Kri Dhatu Roop कृ धातु-रूप व हिन्दी अर्थ

कृ धातु-रूप व हिन्दी अर्थ

अधिकांशतया विद्यार्थियों को धातु रूप के साथ उस रूप का हिन्दी अर्थ क्या होता है इस विषय में जानकारी अल्प होती है तथा विद्यालयों में भी धातु के रूप व उसका हिन्दी अर्थ के विषय में लिखने के लिए दिया जाता है । अत: इस लेख में कृ धातु के सभी पांचों लकारों में धातु रूप Kri Dhatu Roop व उनका हिन्दी अर्थ बताया जा रहा है |


कृ धातु का अर्थ -
अर्थ होता है "करना” |
स्वर संधि के प्रश्न class – 09 & 10

कृ धातु के रूप व हिन्दी अर्थ Kri Dhatu Roop


‘तुम’ करते हो, ‘तुम दोनों’ करते हो, ‘तुम सब’ करते हो, ‘हम सब’ करते हैं, ‘हम दोनों’ करते हैं इत्यादि में आए ।
तुम’, ‘तुम दोनों’, ‘तुम सब’, ‘हम सब ‘ इस प्रकार के शब्द कर्ता Noun है |

इन्हें धातु रूप का अर्थ न समझे ।


लट् लकार वर्तमानकाल

पुरुष एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम
करोति
(करता है)

कुरुत:
(दोनों करते है)


कुर्वन्ति
(सब करते है)
मध्यमकरोषि
(‘तुम’ करते हो)
कुरुथ:
(‘तुम
दोनों’
करते हो)
कुरुथ
(‘तुम सब’ करते हो)
उत्तमकरोमि
(करता हूँ)
कुर्व:
(‘हम
दोनों’ करते हैं)
कुर्मः
(‘हम सब’ करते हैं)

लङ् लकार भूतकाल

पुरुषएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनमव
प्रथम
अकरोत्
(करता था)

अकुरुताम्
(दोनों करते थे)

अकुर्वन्
(सब करते थे)
मध्यम अकरो:
(‘तुम’ करते
अकुरुतम्
ने (‘तुम दोनों’ करते थे)
अकुरुत
(‘तुम सब’ करते थे)
उत्तमअकरवम्
(‘मैं’ करता
था)
अकुर्व
(‘हम दोनों’ करते थे)
अकुर्म
(‘हम सब’ करते थे)

लृट् लकार भविष्यत काल

पुरुष एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम
करिष्यति
(करेगा)
करिष्यतः
(दोनों
करेंगे)
करिष्यन्ति
(सब करेंगे)
मध्यमकरिष्यसि
(‘तुम’ करोगे)
करिष्यथः
(‘तुम
दोनों’
करोगे)
करिष्यथ
(‘तुम सब’ करोगे)
उत्तमकरिष्यामि
(करूँगा)
करिष्यावः
(‘हम दोनों’
करेंगे)
करिष्यामः
(‘हम सब ‘ करेंगे)

लोट् लकार आज्ञार्थ काल

पुरुषएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम
करोतु
(करो)

कुरुताम्
(‘तुम
दोनों’
करो)

कुर्वन्तु
(‘तुम सब’ करो)
मध्यमकुरु
(‘तुम’ करो)
कुरुतम्
(‘तुम ) दोनों
करो)
कुरुत
(‘तुम सब’ करो)
उत्तमकरवाणि
(करूँ)
करवाव
(‘हम
दोनों’
करें)
करवाम
(‘हम सब’
करें)

विधिलिङ् लकार चाहिए अर्थ में

पुरुषएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम
कुर्यात्
(करना चाहिए)

कुर्याताम्
(‘दोनों को’ करना चाहिए)

कुर्युः
(‘सब को ‘
करना
चाहिए)
मध्यमकुर्या:
(‘तुम्हें’ करना
चाहिए)
कुर्यातम्
(‘तुम दोनों’ को
करना
चाहिए)
कुर्यात
(‘तुम सब’ को करना चाहिए)
उत्तमकुर्याम्
(‘मुझे’ करना
चाहिए)
कुर्याव
(‘हम दोनों को करना
चाहिए)
कुर्याम
(‘हम सब’ को करना चाहिए)

निष्कर्ष Kri Dhatu Roop

मैं आशा करता हूँ कि मेरे द्वारा “कृ धातु के रूप व हिन्दी अर्थ Kri Dhatu Roop आपको पसंद आए होंगे | अत: अब आप अपने दोस्तों और संस्कृत प्रेमीजनों व विद्यार्थियों के साथ शेयर जरूर करेंगे । इसके बारे में अगर आपका कोई सुझाव व इससे सम्बन्धित प्रश्न हो तो मुझे कमेंट करके जरूर बताने का प्रयास करें ।

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