पाठ 6 महाजनपद की ओर mahajanpad

आप जानते हैं कि आपका जनपद (जिला) कई तहसीलों से मिलकर बना है। कई जनपदों से मिलकर आपका प्रदेश बना है। इसी प्रकार प्राचीन काल में छोटे-छोटे जनपद मिलकर महाजनपद बन गए।


जन से जनपद

वैदिक काल में किसी कुल, जनजाति या लोगों के समूह को जन कहा जाता था । प्रत्येक जन का राजा होता था। लगभग 600 ईसा पूर्व में जन का राजा अब जनपद का राजा माना जाने लगा। जनपद का शाब्दिक अर्थ है ‘जन के बसने की जगह’ अर्थात् ऐसा भूखण्ड जहाँ कोई जन अपना पांव रखता है अथवा बस जाता है।

महाजनपद

वैदिक कालीन जनपदों ने अपनी-अपनी भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाकार अपना विकास किया और स्वयं को सुविधा सम्पन्न बनाया। प्रकृति से प्राप्त संसाधनों जैसे हाथी, लोहा आदि को अपनी सामरिक शक्ति बढ़ाने एवं उपकरण आदि का निर्माण करने में प्रयोग किया। जनपद अपनी शक्ति और सामर्थ्य के आधार पर अधिक महत्वपूर्ण हो गए और महाजनपद के रूप में स्वयं को स्थापित कर लिया। बौद्ध पुस्तक अंगुत्तर निकाय में सोलह महाजनपदों का उल्लेख मिलता है इनमें दो प्रकार के राज्य थे। इन महाजनपदों में चौदह में राजतन्त्र तथा दो में गणतन्त्र था।


राजतंत्र– इनमें राज्य का अध्यक्ष राजा होता था। इस प्रकार के राज्यों का विवरण निम्नलिखित है-

1.महाजनपदवर्तमान में स्थिति
2.अंगमुंगेर एवं भागलपुर जिला
3.मगधपटना गया शाहाबाद जिले के कुछ भाग
4.काशीवाराणसी
5.कोसलअयोध्या गोंडा बहराइच
6.वत्सप्रयागराज मिर्जापुर
7.चेदिआधुनिक बुंदेलखंड
8.कुरुआधुनिक हरियाणा एवं दिल्ली का भाग
9.पंचालउत्तर प्रदेश के बरेली बदायूं व फर्रुखाबाद जिले का क्षेत्र
10.शूरसेनबृजमण्डल मथुरा
11.मत्स्यअलवर ,भरतपुर ,जयपुर
12अवांतिआधुनिक मालवा
13.अश्मकनर्मदा एवं गोदावरी नदियों के बीच का भाग
14.गांधारपाकिस्तान का पश्चिमी और अफगानिस्तान का पूर्वी क्षेत्र
15.कम्बोजपाकिस्तान का आधुनिक हजारा जिला
16.वज्जिबिहार में गंगा नदी के उत्तर का भाग
17.मल्लदेवरिया ,कुशीनगर ,बस्ती गोरखपुर एंव सिद्धार्थनगर का क्षेत्र


गणतांत्रिक व्यवस्था वाले महाजनपद वज्जि की राजधानी के रूप में वैशाली का विशिष्ट राजनीतिक महत्व था । यह सम्पूर्ण वज्जि परिसंघ का मुख्यालय था ।

इन सोलह महाजनपदों में मगध, कोशल वत्स एवं अवन्ति अत्यन्त शक्तिशाली थे। अतः ये प्रमुख महाजनपद कहलाए इनमें भी मगध और अवन्ति ज्यादा महत्वपूर्ण सिद्ध हुए ।

प्रशासन, समाज और लोगों के जीवन में बदलाव


महाजनपद काल में राजा की शक्ति बढ़ गई थी। अब वह एक अति विशिष्ट व्यक्ति बन गया था और वह समाज का रक्षक था। उसका मुख्य कर्तव्य दुश्मनों से प्रजा की रक्षा व राज्य में शांति व्यवस्था, कल्याण और न्याय करना था। शासन के कार्य में मदद हेतु अनेक अधिकारी और कर्मचारी भी नियुक्त किए गए।

राजाओं की प्रवृत्ति अपने राज्य को बढ़ाने में थी इसलिए उन्हें बड़ी-बड़ी सेनाएँ भी रखनी पड़ती थी। राजा सेना का प्रमुख होता था तथा वही युद्ध में सेना का संचालन करता था। राज्य की आय के लिए प्रजा से कर वसूला जाता था। व्यापार के द्वारा भी आय प्राप्त होती थी। इस समय वस्तुओं की खरीद एवं बिक्री रुपये-पैसे द्वारा होने लगी थी। बड़ी-बड़ी सड़कों से व्यापार में काफी वृद्धि होने लगी थी। ईरान, मध्य एशिया, और दक्षिण पूर्व-एशिया से व्यापारी
भारत आते थे। शिल्पकार और व्यापारियों
ने व्यापार के विकास के लिए समूह और संगठन भी बनाए।

