बोलने वाली गुफा-पाठ-4 bolane wali gufa chapter 4

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे बोलने वाली गुफा| (पंचतंत्र की कथा)

सुंदरवन में एक खूँखार शेर रहता था। वह वन के सभी जीवों के लिए मुसीबत था। जंगल के जानवर उससे इतना डरते थे कि उसकी दहाड़ सुनते ही अपने-अपने प्राण बचाने के लिए इधर-उधर छिप जाते थे। कभी-कभी तो उस शेर को इसी कारण से भूखा भी रहना पड़ता था।
एक बार शेर को कई दिनों तक कोई शिकार हाथ न लगा । वह शिकार की खोज में इधर-उधर मारा-मारा फिरता रहा। बहुत परिश्रम के बाद भी उसे शिकार के लिए कोई जानवर न दिखाई दिया। उसे ऐसा लगने लगा कि वह भूख से मर जाएगा। शेर शिकार की खोज में अपनी गुफा से बहुत दूर निकल आया, अचानक उसने देखा कि सामने एक बड़ी-सी है गुफा जिसका द्वार खुला हुआ है। गुफा देखकर शेर के मन में विचार आया कि जरूर इस गुफा में कोई न कोई जानवर रहता होगा। इसके भीतर चल कर देखना चाहिए, हो सकता है कि कोई शिकार अंदर बैठा हो। यह सोचकर शेर गुफा के अंदर चला गया लेकिन इस समय गुफा में कोई न था। शेर ने सोचा, “मुझे इसके भीतर चुपचाप लेटे रहना चाहिए। अँधेरा होने पर गुफा में रहने वाला जानवर अवश्य ही आएगा, तब मैं उसका शिकार करके अपनी भूख मिटा लूँगा।”

कुछ समय बाद अँधेरा होने लगा। रात में सारा जंगल चाँदनी में नहाया हुआ था। चंद्रमा के प्रकाश में सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था ।
जिस गुफा में शेर घुसा था, वह एक लोमड़ी की थी। लोमड़ी अन्य जानवरों की अपेक्षा तीव्र बुद्धि की मानी जाती है। रात होने पर लोमड़ी अपनी गुफा की ओर लौट रही थी। वह शीतल चाँदनी का आनंद लेते हुए धीरे-धीरे चल रही थी। अचानक उसकी दृष्टि धरती पर बने हुए कुछ पद-चिह्नों पर पड़ी। ध्यानपूर्वक देखकर उसने जान लिया कि यह पद-चिह्न किसी शेर के हैं।
शेर के पद-चिह्नों को देखते हुए लोमड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ी। ऐसा करने में उसे समय अवश्य लगा लेकिन उसने यह देख लिया कि शेर के पैरों के निशान उसकी गुफा के भीतर गए हैं। उसे आभास हो गया कि उसकी गुफा में शेर बैठा है क्योंकि गुफा में शेर के पंजों के जाने के निशान तो थे लेकिन बाहर निकलने के निशान कहीं भी नहीं उभरे थे।

लोमड़ी ने ठंडे दिमाग से सोचा और शेर के पंजों के निशानों की पुनः बारीकी से छान-बीन की लेकिन शेर के गुफा से बाहर आने के निशान उसे न मिल सके। उसे विश्वास हो गया कि शेर अभी तक गुफा के अंदर ही है जो कि अंदर जाते ही उस पर हमला कर देगा।

