जब मैं पढ़ता था पाठ -3 jab main padhta tha chapter- 3

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे जब मैं पढ़ता था कहानी |

मेरे पिता करमचंद गांधी राजकोट के दीवान थे । वे सत्यप्रिय, साहसी और उदार व्यक्ति थे। वे सदा
न्याय करते थे।
मेरी माता जी का स्वभाव बहुत अच्छा था। वे धार्मिक विचारों की महिला थीं। पूजा-पाठ किए बिना भोजन नहीं करती थीं।
2 अक्टूबर सन् 1869 ई0 को पोरबंदर में मेरा जन्म हुआ। पोरबंदर से पिता जी जब राजकोट गए तब
मेरी उम्र सात वर्ष की रही होगी । पाठशाला से फिर ऊपर स्कूल में और वहाँ से हाईस्कूल में गया। मुझे यह याद नहीं है कि मैंने कभी भी किसी में शिक्षक या किसी लड़के से झूठ बोला हो। मैं बहुत संकोची था। एक बार पिता जी ने ‘श्रवण-पितृभक्ति’ नामक पुस्तक खरीद कर लाए। मैंने उसे बहुत शौक से पढ़ा। उन दिनों बाइस्कोप में तस्वीर दिखाने वाले लोग आया करते थे। तभी मैंने अंधे माता-पिता को बहँगी पर बैठाकर ले जाने वाले श्रवण कुमार का चित्र देखा। इन बातों का मेरे मन पर बहुत प्रभाव पड़ा। मैंने मन ही मन तय किया कि मैं भी श्रवण की तरह बनूँगा ।
मैंने ‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक भी देखा था। बार-बार उसे देखने की इच्छा होती । हरिश्चंद्र के सपने आते। बार-बार मेरे मन में यह बात उठती थी कि सभी हरिश्चंद्र की तरह सत्यवादी क्यों न बनें? यही बात मन में बैठ गई कि चाहे हरिश्चंद्र की भाँति कष्ट उठाना पड़े, पर सत्य को कभी नहीं छोड़ना चाहिए ।
मैंने पुस्तकों में पढ़ा था कि खुली हवा में घूमना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यह बात मुझे अच्छी लगी और तभी से मैंने सैर करने की आदत डाल ली। इससे मेरा शरीर मजबूत हो गया।
एक भूल की सजा मैं आज तक पा रहा हूँ। पढ़ाई में अक्षर अच्छे होने की जरूरत नहीं,यह गलत विचार मेरे मन में इंग्लैंड जाने तक रहा। आगे चलकर दूसरों के मोती जैसे अक्षर देखकर मैं बहुत पछताया। मैंने देखा कि अक्षर बुरे होना अपूर्ण शिक्षा की निशानी है। बाद में मैंने अपने अक्षर सुधारने का प्रयत्न किया परंतु पके घड़े पर कहीं मिट्टी चढ़ सकती है?
सुलेख शिक्षा का एक जरूरी अंग है। उसके लिए चित्रकला सीखनी चाहिए। बालक जब चित्रकला सीखकर चित्र बनाना जान जाता है, तब यदि अक्षर लिखना सीखे तो उसके अक्षर मोती जैसे हो जाते हैं।
अपने आचरण की तरफ मैं बहुत ध्यान देता था। इसमें यदि कोई भूल हो जाती तो मेरी आँखों में आँसू भर आते। मेरे हाथों कोई ऐसा काम हो, जिसके लिए शिक्षक मुझे दंड दे, तो यह मेरे लिए असह्य था। मुझे याद है कि एक बार मुझे मार खानी पड़ी थी। मुझे मार का दुःख न था, पर मैं दंड का पात्र समझा गया, इस बात का बहुत दुःख था। यह बात पहली या दूसरी कक्षा की है।
दूसरी बात सातवीं कक्षा की है। उस समय हेडमास्टर कड़ा अनुशासन रखते थे, फिर भी वे विद्यार्थियों के लिए प्रिय थे। वे स्वयं ठीक काम करते और दूसरों से भी ठीक काम लेते थे। पढ़ाते अच्छा थे। उन्होंने ऊपर की कक्षा के लिए व्यायाम और क्रिक्रेट अनिवार्य कर दिए थे। मेरा मन इन चीजों में न लगता था । अनिवार्य होने से पहले मैं कभी व्यायाम करने, क्रिकेट या फुटबाल खेलने गया ही नहीं था। वहाँ न जाने में मेरा संकोची स्वभाव भी कारण था। अब मैं यह देखता हूँ कि व्यायाम के प्रति अरुचि मेरी गलती थी। उस समय मेरे मन में गलत विचार घर किए हुए था कि व्यायाम का शिक्षण के साथ कोई संबंध नहीं है। बाद में समझा कि पढ़ने के साथ-साथ व्यायाम करना भी बहुत जरूरी है।
व्यायाम में अरुचि का दूसरा कारण था- पिता जी की सेवा करने की तीव्र इच्छा। स्कूल बंद होते ही घर जाकर उनकी सेवा में लग जाता । व्यायाम अनिवार्य होने से इस सेवा में विघ्न पड़ने लगा। मैंने पिता जी की सेवा के लिए व्यायाम से छुटकारा पाने का प्रार्थना पत्र दिया पर हेडमास्टर साहब कब छोड़ने वाले थे।
एक शनिवार को स्कूल सबेरे का था। शाम को चार बजे व्यायाम के लिए जाना था। मेरे पास घड़ी न थी। आकाश में बादल थे, इससे समय का पता न चला। बादलों से धोखा खा गया। जब पहुँचा तो सब जा चुके थे। दूसरे दिन मुझसे कारण पूछा गया। मैंने जो बात थी, बता दी। उन्होंने उसे नहीं माना और मुझे एक या दो आना, ठीक याद नहीं कितना दंड देना पड़ा।झूठा बना। मुझे भारी दुःख हुआ । मैं झूठा नहीं हूँ यह कैसे सिद्ध करूँ। कोई उपाय नहीं था।मैं मन मारकर रह गया। बाद में समझा कि सच बोलने वाले को असावधान भी नहीं रहना चाहिए ।

