Gun Sandhi Examples Definition गुण संधि की परिभाषा, सूत्र व उदाहरण

गुण संधि

संस्कृत व हिंदी में स्वर संधि का एक भेद गुण संधि के बारे में परीक्षाओं में अनेकों बार प्रश्न पूछे जाते हैं | जैसे गुण संधि क्या है, किसे कहते है, अर्थ,

Gun Sandhi Examples & Definition अपवाद आदि को हम इस लेख में पढ़ेंगे और मेरी कोशिश होगी कि इस संधि के बारे में विस्तारपूर्वक आपको बताऊँ ।


गुण संधि की परिभाषा Gun Sandhi Definition


गुण संधि की Definition यह बताती है कि यदि “अ/आ” के पश्चात् हृस्व ,श,श दीर्घ” इ, उ, ऋ, लृ” हो तो पूर्व – पर श बाद वाला वर्णों के स्थान पर क्रमशः “ए, ओ, अर्, अल्” आदेश होता है |

ए, ओ, अर्, अल् को गुण कहा जाता है ।
गुण संधि का सूत्र :- “आद् गुणः” गुण संधि का सूत्र
है ।

Gun Sandhi Examples गुण संधि के उदाहरण

धन + इन्द्र:=धनेन्द्र:

उप + इन्द्र:=उपेन्द्रः

पुष्प + इन्द्र:=पुष्पेन्द्रः

गज + इन्द्र:=गजेन्द्रः

सुर + इन्द्र:=सुरेन्द्र:

रमा + ईश:=रमेश: 

(अ + ई = ए)

दिन + ईश:=दिनेश:

राम + ईश्वर:=रामेश्वर

नर + ईश:=नरेश:

उपर्युक्त Examples की मदद से अ/आ और इ/ई के संधि युक्त शब्दों की प्रकृति को समझा जा सकता | संधि के बाद अ / आ + इ/ई को ए हो गया है । यह परिवर्तन गुण संधि की पहचान का परिचायक है | जिसमें पहले पद में आपको अ/आ की ध्वनि तथा दूसरे पद में इ/ई की ध्वनि को पहचाना जा सकता है जो संधि युक्त पद होने पर ए बन जाता है |

सूर्य + उदय:=सूर्योदय:

महा + उत्सवः = महोत्सव:

गंगा + उदकम् = गंगोदकम् (आ + उ = ओ)

हित + उपदेश: = हितोपदेश: ( अ + उ = (अ ओ)

पुरुष + उत्तम:=पुरुषोत्तम:

यथा + उक्तम्=यथोक्तम्

चंद्र + उदय:=चन्द्रोदय:

पर+ उपकारः = परोपकारः

महा + ऊर्मिः=महोर्मि:

नव + ऊढा=नवोढ़ा

ऊपर लिखे गए उदाहरणों की मदद से अ / आ और उ/ऊ के संधि युक्त शब्दों को समझ सकते हैं । इस संधि के बाद अ/आ + उ/ऊ को ओ हो गया है , यह परिवर्तन गुण संधि की पहचान है | जिसमें पहले पद में आपको अ/आ की ध्वनि तथा दूसरे पद में उ/ऊ की ध्वनि को पहचाना जा सकता है जो संधि युक्त पद होने पर ओ बन जाता है।

महा + ऋषि = महर्षि: (आ + ऋ =अर्)

तव + लृकारः= तवल्कार: (अ + लृ = अल्)

सप्त + ऋषि:=सप्तर्षिः

महा + ऋषिः=महर्षि:

देव + ऋषि:=देवर्षिः

विशेष

यहाँ पर “अ/आ + ऋ = अर् होता है प्रथम शब्द का अंतिम स्वर और अगले शब्द का पहला स्वर मिलकर “अर्” होता है तथा “अर्” का ‘र्’ हलन्त होता है अतः ‘र्’ अगले वर्ण के ऊपर चला जाता है ।

राजा + ऋषि:=राजर्षिः

ब्रह्म + ऋषिः = ब्रह्मर्षिः

वर्षा + ऋतु:=वर्षर्तुः

ग्रीष्म + ऋतु:==ग्रीष्मर्तुः

शीत +ऋतु,=शीतर्तुः

वसंत +:ऋतु=वसन्तर्तुः

:इन उदाहरणों की सहायता से हम अ/आ और ऋ/ ॠ के संधि युक्त शब्दों की प्रकृति को समझ रहे हैं । संधि के बाद अ/आ + ऋ ॠ को अर् हो गया है । यह परिवर्तन गुण संधि की पहचान का परिचायक है | इसमें पहले पद में आपको अ/आ की ध्वनि तथा दूसरे पद में ऋ ॠ की ध्वनि मिलती है जो संधि युक्त पद होने पर अर् बन गया है ।

तव + लृकारः = तवल्कारः

मम + लृकारः = ममल्कारः

नव + लृकारः = नवल्कार:

महा + लृकारः = महाल्कारः

माला + लृकारः = मालाल्कारः

यहाँ पर हम अ/आ और लृ के संधि युक्त शब्दों की प्रकृति को समझ रहे हैं | संधि के बाद अ/आ + लृ को अल हो गया है | जिसमें पहले पद में आपको अ/आ की ध्वनि तथा दूसरे पद में लृ की ध्वनि को पहचाना जा सकता है जो संधि युक्त पद होने पर अल् बन जाता है ।

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