Kta pratyay in sanskrit क्त प्रत्यय की परिभाषा व उदाहरण

क्त प्रत्यय की परिभाषा :


क्त कृदंत प्रत्यय है | इस प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल अर्थ में किया जाता है । “क्त” प्रत्यय का प्रयोग कर्मवाच्य और भाववाच्य में होता है | “क्त” प्रत्यय में “क्” का लोप होकर “त” शेष रहता है । इस प्रत्यय का प्रयोग करते समय धातु को गुण और वृद्धि न होकर सम्प्रसारण होता है ।


विशेष :- गत्यर्थक धातु होने पर क्त प्रत्यय का प्रयोग कर्तृवाच्य में भी होता है। इसके रूप तीनो लिंगो में चलते है :- पुल्लिंग में (राम शब्द रूप की तरह), स्त्रीलिंग में (रमा शब्द रूप की तरह ), नपुंसकलिंग में (फल शब्द रूप की तरह ) |
पठ् + क्त = पठितः  पठिता  पठिता  पठितम्
 लिखे + क्त = लिखित:  लिखिता  लिखितम्
 हस् + क्त = हसित:  हसिता  हसितम्
पा + क्त = पीत : पीता  पीतम्
त्यज् + क्त = त्यक्तः  त्यक्ता  त्यक्तम्
 कृ + क्त =कृत: कृता  कृतम्
गम्+ क्त = गत: गता  गतम्
प्रच्छ्+ क्त =पृष्ट:  पृष्टा   पृष्टम्
स्ना + क्त = स्नातः  स्नाता  स्नातम्
शृ + क्त = शीर्ण  शीर्णा  शीर्णम्
दा + क्त = दत्तः  दत्ता  दत्तम्
छिद् + क्त = छिन्नः  छिन्ना  छिन्नम्
वचन + क्त = उक्तः उक्ता  उक्तम्
वद् + क्त = उदितः  उदिता  उदितम्
 वस् + क्त = उषितः  उषिता  उषितम्
वह् + क्त = ऊढ:  ऊढा  ऊढम्
इष् + क्त = इष्ट:  इष्टा  इष्टम्
लभ् + क्त = लब्ध: लब्धा  लब्धम्
 खाद्य + क्त = खादितः  खादिता  खादितम्
 दृश्य + क्त = दृष्ट: दृष्टा  दृष्टम्

कुछ वाक्यों की मदद से क्त प्रत्यय के अर्थ का
अनुमान कर सकते हैं ।

वाक्य प्रयोग

1.बालक के द्वारा पाठ पढ़ा गया |
बालकेन पाठः पठितः ।

2.शिक्षक के द्वारा कविता पढ़ी गई |
शिक्षकेन कविता पठिता ।

3.राम के द्वारा रावण मारा गया |
रामेण रावणः मारितः |

4.व्यास के द्वारा महाभारत रचा गया ।
व्यासेन महाभारतं रचितम् |

इट् आगम
इट् आगम में ट् का लोप होकर केवल इ शेष रहता
है ।

प्रायः हलन्त धातु जैसे – पठ्, लिखु, चल आदि धातुओं से इट् आगम होता है और अजन्त जो हलन्त नहीं है जैसे – नी, ज्ञा, क्री आदि धातुओं को इट् आगम नहीं होता है ।

परन्तु इट् आगम के कुछ अपवाद भी होते है |

Kta pratyay in sanskrit हलन्त धातु से


पठ् + क्त = पठित:
लिख् + क्त = लिखित:

अब पठ् (पठति) धातु को क्त प्रत्यय लगाकर देखते
हैं ।

पठ् + क्त

यहाँ क्त प्रत्यय के “क्” का लोप होकर केवल “त” शेष रहता है = पठ् + त

पठ् एक हलन्त धातु है और सामान्यतः हलन्त धातु और क्त प्रत्यय के बीच इट् आगम होगा |
पठ् + इट् + त
और इट् आगम से भी ट् हटाकर अनुबन्धलोप होकर रूप बनता है –
पठ् + इ + त = पठित
इस प्रकार से प्रातिपदिक बना – पठित:
लिख् (लिखति) = लिखित:
चल् (चलति) = चलितः

भू = भ् + ऊ
ज्ञा = ज्ञ् + आ
कृ = क् + ऋ
 नी = न् + ई

इन धातुओं के अन्त में स्वर है। इसीलिए ये धातु अजन्त धातु कहलाते हैं ।


चलिए अब भू (भवति) धातु को क्त प्रत्यय लगाकर देखते हैं
भू + क्त
यहाँ पर भी “क्त” प्रत्यय से “क्” का लोप होकर केवल “त” ही शेष रहता है ।
भू + त

अत: भू एक अजन्त धातु है और सामान्यतः अजन्त धातु और क्त प्रत्यय के बीच इट् आगम नहीं होता है | इसीलिए :-
भू + त = भूतः
इस प्रकार से हमारा प्रातिपदिक तैयार हुआ :- भूतः |

ज्ञा (जानना)+ क्त = ज्ञात:

कृ (करना)+ क्त = कृत:

नी (ले जाना) + क्त =नीत:

ह्र (हरना)+ क्त = हृतः

श्रू (सुनना)+ क्त = श्रुतः

स्मृ (याद करना) + क्त = स्मृतः

कुछ विशेष रूप


कुछ धातु ऐसे होती हैं, जिनका रूप किसी विशेष प्रक्रिया की वजह से अलग दिखाई देता है |


दृश् (पश्यति) +क्त = दृष्टः
नश् (नष्यति) +क्त = नष्ट:
स्पृश् (स्पर्शति) +क्त = स्पृष्ट:
प्रच्छ् (पृच्छति) +क्त = पृष्ट:
हृष् (हर्षति) +क्त = हृष्ट:
रुष् (रुष्यति) +क्त = रुष्टः

इस प्रकार से हम ने क्त प्रत्यय का प्रयोग करना
सीखा |

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