मोहनदास करमचंद गांधी

मोहनदास करमचंद गांधी’बापू’ और ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से पुकारे जाने वाले महात्मा गांधी के नेतृत्व में हमारा राष्ट्र स्वतंत्र हुआ। इनकी दृष्टि में सभी मनुष्य एक परमात्मा की संतान हैं और बराबर हैं। बापू ने जाति-पाँति, ऊँच-नीच या धर्म के आधार पर किए जाने वाले भेदभाव को व्यर्थ बताया।

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
अप्रसन्ननाराज
सत्यवादीसत्य बोलने वाला
अनिवार्यजो टाला न जा सके
बहँगीकाँवर
असहय जो सहन करने योग्य न हो
गर्वअभिमान
अरुचिरुचि न होना
बाइस्कोपतस्वीर दिखाने का एक यंत्र

1-बोध प्रश्न उत्तर लिखिए-

(क) गांधी जी ने ‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक देखकर क्या निश्चय किया ?

उत्तर-गांधी जी ने सत्य हरिश्चंद्र नाटक को देखकर यह निश्चय किया कि चाहे सत्य हरिश्चंद्र की भांति ही कष्ट उठाना पड़े पर सत्य को कभी छोड़ना नहीं चाहिए और सत्यवादी बनने का निश्चय किया |

(ख) सैर करने की आदत से गांधी जी को क्या लाभ हुआ?

उत्तर-सैर करने की आदत डालने से गांधी जी का शरीर मजबूत हो गया |


(ग) गांधी जी के सुंदर लिखावट के बारे में क्या विचार थे ?

