Dvigu Samas in Sanskrit द्विगु समास

द्विगु समास

द्विगु समास तत्पुरुष समास का ही एक भेद है तत्पुरुष समास दो प्रकार का होता है – व्यधिकरण तत्पुरुष समास और समानाधिकरण तत्पुरुष समास | समानाधिकरण तत्पुरुष समास भी दो प्रकार का होता है – द्विगु समास व कर्मधारय समास |
तत्पुरुष समास के दो प्रकार होते हैं :-

1.व्याधिकरण तत्पुरुष समास

2.समानाधिकरण तत्पुरुष समास

यह दो प्रकार का होता है –

द्विगु समास की परिभाषा :- जब पूर्व पद संख्या- वाचक हो तथा उत्तर पद संज्ञा या सर्वनाम हो तो उसे द्विगु समास कहते है | द्विगु समास का समस्त पद समास युक्त पद नपुंसकलिंग एकवचन में ही निर्मित होता है ।


उदाहरण—

द्विगु: समूह)=द्वयोः गवोः समाहारः दो गायों का समूह

चतुष्पथम्=चतुर्णाम् पथानाम् समाहारः

पंचरात्रम् = पञ्चानां रात्रीणाम् समाहारः।

पञ्चमूलम्=पञ्चानां मूलानाम् समाहारः

त्रिभुवनम्= त्रयाणां भुवनानाम् समाहारः

शताब्दी= शतानाम् अब्दानाम् समाहारः

पञ्चगवम् = पञ्चानां गवानाम् समाहार

पञ्चवटी=पञ्चानां वटानाम् समाहारः

चतुर्युगम्=चतुर्णां युगानाम् समाहार:

त्रिलोकी = त्रयाणां लोकानाम् समाहार:

इस प्रकार से हम द्विगु समास को समझ सकते है कि यहाँ पर पूर्व पद और उत्तर पद की विभक्ति एक समान है इसीलिए इसे समानाधिकरण तत्पुरुष समास कहते है ।

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