Lyap Pratyaya ल्यप् प्रत्यय in Sanskrit

ल्यप् प्रत्यय

इस प्रत्यय का Lyap Pratyaya in Sanskrit प्रयोग ” धातु पूर्व उपसर्ग” होने पर किया जाता है । “ल्यप्” प्रत्यय एक कृदन्त प्रत्यय है | पढ़कर, लिखकर या खाकर इत्यादि “कर” अथवा ” करके ” के अर्थ में “ल्यप्” प्रत्यय का प्रयोग होता है । “ल्यप्” प्रत्यय में “ल्” और “प्” का लोप होकर “य” शेष रहता है |


विशेष :”कर” अथवा “करके” के अर्थ में धातु से पूर्व उपसर्ग होने पर ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग होता है उपसर्ग न होने पर क्त्वा प्रत्यय का प्रयोह होगा |

उदाहरण

उपसर्ग धातुप्रत्यय

आ + लिख्+ ल्यप् = आलिख्य

अनु+ वद्+ ल्यप् = अनूद्य

वि + चारि+ ल्यप् = विचार्य

आ + गम्+ ल्यप् = आगम्य

Lyap Pratyaya in Sanskrit ल्यप् प्रत्यय नियम

1.ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है |

2.ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग करते समय धातु को ” गुण या वृद्धि” नहीं होता है तथा “इ” भी नहीं लगेगा |

3.ह्रस्व अ, इ, उ, ऋ के बाद ल्यप् प्रत्यय के प्रयोग से पहले ” त्” (तकार) का आगम होता है ।

4.वच् आदि धातुओं को सम्प्रसारण होता है |

5.दीर्घ “ऋ” को ‘ईर्’ और “पृ” में ‘ऊर्’ हो जाता है ।

6.नम्, हन्, मन्, और तनादिगण की धातुओं में “म्” का लोप विकल्प से होता है ।


Lyap Pratyaya in Sanskrit
ल्यप् प्रत्यय उदाहरण

उपसर्ग. धातु. प्रत्यय

सम् + पठ् + ल्यप् = सम्पठ्य

प्र + दा + ल्यप् = प्रदाय

नि + धा + ल्यप् = निधायल्य

अन+भू+ल्यप् = अनुभूय

वि + क्री + ल्यप् = विक्रीय

आ+ नी + ल्यप् = आनीय

वि + जि + ल्यप् = विजित्य

उत् + स्था + ल्यप् = उत्थाय

प्र + स्तु + ल्यप् = प्रस्तुत्य

प्र + ह+ ल्यप् = प्रहृत्य

सम् + श्रु+ ल्यप् = संश्रुत्य

आ + प्रच्छ् + ल्यप् = आपृच्छ्य

प्र + वच् + ल्यप् = प्रोच्य

अभि + वस् + ल्यप् = अभ्युष्य

सम् + ग्रह् + ल्यप् = संगृह्य

आ +गम् + ल्यप् = आगम्य / आगत्य

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