पाठ 3 नदी घाटी की सभ्यता- हड़प्पा सभ्यता hadappa sabhyata

हड़प्पा सभ्यता


आज कुछ लोग गाँवों में रहते हैं तो कुछ नगरों (शहरों) में। दोनों ही जगह के रहन-सहन में कुछ-कुछ समानताएँ होती हैं तो कुछ अन्तर भी । क्या आपको पता है कि आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भी भारत में नगर थे। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन प्राचीन नगरों का निर्माण लगभग आजकल की सुनियोजित नगर-निर्माण योजना की तरह होता था। ऐसा उस समय के अवशेष बताते हैं।


विश्व की प्राचीन नगर सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ। नदी के किनारे होने के कारण खेती के लिए पानी की उपलब्धता ने अधिक अन्न उत्पादन में मदद की। अधिक अन्न उत्पादन ने व्यापार को बढ़ावा दिया। जिससे नगरों का विकास संभव हो सका। व्यापार के लिए जलमार्ग सुलभ था। साथ ही नदी मार्ग से व्यापार सस्ता, आसान तथा सुरक्षित था। नगरीय जीवन में अब कृषि की अपेक्षा अन्य काम-धन्धों को अधिक महत्व मिला। इन काम-धन्धों के विकास के लिए प्राकृतिक कच्चे माल की उपलब्धता तथा उससे निर्मित वस्तुओं ने नगरीय जीवन को और उन्नत बनाया । फलस्वरूप विश्व में पहली बार अलग-अलग नदियों के किनारे नगरीय सभ्यता का विकास हुआ, जिनमें सिन्धु नदी के तट पर विकसित हुई हड़प्पा सभ्यता ।
हड़प्पा सभ्यता (लगभग 2500 ई०पू० -1520ई0पू0)

कैसे हुई खोज

सन् 1921 ई0 की बात है जब भारत में अंग्रेजों का राज था। इसी वर्ष पुरातत्वविदों ने पंजाब प्रांत में हड़प्पा नामक स्थल की खोज की। इस स्थल से प्राप्त अवशेषों के अध्ययन से पुरातत्वविदों को ज्ञात हुआ कि यह एक नगरीय सभ्यता के अवशेष हैं। इसी प्रकार सिन्ध प्रान्त में एक और गाँव मिला जिसको लोग मोहनजोदड़ो कहते थे। मोहनजोदड़ो का मतलब है मृतकों का टीला । यहाँ से भी नगरीय सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं।


हड़प्पा नामक स्थल से इस सभ्यता के अवशेष सबसे पहले मिले थे इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता कहते हैं।
पुरातत्वविदों ने इन स्थलों की विस्तृत खुदाई की तो नीचे दबा हुआ पूरा का पूरा शहर निकल आया

नगर ही नगर

धीरे-धीरे आगे और खोज हुई। कई जगहों पर खुदाई की गई तो पता चला कि उस समय एक नहीं, दो नहीं, कई नगर थे। ये नगर सिन्धु नदी और उसकी सहायक नदियों की घाटी में बसे हुए थे। इस सभ्यता के कुछ क्षेत्र आज पाकिस्तान में हैं। भारत में रोपड़ (पंजाब), कालीबंगा (राजस्थान), लोथल (गुजरात) तथा दायमाबाद (महाराष्ट्र) इस सभ्यता से संबंधित मुख्य पुरास्थल है ।

इसे भी जाने

मेरठ (उत्तर प्रदेश) में हिण्डन नदी के तट पर आलमगीरपुर पुरास्थल स्थित है। इस पुरास्थल से हड़प्पा कालीन मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए हैं।

नगरों की विशेषताएँ

हड़प्पा कालीन नगरों का निर्माण एक निश्चित योजना के आधार पर किया गया था। सड़कें चौड़ी थी तथा वे छोटी-छोटी सड़कों एवं गलियों से जुड़ी थीं। सड़कें पूर्व से पश्चिम की ओर तथा उत्तर से दक्षिण की ओर जाती थीं। सड़कों के किनारे पक्की नालियाँ बनी थीं। हर घर की नाली बड़े नालों से मिल जाती थी। हर नाली में हल्की सी ढाल होती थी ताकि पानी आसानी से बह सके। इससे पता चलता है कि इस सभ्यता के लोग सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरूक थे।

