पाठ 9 गुप्तकाल guptkal

गुप्तकाल

“दिल्ली में स्थित मेहरौली लौह स्तम्भ में चन्द्र नामक शासक की विजयों का वर्णन है। इस चन्द्र नामक शासक की पहचान इतिहासकार गुप्तवंश के शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय से करते है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आज लगभग 1600 साल बीत जाने के बाद भी इस लौह स्तम्भ में जंग नहीं लगा है। इससे गुप्तकाल की उन्नत प्रौद्योगिकी का पता चलता है।”

कुषाणों के पश्चात् एक नए वंश का उदय हुआ। यह राजवंश गुप्त वंश के नाम से जाना जाता है। गुप्त साम्राज्य भारत में लगभग 319-20 ई0 में स्थापित हुआ । इस राजवंश ने भारत के विशाल भू-भाग पर लगभग दो सौ वर्षों से भी अधिक समय तक शासन किया था । गुप्त सम्राटों ने विशाल साम्राज्य स्थापित कर केन्द्रीय शक्ति को सुदृढ़ किया ।
गुप्त शासकों ने व्यापार, साहित्य, कला, स्थापत्य, विज्ञान एवं तकनीकी के विकास को बहुत प्रोत्साहित किया। गुप्तकाल में देश धन-धान्य से पूर्ण था । गुप्तकाल को भारत का स्वर्णकाल कहा जाता है।

गुप्तवंश-

गुप्तवंशावली में प्रथम शासक के रूप में श्रीगुप्त तथा द्वितीय शासक के रूप में घटोत्कच का नाम मिलता है। ये दोनों ही प्रभावहीन शासक थे। इस वंश के प्रथम शक्तिशाली शासक चन्द्रगुप्त प्रथम थे। इन्होंने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की। चन्द्रगुप्त प्रथम ने ही गुप्त संवत् चलाया। इसकी रानी का नाम कुमारदेवी था,
जो लिच्छिवी गणराज्य की राजकुमारी थी। इस वैवाहिक संबंध ने गुप्त सत्ता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।

समुद्रगुप्त

चन्द्रगुप्त प्रथम के बाद उसका पुत्र समुद्रगुप्त शासक बना। समुद्रगुप्त महान विजेता था। उसे कभी भी पराजय का सामना नहीं करना पड़ा। पश्चिमी इतिहासकारों ने समुद्रगुप्त की तुलना नेपोलियन से की है। समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के नौ शासकों को पराजित कर उनके राज्यों को अपने साम्राज्य में मिला लिया जबकि दक्षिणापथ के बारह राज्यों को जीतने के बाद उनसे उपहार (कर) प्राप्त कर मुक्त कर दिया। विजय प्राप्त करने के बाद समुद्रगुप्त ने ‘अश्वमेध यज्ञ’ किया तथा अश्वमेध घोड़ा अंकित मुद्रा को चलाया। समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है। प्रयाग प्रशस्ति की रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने की थी जो इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) स्थित अशोक स्तम्भ पर उत्कीर्ण है।

चन्द्रगुप्त द्वितीय

समुद्रगुप्त के बाद उसका पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय राजगद्दी पर बैठा । चन्द्रगुप्त द्वितीय ने लगभग 400 वर्षों से मालवा व गुजरात में शासन कर रहे शकों को हराया। शक विजय के उपलक्ष्य में इन्होंने चाँदी के सिक्के चलाए तथा विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।

कुमारगुप्त व स्कन्दगुप्त

चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के बाद क्रमशः कुमारगुप्त व स्कन्दगुप्त गद्दी पर बैठे। स्कन्दगुप्त के शासन काल में गुप्त साम्राज्य पर हूणों ने आक्रमण कर दिया। हूण मध्य एशिया की क्रूर एवं बर्बर जाति के लोग थे। स्कन्दगुप्त ने सफलतापूर्वक हूणों को पराजित किया। स्कन्दगुप्त के समय सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार कराया गया। स्कन्दगुप्त के बाद गुप्त वंश के उत्तराधिकारी शासक हूणों का प्रहार नहीं रोक सके। बुद्धगुप्त के समय से ही गुप्त साम्राज्य विघटित होता चला गया। छठी शताब्दी के आरम्भ में गुप्तवंश का अन्त हो गया।