शेर अंदर है या नहीं, इसको पक्के तौर पर जानने के लिए लोमड़ी ने एक योजना बनाई । वह गुफा की तरफ मुँह करके ऊँची आवाज में बोली – “कहिए गुफा जी! सब ठीक-ठाक तो है न ? क्या मैं रात बिताने के लिए आपके भीतर आ सकती हूँ ?”
शेर गुफा के अंदर ही था लेकिन वह चुप रहा। वह लोमड़ी के भीतर आने की प्रतीक्षा कर रहा था। लोमड़ी ने एक बार पुनः प्रश्न को दोहराया – “गुफा ओ मेरी प्यारी गुफा ! आज आप चुप क्यों हो? मुझे बताती क्यों नहीं कि मैं भीतर आऊँ या कि न आऊँ ? पहले तो कभी भी आप इस तरह शांत न रहती थीं। एक बार के पूछने में ही आप उत्तर दे देती थीं। आज आपको क्या हो गया है ? जब तक आप मुझे अंदर आने के लिए न कहोगी तब तक मैं भीतर नहीं आऊँगी।”
लोमड़ी की बातों को सुन कर शेर असमंजस में पड़ गया। वह यह नहीं सोच पा रहा था कि अब क्या करे ? वह चुपचाप अंदर ही बैठा रहा। लोमड़ी ने दोबारा गुफा से दूसरे तरीके से बात करने की सोची। इस बार उसने कहा-
“मेरी प्यारी गुफा ! आपके चुप रहने का रहस्य मैं जान रही हूँ। आज भीतर अवश्य ही कोई खूँखार जानवर बैठा है, जिसके कारण आप मुझसे बात नहीं कर रही हो। अच्छा तो मैं चलती हूँ।”
शेर को लगा कि शिकार हाथ से निकल रहा है। उसने सोचा कि जरूर यह गुफा लोमड़ी से बात करती होगी। मेरे डर के मारे गुफा आज लोमड़ी से बात नहीं कर रही है। चलो गुफा की तरफ से मैं ही बोलता हूँ। यह सोचकर शेर आवाज बदलकर बोला – “अरे, जरा रुको प्यारी लोमड़ी! मैं गहरी नींद में सो रही थी, इसलिए आपसे बात न कर सकी। अंदर सब ठीक है। आप बिना भय और संदेह के अंदर चली आओ।”
लोमड़ी की चाल सफल हुई। वह पहचान गई कि गुफा के अंदर से आने वाली आवाज शेर की ही है। उसे पूरा विश्वास हो गया कि शेर अभी तक गुफा के भीतर ही बैठा है।
“जैसे एक शेर कभी घास नहीं खाता, उसी तरह गुफा कभी बोल नहीं सकती हुजूर! आप आराम से रात भर मेरी गुफा में रहें। शुभ रात्रि।” यह कहकर लोमड़ी अपने प्राण बचाने के लिए सिर पर पाँव रखकर वहाँ से भाग निकली।

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
असमंजसदुविधा
अंदाजहाव -भाव /ढंग
खूंखारहिंसक
तीव्रतेज

1-बोध प्रश्न :उत्तर लिखिए-

(क) जंगल के सभी जानवर शेर से क्यों डरते थे ?

उत्तर-जंगल में सभी जानवर खूंखार शेर की और दहाड़ से डरते थे|


(ख) गुफा को देखकर शेर के मन में क्या विचार आया ?

उत्तर– गुफा को देखकर शेर के मन में यह विचार आया कि इस गुफा में कोई ना कोई जानवर आवश्य रहता होगा|


(ग) लोमड़ी को कैसे पता चला कि गुफा के अंदर कोई है ?

उत्तर– लोमड़ी की दृष्टि अचानक धरती पर पड़े कुछ पद चिन्ह के द्वारा पता चला की गुफा के अंदर कोई खूंखार जानवर है

(घ) लोमड़ी ने गुफा से क्या पूछा और क्यों पूछा ?

उत्तर-लोमड़ी ने गुफा से पूछा कहिए गुफा जी सब ठीक-ठाक तो है ना क्या मैं रात बिताने के लिए आपके भीतर आ सकती हूं|


(ङ) गुफा के भीतर से क्या आवाज आई ?

गुफा से यह आवाज आया कि जरा रुको ! प्यारी लोमड़ी मैं गहरी नींद सो रही थी इसलिए आपसे बात ना कर सकी अंदर सब ठीक है आप बिना भय और संदेह के अंदर चली आओ|

2-सही मिलान कीजिए-

(क) गुफा, ओ मेरी प्यारी गुफा! आज आप चुप क्यों हैं – (लोमड़ी)
(ख) अंदर सब ठीक है। आप बिना भय और संदेह के अंदर चली आओ- (शेर )

(ग) कहिए गुफा जी! सब ठीक ठाक तो है न – (लोमड़ी)
(घ) मैं गहरी नींद में सो रही थी इसलिए आपसे बात न कर सकी – (शेर)

3-वाक्य को कहानी के क्रम में लिखिए-

(घ)- सुंदरबन मैं एक खूंखार शेर रहता था|

(ङ)-शेर शिकार की खोज में अपनी गुफा से बाहर निकला|

(च)-बहुत दूर निकल आने पर शेर को एक खाली गुफा दिखी और वह उस गुफा के अंदर चला गया|

(ग)-लौटने पर लोमड़ी की दृष्टि गुफा के बाहर बने कुछ पद चिन्ह पर पड़ी उसे लगा की गुफा में कोई है|

(क) उसे पूरा विश्वास हो गया कि शेर अभी तक गुफा के भीतर ही है|

(ख)-लोमड़ी ने गुफा से पूछा वह मेरी प्यारी गुफा आज चुप क्यों हो मुझे बताती क्यों नहीं कि मैं भीतर आऊं या ना आऊं|

(छ)-गुफा के अंदर से आवाज आई अंदर सब ठीक है चली आओ|

(ज)-आप आराम से रात भर मेरी गुफा में रहे|

4-सोच -विचार :बताइए-

(क) यदि लोमड़ी को शेर के पद-चिह्न न दिखते तो क्या होता ?

