हाँ में हाँ पाठ-6 han main han chapter-6

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे हाँ में हाँ-(बुंदेलखंड की एक लोक कथा)
एक राजा थे। राज-काज से थक गए थे। एक दिन दरबार में मंत्री से बोले- “मंत्री जी,
सोचता हूँ, हम लोग गंगा-स्नान कर आएँ ।”

राजा की बात सुनते ही मंत्री जी चट से बोले- “बहुत शुभ विचार है महाराज !आपके पूर्वजों ने तो कई बार गंगा जी की यात्रा की है। अवश्य चला जाए।”राजा ने पूछा-“तो मंत्री जी, फिर चलने का कोई शुभ मुहूर्त निकलवाएँ ।”

मंत्री बोले- “मुहूर्त की क्या बात महाराज ! सबसे बड़ा मुहूर्त इच्छा ही है। जिस दिन महाराज चलने का विचार करें वही शुभ मुहूर्त है ।”
राजा बोले- “सवारी का प्रबंध भी तो होना चाहिए ।”
मंत्री जी ने कहा- “हाँ महाराज, सवारी तो होनी ही चाहिए। गंगा जी बहुत दूर हैं, परंतु सवारी की आपके यहाँ क्या कमी है ?

एक-से-एक बढ़कर सवारियाँ हैं।”राजा ने पूछा- “कौन-सी सवारी ठीक रहेगी “मंत्री जी बोले- “सवारी वही ठीक रहेगी जिसमें श्रीमान जी को सुविधा हो।”

राजा बोले- “मंत्री जी हाथी कैसा रहेगा ?”
मंत्री जी बोले- “उत्तम महाराज! हाथी जैसी सवारी ? वाह, क्या कहना ! आनंद से चले जा रहे हैं। जहाँ ठहरना चाहें, ठहर सकते हैं। जब चलना है, चलें । राजाओं की सवारी तो हाथी ही है। ठाट से हौदा कसा हो- महाराज की सवारी चली जा रही हो। आगे-पीछे नौकर-चाकर साज-सामान लिए चल रहे हों। दूर से देखने वाले देखें- कोई बड़ा रईस चला आ रहा है।” राजा बोले – “गंगा जी तो बहुत दूर हैं। हाथी से तो महीनों में पहुँच पाएँगे। चींटी की चाल चलता है ।”
मंत्री ने उत्तर दिया – “सो तो है ही महाराज । हाथी से ज्यादा सुस्त जानवर दूसरा नहीं ।”
राजा ने कहा- “तो फिर ऊँट ?”
मंत्री जी बोले- “ऊँट ठीक है महाराज ! उत्तम सवारी है। कोसों की मंजिल एक दिन में पूरी करने के लिए ऊँट से बढ़कर कोई सवारी नहीं ।”
राजा बोले- “परंतु कई दिनों का खटराग है। ऊँट पर बैठे-बैठे कूबड़ निकल आएगा। कमर तो टूट ही जाएगी। ऊँट बलबलाता भी बहुत है।”
मंत्री जी बोले- “छोड़िए भी ऊँट को। कमर दुःखने की बात तो है ही। आपका पेट भी हिल जाएगा। ऊँट भी कोई सवारी है ? ऊँट और गधे में अधिक अंतर नहीं।”
राजा ने कहा- “मेरी समझ में घोड़ा ठीक रहेगा ।”
मंत्री जी ने कहा- “हाँ महाराज ! घोड़ा बिल्कुल ठीक है। मैदान हो, चाहे पहाड़ हो, घोड़ा सब जगह चला जाएगा। वीरों की सवारी है, और सब में शानदार। जी चाहे जहाँ रुकिए, जब चलिए। घोड़े की दुलकी चाल का क्या कहना ?”
है ।”
राजा बोले- “पर एक बात है, घोड़े पर घंटों बैठना तो कठिन है। कायदे से बैठना पड़ता
मंत्री जी बोले- “सो तो है ही महाराज ! काठी और काठ को एक समान समझिए। धूप अलग लगे, पानी से भी बचाव नहीं। मनमौजी जानवर है । जाने कब किस खाई-खंदक
पटक दे।”
ने
राजा पूछा-
“मंत्री जी, पालकी कैसी रहेगी ?”