उत्तर-गांधी जी के सुंदर लिखावट के बारे में विचार था कि सुलेख शिक्षा का एक जरूरी अंग है जब बालक चित्रकला सीख कर चित्र बनाना जान जाता है तब यदि अक्षर लिखना सीखे तो उसके अक्षर मोती जैसे हो जाते हैं |


(घ) इस पाठ से गांधी जी के व्यक्तित्व के किन-किन गुणों का पता चलता है?

उत्तर –इस पाठ से हमें गांधी जी के व्यक्तित्व के गुणो का यह पता चलता है कि गांधी जी साहसी, सत्यप्रिय ,उदार और अनुशासन प्रिय थे |

2-सोच- विचार , बताइए –

इन बातों के संबंध में आपके क्या विचार हैं-

(क) सुंदर लिखावट– से शब्द को पढ़ने में और देखने में अच्छा लगता है और उसके सम्मान में वृद्धि होती है|

(ख) प्रातः काल भ्रमण-से स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है|

(ग) खेलने और व्यायाम-से शरीर के लिए लाभदायक और और स्वास्मथ्य स्तिष्क का विकास होता है|

(घ) सत्य बोलना-सत्य बोलने से आप पर लोगों का विश्वास रहता है|

3-भाषा के रंग-

ध्यान से पढ़िए-

शब्दों के बाद जो अक्षर या अक्षर समूह लगाया जाता है उसे प्रत्यय कहते हैं इक प्रत्यक्ष लगने पर शब्द का पहला स्वर दीर्घ हो जाता है|

(क) धर्म शब्द में इक लगाने पर धार्मिक बनता है इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों में इक लगाकर नए शब्द बनाइए-

मास – मासिक

पक्ष – पाक्षिक

वर्ष – वार्षिक

सप्ताह – साप्ताहिक

ध्यान से पढ़िए-

किसी शब्द के पूर्व में जुड़ने वाले शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं जो विशेष अर्थ प्रकट करते हैं

जैसे– अप+मान = अपमान

कुछ शब्दों के पहले उपसर्ग जोड़ देने पर बनने वाला शब्द उसका विलोम शब्द बन जाता है

(ख) शब्दों के विलोम शब्द लिखिए

शब्दविलोम
सावधानअसावधान
पूर्ण अपूर्ण
रुचिअरुचि
न्यायअन्याय
प्रसन्नअप्रसन्न
सभ्यअसभ्य
(ग) निम्नलिखित वाक्यांश के लिए एक शब्द लिखिए-
वाक्यांशएक शब्द
जो पिता का भक्त होपितृभक्त
जो सत्य बोलते होसत्यवादी
जिसे सत्य प्यारा होसत्यप्रिया
सत्य के लिए आग्रह सत्याग्रह
(घ) नीचे लिखे शब्दों को शुद्ध रूप में लिखिए-

अनुसाशन = अनुशासन

धार्मीक। =। धार्मिक

शाहसी । =। साहसी

हरीशचंद्र =। हरिश्चंद्र

शुलेख =। सुलेख

लभकारी =। लाभकारी

(ॾ़) नीचे लिखे वाक्यों में उचित विराम चिन्हो का प्रयोग कीजिए |

मैंने पुस्तकों में पढ़ा था की खुली हवा में घूमना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है | यह बात मुझे अच्छी लगी और मैं तभी से शेयर करने की आदत डाल ली |

(च) प्रातः काल व्यायाम करना चाहिए |

इस वाक्य में प्रातः काल और व्यायाम शब्दों का एक साथ प्रयोग हुआ है दो वाक्य और बनाई जिम इन दोनों शब्दों का एक साथ प्रयोग हो-

1-आज मैं प्रातः काल व्यायाम के लिए गया था

2-व्यायाम करना प्रातः काल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है

प्रश्न संख्या 4, 5 ,6, 7 ,विद्यार्थी स्वयं करने का प्रयास करें?

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