पाठ 6 भोजन और पाचन bhojan aur pachan

भोजन और पाचन

जिस प्रकार भोजन हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है, उसी प्रकार भोजन का पाचन शारीरिक क्रियाओं में एक महत्वपूर्ण क्रिया है। हम जो भोजन खाते हैं, उसे उसी रूप में शरीर उपयोग में नहीं ला सकता है। पाचन द्वारा भोजन का सही उपयोग होता है।

शरीर के विभिन्न अंग भोजन को छोटे-छोटे कणों में परिवर्तित करके उसका अवशोषण करते हैं। वे सभी अंग जो पाचन क्रिया में सहायक होते हैं, मिलकर पाचन तन्त्र बनाते हैं। .

1.मुँह – भोजन की पाचन-क्रिया मुँह से आरम्भ होती है। हम मुँह से भोजन खाते हैं। भोजन सबसे पहले दाँतों द्वारा छोटे-छोटे कणों में तोड़ा और पीसा जाता है। भोजन को चबाने से मुँह में बनने वाली लार रस उसमें मिलती रहती है। लार रस मिलने से भोजन सरलता से निगला जाता है। जीभ भोजन और लार को एक साथ मिलाने का कार्य करती है। मुँह द्वारा चबाया हुआ भोजन भोजन-नली में जाता है। वहाँ से आमाशय में पहुँच जाता है।

2. अमाशय अमाशय मांसपेशियां का बना एक थैला होता है आमाशय में भोजन कई पाचक रसों के साथ मिलकर मथ जाता है आमाशय में भोजन जठर के संपर्क में आता है ये रस भोजन को तोड़कर द्रव में बदल देते हैं

3.छोटी आँत – छोटी आँत आमाशय के निचले सिरे से आरम्भ होने वाली एक लम्बी, संकरी एवं
कुंडलित नली होती है। आमाशय से भोजन छोटी आँत में आता है। छोटी आँत में पित्त रस, अग्नाशप रस और अन्तड़ियों के रस में भोजन मिलकर नरम हो जाता है।
यह भोजन छोटी आँत की दीवारों के भीतर उपस्थित रक्त वाहिनियों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जो कि बाद में रक्त में मिल जाता है।

4.बड़ी आँत – बड़ी आँत को मलाशय भी कहा जाता है। छोटी आँत में बिना पचा भोजन जो रक्त
वाहिनियों द्वारा अवशोषित नहीं किया जाता, बड़ी आँत में भेज दिया जाता है। बड़ी आँत द्वारा पौष्टिक पदार्थ चूस लिये जाते हैं। इस क्रिया को अवशोषण कहते हैं। अन्त में व्यर्थ ठोस पदार्थ मलद्वार द्वारा शरीर से बाहर फेंक दिये जाते हैं।

याद रखिए-

जिस प्रकार भोजन हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है, उसी प्रकार भोजन का पाचन शारीरिक क्रियाओं में एक महत्वपूर्ण क्रिया है।

भोजन की पाचन-क्रिया मुँह से आरम्भ होती है।

लार रस मिलने से भोजन सरलता से निगला जाता है। जीभ भोजन और लार को एक साथ मिलाने का कार्य करती है।

आमाशय माँसपेशियों का बना एक थैला होता है।

छोटी आँत आमाशय के निचले सिरे से आरम्भ होने वाली एक लम्बी, संकरी एवं कुंडलित नली होती है।

बड़ी आँत को मलाशय भी कहा जाता है।

व्यर्थ ठोस पदार्थ मलद्वार द्वारा शरीर से बाहर फेंक दिये जाते हैं।

देखें आपने क्या सीखा ।


क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

1. शरीर में भोजन का सही उपयोग कैसे होता है ?

शरीर में पाचन द्वारा भोजन का सही उपयोग होता है।

2.शरीर के कौन-से अंग पाचन-तन्त्र बनाते हैं ?

वे सभी अंग जो पाचन क्रिया में सहायक होते हैं मिलकर पाचन तंत्र बनाते हैं

3. पाचन-क्रिया कौन-से अंग से आरम्भ होती है ?

पाचन क्रिया मुख से आरंभ होती है

4.आमाशय में भोजन कौन-से रस के सम्पर्क में आता है ?

आमाशय में भोजन जठर रस के संपर्क में आता है यह रा भोजन को तोड़कर द्रव में बदल देते हैं।

5. बड़ी आँत में कौन-सा भोजन एकत्र होता है?

छोटी आंत में बिना पचा भोजन जो रक्त वाहिनियों द्वारा अवशोषित नहीं किया जाता वह बड़ी आंत में एकत्रित होता है।

ख. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –


1….भोजन …शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। रुषो

2.भोजन..कणो…के द्वारा छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है।

3…पाचक.. रसो में भोजन मथ जाता है।

4….छोटी आंत …आमाशय के निचले सिरे से आरम्भ होती है।

5.बड़ी आँत को… मलाशय… भी कहते हैं।


ग. सही उत्तर के सामने सही () और गलत के सामने (X) का चिह्न लगाइए –

1.हम भोजन जिस रूप में खाते हैं, शरीर उसे उसी रूप में उपयोग में लाता है।

2.शरीर के विभिन्न अंग भोजन को छोटे-छोटे कणों में परिवर्तित करते हैं।

3.मुँह में बनने वाली लार रस से भोजन सरलता से निगला जाता है।

4.पाचक रस भोजन को तोड़कर द्रव में बदल देते हैं|

5.व्यर्थ पदार्थ आमाशय द्वारा बाहर निकलता है।

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