Svar Sandhi ki paribhasha bhed udaharan स्वर संधि की परिभाषा, भेद व उदाहरण

स्वर संधि इस लेख में सबसे पहले हम संधि की परिभाषा और उसके बाद स्वर संधि के विषय में पढ़ेंगे । सन्धि की परिभाषा :- ” वर्णसंधानं संधि:“संधानम् अर्थात् मेलनम् इत्युक्ते दो वर्णों के मेल को संधि कहते है | महर्षि पाणिनि की परिभाषा :- “पर: सन्निकर्ष: संहिता” अर्थात् वर्णों के अत्यन्त सामिप्यता को संधि … Read more

Deep Pratyay in Sanskrit ङीप् प्रत्यय-परिभाषा, सूत्र व उदाहरण –

ङीप् प्रत्यय-परिभाषा, सूत्र व उदाहरण – किसी पुल्लिंग के शब्द को स्त्रीलिंग बनाने के लिए जिस प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है उसे स्त्री- प्रत्यय कहते है | ङीप् भी एक स्त्री प्रत्यय है जिसको परिभाषा व उदाहरणों की सहायता से इस लेख में समझाने का प्रयास किया गया है । Deep Pratyaya in Sanskrit … Read more

N Tat Purush Samas नञ् तत्पुरुष समास

नञ् तत्पुरुष समास परिभाषा :- जब शब्दों को नकारात्मक बनाने केलिए “अ” अथवा “अन्” लगाकर शब्द बनाया जाए तो उसे नञ् तत्पुरुष समास कहते हैं | समास विग्रह करते समय “अ” अथवा “अन्” के स्थान पर “न” शब्द का प्रयोग किया जाता है | तत्पुरुष समास के दो प्रकार होते हैं :- 1.व्यधिकरण तत्पुरुष समास … Read more

Sandhi ki paribhasha bhed udaharan संधि की परिभाषा, भेद, उदाहरण

संधि की परिभाषा, भेद, उदाहरण संधि का शाब्दिक अर्थ है – मेल । अर्थात् जब दो निकटवर्ती ध्वनियाँ आपस में मिल जाती हैं और एक नया रूप धारण करती हैं तब उसे संधि कहते हैं ; जैसे – सूर्य + उदय = सूर्योदय। यहाँ ‘ सूर्य’ की अंतिम ध्वनि ‘अ’ तथा ‘उदय’ की प्रारंभिक ध्वनि … Read more

karmadharya Samas in Sanskrit कर्मधारय की परिभाषा व उदाहरण

karmadharya Samas in Sanskrit कर्मधारय समास परिभाषा कर्मधारय समास में दोनों पद समान होते हैं । जिस समास में दोनों पदों की प्रधानता होती है उसे कर्मधारय समास कहते हैं । अर्थात् जिसमें दोनों शब्दों का समानाधिकरण हो ऐसा तत्पुरुष समास समानाधिकरण तत्पुरुष (कर्मधारय) समास कहलाता है । समास की परिभाषा :- दो या दो … Read more

Avyay and CBSE Questions अव्यय और CBSE सम्बन्धित प्रश्न

अव्यय और CBSE सम्बन्धित प्रश्न संस्कृत भाषा के वे शब्द जो एक ही अवस्था में रहते हैं उन्हें अव्यय पद Irvariable कहा जाता हैं । जिन शब्दों का लिंग, वचन, वर्तमान इत्यादि काल व विभक्ति के अनुसार रूप नहीं बदलता है उन्हें अव्यय पद कहते हैं । इन शब्दों का धातु रूप व शब्द रूप … Read more

Samas ki Paribhasha & Prakar समास संस्कृत व हिन्दी में

Samas ki Paribhasha v Prakar समास की परिभाषा व प्रकार समास की परिभाषा व प्रकार :- समास शब्द “सम्” उपसर्ग पूर्वक “अस्” धातु से बना है । इसका अर्थ होता है :- संक्षेप | अर्थात् समास की परिभाषा होती है – दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से उत्पन्न विकार को समास कहते … Read more

Paryayvachi Shabd Hindi me

पर्याय से तात्पर्य एकार्थ बोधक, तुल्यार्थक अथवा समान अर्थ वाले शब्दों से है और जब कई शब्दों से एक ही अर्थ की प्रतीति होती है तब उन्हें एक दूसरे का पर्याय कहा जाता है। कोई शब्द दूसरे शब्द का सामान्य रूप में समानार्थी हो सकता है परन्तु सूक्ष्म दृष्टि से प्रयोगानुसार उनके अर्थों में भिन्नता … Read more

