पाठ 1 जीवन के लिए आवश्यक तत्व jivan ke liye avashyak tatv

सजीव-वर्ग में सभी पेड़-पौधे, जीव-जन्तु एवं मनुष्य आदि सभी जीवित प्राणी आते हैं। हमारे सौरमण्डल में केवल पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन है। जीवन के लिए निम्नलिखित आठ तत्वों का होना अत्यन्त आवश्यक है; जिनमें से किसी भी एक तत्व के बिना जीवन असम्भव है -हैं।

1.ऑक्सीजन

2.नाइट्रोजन

3.ऊष्मा

4.खनिज

5.कार्बन डाई ऑक्साइड

6.जल

7.प्रकाश

8.पौधों एवं जन्तुओं की परस्पर निर्भरता ।

ऑक्सीजन, कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन एवं जल चारों तत्व वायु से प्राप्त तत्व
। ऊष्मा तथा प्रकाश सूर्य की किरणों से प्राप्त तत्व हैं। खनिज, पौधों और जन्तुओं की परस्पर निर्भरता आदि तत्व मिट्टी से प्राप्त तत्व हैं।

वायु – पृथ्वी वायु की एक मोटी परत से घिरी हुई है। यह परत लगभग 300 किमी से 1000 किमी तक मोटी है। यह वायु के एक समुद्र के समान है। इसके सबसे नीचे वाले तल पर जीव-संसार हैं, जिस पर समस्त प्राणी तथा जीव-जन्तु रहते हैं। वायु रूपी इस समुद्र को वायुमण्डल कहते हैं।

वास्तव में वायुमण्डल को पृथ्वी का ही हिस्सा कहा जाता है, क्योंकि वायुमण्डल पृथ्वी के साथ गुरुत्वाकर्षण शक्ति से जुड़ा हुआ है।

वायुमण्डल सूर्य की हानिकारक किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकता है। यह सूर्य की किरणों की अत्यधिक ऊष्मा और तेज प्रकाश को अन्तरिक्ष में वापिस भेज देता है।
वायु ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाई-ऑक्साइडे और जलवाष्प का एक मिश्रण है।

ऑक्सीजन – सभी जीवित प्राणियों के लिए
ऑक्सीजन अति आवश्यक है। वे साँस लेते समय ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं। पौधे अपनी पत्तियों के छिद्रों से श्वसन क्रिया करते हैं। जन्तु फेफड़ों, गलफड़ों या शरीर के सूक्ष्म छिद्रों से श्वास लेते हैं।

ऑक्सीजन भोजन को धीरे-धीरे जलाकर या
तोड़कर ऊर्जा देती है। ऊर्जा जीवन की सभी क्रियाओं के लिए आवश्यक है।

ऊँचे पहाड़ों पर वायु पतली होने से साँस लेने में कठिनाई होती है। अतः पर्वतारोही अपने साथ ऑक्सीजन के सिलिंडर ले जाते हैं। समुद्र की गहराई में जाते समय गोताखोर भी अपने साथ ऑक्सीजन के सिलिंडर ले जाते हैं, क्योंकि वहाँ वायु नहीं है। जब रोगी स्वयं साँस लेने में कठिनाई अनुभव करते हैं, तो उन्हें ऑक्सीजन दी जाती है। अन्तरिक्ष यात्री भी श्वास लेने के लिए अन्तरिक्ष में ऑक्सीजन साथ ले जाते हैं। जलीय जन्तु भी पानी में घुली ऑक्सीजन के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।

नाइट्रोजन – नाइट्रोजन पौधों के बढ़ने के लिए बहुत ही उपयोगी है। जीवाणु अथवा विद्युत कड़कने और वर्षा के द्वारा वायु की नाइट्रोजन मिट्टी में चली जाती है। यूरिया जैसे नाइट्रोजन युक्त कुछ पदार्थ खाद के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।

नाइट्रोजन शरीर-निर्माण के लिए प्रोटीन का आवश्यक अंग है। जन्तुओं को प्रोटीन की आवश्यकता होती है और वे इसे पौधों से प्राप्त करते हैं।


