हौसला पाठ -13 Hosala chapter -13

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे हौसला पाठ 13

जुलाई का दूसरा सप्ताह । पंद्रह जुलाई सन् उन्नीस सौ उन्यासी। अपनी माँ के साथ हमारी कक्षा में एक बच्चा आया । उसका उसी दिन दाखिला हुआ था। नाम-माइकल । स्वस्थ, गोल-मटोल । छोटी-छोटी आँखें, घुँघराले बाल, हँसता हुआ-सा चेहरा। कुछ ही दिनों में अपने व्यवहार और प्रतिभा के बल पर वह कक्षा में सबकी आँखों का तारा हो गया।

माइकल कब मेरा सबसे खास दोस्त हो गया, मुझे भी पता न चला।
साथ-साथ रहना, खेलना, पढ़ना, खाना-पीना । मित्र के साथ-साथ वह मेरा प्रतिद्वंद्वी भी था । कक्षा में सबसे अधिक अंक पाने के लिए हम दोनों में होड़ लगी रहती। वह संगीत में प्रथम रहता तो मैं खेल में। माइकल चित्रकला में पुरस्कार पाता, मैं भाषण में। उसे गणित में ज्यादा अंक मिलते तो मुझे हिंदी में
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एक दिन सुबह स्कूल खुलते ही प्रधानाचार्य जी ने हमें अपने कक्ष में बुलवा लिया। बोले, “बेटा, तुम दोनों ने हमारे विद्यालय का सदैव गौरव बढ़ाया है। चेन्नई में बच्चों की राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता होने वाली है । मैंने वहाँ के लिए तुम दोनों का नाम भेज दिया है। मैं चाहता हूँ कि तुम देश भर में अपने विद्यालय का नाम रोशन करो। तुम्हारी शिक्षिका मंजीत साथ रहेंगी। अगले सप्ताह ही जाना होगा, इसलिए मंजीत जी से मिलकर तैयारियाँ कर लो।” हमारी खुशी का ठिकाना न रहा। मंजीत मैडम से मिलकर बात की और जी-जान से प्रतियोगिता की तैयारियों में जुट गए।
पूरे एक सप्ताह तक हम चेन्नई में रहे। विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। माइकल ने संगीत में स्वर्ण पदक जीता, मैंने भाषण में। हमें और भी कई पुरस्कार मिले। वहाँ कई प्रदेशों के बच्चे हमारे दोस्त बन गए। अब हम जल्द से जल्द घर पहुँचकर इस खुशी को सबसे साझा करना चाहते थे। बस पकड़ने की जल्दी में माइकल ने चौराहे पर जली लाल बत्ती नहीं देखी और दूसरी ओर से आ रहे वाहन की चपेट में आ गया। होश आने पर वह अस्पताल में था और दोनों पैर गँवा चुका था। रंग में भंग पड़ गया। सबकी आँखों में सिर्फ आँसू थे।

सुना था कि विपत्ति कभी बताकर नहीं आती। कई बार हमारी जरा-सी असावधानी जीवन भर का दुख बन जाती है। वापसी में ऐसा ही हुआ।इस बीच माइकल के पिता जी का तबादला चंडीगढ़ हो गया। अपनी माँ, पिता जी और बहन के साथ माइकल शहर छोड़ रहा था तो लग रहा था जैसे मेरे शरीर से कोई प्राण ले जा रहा है। माइकल चंडीगढ़ जा चुका था । कुछ दिनों तक दीदी की चिट्ठियाँ आती रहीं, धीरे-धीरे कम होती गईं। वर्षों के अंतराल ने हमें एक दूसरे से लगभग दूर कर दिया था ।शिक्षा पूरी करने के बाद मैं अध्यापक बन गया । कक्षा के बच्चों में अभी भी मेरी निगाहें माइकल को ढूँढ़ती, पर माइकल का कहीं कोई अता-पता न था। कहते हैं, इतिहास खुद को दोहराता है। लगभग ऐसा ही हुआ। अपने विद्यालय के बच्चों की टीम लेकर मुझे मुम्बई जाना पड़ा। इस बार मैं बहुत सावधान था। “सभी बच्चे यातायात के नियमों का पालन करेंगे” मैंने चेतावनी पूर्वक कहा।