भवन निर्माण

उत्खनन में कई तरह की बड़ी-बड़ी इमारतें मिली हैं जो आयताकार थीं। कई दो मंजिला घर थे, तो कुछ छोटे-छोटे घर थे। हडप्पा, मोहनजोदड़ो एवं अन्य स्थलों की खुदाई से पता चलता है कि हड़प्पा कालीन भवनों का निर्माण एक सुनिश्चित योजना के अन्तर्गत किया गया था । प्रत्येक घर के बीच में एक आँगन होता था। आँगन के चारों ओर कमरे बने हुए थे। प्रत्येक घर में रसोईघर, शौचालय तथा स्नानघर का उचित प्रबन्ध था। दो मंजिला मकान में ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई थीं।

IMG 20240227 104120 पाठ 3 नदी घाटी की सभ्यता- हड़प्पा सभ्यता hadappa sabhyata

चित्र में इस इमारत की दीवारें देखिए। कितनी
ऊँची दीवारें हैं। दीवारें पकी ईंटों की बनी हुई हैं। इससे
पता चलता है कि उस समय ईंट पकाने की भट्टियाँ रही होंगी ।
हड़प्पा सभ्यता के नगरों की खुदाई में पक्के घरों के
अलावा बड़े-बड़े गोदाम मिले हैं। आसपास के गाँवों से अनाज इकट्ठा करके इन्हीं गोदामों में रखा जाता रहा होगा। घरों और गोदा के अलावा मोहनजोदड़ों में एक बड़ा सा पक्
स्नानागार मिला है। इसके चारों तरफ कमरे बने हुए थे।

सोचिए और बताइए
 ऐसा क्यों लगता है कि हड़प्पा सभ्यता के नगर बहुत सोच-विचार कर बनाए गए थे ?
शहर के लोगों को बड़े गोदामों में अनाज भर कर रखने की जरूरत क्यों पड़ी होगी ? सोचें ।

रहन-सहन

चावल, गेहूँ और जौ हड़प्पा वासियो के मुख्य भोज्य पदार्थ थे। ये लोग सूती एवं ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्र पहनते थे। यहाँ के निवासी गेहूँ, जौ, कपास, मटर, तिल और चावल की खेती करते थे। ऊँचे कन्धों वाले बैल, गाय, भैंस, बकरी, भेंड़, सुअर, हाथी और ऊँट इनके पालतू पशु थे। हार, कंगन, पाजेब (पायल), बाली,अंगूठी उनके प्रिय आभूषण थे। मनका बनाने का कारखाना चन्हूदड़ों से प्राप्त हुआ है।
देवी-देवता सम्भवतः यह मिट्टी की मूर्ति उन लोगों की देवी की मूर्ति थी। पत्थर के चौकोर पट्टे पर एक आकृति के सिर पर भैंसे के सींग का चित्र है। उसके चारों तरफ कई
जानवर बने हैं। यह कोई देवता होंगें, सम्भवतः सिन्धुवासी इन्हें पशुओं का देवता मानकर पूजते थे।

इसके अलावा कुछ मुहरों पर पीपल की पत्तियाँ और साँप की आकृतियाँ भी बनी मिली हैं। शायद वे इन सबकी पूजा करते थे । इन बातों का हम अन्दाजा लगा सकते हैं, पक्की तरह से नहीं कह सकते ।

इतिहासकारों के अनुसार हड़प्पा सभ्यता के धर्म की चार मुख्य विशेषताएँ थीं- मातृ शक्ति की उपासना, शिव की
पूजा, वृक्ष पूजा और पशु पूजा ।

ऊपर बताई गई किन-किन चीजों को आज भी लोग मानते हैं ? इन चीजों को मानने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं ? सोचिए और बताइए ।
काम धंधे
सोचिए ! पत्थर का भाला उन्होंने कैसे बनाया होगा ?
जब लोग पत्थर से औजार व हथियार बना लेते थे तो उन्होंने धातु की चीजें बनाना क्यों शुरू किया होगा ?