कार्बन डाई ऑक्साइड- कार्बन डाई ऑक्साइड लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, एल० पी० जी० रसोई गैस आदि के कार्बन के जलने से उत्पन्न होती है। श्वास क्रिया से भी कार्बन डाई-ऑक्सइड निकलती है। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु से कार्बन डाई-ऑक्साइड और मिट्टी से जल लेकर हरे पौधे कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। कार्बोहाइड्रेट पौधों और जन्तु दोनों के भोजन के काम आती है।


जल – वायु के बाद जल ही हमारे जीवन की सबसे आवश्यक वस्तु है। जल सभी जीवित शरीरों का आवश्यक हिस्सा है। सभी जन्तुओं और पौधों में अत्यधिक मात्रा में जल होता है। मनुष्य में 70%, हाथी में 80%, तरबूज में 90% और वृक्षों में 60% जल होता है। जन्तुओं और पौधों की अधिकतर जीवन-क्रियाएँ जल के माध्यम से ही होती हैं। अतः पौधे और जन्तु जल के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।

जल से ही बादलों का निर्माण होता है, वर्षा होती है और मौसम बदलते हैं। जल पौधों के अंकुरण और पौधों के बढ़ने के लिए आवश्यक है। पौधों के भोजन बनाने की क्रिया में जल एक आवश्यक पदार्थ है।

जल जन्तुओं के भोजन को पचाने में सहायक होता है। जल उन्हें ठण्डा भी रखता है।
हमारे शरीर में 70% जल है। हमारे रक्त में 90% जल है। हमारी माँसपेशियों में 80% जल है। शरीर की कोशिकाओं के लिए आवश्यक जल की पूर्ति के लिए हम पर्याप्त मात्रा में जल पीते हैं और ऐसा भोजन खाते हैं, जिसमें अधिक जल होता है।


ऊष्मा – सभी प्राणियों के जीवित रहने के लिए ऊष्मा का होना अति आवश्यक है। हमारी सभी जीवन-क्रियाएँ ऊष्मा की एक उचित मात्रा पर निर्भर होती हैं। बीजों के अंकुरण और अण्डे सेने के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है। अधिक ऊष्मा या ठण्ड जन्तुओं अथवा पौधों को नष्ट कर देती है। उन्हें ऊष्मा की केवल उचित मात्रा चाहिए। गर्म मरुस्थलों (और ठण्डी बर्फीली जलवायु में बहुत कम पौधे या जन्तु जीवित रह पाते हैं।


अपने बच्चों को दूध पिलाने वाले जन्तु और पक्षियों के शरीर का तापमान स्थिर रहता है, चाहे वातावरण कितना भी ठण्डा या गर्म हो, ये ऊष्ण रक्त वाले जन्तु कहलाते हैं।

मछलियों, छिपकली एवं सर्प के शरीर का तापमान वातावरण के तापमान पर निर्भर रहता है। उनके शरीर का तापमान ठण्ड में कम और गर्मी में अधिक हो जाता है, इन्हें शीत रक्त वाले जन्तु कहते हैं

भोजन शरीर में धीरे-धीरे जलकर ऊष्मा देता है। सूर्य पृथ्वी पर ऊष्मा का मुख्य स्त्रोत है। जब बहुत गर्मी पड़ती है, तो हमारा शरीर अनावश्यक ऊष्मा को पसीने द्वारा बाहर निकाल देता है। वायु और जल दोनों मिलकर पृथ्वी पर जीवन बनाये रखने के लिए आवश्यक मात्रा में ऊष्मा बनाये रखते हैं।

प्रकाश – पौधों को भोजन बनाने के लिए सूर्य का प्रकाश चाहिए। हमें अपने प्रतिदिन के सभी कार्य भली-भाँति देखकर करने के लिए प्रकाश चाहिए ।

खनिज – सभी पौधों और जन्तुओं को स्वास्थ्य और पौषण के लिए खनिज चाहिए। खनिज मिट्टी में उपस्थित है। पौधे उन्हें मिट्टी से अपनी जड़ों द्वारा जल के साथ सोख लेते हैं। जन्तु पौधों को खाकर इन खजिनों को प्राप्त करते हैं।

