पाठ 1 कैसे पता करें कब क्या हुआ था (इतिहास जानने के स्रोत) itihaas janne ke strot

इतिहास जानने के स्रोत

परिवार की पुरानी बातें हम दादा-दादी, नाना-नानी की बातों से जानते हैं। समाचार पत्र, पत्रिका टी०वी० और रेडियो से भी हमें जानकारी मिलती है। सोचो! अगर हमें आज से हजारों वर्ष पहले के लोगों के रहन-सहन के बारे में जानना हो तो हम कैसे जानेंगे ?


हजारों वर्ष पहले के लोगों के बारे में जानना हो तो उनके बारे में जानने के लिए हम इतिहास का अध्ययन करते हैं। इतिहासकार अतीत से प्राप्त तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर, बीते समय की जानकारी देते हैं। इतिहास, बीते हुए समय और उस समय के लोगों को समझने और जानने का एक साधन है।

कैसे पता लगाते हैं-

पुरातत्व-
प्राचीन काल में मानव द्वारा प्रयोग में लाई वस्तुओं, निर्मित मन्दिरों एवं इमारतों आदि के अवशेषों का अध्ययन पुरातत्व कहलाता है। इनका अध्ययन करने वाले पुरातत्ववेत्ता कहलाते हैं।


अतीत में एक ऐसा भी युग था, जब लोग लिखना नहीं जानते थे। उन लोगों के जीवन के विषय में हमें जानकारी उनके द्वारा छोड़ी गई वस्तुओं जैसे- मिट्टी के बर्तन, खिलौने, हथियारों तथा औजारों द्वारा मिलती है। प्रायः इन वस्तुओं को पुरातत्ववेत्ता जमीन के अन्दर से खोदकर प्राप्त करते हैं। ये वस्तुएँ ऐतिहासिक जानकारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। उपलब्ध सामग्री के आधार पर इतिहासकारों ने अतीत को तीन भागों बाँटा है- वह समय जिसके लिए कोई भी लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है, पूर्व (प्राक) ऐतिहासिक काल कहलाता है। वह समय जिससे संबंधित लिखित साक्ष्य प्राप्त तो है किन्तु उसे पढ़ा नहीं जा सकता है, उसे आद्य ऐतिहासिक काल कहते हैं। इसी प्रकार जिस काल (समय) के विषय में लिखित सामग्री से जानकारी मिलती है एवं उसे पढ़ा भी जा सकता है। उस काल (समय) को ऐतिहासिक काल कहते हैं।

प्राचीन काल में मानव ने जब लिखना शुरू किया तब उसे कागज का ज्ञान नहीं था। वह अपने लेखों को ताड़पत्रों, भोजपत्रों और ताम्रपत्रों पर लिखता था। कभी-कभी लेख बड़ी शिलाओं, स्तम्भों, पत्थरों की दीवारों, मिट्टी या पत्थर के छोटे-छोटे फलकों (टुकड़ों) पर भी लिखे जाते थे।

आरम्भ में मानव ने अपनी भावनाओं को चित्रों के माध्यम से इन चीजों पर उकेरा धीरे-धीरे ये चित्र संकेतों/प्रतीकों में बदलते चले गये और लिपि का आविष्कार हुआ। इसलिए आरम्भिक लिपियाँ चित्रात्मक (पिक्टोग्राफिक) दिखाई पड़ती हैं जैसे- चीनी लिपि, मिस्र की लिपि, सैंधव लिपि आदि । आप जिसे पढ़ रहे हैं इसे देवनागरी लिपि कहते हैं।

प्राचीन इतिहास के विषय में हमें जानकारी तत्कालीन लेखों से भी प्राप्त होती है। इतिहास को जानने के स्रोत (साधन) इस प्रकार हैं-


(अ) पुरातात्विक स्रोत-

अभिलेख– यह अशोक के रुम्मिनदेई अभिलेख का अंश है। जो लुम्बिनी (नेपाल) से प्राप्त हुआ है। इस अभिलेख में अशोक ने यह घोषणा की है कि लुम्बिनी में उपज का आठवाँ भाग कर के रूप में लिया जाएगा। अशोक के अभिलेख पत्थर पर उत्कीर्ण होने के कारण महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत हैं।

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सिक्के एवं मुहरें– प्राप्त सिक्कों से तत्कालीन शासक का नाम तथा उसके समय का पता चलता है। सिक्के की बनावट से उस समय की कला तथा सिक्कों
की धातु से आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है।
गुप्तशासक कुमारगुप्त प्रथम को इस सिक्के पर घुड़सवारी करते हुए दिखाया गया है, जिससे हम कह सकते हैं कि वह एक अच्छे घुड़सवार थे। इस प्रकार सिक्के इतिहास लेखन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।