यदि लोमड़ी को शेर का पद चिन्ह ना दिखता तो लोमड़ी सीधे अपने गुफा में प्रवेश करती और शेर शिकार करके अपनी भूख को मिटा लेता|


(ख) यदि लोमड़ी के स्थान पर आप होते तो कैसे पता लगाते कि गुफा में शेर है ?

यदि लोमड़ी के स्थान पर कोई व्यक्ति होता तो वह भी लोमड़ी की तरह है उसके पद चिन्ह को देखकर अनुमान लगाता की गुफा के अंदर कोई जानवर है|


(ग) यदि शेर गुफा की ओर से लोमड़ी की बात का जवाब नहीं देता तो लोमड़ी शेर के बारे में पता करने के लिए और क्या-क्या करती ?

यदि गुफा के अंदर से शेर जवाब नहीं देता तो लोमड़ी पता लगाने के लिए दूसरी योजना बनाती |

5-भाषा के रंग-

याद रखिए-

पर्यायवाची शब्द को समानार्थी शब्द भी कहते हैं|

(क)-समानार्थी शब्द लिखिए-

मुँह = मुख

वन = जंगल

धरती = भूमि

चन्द्रमा = शशि

अंदर = भीतर

तलाश = खोजना

(ख)-पाठ में आए हुए अनुस्वार ( •) और अनुनासिक (ँ ) शब्दों को छाँटकर लिखिए-

अनुस्वार शब्द—– जंगल। संगम

अनुनासिक शब्द—- मुँह। अँधेरा, खुँखार

(ग)-विशेषण शब्दों को रेखांकित कीजिए-

एक वन में खूंखार शेर रहता था उससे डर कर जंगली जानवर छुप जाते थे शिकार की तलाश में उसे एक खूबसूरत गुफा दिखाई दिया और वह उसमें जा बैठा चालाक लोमड़ी ने शहर के पद चिन्ह देख लिए|

6-अनुमान और कल्पना बताइए-

1-लोमड़ी ने इस घटना के बारे में अपने साथियों को क्या बताया होगा

लोमड़ी ने इस घटना के बारे में अपने साथियों से कहा होगा कि जब मैं अंधेरा होने पर वापस अपने गुफा की तरफ लौट रही थी तब देखा कि खुँखार शेर के पद चिन्ह दिखाई दिया और मैं उसे जानने के लिए योजना बनाई की और योजना सफल होने से पता चला कि शेर गुफा के अंदर बैठा है|

7-अब करने की बारी-

(क). लोमड़ी गुफा से वापस लौट रही थी तो उसे रास्ते में उसका दोस्त खरगोश मिला उन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई लिखकर बताइए-

. खरगोश– रुको! लोमड़ी बहन इतनी तेज क्यों भाग रही हो |

लोमड़ी – क्या बताऊं खरगोश भाई , आज तो मेरी जान बच गई |

खरगोश – थोड़ा सांस ले लो और बताओ क्या हुआ |

लोमड़ी – आज जब मैं अपनी गुफा की ओर जा रही थी तो रास्ते में शेर के पैरों के पद चिन्ह दिखाई दिए |

खरगोश – तब तुमने क्या किया लोमड़ी बहन|

लोमड़ी – तो मैंने भी अपनी बुद्धिमानी से योजना बनाई और शेर के गुफा के अन्दर होने का पता लगा लिया | लोमड़ी बहन ने पूरी घटना खरगोश भाई को बताई |

(ख)-इस कहानी का शीर्षक है बोलने वाली गुफा आपके अनुसार इस कहानी के और क्या-क्या शीर्षक हो सकते हैं कम से कम तीन शीर्षक लिखिए

1-चालाक लोमड़ी

2-खूंखार शेर

3-खरगोश

8-मेरे दो प्रश्न कहा। कहानी के आधार पर सवाल बनाइए-

1-लोमड़ी ने अपने योजना से क्या पता लगाया

2-गुफा की ओर वापस आते हुए क्या देखा

9-इस कहानी से-

(क) मैंने सीखा—हमेशा बुद्धिमत्ता और सावधानी के साथ कार्य करना चाहिए सावधानी ही सुरक्षा है|

मैं करूंगी/ करूंगा-मैं बुद्धिमत्ता और सावधानी से करूंगी करूंगा|

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