मंत्री जी बोले- “पालकी का क्या कहना महाराज ! यही तो राजा की सवारी है।” राजा बोले- “परंतु पालकी में बैठकर गंगा जी में स्नान के लिए जाने की बात कुछ जँचती नहीं। लोग हँसेंगे तो नहीं ?”
मंत्री जी ने कहा- “हँसने की बात तो है ही महाराज ! पालकी पर लदकर चलना तो जीते जी ही मुर्दों की तरह जाने के बराबर है।”
राजा ने कहा- “तब तो कोई सवारी ठीक ही नहीं बैठती। तो फिर मंत्री जी, गंगा स्नान के लिए जाने की बात रहने ही दें।”
मंत्री जी बोले- “उत्तम विचार है महाराज! घर में ही सब आनंद है।

कहा भी गया है-मन चंगा तो कठौती में गंगा ।”
राजा ने कहा- “हाँ, तो फिर यही तय है। कौन इस यात्रा के पचड़े में पड़े।” और फिर राजा ने गंगा यात्रा का विचार त्याग दिया।
इसे ही कहते हैं “झूठ-मूठ हाँ में हाँ मिलाना। बच्चो ! तुम इस आदत से बचना।”

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
मुहूर्तकार्यक्रम प्रारंभ करने का समय
काठीघोड़े की पीठ पर कसने वाली जीन जिसके नीचे कट लगा रहता है|
पचडाझमेला झंझट
बलबलानाऊंट का बोलना
मनमौजीअपनी इच्छा अनुसार काम करने वाला

1-बोध प्रश्न उत्तर दीजिए-

(क) लोककथा में किस तरह के लोगों पर व्यंग्य किया गया है ?

उत्तर-इस लोककथा में झूठ मूठ हाँ में हाँ मिलाने वाले लोगों का व्यंग किया गया है|


(ख) इस लोककथा में यातायात के किन-किन साधनों का नाम आया है ?

उत्तर– इस लोककथा में यातायात के साधन में सर्वप्रथम हाथी और ऊंट, घोड़ा पालकी के साधन का नाम आया है|

(ग) ‘हाँ में हाँ’ लोककथा से क्या सीख मिलती है ?

उत्तर-हमें झूठ-मूठ में हां में हां नहीं मिलना चाहिए और इस आदत बचना चाहिए ,|

2-सोच विचार बताइए-

यदि मंत्री की जगह तुम होते तो सवारी के विषय में क्या सलाह देते और क्यों
उत्तर
-मैं राजा को घोड़े से यात्रा करने का सलाह देता क्योंकि घोड़े से खाँई खंदक जगहों पर आसानी से चला जाता और जहां चाहे वही रुक सकते थे और जल्द ही गंगा स्नान कर आते|

3-भाषा के रंग –

इस शब्द पहेली में कुछ नदियों के नाम है उन्हें ढूंढ कर लिखिए

ब्रमुनाकावेरी
ह्रागोदारी
वीगंगाझे
पुर्मदागोती
त्रचेनालु
ब्रह्मपुत्र, यमुना, कावेरी , नर्मदा, चेनाब, सतलुज, गोदावरी, गंगा, झेलम , रावी |

4-आपकी कलम से-

इन बिंदुओं के आधार पर किसी स्थान की यात्रा की योजना बनाकर लिखिए-

कहां जाएंगे किन-किन साधनों से जाएंगे कौन-कौन साथ होंगे वहां क्या-क्या करेंगे खर्च का भी अनुमान करके लिखिए

