Daliye shikshan pravidhi uddeshy paribhashaen paksh bhed sopan Labh sujhavदलीय शिक्षण प्रविधि – उद्देश्य, परिभाषाएँ, पक्ष, भेद, सोपान,लाभ एवं सुझाव

Group TeachingTechnique
दलीय शिक्षण प्रविधि


दलीय शिक्षण प्रविधि का जन्म संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ और यद्यपि यह भारत के लिये नयी तकनीक है, लेकिन अमेरिका में इस तकनीक का प्रयोग इस सदी के पाँचवें दशक से ही किया जा रहा है।

दलीय शिक्षण, शिक्षण संरचना का वह व्यवस्थित स्वरूप है, जिसमें दो या दो से अधिक शिक्षक परस्पर एक-दूसरे से सहयोग करते हुए विद्यार्थियों के एक समूह को किसी विषय विशेष का शिक्षण देते हैं।

इस दल के शिक्षक अपने-अपने क्षेत्र में विशेष योग्यता प्राप्त किये हुए होते हैं तथा शिक्षण कला में दक्ष होते हैं। इन शिक्षकों के दल में से एक शिक्षक दल का नेता होता है, जो पूरी शिक्षण व्यवस्था का संचालन करता है।

सामान्यतः नेता उस शिक्षक को चुना जाता है, जिसमें पाठ्यविषय की विशेष योग्यता, शिक्षण को संगठित करने की कला और विद्यार्थियों के व्यवहार को जानने एवं उसका मूल्यांकन कर सकने की क्षमता हो। ऐसे शिक्षक के निर्देशन में अन्य शिक्षक कार्य करने को तत्पर रहते हैं तथा सभी मिलकर निष्ठापूर्वक कार्य करते हैं।

यह शिक्षण पद्धति निरन्तर परस्पर सहयोग करने पर आश्रित रहती है। अतः कुछ विद्वान् इसको ‘सहकारिता शिक्षण’ भी कहने लगे हैं।

Aims of group teaching technique दलीय शिक्षण प्रविधि के उद्देश्य

दलीय शिक्षण प्रविधि के दो प्रमुख उद्देश्य हैं:-
1 शिक्षक की क्षमता का अधिकतम प्रयोग करना।
2 शिक्षण स्तर में सुधार लाना।

इस तकनीक में प्रत्येक शिक्षक विषयवस्तु का वही पक्ष पढ़ाता है, जिसमें वह दक्ष होता है। अन्य पक्ष दल के दूसरे शिक्षक पढ़ाते हैं। अन्य शिक्षक नेता के सहयोगी कहे जाते हैं। इस प्रविधि में जहाँ शिक्षक को अपनी क्षमता एवं कौशल के उपयोग का अवसर मिलता है वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों की जिज्ञासा की अधिकतम तुष्टि होती है।
विद्यार्थी को वह सब ज्ञान एक साथ मिल जाता है जो टुकड़ों- टुकड़ों में अनेक शिक्षकों से अलग-अलग अवसरों पर मिलता है।


Definations of group teachingtechnique
दलीय शिक्षण प्रविधि की परिभाषाएँ


इस प्रविधि की परिभाषाएँ अलग-अलग विद्वानों ने अपने ढंग से दी हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं :-

“दलीय शिक्षण व्यवस्था में अनेक शिक्षक अपने स्रोतों, अभिरुचियों तथा दक्षताओं को एकत्रित करते हैं और छात्रों की आवश्यकता के अनुसार, विद्यालय की सुविधाओं का समुचित उपयोग करते हुए एक संगठनात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं। “

दलीय शिक्षण अनुदेशन परिस्थितियों को उत्पन्न करने की एक प्रविधि है, जिसमें दो या दो से अधिक शिक्षक अपने कौशल तथा शिक्षण योजना का कक्षा – शिक्षण में एक साथ सहयोग करते हैं। इनकी योजना खर्चीली होती है, जिसका आवश्यकतानुसार परिवर्तित कर लिया जाता है । “

“दलीय शिक्षण एक ऐसी शिक्षण व्यवस्था है, जिसमें दो या दो से अधिक शिक्षक सहायक शिक्षण सामग्री अथवा इसके सहकारी योजना अनुदेशन तथा मूल्यांकन के लिये एक या अधिक कक्षाओं को तैयार करते हैं। इसके अन्तर्गत शिक्षकों की विशिष्ट क्षमताओं का निर्धारित समय में अधिकतम लाभ उठाया जाता है।

इन परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि दलीय शिक्षण अथवा टोली शिक्षण, शिक्षण की एक ऐसी सुव्यवस्थित प्रणाली है, जिसमें अनेक शिक्षक मिलकर छात्रों को एक साथ अनुदेशित करते हैं।