खुदाई में ताँबे और काँसे की बनी हुई कुल्हाड़ी, दर्पण, आरी, कंघियाँ, उस्तरा प्राप्त हुए हैं। इसका मतलब यह हुआ कि सिन्धु घाटी के लोग जमीन में से धातु निकालने और उसे साफ करने तथा आग में पिघलाकर चीजें बनाने के तरीके से परिचित थे।

काँसा- ताँबा और टिन को मिलाकर बनाई गई धातु है ।

आश्चर्य की बात तो यह है कि धातु की चीजें बनाने के साथ-साथ लोग पत्थर के औजार भी बनाया करते थे। इसका कारण शायद यह था कि ताँबा व काँसा जैसी धातुएँ, पत्थर की तुलना में बहुत ज्यादा मजबूत नहीं थीं । ये धातुएँ हर जगह आसानी से मिल भी नहीं पाती थीं इसीलिए लोग कई औजार पहले की तरह पत्थर के ही बनाते रहे।
इस बैलगाड़ी में दो बड़ी खोज छिपी है- एक है पहिया
व दूसरा है बैलगाड़ी ।

सोचकर बताइए कि हड़प्पा सभ्यता में बैलगाड़ी एक जरूरी चीज क्यों रही होगी ? आप अपने आसपास किस-किस काम में पहिए या चक्के का प्रयोग देखते हैं ? लिखिए।


उस समय चक्के का इस्तेमाल मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए भी होने लग था। इसलिए पहले की तुलना में बहुत अच्छे किस्म केbबर्तन बनाए जाने लगे थे।
आप अनुमान लगा सकते हैं कि हड़प्पा के नगरों में बहुत से कारीगर रहते थे। नगर के लोग अपनी जरूरत की सब चीजें घर पर नहीं बनाते थे । अलग-अलग चीजों को बनाने वाले
अलग-अलग कारीगर थे जो अपनी चीजें बनाकर दूसरों को बेचते थे।


वस्तु विनिमय


हड़प्पा सभ्यता के लोग एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तुओं को ले-देकर व्यापार करते थे। इसके लिए वे रुपये या सिक्कों का प्रयोग नहीं करते थे। उस समय रुपये-पैसे का प्रचलन नहीं था

वस्तु विनिमय-वस्तु के बदले दूसरे की वस्तु का लेना और देना

व्यापार

हड़प्पा के नगरों से पत्थर, हाथी दाँत, धातु एवं मिट्टी की बनी वस्तुएँ मिली हैं। कुछ विद्वान सोचते हैं कि ये वास्तव में व्यापारियों की मुहरें थीं। ये विभिन्न आकार की हैं। इन मुहरों पर आदमी की आकृतियाँ, कुछ पर जानवरों की, पौधों की और कुछ पर बर्तनों की आकृतियाँ बनी हुई हैं व्यापारी जब एक जगह से दूसरी जगह सामान भेजते थे तो सामान बाँधकर उस पर गीली मिट्टी छापते होंगे और गीली मिट्टी पर अपनी मुहर से छाप बना देते रहे होंगे ताकि उनके सामान की पहचान बनी रह सके। तौल और नाप के लिए बटखरे और पैमाने का प्रयोग करते थे। ऐसी
मुहरें दूसरे देशों में भी पाई गई हैं- खासकर मेसोपोटामिया (इराक) मे लगता है कि उन दिनों इराक और हड़प्पा के नगरों के बीच व्यापार होता था।


आइए जानें व्यापार से होने वाले लाभ
आवश्यकतानुसार सुंदर और नई-नई चीजें आसानी से मिल जाती हैं। विचारों का आदान-प्रदान होता है।
दूसरे देशों के विषय में जानकारी होती है। अतिरिक्त उत्पादन से ही व्यापार सम्भव है।

लिखावट-हड़प्पा सभ्यता की मुहरों पर संकेत के रूप में लेख लिखे हैं जिससे उनके अक्षर चित्रों जैसे लगते हैं। विद्वान आज भी इस लिखावट को पढ़ नहीं पाए हैं इसलिए हड़प्पा सभ्यता को आद्य ऐतिहासिक युग के अन्तर्गत रखते हैं। खुदाई से मिले अवशेषों के आधार पर ही हम इस सभ्यता के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