IMG 20240302 150144 पाठ 9 गुप्तकाल guptkal

प्रशासन

गुप्तकाल में सम्राट शासन का केन्द्र होता था। राजा की सहायता के लिए मंत्रिपरिषद होती थी जिसके सदस्यों को अमात्य कहा जाता था। गुप्त साम्राज्य भुक्ति (प्रान्त) में विभाजित था । प्रान्त के प्रमुख को उपरिक कहा जाता था। प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम होती थी। गुप्त काल में राज्य के अधिकारियों को नकद वेतन के स्थान पर भूमि दी जाती थी । प्राचीन काल से चली आ रही राजस्व प्रणाली का अनुसरण किया गया। सामान्यतः कुल उपज का 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था ।

धर्म– गुप्त शासक वैष्णव धर्मानुयायी थे। इन्होंने परमभागवत् की उपाधि धारण की। गुप्त शासकों का राजकीय चिह्न गरुण था ।

गुप्त साम्राज्य की उपलब्धियाँ

1.संगीत-गुप्त सम्राट संगीत प्रेमी थे। कुछ सिक्कों पर वीणा बजाते हुए सम्राट समुद्रगुप्त का चित्र अंकित हैं।

2.कला-स्थापत्य, मूर्तिकला और चित्रकला

इस युग की महान देन है। भूमरा नामक स्थान पर शिव मन्दिर का चबूतरा और शिवलिंग ही शेष रह गए हैं। गुप्तकालीन मन्दिर का सर्वोत्तम उदाहरण देवगढ़ का दशावतार मन्दिर है। मूर्तियाँ हिन्दू वैष्णव, शैव, बौद्ध, जैन आदि सभी धर्मों से सम्बन्धित हैं। मूर्तियों का निर्माण सफेद बलुआ पत्थरों से हुआ है। गुप्त काल में विशेष प्रकार के पत्थर के स्तम्भ भी बनाए जाते थे

औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के पास अजन्ता की प्रसिद्ध गुफा है। गुफा की दीवारों पर बुद्ध के जीवन से संबन्धित घटनाओं का चित्रांकन (जिन्हें भित्ति चित्र कहते हैं) किया गया था। इन चित्रों के रंग आज भी लगभग वैसे ही हैं जैसे प्रारम्भ में थे ।

3. साहित्य

गुप्त काल में साहित्य के क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हुई । चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार में नव रत्न थे। इन नवरत्नों में कालिदास भी एक थे। कालिदास की
प्रमुख रचनाएँ अभिज्ञान शाकुन्तलम्, रघुवंशम्, कुमारसम्भवम् हैं। इसी काल में शूद्रक ने मृच्छकटिकम् तथा विशाखदत्त ने मुद्राराक्षस नामक प्रसिद्ध नाटक लिखे। इस काल में पुराणों की रचना प्रारम्भ हुई तथा विष्णुशर्मा द्वारा पंचतंत्र की रचना की गई जिसमें लिखी गई कहानियाँ बच्चों को सूझबूझ की जानकारी देती हैं। रामायण तथा महाभारत को भी इसी समय अन्तिम रूप दिया गया ।