दूसरे शब्दों में इस प्रकार भी कह सकते हैं कि “परम्परागत कक्षा शिक्षण को परिवर्तित करने एवं सुधारने की प्रेरणा देने वाली यह उत्तम तकनीक है। इसमें शिक्षक का एकाकीपन दूर होता है और शिक्षण में गुणात्मक वृद्धि होती है।”

Aspects of group teaching दलीय शिक्षण के पक्ष


दलीय शिक्षण के सैद्धान्तिक पक्ष तीन घटकों पर आधारित हैं:-
1 छात्रों की आवश्यकता,
2 शिक्षकों की विशेष योग्यता का योगदान और
3 विद्यालय में उपलब्ध शिक्षण सामग्री ।

इन तीनों पक्षों में निकट सम्बन्ध स्थापित करके ही शिक्षण को प्रभावी एवं उपयोगी बनाया जा सकता है।

Types of group teaching दलीय शिक्षण के भेद

दलीय शिक्षण के प्रकार निम्नलिखित हैं:-

1 एक विभाग में शिक्षकों की टोली,
2 एक ही संस्था के विभिन्न विभागों के शिक्षकों की टोली और
3 विभिन्न संस्थाओं के एक ही विभाग के शिक्षकों की टोली

इस प्रकार के दलों को सभी कक्षाओं के स्तर पर सभी विषयों की शिक्षण व्यवस्था को प्रभावशाली बनाने के लिये किया जा सकता है।

Steps of group teaching technique दलीय शिक्षण प्रविधि के सोपान


इस प्रविधि के लिये सर्वमान्य क्रिया-प्रविधि होना तो सम्भव नहीं है। फिर भी निम्नलिखित सोपानों का अनुसरण किया जा सकता है:-

1 प्रथम सोपान – टोली – शिक्षण की योजना तैयार करना ।
2 द्वितीय सोपान – टोली – शिक्षण की व्यवस्था करना।
3 तृतीय सोपान – टोली – शिक्षण के परिणामों का मूल्यांकन
करना।

इस तकनीक के प्रत्येक शिक्षक की योग्यता का उपयुक्त समय पर उपयोग करना मुख्य क्रिया है। इस तकनीक में प्रत्येक शिक्षक अपनी कुशलता के अनुसार भिन्न-भिन्न क्रिया करता है ।

Advantages of group teachingtechnique
दलीय शिक्षण प्रविधि के लाभ

इस प्रविधि के लाभ निम्नलिखित हैं:-

1 विद्यार्थी शिक्षकों की विशेष योग्यताओं का लाभ उठाते हैं।
2.इससे शिक्षकों का व्यावसायिक विकास होता है।
3 विद्यार्थियों को स्वतन्त्र चर्चा करने का अवसर मिलता है।
4 विद्यार्थियों को आत्म अभिव्यक्ति का भी अवसर मिलता है।
5 शिक्षक-विद्यार्थियों में एक-दूसरे के निकट आने से घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित होता है।
6.इस प्रविधि में विषय विशेषज्ञों से सीखने का अधिक अवसर मिलता है।

7.इस प्रविधि में कक्षा का वातावरण प्रजातान्त्रिक एवं परिचर्चात्मक होने से विद्यार्थियों में मानव सम्बन्धों का विकास होता है।
8.इस प्रविधि में शिक्षकों में उत्तरदायित्व निभाने की भावना का विकास होता है।
9.शिक्षक कठोर परिश्रम कर समुचित तैयारी करने में अभ्यस्त होते हैं।
10 शिक्षण स्तर में सुधार एवं वृद्धि का अवसर मिलता है।

Suggestion for group teaching दलीय शिक्षण हेतु सुझाव

दलीय शिक्षण प्रविधि में करणीय योग्य बिन्दु निम्नलिखित हैं:-

  • शिक्षकों में सहयोग एवं लगन से काम करने की भावना होनी चाहिये।
  • शिक्षण क्रियाएँ वरिष्ठता के आधार पर न सौंपकर स्वेच्छा से चयन करने का अवसर दिया जाना चाहिये।
  • दलों में परिपक्व, सहनशील एवं सन्तुलित शिक्षकों को ही सम्मिलित करना चाहिये।
  • दल के सभी शिक्षक सम्वेदनशील एवं उत्तरदायित्व को निभाने की क्षमता वाले होने चाहिये।
  • विद्यालय के उपलब्ध साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करने की भावना होनी चाहिये।
  • यह प्रविधि सामान्य व्यवस्था से अधिक खर्चीली होती है। अत: प्रत्येक व्यक्ति एवं साधन के समुचित प्रयोग पर बल देना चाहिये।

अंत में यही कहना अधिक उपयुक्त होगा कि इस प्रविधिको प्रयोग के समय स्थानीय साधन-सुविधाओं एवं छात्रों की आवश्यकता के अनुसार साधारण देर-फेर कर प्रभावी बनाने का प्रयास करना चाहिएl

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