हड़प्पा संस्कृति के लोथल क्षेत्र में मिले बन्दरगाह के अवशेषों से पता चलता है कि ये लोग नदी या समुद्र से व्यापार करते थे। लोथल मुख्यतः व्यापारिक नगर रहा होगा क्योंकि यहाँ से बंदरगाह (गोदी), मुहरें तथा गोदाम के अवशेष मिले हैं।

नगर निर्माण योजना के साथ-साथ अन्य विशेषताओं के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इसकी शासन व्यवस्था काफी सुदृढ़ रही होगी। युद्ध संबंधी अस्त्र-शस्त्रों के न मिलने के कारण कहा जा सकता हैं कि राज्य में शांति एवं सुव्यवस्था थी ।

नगरों का खत्म होना

आज से चार-पाँच हजार साल पहले हड़प्पा में नगर बने हुए थे। ये नगर लगभग एक हजार साल तक बने रहे, फिर किसी कारण से नष्ट हो गए और मिट्टी में दब गए। क्या कारण हो सकते हैं- बाढ़, भूकम्प, महामारी, आक्रमण, आग या फिर आर्यों का आना ।


नगर निर्माण कला का विकास इस सभ्यता की विशिष्ट देन है। यहाँ के लोगों ने घर बनाने में पकी ईंटों का प्रयोग किया। पानी निकास हेतु नालियों की समुचित व्यवस्था सर्वप्रथम हड़प्पा वासियों ने की। हड़प्पा सभ्यता के नगरों के खत्म होने के बाद सैकड़ों वर्षों तक भारत में कोई नगर नहीं बसे ।


और भी जानिए

हड़प्पा सभ्यता के निवासी बहुत शान्तिप्रिय थे क्योंकि यहाँ से लड़ाई के अस्त्र-शस्त्र बहुत ही कम संख्या में मिले हैं।
यह सभ्यता काँस्य युगीन सभ्यता थी।
हड़प्पा सभ्यता भारत की पहली नगरीय सभ्यता थी ।
सबसे पहले कपास उत्पादन करने का श्रेय हड़प्पा सभ्यता के लोगों को है। हड़प्पा सभ्यता के लोग सूती कपड़ों का प्रयोग किया करते थे।
सभी भारतीय लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती हैं लेकिन हड़प्पा की लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी।

शब्दावली

सभ्यता-योजना- मानव सभ्य तब कहा जाता है जब वह अपने जीवन के तरीके को बदल देता है और पुराने रीति-रिवाजों से आधुनिक रीति-रिवाजों को अपनाकर नई स्थिति में पदार्पण करता है।

योजना किसी कार्यक्रम को सम्पन्न करने से पूर्व उसकी रूपरेखा तैयार करना ।

व्यापार उत्पादित वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह भेजकर अतिरिक्त लाभ कमाना जिससे उत्पादन में और अधिक वृद्धि हो सके।

शताब्दी सौ वर्ष का समय। जैसे सन् 2002 21वीं शताब्दी में आयेगा

IMG 20240228 091029 पाठ 3 नदी घाटी की सभ्यता- हड़प्पा सभ्यता hadappa sabhyata

मिस्र सभ्यता (5000 ई०पू०-2000ई०पू०)
मिश्र सभ्यता को नील नदी का वरदान कहते हैं। शवों को संरक्षित करने के लिए उनके शरीर पर नाइट्रोन नामक पदार्थ का लेप लगाकर उसे पतले एवं मुलायम कपड़े से ढक देते थे। इस प्रकार के शरीर को ममी कहते हैं। इनको पिरामिड के अन्दर रखा जाता था।

IMG 20240228 091352 पाठ 3 नदी घाटी की सभ्यता- हड़प्पा सभ्यता hadappa sabhyata

क्रीट सभ्यता 3000 ई०पू० 1500 ई०पू०-
इसे महान द्वीप सभ्यता भी कहते हैं। यह सभ्यता भूमध्य सागर के किनारे विकसित हुई थी। सुन्दर चित्रकारी के कारण यहाँ के बर्तनों की माँग दूसरे देशों में भी थी ।