Shabd vichar-शब्द विचार morphology

हिंदी भाषा का जन्म संस्कृत भाषा से हुआ है। समय के साथ-साथ इसमें अन्य भाषाओं के शब्द भी मिलते गए। परिणामतः हिंदी शब्दावली का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से कर सकते हैं- परिभाषा : जिन वर्णों के समूह का कोई अर्थ होता है, उसे शब्द कहते हैं। सामान्य शब्द-भेद शब्द के दो प्रकार होते हैं- 1. … Read more

भाषा एवं लिपि bhasha aur lipi

भाषा की परिभाषाजिस साधन के द्वारा मनुष्य अपने भावों और विचारों को लिखकर या बोलकर प्रकट करता है, उसे भाषा कहते है ।भाषा ध्वनि प्रतीकों की ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से किसी समाज के सदस्य परस्पर भावों और विचारों का बोलकर या लिखकर आदान-प्रदान या संप्रेषण करते है ।भाषा भावों या विचारों की अभिव्यक्ति … Read more

हिन्दी भाषा परिचय Hindi Bhasha

हिन्दी विश्व की लगभग 3000 भाषाओं में से है। यह भारत की बहुसंख्यक लोगों की भाषा है। इसका प्रारंभ 1000 ई०पू० में हुआ। यह यूरोपीय (Indo- European) परिवार की भाषा है। इसकी आदि जननी संस्कृत है। इस भाषा का जन्म वैदिक संस्कृत से हुआ है। हिन्दी विश्व में चीनी एवं अंग्रेजी के बाद तीसरे नम्बर … Read more

सामान्य हिन्दी(सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उपयोगी)

विषय सूची हिन्दी भाषा परिचय प्रसिद्ध रचनाएँ एवं रचनाकार रस, छंद एवं अलंकार गद्यांश ( रिक्त स्थानों की पूर्ति ) अपठित गद्यांश युग्म एवं अनेकार्थक शब्द लोकोक्तियाँ मुहावरे अनेक शब्दों के लिए एक शब्द विलोम शब्द पर्यायवाची शब्द रिक्त स्थानों की पूर्ति वाक्य क्रम वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ वाक्य विचार शुद्ध वर्तनी समास और उसके भेद … Read more

भाग्य और पुरूषार्थ कक्षा-12 bhagya aur Purusharth

1. जैनेन्द्र कुमार का जीवन-परिचय देते हुए इनकी कृतियों का वर्णन कीजिए।उ०- लेखक परिचय- सुप्रसिद्ध साहित्यकार जैनेन्द्र कुमार का जन्म 2 जनवरी सन् 1905 ई० को कौड़ियागंज, अलीगढ़ में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री प्यारे लाल तथा माता का नाम श्रीमती रमादेवी था। बचपन में ही ये पिता की छत्रछाया से वंचित हो … Read more

राष्ट्र का स्वरूप कक्षा 12 question Answer Rashtra ka swaroop

1. वासुदेवशरण अग्रवाल का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों का वर्णनउ०- प्रसिद्ध साहित्यकार वासुदेवशरण अग्रवाल का जन्म खेड़ा ग्राम, जिला मेरठ, प्रदेश में सन् 1904 ई० में हुआ था। इनके माता-पिता लखनऊ में रहते थे, वहीं इन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने स्नातक की परीक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पास की तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से … Read more

गद्य गरिमा कक्षा-12 हिन्दी भूमिका Gadya Garima Class-12 Hindi

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. गद्य एवं पद्य में मुख्य अन्तर क्या हैं?उ०– गद्य मुख्यत: छन्दमुक्त वाक्यों में की गई रचना होती है, जबकि पद्य लयबद्ध या छन्दोबद्ध रचना होती है। यति, गति, लय, पद्य लेखक के सहायक तत्व होते हैं, जबकि गद्य लेखक के लिए विराम-चिह्न सहायक तत्व सिद्ध होते2. हिन्दी की आठ बोलियों के … Read more

Kriya visheshan क्रिया विशेषण (adverb)

परिभाषा : जिस अव्यय से क्रिया की किसी विशेषता का बोध होता है, तो क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। जैसे- यहाँ, जल्दी, धीरे, अभी, बहुत, कम आदि। उदाहरण – राम वहाँ रहता है। सोहन तेज दौड़ता है। तुम यहाँ बैठो। ऊपर के वाक्यों में वहाँ, तेज, यहाँ शब्दों से क्रिया की विशेषता का बोध हो रहा है। … Read more

Kriya क्रिया अध्याय 10-(verb)

