भाषा एवं लिपि bhasha aur lipi

भाषा की परिभाषा
जिस साधन के द्वारा मनुष्य अपने भावों और विचारों को लिखकर या बोलकर प्रकट करता है, उसे भाषा कहते है ।
भाषा ध्वनि प्रतीकों की ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से किसी समाज के सदस्य परस्पर भावों और विचारों का बोलकर या लिखकर आदान-प्रदान या संप्रेषण करते है ।
भाषा भावों या विचारों की अभिव्यक्ति का प्रमुख साधन है।
भाषा के रूप
भाषा के दो रूप होते है
(1) मौखिक और (2) लिखित

  1. मौखिक भाषा : मौखिक भाषा, भाषा का बोलचाल का रूप है। इस भाषा की आधार भूत ईकाई ध्वनि है । इस भाषा का प्रयोग प्रायः तभी किया जाता है जब श्रोता वक्ता के सामने होता है।
    लिखित भाषा : भाषा का लिखित रूप लिखित भाषा कहलाती है। इस भाषा की आधारभूत इकाई वर्ण है। यह भाषा का स्थायी रूप है, जिसमें हम अपने भावों-विचारों को अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
    बोली एवं उपभाषा
    बोली : किसी छोटे तथा विकसित क्षेत्र में स्थानीय व्यवहार में प्रयुक्त होने वाली भाषा का अल्पविकसित रूप ‘बोली’ कहलाता है। बोली में साहित्य रचना नहीं होती।
    उपभाषा : अगर किसी बोली में साहित्य रचना होने लगती है और क्षेत्र का विस्तार हो जाता है तो वह बोली न रहकर ‘उपभाषा’ बन जाती है। हिन्दी के अन्तर्गत पाँच उपभाषाएँ एवं अठारह बोलियाँ आती है।

खड़ी बोली : जिस रूप में आज हिन्दी बोली और समझी जाती है वह खड़ी बोली का साहित्यिक भाषा रूप है, जिसका विकास मुख्यत: उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ। खड़ी बोली का प्राचीन रूप 10 वीं शताब्दी में मिलता है लेकिन चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभ में अमीर खुसरो द्वारा पहली बार खड़ी बोली हिन्दी में पहेलियाँ एवं मुकरिया रची गई । मध्यकाल तक खड़ी बोली मुख्यत: बोलचाल की भाषा ही रही, साहित्यक भाषा के रूप में नहीं। इसका अर्थ यह था कि उस युग में ब्रजभाषा आपके काव्य की भाषाएँ थी।

मानकभाषा : शिष्ट और सुशिक्षित लोगो द्वारा निश्चित, प्रयुक्त तथा व्याकरण सम्मत भाषा रूप ही मानक भाषा कहलाती है।
संविधान की 8वीं अनुसूची
भाषा का संबंध संविधान की आठवीं अनुसूची से है ।
8वीं अनुसूची में आरंभ में 14 भाषाएँ

[ 1. असमिया 2. बांग्ला 3. गुजराती 4. हिन्दी 5. कन्नड़ 6. कश्मीरी 7. मलयालम 8. मराठी 9 उड़िया 10. पंजाबी 11. संस्कृत 12. तमिल 13. तेलगू 14. उर्दू ] थी।
सिंधी भाषा को 15वीं भाषा के रूप में 21वाँ संशोधन 1967 ई० द्वारा मान्यता दी गई।


तत्पश्चात् 71वाँ संशोधन, 1992 ई० द्वारा इसमें तीन अन्य भाषाएँ मणिपुरी, नेपाली और कोंकणी को सम्मिलित करने से इनकी संख्या 18 हो गई।
तदुपरांत 92वाँ संशोधन 2003 द्वारा इसमें चार अन्य भाषाएँ – बोडो, डोगरी, मैथली, संथाली को शामिल किया गया।
वर्तमान में 8वीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषाओं की संख्या 22 है।


अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य

भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी है।
भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है जबकि दूसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा ‘तेलगू’ है।
किसी देश या राज्य की राजकाज के लिए प्रयुक्त भाषा राजभाषा कहलाती है।
14 सितम्बर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने अनुच्छेद- 343 के अन्तर्गत ‘हिन्दी’ को भारतसंघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है। राजभाषा आयोग का प्रथम गठन 1955 में किया गया था, जिसके अध्यक्ष बी० जी० खरे थे।
भारत की प्राचीन भाषाएँ ‘ पाली और प्राकृत’ है।
विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञात लिखित भाषाएँ सुमेरियन है।
भाषाई आधार पर गठित सर्वप्रथम राज्य आंध्र-प्रदेश है।

लिपि की परिभाषा
मौखिक ध्वनियों को लिखित रूप में प्रकट करने के लिए निश्चित किए गए चिह्नों को लिपि कहा जाता है। अर्थात् किसी भाषा को लिखने का ढंग लिपि है । प्राय: हर भाषा की अपनी लिपि होती है। जैसे :-
‘हिन्दी’ देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। ‘पंजाबी’ गुरूमुखी लिपि में लिखी जाती है। ‘अंग्रेजी’ रोमन लिपि में लिखी जाती है। ‘उर्दू’ फारसी लिपि में लिखी जाती है। ‘बंगला ‘ बंगला लिपि में लिखी जाती है।
‘अरबी’ अरबी लिपि में लिखी जाती है।
फारसी लिपि दायीं से बायीं ओर लिखी जाती है।
देवनागरी और रोमन लिपि बायीं से दायीं ओर लिखी जाती है।
हिन्दी के अलावा संस्कृत, मराठी, नेपाली भाषाएँ भी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

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