पौधों और जन्तुओं की परस्पर निर्भरता – भले ही पौधों या जन्तुओं के पास जीवन के लिए आवश्यक आठ तत्व हों, किन्तु वे एक-दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं। ऑक्सीजन, भोजन और आश्रय के लिए जन्तु पौधों पर निर्भर हैं। कार्बन डाई-ऑक्साइड और खाद के लिए पौधे जन्तुओं पर निर्भर हैं। यह एक-दूसरे पर निर्भरता दोनों के लिए ही जीवित बने रहने में सहायक है।

मनुष्य सबसे अधिक विकसित जन्तु है। वह जीवन के लिए आवश्यक सभी आठ तत्वों को प्रदूषित कर रहा है। वह अपने मनोरंजन के लिए पौधों और जन्तुओं दोनों को ही नष्ट कर रहा है। अत: हमें वायु, जल, मिट्टी और जन्तुओं की रक्षा एवं देखभाल करनी चाहिए।

याद रखने योग्य बातें

पेड़-पौधे एवं जीव-जन्तु सजीव हैं।

जीवन के लिए आठ तत्वों की आवश्यकता होती है।

पृथ्वी वायु की एक मोटी परत से घिरी हुई है।

वायु रूपी समुद्र को वायुमण्डल कहते हैं।

वायुमण्डल सूर्य की हानिकारक किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकता है।

वायु ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाई-ऑक्साइड और जलवाष्प का एक मिश्रण है।

क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

1.पृथ्वी रात को चन्द्रमा की भाँति अत्यन्त ठण्डी क्यों हो जाती है ? –

सूर्य को अस्त हो जाने पर पृथ्वी पर उष्मा न होने के कारण और धरती द्वारा अवशोषित यह ऊष्मा पुनः वायुमंडल में वापस होने पर पृथ्वी रात को ठंडी हो जाती है।

2.हमें श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन की आवश्यकता क्यों होती है ?

हमें श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन की आवश्यकता इसलिए पड़ती है क्योंकि ऑक्सीजन के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता है

3.पौधों को अपना भोजन बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए ?

हरे पौधे मिट्टी से कुछ खनिज पदार्थ ,और जल तथा वायु से कार्बन डाइऑक्साइड को लेकर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल की सहायता से अपना भोजन बनाते हैं।

– 4. प्राणियों को जल की आवश्यकता क्यों होती है ?

क्योंकि कोई भी प्राणी बिना जल के जीवित नहीं रह सकता है इसलिए प्राणी को जल की आवश्यकता पड़ती है

5.कौन-कौन सी वस्तुएँ पृथ्वी पर ऊष्मा को उचित मात्रा में बनाये रखती हैं ?

ऊष्मा के प्रवाह के माध्यम से पृथ्वी अपने तापमान को संतुलित रखती है। सभी प्राणियों को जीवित रहने के लिए उसे उष्मा होना अति आवश्यक है अधिक ऊष्मा या ठंड है जंतुओं अथवा पौधों को नष्ट कर देती है।

ख. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1.हम वायु के…एक……..नीचे के तल में रहते हैं।

2.पर्वतारोही अपने साथ ..ऑक्सीज …के सिलिंडर ले जाते हैं।

3.नाइट्रोजन …..शरीर….निर्माण के लिए आवश्यक भोजन का एक भाग है।

4.हमारे शरीर का …70%…प्रतिशत भाग जल है

5.पौधों को भोजन बनाने के लिए…सूर्य का… प्रकाश चाहिए।


ग. सही कथन के आगे सही ( / ) का चिह्न और गलत कथन के आगे (X) का चिह्न लगाइए –

1.वातावरण ऊष्मा को पूरी पृथ्वी पर फैला देता है।

2.जलीय जन्तु जल में घुली वायु का प्रयोग करते हैं।

3. बीजों के अंकुरण के लिए जल नहीं चाहिए।

4. शीत-रक्त वाले जन्तु गर्मी की ऋतु में भी ठण्डे रहते हैं।

5. पौधे और जन्तु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

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