परिभाषा : जिन शब्दों से कार्य के होने या करने का बोध हो उन्हें क्रिया कहते हैं; जैसे- रोना, दौड़ना, लिखना, पढ़ना आदि । धातु क्रिया का मुक्त रूप धातु कहलाता है; जैसे- पढ़, लिख, दौड़ आदि । क्रिया के भेद कर्म के आधार पर क्रिया दो प्रकार की होती है- 1.सकर्मक क्रिया 2.अकर्मक क्रिया … Read more

Visheshan विशेषण अध्याय-9 adjective

परिभाषा : वे शब्द जो संज्ञा तथा सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। यह एक विकारी शब्द भी है। जैसे – सफेद हाथी, लाल बिल्ली,लाल बिल्ली, काला घोड़ा, मीठा सेब, नीली कमीज आदि । यहां सफेद, लाल, काला, मीठा, नीली, क्रमशः हाथी, बिल्ली, घोड़ा, सेब, कमीज की विशेषता बता रहे हैं; अतः … Read more

Sarvnam,सर्वनाम अध्याय 8 -(pronoun)

परिभाषा संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे – मैं, तुम, हम, वह, उन्होंने, वे आदि। उपर्युक्त वाक्यों में ‘रावण’ संज्ञा के स्थान पर वह, उसने, उसका आदि शब्द प्रयुक्त किए गए हैं। ये सभी शब्द सर्वनाम शब्द कहलाते हैं सर्वनाम के प्रकार पुरुषवाचक सर्वनाम – जिन सर्वनामों से बोलने … Read more

sangya संज्ञा (noun)अध्याय 7

संज्ञा परिभाषा : किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु या स्थान के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे – मोहन, गाय, दिल्ली, मेज आदि। संज्ञा के भेद 1.जातिवाचक संज्ञा – जिन शब्दों से किसी प्राणी, पदार्थ, समूह आदि की जाति का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे- मनुष्य, पुस्तक, पर्वत, नगर आदि । 2.भाववाचक … Read more

Vachan वचन अध्याय 6 number

परिभाषा जो शब्द एक या एक से अधिक है संख्याओं का बोध कराते हैं उन्हें वचन कहते हैं जैसे गाय, गाएँ, किताब, किताबें आदि| वचन के भेद 1.एकवचन जिन शब्दों में एक वस्तु एक स्थान एक व्यक्ति तथा एक पदार्थ होने का ज्ञान होता है, वे शब्द एकवचन कहलाते हैं; जैसे—एक हिरन, एक गाय, किताब, … Read more

ling लिंग (gender) अध्याय 5

परिभाषा : संज्ञा का वह रूप जिससे यह पता चलता है कि वह स्त्री जाति का है या पुरुष जाति का, लिंग कहलाता है।लिंग संस्कृत भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ चिहन या निशान होता है। लिंग के दो भेद होते हैं- लिंग के भेद 1.पुल्लिंग – वे शब्द जो पुरुष जाति का बोध … Read more

sandhi -chapter 4 संधि -अध्याय 4

संधि Joining संधि का शब्दिक अर्थ ‘मेल’ होता है। भाषा में दो वर्षों के आपस में मिलने से जो विकार उत्पन्न होता है, वह संधि कहलाता है। संधि प्रथम शब्द के अंतिम वर्ण तथा दूसरे शब्द के प्रथम वर्ण के बीच होती है। दोनों वर्णों के योग से एक नया वर्ण उत्पन्न हो जाता है; … Read more

Varn vichar – वर्ण विचार phonology

ध्वनि जो आवाज मुख से निकलती है ध्वनि कहलाती है ध्वनि भाषा की मूल इकाई है वर्ण शब्द या अच्छा ध्वनि के वे छोटे-छोटे टुकड़े हैं जिन्हें और आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है जैसे क् , ख्, च् ,प् ,अ ,आ,आदि| वर्ण के भेद १ स्वर‌ २ व्यंजन 1.स्वर जिन वर्णों का उच्चारण … Read more

language and grammar chapter 1 भाषा और व्याकरण अध्याय 1.