विद्यार्थी स्वयं करें

5-अब करने की बारी-

(क) इस कहानी पर अपनी कक्षा में अभिनय कीजिए ।

उत्तर -अपनी कक्षा के साथियों के साथ मिलकर अभिनय करें|


(ख) इसी प्रकार की अन्य लोककथाओं, हास्य कविताओं, चुटकुलों का संग्रह कीजिए ।

उत्तर-विद्यार्थी स्वयं करने का प्रयत्न करें |


(ग) पाठ में आए मुहावरे ढूँढ़िए और उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।

उत्तरमन चंगा तो कठौती में गंगा-मन की शुद्धता ही वास्तविक शुद्धता है |

(घ) पता कीजिए और लिखिए

  • आपके घर से गंगा जी कितनी दूर है?
  • वहां किन-किन साधनों से जा सकते हैं?
  • आपके मत में वहां जाने के लिए सबसे अच्छा साधन कौन सा होगा और क्यों?

विद्यार्थी अपने विचार विमर्श से स्वयं करने का प्रयत्न करें?

(ङ)-हमारे आसपास बहुत सी नदियां होती हैं जो हमारे बहुत कम आते हैं वर्ष में कई पर्व त्यौहार आते हैं जब हम नदियों में स्नान करते हैं बताइए-

  • आपके आसपास कौन सी नदिया है?
  • आपका परिवार इनमें कब का स्नान के लिए जाता है?
  • नदियों में स्नान करते समय हमें क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

(च) नीचे लिखे अनुच्छेद को पढ़िए और समझिए

दो चूहे कहीं घूमने निकले। रास्ते में उन्हें हाथी मिला। एक चूहे ने मूँछें फड़काते हुए उससे लड़ने को कहा। हाथी ने लड़ने से मना कर दिया। दूसरे चूहे ने कहा कि वह हम दो से घबरा गया है, लडेगा नहीं ।


इस अनुच्छेद को संवाद शैली में बदल सकते हैं। परिवर्तन इस प्रकार से होगा –

एक चूहा – अरे ओ हाथी ! बोल क्या हमसे लड़ेगा ?


दूसरा चूहा – रहने दे, वह घबरा गया है। हम दो हैं न । वह हमसे नहीं लड़ेगा।

आप नीचे दिए गए अनुच्छेदों को संवाद शैली में बदलते-

फरजाना को स्कूल से घर आने में देर हो गई मम्मी ने देर से आने का कारण पूछा फरजाना ने बताया कि साइकिल की चैन टूट गई थी उसे ठीक कराने में देर हो गई|

(छ)-कविता को पढ़कर सवालों के उत्तर दीजिए

हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं,
रंग-रूप, वेश-भाषा चाहे अनेक हैं।
बेला, गुलाब, जूही, चंपा, चमेली,
प्यारे-प्यारे फूल गूँथे माला में एक हैं।
।गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा, कावेरी
, जाके मिल गईं सागर में, हुई सब एक हैं।
कोयल की कूक प्यारी, पपीहे की टेर न्यारी,
गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है।

कविता में-

1-किन-किन फूलों के नाम है – बेला गुलाब जूही चंपा चमेली|

2-किन-किन नदियों के नाम है – गंगा ,यमुना, ब्रह्मपुत्र कृष्ण ,कावेरी|

3-किन-किन पक्षियों के नाम हैं – कोयल ,पपीहे |

लिखिए जो कविता में नहीं है

पांच फूलों के नाम-

तीन नदियों के नाम-

पांच पशु -पक्षियों के नाम-

उपरोक्त कविता को पढ़कर विद्यार्थी उपर्युक्त तीन प्रश्नों के उत्तर स्वयं हल करने का प्रयास करें?

6-मेरे दो प्रश्न पाठ के आधार पर दो सवाल बनाया-

1-एक दिन दरबार में राजा मंत्री से क्या बोले?

2-राजा ने मंत्री से चलने के लिए क्या कहा?

7-इस कहानी से-

(क)-मैंने सीखा-हमें झूठ-मूठ में हां मैं हां नहीं मिलना चाहिए

(ख)-मैं करूंगी/करूंगा-मैं कभी झूठ-मद में हां में हां नहीं करूंगी /करूंगा |

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