हड़प्पा कालीन मुहरें मेसोपोटामिया
से मिली हैं। इससे ज्ञात होता है कि हड़प्पावासियों का व्यापार मेसोपोटामिया (इराक) से होता था। धौलावीरा-हड़प्पा सभ्यता का यह पुरास्थल गुजरात में स्थित है। यहाँ से हड़प्पा कालीन नगर निर्माण योजना, जल निकास प्रबन्ध आदि के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

सारनाथ स्तूप-सारनाथ (उत्तर-प्रदेश) मे स्थित इस स्तूप (धमेख स्तूप) का निर्माण मौर्य वंश के शासक अशोक ने कराया था। महात्मा बुद्ध ने सर्वप्रथम सारनाथ में अपना उपदेश दिया था।

(ब)- साहित्यिक स्रोत-

ताड़पत्रों, भोजपत्रों, ताम्रपत्रों, चमड़े एवं लकड़ी के पट्टों पर लिखित लेखों के साथ-साथ कुछ साहित्यिक ग्रंथों से भी हमें लोगों के रहन-सहन, विचारों, खान-पान इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। जैसे-

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इस प्रकार पुरातात्विक एवं साहित्यिक दोनों स्रोतों से हमें इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है। विदेशी यात्रियों के विवरणों से भी हमें तत्कालीन इतिहास की जानकारी मिलती है। प्राप्त स्रोतों की सहायता से ही इतिहासकार और पुरातत्वविद् अतीत का पुनर्निमाण करते हैं।
(इतिहासकार इन्हीं स्रोतों से अतीत की कृषि, पशु-पालन, कामगार/शिल्प, काम- धन्धे, व्यापार, नाप-तौल, लेन-देन, कर आदि के आधार पर आर्थिक स्थिति का वर्णन करते हैं

घर-परिवार, स्त्रियों की स्थिति, शिक्षा, रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा, मनोरंजन, त्योहार, मेले आदि के आधार पर सामाजिक तथा राजा, प्रजा, प्रशासन, सुरक्षा व सैन्य व्यवस्था के आधार पर राजनीतिक स्थिति की जानकारी प्रदान करते हैं। इसी प्रकार कला, आचार-विचार, ज्ञान-विज्ञान की मान्यताएँ, धार्मिक विश्वास, देवी-देवता, पूजा-पाठ एवं परम्पराओं के आधार पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का वर्णन करते हैं।

इतिहास हमें मानव की संस्कृति, उनके धर्म और उनकी सामाजिक व्यवस्था को जानने और समझने में सहायता करता है। इतिहास का अध्ययन अतीत की घटनाओं से वर्तमान और भविष्य के लिए सबक लेना सिखाता है। इतिहास हमें यह भी सिखाता है कि हम उन बातों का अनुसरण कैसे करें जिनसे समरसता और शान्ति को बढ़ावा मिल सके

कौन पहले कौन बाद में

जब पुरातत्वविद् किसी स्थान की खुदाई करते हैं तो वे कैसे समझते हैं कि कौन से स्तर पहले के हैं और कौन से बाद के?

इस चित्र को देखिए ।

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किसी भी पुरास्थल में कई बस्तियों के अवशेष मिल सकते हैं। आम तौर पर लोग जहाँ रहते हैं घर टूटने पर दोबारा वहीं घर बना लेते हैं। टूटे-फूटे सामान और कूड़ा-करकट भी घरों के आस-पास जमा होते रहते हैं। इन कारणों से बस्ती की जमीन धीरे-धीरे ऊँची होती रहती है और सैकड़ों साल के बाद वहाँ एक टीला बन जाता है इसलिए जब टिले की खुदाई की जाती है तो उसका सबसे निचला स्तर है सबसे पुराना होता है और उसके बाद के स्तर बाद के युगों के होते हैं।

इतिहास में तिथियाँ-इतिहास में कुछ तिथियाँ ईसा पूर्व में होती है और कुछ ईस्वी में। ईसा पूर्व का तात्पर्य है ईसा मसीह (ईसाई धर्म के प्रवर्तक) के जन्म से पहले का समय। इसे अंग्रेजी में B.C. अर्थात बिफोर क्राइस्ट लिखते हैं। इसी प्रकार ईस्वी को अंग्रेजी में A.D. लिखा जाता है। A.D. लैटिन भाषा के दो शब्द 'एनो डॉमिनी' से बना है। A.D. का मतलब है ईसा मसीह के जन्म का वर्ष अर्थात ईसा मसीह के जन्म के बाद की तिथियों में हम ईस्वी या A.D. का प्रयोग करते हैं।