भाषा भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपने मन के विचारों को व्यक्त करता है इस बात को निम्नलिखित उदाहरणों के द्वारा समझा जा सकता है| उपर्युक्त उदाहरणों में पिताजी, विजय तथा अध्यापक ने अपनी बात भाषा के माध्यम से कहीं है। इस प्रकार सुबह से शाम तक हम विभिन्न अवसरों पर अपने विचार … Read more

Hindi bhasha varnmala हिंदी भाषा एवं वर्णमाला

भाषा भाषा भाव-सम्प्रेषण का सशक्त माध्यम है। भाषा के माध्यम से हम अपने भाव एवं विचारों को दूसरों के सामने व्यक्त कर सकते हैं तथा दूसरों के भाव एवं विचारों को समझ सकते हैं भाषा शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है-वाणी को प्रकट करना। प्रत्येक देश की अपनी पृथक् भाषा … Read more

RAS KE PRAKAR रस के प्रकार स्थायी भाव, रस और-भाव

रस नौ प्रकार के होते हैं – वात्सल्य रस को दसवाँ एवं भक्ति रस को ग्यारहवाँ रस भी माना गया है, वत्सलता तथा भक्ति इनके स्थायी भाव हैं। भरतमुनी ने केवल रस के आठ प्रकार का वर्णन किया है। परंतु आज के समय में हमारे syllabus में 11 प्रकार के रसों का अध्ययन किया जाता … Read more

Veer Ras वीर रस – परिभाषा,-भेद और उदाहरण :हिन्दी व्याकरण

Veer Ras वीर रस वीर रसः वीर रस का स्थाई भाव उत्साह है। श्रृंगार के साथ स्पर्धा करने वाला वीर रस है। श्रृंगार, रौद्र तथा वीभत्स के साथ वीर को भी भरत मुनि ने मूल रसों में परिगणित किया है। वीर रस से ही अदभुत रस की उत्पत्ति बतलाई गई है। वीर रस का ‘वर्ण’ … Read more

Vatsalya Ras -वात्सल्य रस परिभाषा, भेद और उदाहरण : हिन्दी व्याकरण

वात्सल्य रस : इसका स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है। वात्सल्यता वात्सल्य रस … Read more

Nij Vachak Sarvanam : निजवाचक सर्वनाम हिन्दी व्याकरण

निजवाचक सर्वनाम वह सार्वनामिक शब्द जो स्वयं के लिए प्रयोग करते हैं जैसे आप अपना आदि जिससे स्वयं का बोध हो वह निजवाचककहलाते हैं।अथवाजो सर्वनाम तीनों पुरुषों (उत्तम, मध्यम और अन्य) में निजत्व का बोध कराता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं खुद लिख लूँगा। तुम अपने आप चले जाना। वह स्वयं गाडी … Read more

Anishchay Vachak Sarvanam अनिश्चयवाचक सर्वनाम : हिन्दी व्याकरण

अनिश्चयवाचक सर्वनाम जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति या पदार्थ का बोध नहीं होता, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- बाहर कोई है। मुझे कुछ नहीं मिला।अथवाजो सर्वनाम शब्द किसी निश्चित व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान का बोध नहीं करवाता वह अनिश्चय वाचक कहलाते हैं। अनिश्चयवाचक सर्वनाम के उदाहरण कोई’, ‘कुछ’ सर्वनाम शब्दों में किसी घटना … Read more

Sambandh Vachak Sarvanam संबंधवाचक सर्वनाम : हिन्दी व्याकरण

संबंधवाचक सर्वनाम वह सर्वनाम शब्द जो किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा अथवा सर्वनाम के संबंध का बोध कराएं उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं जैसे- ‘जो’, ‘सो’, ‘उसी’ आदि।अथवाजो सर्वनाम किसी दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से संबंध दिखाने के लिए प्रयुक्त हो, उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- जो करेगा सो भरेगा। इस वाक्य में जो … Read more

Nishchay Vachak Sarvanam : हिन्दी व्याकरण निश्चयवाचक या संकेतवाचक सर्वनाम

निश्चयवाचक/ संकेतवाचक सर्वनामजो सर्वनाम निकट या दूर की किसी वस्तु की ओर संकेत करे, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह लड़की है। वह पुस्तक है। ये हिरन हैं। वे बाहर गए हैं।अथवाजो सर्वनाम किसी व्यक्ति, वस्तु आदि को निश्चयपूर्वक संकेत करें वह निश्चयवाचक कहलाता है। निश्चयवाचक / संकेतवाचक सर्वनाम के उदाहरण यह’, ‘वह’, ‘वह’ … Read more

Prashn Vachak Sarvanam प्रश्नवाचक सर्वनाम : हिन्दी-व्याकरण

प्रश्नवाचक सर्वनाम वाक्य में प्रयुक्त वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान के विषय में प्रश्न उत्पन्न हो, उसे प्रश्नवाचक कहते हैं। जैसे- क्या, कौन, कहां, कब, कैसे आदि ।अथवाजिस सर्वनाम से किसी प्रश्न का बोध होता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- तुम कौन हो? तुम्हें क्या चाहिए? इन वाक्यों में कौन … Read more

