवं परिवेश से सीखकर आता है।जैसे- शिक्षक की आज्ञा का पालन करना, शिक्षक … Read more

Sambaddh pratikriya ka Siddhant सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत –

सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत Conditioned ResponseTheoryl साहचर्य के द्वारा अधिगम में सम्बद्ध सहज क्रिया सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। जब हम अस्वाभाविक उद्दीपक के प्रति स्वाभाविक प्रतिचार करने लगते हैं, तो वहाँ पर सम्बद्ध प्रतिक्रिया के द्वारा सीखना उत्पन्न होता है।जब खाने को देखने पर कुत्ते के मुँह में लार आ जाती है या … Read more

Kriya prasoot anubandhan ऑपरेंट कंडीशनिंग या स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत

ऑपरेंट कंडीशनिंग या स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन Skinner’s Operant Conditioning उत्तेजक प्रतिक्रिया अधिगम सिद्धांतों की कोटि में बी. एफ. स्किनर ने सन् 1938 में क्रिया प्रसूत अधिगम प्रतिक्रिया को विशेष आधार देकर महान् योगदान दिया। स्किनर ने इस प्रक्रिया को प्रमाणित करने के लिये मंजूषा का निर्माण किया, जिसे स्किनर बॉक्स या स्किनर मंजूषा … Read more

Anukaran ka Siddhant अनुकरण का सिद्धांत

अनुकरण का सिद्धांत अनुकरण के सिद्धांत के प्रतिपादक मनोवैज्ञानिक हैगार्ट को माना जाता है। अनुकरण एक सामान्य प्रवृत्ति है, जिसका प्रयोग मानव दैनिक जीवन की समस्याओं के सुलझाने में करता है। अनुकरण में हम दूसरों को क्रिया करते हुए देखते हैं और वैसा ही करना सीख लेते हैं मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है … Read more

Shoes ya antarDrishti सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत-

अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धांत सूझ का अधिगम सिद्धांत गैस्टाल्टवादियों की देन है। वे लोग समग्र में विश्वास करते हैं, अंश में नहीं। जैसा कॉलसनिक ने लिखा है, ‘अधिगम व्यक्ति के वातावरण के प्रति सूझ तथा आविष्कार के सम्बन्ध को स्पष्ट करने वाली प्रक्रिया है। Learning is to the field theorists a process of discovering … Read more

Mansik Vikas ki avasthaen पियाजे की मानसिक विकास की अवस्थाएँ

आज तक ज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में जितने शोध एवं अध्ययन किये गये हैं, उनमें सबसे अधिक विस्तृत, वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अध्ययन जीन प्याजे ने किया। यही कारण है कि जीन प्याजे को मनोविज्ञान के क्षेत्र में तृतीय शक्ति third force के रूप में जाना जाता है। पियाजे के ज्ञानात्मक सिद्धान्त में ज्ञानात्मक प्रकिया Cognition … Read more