अभिलेख– अभिलेख पत्थर अथवा धातु जैसी कठोर सतह पर उत्कीर्ण किए गए लेख होते थे।

• स्तूप– स्तूप का शाब्दिक अर्थ है-टीला । प्रायः सभी स्तूपों के अन्दर एक डिब्बे में महात्मा बुद्ध या उनके अनुयायियों के शरीर के अवशेष (जैसे-दाँत, हड्डी, राख) या उनके द्वारा प्रयोग में लाई सामग्री, पत्थर अथवा सिक्के रखे रहते हैं।


पुरास्थल-वह स्थान जहाँ की खुदाई से औजार, बर्तन और इमारतों के अवशेष मिलते हैं। प्रायः पुरास्थल जल स्रोतों जैसे नदी, तालाब, झील व समुद्र के किनारे पाए जाते हैं।

और भी जानिए

महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है।
लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय है
· अलेक्जेंडर कनिंघम को भारतीय पुरातत्व विभाग का जन्मदाता माना जाता है।

उत्तर लिखिए-

(क) प्राचीन काल के मानव किस-किस पर अपने अभिलेख लिखते थे और क्यों?

प्राचीन काल में मानव ताड़पत्र ,भोजपत्र ,ताम्रपत्र ,स्तंभ लेख शिलालेख पर लिखते थे क्योंकि उसको कागज का ज्ञान नहीं था।

(ख) पाठ में आपने सम्राट अशोक के किस अभिलेख के बारे में जाना ?

पाठ में सम्राट अशोक के रुम्मिनदेई अभिलेख के बारे में जाना।


(ग) इतिहास लेखन में सिक्के एवं अभिलेख किस प्रकार सहायक होते हैं ? लिखिए।

इतिहास लेखन में सिक्के और अभिलेख है तत्कालीन शासक का नाम और उस समय का रहन सहन संस्कृत का पता चलता है।

(घ) मेगस्थनीज की पुस्तक का नाम क्या था?

मेगास्थनीज के पुस्तक का नाम इंण्डिका था।


(ङ) इतिहास जानने के पुरातात्विक व साहित्यिक साधनों (स्रोतों) का वर्णन कीजिए।

इतिहास जानने के पुरातात्विक व साहित्यिक साधन में इमारत पशुओं के अवशेष तथा रामायण एवं महाभारत जैन एवं बौद्ध साहित्य स्रोत हैं

2.अन्तर स्पष्ट कीजिए-


(क) पूर्व (प्राक) ऐतिहासिक काल

वह समय जिसके लिए कोई लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है ।उसे पूर्व (प्राक) ऐतिहासिक काल कहा जाता है।


(ख) आद्य ऐतिहासिक काल

आद्य ऐतिहासिक के काल में लोगों को पढ़ने लिखने का ज्ञान था लेकिन उनको लिपियां को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका उस काल के समय को आद्य ऐतिहासिक काल कहते हैं।

(ग) ऐतिहासिक काल

जिस काल में लिखित सामग्री से जानकारी मिलती है और उन्हें आसानी से पढ़ा भी जा सकता है उन्हें ऐतिहासिक काल कहा जाता है।

3.निम्नलिखित से आप क्या समझते हैं ?

(अ) पुरातत्ववेत्ता प्राचीन समय की प्राप्त अवशेष के अध्ययन करने वाले पुरातत्ववेत्ता को कहते हैं

(ब) इतिहासकार -अतीत से प्राप्त तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर बीते समय की जानकारी देते हैं उसे इतिहासकार कहते हैं।


सही कथन पर सही (V) का निशान एवं गलत कथन पर गलत (X) का निशान लगाइए-


(क) प्राक् (पूर्व) इतिहास जानने के लिए हमारे पास लिखित सामग्री है।
(ख) प्राचीन काल के मानव कागज पर लिखते थे।

ग) सिक्कों एवं अभिलेख से भी ऐतिहासिक जानकारी मिलती है।

(घ)राजतरंगिणी कौटिल्य (चाणक्य) की रचना है।

(ङ) वेद धार्मिक साहित्य हैं।

च) फाह्यान मौर्य काल में भारत आया था।

5.आप सारनाथ स्तूप देखने जा रहे हैं। स्तूप के बारे में आप क्या-क्या जानना चाहेंगे? अपनी जानकारी
के लिए कुछ प्रश्न बनाइए ।

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