Purush Vachak Sarvanam पुरुषवाचक सर्वनाम हिन्दी व्याकरण

पुरुषवाचक सर्वनाम जो सर्वनाम वक्ता (बोलनेवाले), श्रोता (सुननेवाले) तथा किसी अन्य के लिए प्रयुक्त होता है, उसे पुरूषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – मैं, तू, वह आदि।अथवाजिन सर्वनाम का प्रयोग वक्ता श्रोता या अन्य के लिए किया जाता है वह पुरुषवाचक कहलाता है। पुरुषवाचक सर्वनाम के उदाहरण उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से देखने पर पता … Read more

Conjuction In hindi समुच्चय बोधक – परिभाषा भेद और उदाहरण,

समुच्चय बोधक समुच्चय बोधक (Conjuction): दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चय बोधक कहते हैं।जिन शब्दों की वजह से दो या दो से ज्यादा वाक्य, शब्द, या वाक्यांश जुड़ते हैं उन्हें समुच्चयबोधक कहा जाता है। जहाँ पर तब और, वरना, किन्तु, परन्तु, इसीलिए, बल्कि, ताकि क्योंकि, या, अथवा, एवं, तथा, अन्यथा … Read more

Pratyay in Hindi Grammar प्रत्यय परिभाषा, भेद और उदाहरण : हिन्दी व्याकरण,

प्रत्यय प्रत्यय वे शब्द होते हैं जो दूसरे शब्दों के अन्त में जुड़कर, अपनी प्रकृति के अनुसार, शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं। प्रत्यय शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – प्रति + अय । प्रति का अर्थ होता है साथ में, पर बाद में और अय का अर्थ होता है ‘चलने … Read more

Interjection in hindi विस्मयादिबोधक – परिभाषा, भेद और उदाहरण

विस्मयादिबोधक की परिभाषा Interjection – विस्मयादिबोधक जिन वाक्यों में आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा आदि के भाव व्यक्त हों, उन्हें विस्मय बोधक वाक्य कहते है। इन वाक्यों में सामान्यतः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का उपयोग किया जाता है।जो शब्द वक्ता या लेखक के हर्ष, शोक, नफरत,विस्मय,ग्लानी आदि भावो का बोध कराता है उसे विस्मयादिबोधक कहते हैं। इसका … Read more

Purush in hindi पुरुष परिभाषा, भेद एवं उदाहरण : हिन्दी व्याकरण

पुरुष की परिभाषा: वे व्यक्ति जो संवाद के समय भागीदार होते हैं, उन्हें पुरुष कहा जाता है। • जैसे: मेरा नाम सचिन है। इस वाक्य में वक्ता (सचिन) अपने बारे में बता रहा है। वह इस संवाद में भागीदार है एवं श्रोता भी । पुरुष के प्रकार हिन्दी में तीन पुरुष होते हैं- * एकवचन … Read more

शब्द – विचार

प्रत्येक भाषा की अपनी ध्वनि-व्यवस्था, शब्द – रचना एवं वाक्य का निश्चित संरचनात्मक ढाँचा तथा एक सुनिश्चित अर्थ प्रणाली होती है । भाषा की सबसे छोटी और सार्थक इकाई ‘शब्द’ है । ध्वनि – समूहों की ऐसी रचना जिसका कोई अर्थ निकलता हो उसे शब्द कहते हैं । परिभाषा – “एक या एक से अधिक … Read more

वर्ण – विचार एवं आक्षरिक खंड

भाषा की वह छोटी से छोटी इकाई जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते हों, वर्ण कहलाते हैं, जैसे एक शब्द है-पीला । पीला शब्द के यदि टुकड़े किए जाएँ तो वे होंगे-पी + ला। अब यदि पी और ला के भी टुकड़े किए जाएँ तो होंगे – प् + ई तथा ल् + आ। अब … Read more

भाषा-व्याकरण एवं लिपि का परिचय

मानव जाति के विकास के सुदीर्घ इतिहास में सर्वाधिक महत्त्व सम्प्रेषण के माध्यम का रहा है और वह माध्यम है – भाषा । मनुष्य समाज की इकाई होता है तथा मनुष्यों से ही समाज बनता है। समाज की इकाई होने के कारण परस्पर विचार, भावना, संदेश, सूचना आदि को अभिव्यक्त करने के लिए मनुष्य भाषा … Read more