प्रतियोगिताओं का उद्घाटन प्रारंभ हुआ। उद्घोषक ने बताया कि उद्घाटन एक महान संगीतज्ञ के द्वारा किया जाना है। परदे के पीछे से वाद्य-यंत्र बजना प्रारंभ हुए। मंच पर धीरे-धीरे अंधकार से प्रकाश फैलने लगा। व्हील चेयर (पहिया कुर्सी) पर माइक हाथ में थामे मुख्य अतिथि मंच पर आए। सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। अरे ! यह तो मेरे बचपन का मित्र माइकल है – मैं चौंक उठा। मेरी आँखें खुशी से भर आईं।माइकल ने बेहद मधुर गीत सुनाया। गाते-गाते उसकी दृष्टि मुझ पर पड़ी। मैंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया। कार्यक्रम समाप्त होते ही मैं दौड़कर मंच पर गया। माइकल ने मुझे गले लगा लिया। “हम दोनों बचपन के मित्र हैं”- माइकल ने मेरे विद्यार्थियों को बताया । इसके बाद माइकल हम सबको वहाँ ले गया, जहाँ वह रुका हुआ था ।

उसने बताया “तुम्हें याद है न अवनीश वह दुर्घटना। टाँगें गँवा देने पर मैं जीवन से निराश हो गया था। अपने आप को अक्षम समझने लगा था। उस समय रोज़ी दीदी ने मुझे हताशा से उबारा। दीदी मुझे संभालतीं, किताबें लातीं, कैसेट लातीं । उन्होंने मुझे गिटार भी लाकर दिया। ‘तुम एक दिन जरूर प्रसिद्ध संगीतकार बनोगे’ दीदी कहतीं। धीरे-धीरे मैंने संगीत का अभ्यास प्रारंभ किया और अपने सपने को साकार किया। मैं अपना एक संगीत का स्कूल भी चलाता हूँ, जहाँ तमाम बच्चे मुफ्त में संगीत सीख रहे हैं।”
बच्चे उत्सुकता से माइकल की बातें सुन रहे थे। वह कह रहा था, “प्यारे बच्चो! बडी से बड़ी विपत्ति भी सब कुछ समाप्त नहीं करती। विपत्ति के समय हौसला बनाए रखना जरूरी होता है। अगर आपमें हिम्मत है, हौसला है तो आपको अपना लक्ष्य प्राप्त होकर रहेगा।”

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
बुलंदीऊंचाई उत्कर्ष
दाखिलाप्रवेश
प्रतिभाअसाधारण बुद्धिमत्ता या गुण
हताशानिराशा
प्रतिद्वंद्वी मुकाबला करने वाला
प्रतियोगिताहोड़
हौसलाउत्साह
लक्ष्यउद्देश्य
अंतरालकालों के मध्य का अवकाश

1-बोध प्रश्न उत्तर लिखिए-

(क) माइकल किस गुण के कारण सबकी आँखों का तारा हो गया था ?

उत्तर-माइकल कुछ ही दिनों में अपने व्यवहार और प्रतिभा के गुण के कारण वह कक्षा में सब की आंखों का तारा हो गया|


(ख) माइकल के साथ दुर्घटना क्यों हुई ?

उत्तर-माइकल बस पकड़ने की जल्दी में चौराहे पर जली लाल बत्ती नहीं देखी और दूसरी ओर से आ रहे हैं वाहन के चपेट में आने कारण माइकल के साथ दुर्घटना हुई?


(ग) दुर्घटना से माइकल पर क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर-माइकल दुर्घटना के बाद निराश हो गया और अपने आप को अच्छा समझने लगा|

(घ)-रोजी ने माइकल को हताशा से कैसे उबरा?

उत्तर-रोजी ने उसे किताबें लाती ,कैसेट लाती, उन्होंने गिटार भी लाकर दिया और कहा कि तुम एक दिन जरूर प्रसिद्ध संगीतकार बनोगे |

(ङ)-माइकल अपना सपना कैसे पूरा कर पाया?

उत्तर-माइकल ने अपना संगीत का अभ्यास प्रारंभ किया और अपने सपने को साकार किया|

2-किसने किससे कहा?

(क) “बेटा! तुम दोनों ने हमारे विद्यालय का सदैव गौरव बढ़ाया है।”-प्रधानाचार्य ने माइकल और अवनीश से कहा |

(ख) “तुम एक दिन जरूर प्रसिद्ध संगीतकार बनोगे-रोजी ने माइकल से कहा था


(ग)सभी बच्चे यातायात के नियमों का पालन करेंगे
-अवनीश ने छात्रों से


(घ) “हम दोनों बचपन के मित्र हैं।”
माइकल ने अवनीश से कहा


(ङ) “अगर आपमें हिम्मत है, हौसला है तो आपको अपना लक्ष्य प्राप्त होकर रहेगा।”
माइकल ने कहा |

3-सोच विचार बताइए-

(क) पाठ का शीर्षक ‘हौसला’ है। इस पाठ को तुम क्या शीर्षक देना चाहोगे ?

