दुर्जनलक्षणानि (Signs of the Vicious) – द्वादश: पाठ (12)

साधकतमं करणम् जिसकी सहायता से कोई कार्यकिया जाता है वहाँ तृतीया विभक्ति प्रयोग होती है। पाठ में पञ्चहस्तेन, दशहस्तेन आदि का प्रयोग दूरी नापने में हाथ परिमाण किया है। अतः यहाँ तृतीया विभक्ति का प्रयोग है।

शकटं पञ्चहस्तेन दशहस्तेन वाजिनम्। हस्तिनं शतहस्तेन देशत्यागेन दुर्जनम्।।1।।

हस्ती अंकुशहस्तेन वाजी हस्तेन ताडयते। श्रृंगी लगुडहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः।।2।।

तुष्यन्ति भोजने विप्रा मयूराः घनगर्जिते।साधवः परसम्पत्तौ खलाः परविपत्तिषु ।।3।।

अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्।आत्मतुल्यबलं शत्रु विनयेन बलेन वा।।4।।

न दुर्जनः साधुदशामुपैति बहुप्रकारैरपि शिक्ष्यमाणः । आमूलसिक्तः पयसा घृतेन न निम्बवृक्षो मधुरत्वमेति।।5।।

अन्तर्गतमलो दुष्टस्तीर्थस्नानशतैरपि।न शुध्यति यथा भाण्डं सुराया दाहितं च सत् ।।6।।

शब्दार्थाः

शकटं = गाङी cart

वाजिनम् = घोड़ा horse

शतहस्तेन = सो हाथ (की दूरी) से from the distance of hundred hands

अंकुशहस्तेन = अंकुश (हाथी का पैना) वाले हाथ से with the good hand

श्रृंगी = सींग वाले (जानवर) को to the hornful animal

तुष्यन्ति = संतुष्ट होते हैं satisfied

घनगर्जिते = बादलों के गरजने से by thundering of clouds

परसम्पत्तौ = दूसरों की संपत्ति (देखकर) से to see others wealth

अनुलोमेन = विनयपूर्वक व्यवहार से by humble behaviour

प्रतिलोमेन = तिरस्कार से by ignorance

आत्मतुल्यबलम् = समान बलशाली को to the energetic like himself

साधुदशामुपैति = सज्जन नहीं बन सकता can not be gentle

शिक्ष्यमाणः = सिखाने पर भी even on teaching

निम्बवृक्षो = नीम का पेड़ Neem

मधुरत्वमेति = मीठापन sweetness

अन्तर्गतमलः = अन्त:करण की अपवित्रता impurity of heart

भाण्डं = मीठापनबर्तन pot

दाहितं = दहकानेसे/जलाने से by burning

कार्य-कालम्

1.निम्नलिखित प्रश्नों के संस्कृत में उत्तर दीजिए-Answer the following questions in Sanskrit.

(क) शकटं कति हस्तेन त्यागं कर्त्तव्यम् ?

(ख) हस्ती-वाजी शृंगी- दुर्जनञ्च केन ताडयेत् ?

(ग) विप्राः कदा तुष्यन्ति ?

(घ) कस्य केन व्यवहारं कर्त्तव्यम् ?

(ङ) कथं न दुष्टः शुद्धं भवति?

2.रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-Fill in the blanks.

(क) हस्ती …… वाजी हस्तेन ताडयते ।

……..लुगडहस्तेन …….. ‌दुर्जनः ॥

(ख) अनुलोमेन …….. प्रतिलोमेन दुर्जनम्।

.……..शत्रु विनयेन बलेन वा।।

(ग) अन्तर्गतमलोन ……….।

न शुध्यति यथा …….. सुराया दाहितं च सत्।।

(घ) शकटं …… ‌‌दशहस्तेन ………।

हस्तिनं शतहस्तेन …………..दुर्जनम्।।

3.निम्नलिखित पदों से उपसर्ग पहचानिए-Identify the prefixes of the following terms.

पदउपसर्गशेषपद
(क) पञ्चहस्तेन
(ख) दुर्जनः
(ग) परसम्पत्तौ
(घ) परविपत्तिषु
(ङ) प्रतिलोमेन
4.(क) संधि कीजिए- Join the words.

(i) दु: + जनः

(ii) दशाम् + उपैति

(iii) प्रकारैः + अपि

(iv) अन्तः + गतः

(v) दुष्टः + तीर्थस्नान

(vi) शतैः + अपि

(ख) संधि-विच्छेद कीजिए- Disjoin the words.

(i) सज्जनः

(ii) अन्तर्गत:

(iii) शतैरपि

(iv) भाण्डं सुराया

(v) दाहितं च

(vi) निम्बवृक्षो मधुरत्व

5.निर्देशानुसार शब्द रूप लिखिए- Write the word form according to the instructions.

(क) शकट: – विभक्ति – प्रथमा

(ख) हस्तः – विभक्ति – चतुर्थी

(ग) बाजिन् – विभक्ति – षष्ठी

(घ) बलम् – विभक्ति – पञ्चमी

(ङ) घृतः – विभक्ति – सप्तमी

6. निम्नलिखित शब्दों की वाक्य-रचना संस्कृत में कीजिए-Make sentences for the following words in Sanskrit.

(क) अनुलोमेन

(ख) प्रतिलोमेन

(ग) हस्तेन

(घ) निम्बवृक्षा:

(ङ) शिक्ष्यमाणः

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