चीन सभ्यता- लगभग 2500 ई०पू०
यह सभ्यता हवांगहों नदी के किनारे विकसित हुई । सॉटन के कपड़े तथा बाँस पर लिखना सबसे पहले चीन ने शुरू किया। कागज का आविष्कार सर्वप्रथम चीन में हुआ ।

अभ्यास


निम्नलिखित में सही विकल्प पर सही का निशान लगाइए

(अ) सिन्धु घाटी की सभ्यता थी-

क. ग्रामीण सभ्यता ।
ख. नगरीय सभ्यता ।
ग. अर्द्धनगरीय सभ्यता ।


(ब) हड़प्पा कालीन नगर बसे थे-

क. आजकल के गाँवों की तरह ।

ख. टेढ़ी-मेढ़ी गलियों में ।
ग.एक निश्चित योजना के अनुसार ।

2=रिक्त स्थान भरिए-


क. मोहनजोदड़ो का अर्थ ..मृतकों का टीला.. है।

ख. रोपड़ भारत के… पंजाब..राज्य में, कालीबंगा.. राजस्थान.. राज्य में है।

ग. व्यापार…ईराक…और हड़प्पा राज्य में है। के नगरों के बीच होता था ।

3.सही जोड़े बनाइए-
रोपड़पंजाब
कालीबंगा राजस्थान
लोथलगुजरात
दायमाबादमहाराष्ट
4.प्रश्नों के उत्तर लिखिए-


(क)कांसे की बनी नर्तकी की मूर्ति कहाँ से प्राप्त हुई है ?

कासें की बनी नर्तकी की मूर्ति हड़प्पा स्थल से प्राप्त हुई है।


(ख)हड़प्पा के लोगों का विदेश व्यापार किस देश के साथ होता था ?

हड़प्पा के लोगों का विदेश व्यापार इराक के साथ होता था।


(ग)कागज का आविष्कार सर्वप्रथम कहाँ हुआ ?

कागज का आविष्कार सर्वप्रथम चीन में हुआ।


(घ)कौन सी सभ्यता ‘नील नदी का वरदान’ नाम से प्रसिद्ध है ?

मिश्रा की सभ्यता नील नदी का वरदान है।


5.मानचित्र देखकर हड़प्पा कालीन पुरास्थलों की सूची बनाइए ।

6.टिप्पणी लिखिए-

हड़प्पा कालीन नगर निर्माण योजना हड़प्पा कालीन नगर की निर्माण योजना में मुख्य विशेषता सड़के चौड़ी और सीधी थी सड़क के बगल एक सुव्यवस्थित नाली की व्यवस्था यह हड़प्पा कालीन नगर निर्माण योजना में मुख्य विशेषता है।


1.हड़प्पा कालीन व्यापार
2.हड़प्पा कालीन रहन-सहन

3.हड़प्पा कालीन देवी-देवता

7.सिन्धु घाटी के नगरों के बारे में लोगों को कैसे पता चला ? हड़प्पा सभ्यता के नष्ट होने के क्या कारण हो सकते थे ?

सिंधु घाटी के नगरों के बारे में लोगों को खुदाई से प्राप्त अवशेषों को पुरातत्ववेत्ताओं के अध्ययन से पता चला और हड़प्पा सभ्यता के नष्ट होने का मुख्य कारण प्राकृतिक आपदा या बाहरी आक्रमण हो सकते हैं।

8.किस कारण सभी प्राचीन सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ ? (नदियों से विशेष लाभ क्या थे ?)

नदियों के किनारे सभ्यताओं का विकास होने का मुख्य कारण है कि वहां मिट्टी उपजाऊ होती थी और पानी की उपलब्धता होने के कारण प्राचीन सभ्यता नदियों के किनारे ही विकसित हुए।


9.निम्नलिखित तालिका पूरी करिए-

सभ्यता का नामनदी / सागर का नाम मुख्य योगदान
मेसोपोटामिया सभ्यतादजला-फरातदजला-फरात
मिश्रा की सभ्यतानील नदीनील नदी
क्रिट सभ्यताभूमध्य सागर के किनारेभूमध्य सागर
चीन की सभ्यताह्ववांगहो नदी के किनारेह्ववांगहो नदी
हड़प्पा सभ्यतासिंधु नदी के तट परसिंधु नदी

Leave a Comment