(साहसी बालक)

(ख) पाठ के प्रारंभ में लेखक ने अपने मित्र माइकल के बारे में कुछ बातें बताईं हैं।

जैसे स्वस्थ, गोल-मटोल, छोटी-छोटी आँखें, घुँघराले बाल, हँसता हुआ-सा—चेहरा ।


इन बातों से माइकल का हुलिया (शक्ल-सूरत का विवरण) पता चलता है । आप भी अपने किसी दोस्त के बारे में बताइए कि उसका हुलिया कैसा है ?

विद्यार्थी स्वयं करने का प्रयास करें?

4-भाषा के रंग-

(क)-चित्र को देखकर मुहावरे बनाएं-

1-अंधे की लाठी-

2-कुत्ते भाव के रहते हैं और हाथ चलता रहता है-

(ख)-नीचे दिए मुहावरों का अर्थ लिखिए वाक्य में प्रयोग कीजिए-

जी जान से जुटना-बहुत परिश्रम से किसी कार्य को करना |वाक्य -मोहन ने परीक्षा की तैयारी के लिए जी जान से जुटा है

रंग में भंग पड़ना – बना काम बिगड़ जाना|वाक्य अचानक मौसम बिगड़ जाने पर कार्यक्रम में रंग में भंग पड़ गया|

आंखों का तारा होना-बहुत प्रिय होना वाक्य मोहन अपने माता-पिता का आंखों का तारा है |

(ग)-शब्दों का शुद्ध उच्चारण और सुलेख कीजिए-

व्यवहार,प्रतिद्वंदी, प्रेरणा, विभिन्न ,असंतुलित, सर्वाधिक, दृष्टि

उत्तर-छात्र स्वयं शब्दों का शुद्ध उच्चारण करते हुए सुलेख लिखिए?

(घ)-रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्टक में दिए गए शब्दों के विलोम शब्दों से कीजिए-

(अंधकार, आशा, रोता, हुआ, असावधान, शत्रु)

1-बालक की छोटी-छोटी आंखें घुंघराले बाल और हंसता हुआ चेहरा था|

2-टीम लेकर मुंबई जाते समय मैं बहुत सावधान था |

3-मंच पर धीरे-धीरे उजाला फैलने लगा |

4-माइकल मैं छात्रों को बताया कि हम दोनों बचपन के मित्र हैं

5-रोजी दीदी ने मुझे निराशा से उबारा|

(ङ) तीन वाक्य को ध्यान से पढ़िए-

भूतकालवर्तमान कालभविष्य काल
माइकल ने गाना गाया माइकल गाना गा रहा हैमाइकल गाना गाएगा
रोजी पुस्तक लाईरोजी पुस्तक ला रही हैफिरोजी पुस्तक लेगी
अब नीचे दिए गए वाक्यों के सामने उनके काल लिखिए
वाक्यकाल
पिताजी ने बहुत सी बातें बताईभूतकाल
कल विद्यालय की छुट्टी रहेगीभविष्य काल
रजिया खाना खा रही हैवर्तमान काल
अगले माह दीपावली हैभविष्य काल
राघव और श्रेया व्यायाम कर चुके हैंभूतकाल

5-आपकी कलम से –

(क) बस पकड़ने की जल्दी में माइकल ने चौराहे पर जली लाल बत्ती नहीं देखी और दूसरी ओर से आ रहे वाहन की चपेट में आकर अपने दोनों पैर गँवा दिए। आपनेभी कोई ऐसी घटना देखी सुनी होगी जो जरा-सी असावधानी के कारण घटी हो, उसको अपने शब्दों में लिखिए ।

विद्यार्थी स्वयं उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करें |

(ख)-नीचे दिए गए यातायात से संबंधित संकेत का क्या आशय है लिखिए-

  • हार्न नबजाएं
  • बस स्टॉप
  • रुको
  • फ़ोन पर बात न करें
  • पैदल पार पथ (जेब्रा क्रासिंग )
  • रेलवे क्रासिंग
  • रुको
  • तैयार रहो
  • जाओ

प्रश्न संख्या 6 विद्यार्थी स्वयं करें?

7-मेरे दो प्रश्न पाठ के आधार पर दो सवाल बनाइए-

1-माइकल अपने पैर को कैसे खो बैठा?

2-माइकल का मित्र कौन था?

इस कहानी से –

  1. (क) मैंने सीखा सावधानी की बचाव है|
    (ख) मैं करूँगी /करूँगा मैं सावधानी करूंगी करूंगा|

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