4.विज्ञान

इस काल में विज्ञान के क्षेत्र में विशेष प्रगति हुई । इस काल के प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने बताया कि पृथ्वी गोल है । वह सूर्य का चक्कर लगाती है। इनके सम्मान में ही भारत में प्रथम कृत्रिम उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा गया। मेहरौली का लौहस्तम्भ वैज्ञानिक प्रगति का एक बेजोड़ नमूना है।
वराहमिहिर चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वितीय के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। वराहमिहिर, प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने कहा कि कोई शक्ति ऐसी है जो चीजों को जमीन के साथ चिपकाए रखती हैं। आज इसी शक्ति को गुरुत्वाकर्षण कहते हैं। फाह्यान के अनुसार गुप्तकाल की सामाजिक स्थिति-
विदेशी यात्री फाह्यान चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के समय भारत आया था उसने लिखा है कि चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का शासन बहुत अच्छा था। इनके समय में प्रजा सुखी और धनी थी। लोग स्वतंत्रतापूर्वक व्यवसाय करते थे। धर्मशालाओं में
भोजन करने की समुचित व्यवस्था थी। राज्य में चोरी का नाम नहीं सुना जाता था। देश में शान्ति थी। राजा और प्रजा एक दूसरे के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखते थे।
फाह्यान ने पाटलिपुत्र में एक विशाल चिकित्सालय देखा। चिकित्सालयों में रोगियों को मुफ्त दवा व भोजन देने की व्यवस्था थी। नगर में अनेक संस्थाएँ थीं, जहाँ दीन-दुखियों की मदद तथा अपाहिजों की सेवा की जाती थी। गुप्तकाल के लोग दानी और दयालु प्रवृत्ति के थे। गुप्तकाल में लोग लहसुन, प्याज व शराब का सेवन नहीं करते थे। वे अहिंसक और सत्यवादी थे।

IMG 20240302 151926 पाठ 9 गुप्तकाल guptkal

अभ्यास

1.गुप्तवंश के शासकों ने लगभग कितने वर्षों तक शासन किया ?

गुप्तवंश के शासको ने लगभग 200 वर्षों से अधिक शासन किया।

2.समुद्रगुप्त के विजय अभियान को किसने लिखा ?

समुद्रगुप्त के विजय अभियान को उसके दरबारी कवि हरिषेण ने लिखा।

3.गुप्तकाल में कला एवं विज्ञान की उन्नति का उल्लेख करिए ।

स्थापत्य कला मूर्ति कला और चित्रकला इस युग की महान देन है गुप्तकालीन मंदिर का सर्वोत्तम उदाहरण देवगढ़ का दशावतार मंदिर है।तथा इस काल में विज्ञान के क्षेत्र में विशेष प्रगति हुई।


4.गुप्तकाल को भारत का स्वर्णयुग क्यों कहते हैं ? स्पष्ट करिए ।

गुप्त शासकों ने व्यापार, साहित्य, कला, स्थापत्य, विज्ञान एवं तकनीकी के विकास को बहुत प्रोत्साहित किया। गुप्तकाल में देश धन-धान्य से पूर्ण था । गुप्तकाल को भारत का स्वर्णकाल कहा जाता है।

5.फाह्यान कौन था ? उसने तत्कालीन भारत के विषय में क्या लिखा ?

विदेशी यात्री फाह्ययान चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के समय भारत आया उसने लिखा है कि शासन बहुत अच्छा था प्रजा सुखी और धनी थी लोग स्वतंत्रतापूर्वक व्यवसाय करते थे।

6.गुप्त शासकों ने अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए ?

गुप्त शासको ने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए वैवाहिक संबंध स्थापित किया।

7.सही मिलान कीजिए-

कालिदासअभिज्ञान शाकुन्तलम्
शूद्रकमृगच्छटिकम्
विशाखदत्तमुद्राराक्षस
वराहमिहिर गुरुत्वाकर्षण
आर्यभट्टपृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है।

8.रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

क) भारत का नेपोलियन… समुद्रगुप्त..को कहा जाता है।

(ख) स्कन्दगुप्त ने .. सुदर्शन..झील का जीर्णोद्धार
कराया।

(ग) गुप्त संवत् का प्रारम्भ ..78... ई0 से होता है। थे।

(ड) गुप्तवंश के पहले शासक..श्रीगुप्त..थे।

पाठ 6 महाजनपद की ओर
पाठ 7 मौर्य साम्राज्य
पाठ 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से संपर्क

Leave a Comment