फिर बने शहर

इस युग में पहले की अपेक्षा एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, वह था शहरों का विकास। इन शहरों का विकास प्रायः शिल्प केन्द्रों, व्यापारिक- केन्द्रों और राजधानियों के आस-पास हुआ । प्रारम्भ में कुछ गाँव ऐसे थे जिनमें शिल्प कार्य अधिक विकसित अवस्था में था। धीरे-धीरे ये कुशल शिल्पी एक स्थान पर एकत्र होने लगे और ये स्थान गाँव एवं शहर के रूप में बदलते गए। इन कुशल शिल्पियों ने एक स्थान पर रहकर काम करना इसलिए पसंद किया, क्योंकि इन्हें कच्चा माल प्राप्त करने और तैयार की हुई चीजों को बेचने में अधिक सुविधा होती थी। विभिन्न व्यवसायों को पुत्र अपने पिता से सीखता और व्यवसाय करता था। विभिन्न प्रकार के शिल्प कार्य करने वालों के अलग-अलग वर्ग बन गए। धीरे-धीरे इनका कार्य वंशानुगत हो गया और समाज में अधिक जटिलता एवं कठोरता व्याप्त हो गई।

वह कौन सी विशेषताएँ हैं जो शहरों में होती हैं किन्तु गाँवों में नहीं होती, चर्चा कीजिए। 

मगध साम्राज्य

इन छोटे-छोटे राज्यों में एकता का अभाव था। एक राज्य दूसरे राज्य से अधिक शक्तिशाली बनना चाहता था। इस कारण इनमें आपस में संघर्ष होता रहता था। बड़े राज्य छोटे राज्यों को हड़पते चले गए। बिल्कुल वैसे ही जैसे बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। वे अपना राज्य क्षेत्र तथा प्रभाव बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाते थे। जैसे दूसरे राज्यों से मित्रता करना, शादी से रिश्ते बनाना, संधि करना या फिर सीधे आक्रमण करना। इस प्रकार एक राज्य दूसरे राज्यों में मिलते चले गए। अन्त में मगध सबसे शक्तिशाली साम्राज्य हो गया।


साम्राज्य- जब राजा अपने राज्य की सीमा का अत्यधिक विस्तार कर लेते हैं तो उनके राज्य को साम्राज्य कहा जाता है।

छठी शताब्दी ई०पू० से नन्दों के साम्राज्य की स्थापना तक मगध में क्रमशः तीन राजवंशों का शासन हुआ हर्यक वंश, शिशुनाग वंश एवं नन्द वंश। इनका शासनकाल लगभग 220 वर्षों तक रहा। धननन्द नंदवंश का अन्तिम शासक था जिसके शासन काल में सिकन्दर का भारत पर आक्रमण हुआ था। मगध साम्राज्य के शासकों ने अपने साम्राज्य के और अधिक विस्तार की नीति अपनायी। उनके पास एक विशाल सेना थी, जिसमें हजारों घुड़सवार और हाथी भी थे। यही कारण है कि मगध राज्य एक विशाल
साम्राज्य बन सका ।

सिकन्दर का आक्रमण

उन दिनों यूरोप महाद्वीप के यूनान देश में मेसिडोनिया नाम का एक राज्य था। वहाँ का राजा सिकन्दर अपनी विशाल सेना लेकर दुनिया जीतने के इरादे से चला। वह पारसीक (हखमनी) साम्राज्य के सम्राट व अन्य बहुत से राजाओं को हराता हुआ सिन्धु नदी के किनारे पहुँचा। वहाँ उसने बहुत से छोटे-छोटे राज्यों को हराया। इनमें से एक राजा था पुरु जिसकी कहानी चित्रकथा के रूप में आपने पढ़ी।
अब सिकन्दर की सेना लड़ते-लड़ते थक चुकी थी। जब उसने मगध के राजा धननन्द की विशाल सेना के बारे में सुना तो उसने मगध की सेना से लड़ने से इंकार कर दिया और वे मेसिडोनिया लौट गए।

सिकन्दर के आक्रमण का प्रभाव

1.राजनैतिक क्षेत्र से ज्यादा सिकन्दर के आक्रमण का प्रभाव सांस्कृतिक क्षेत्र में पड़ा जैसे-
सिकन्दर ने भारत पर 326ई0पू0 में आक्रमण किया था। सिकन्दर के भारतीय आक्रमण के विवरण से भारतीय इतिहास की तिथि निर्धारण में सहायता मिलती है।

2.सिकन्दर के आक्रमण ने भारत के द्वार यूनानी सम्पर्क और प्रभावों के लिए खोल दिए ।

3.इस घटना के बाद विदेशों से घनिष्ठ व्यापारिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध स्थापित हुए।

4.भारतीय शिल्पकला और ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र पर यूनानी लेखकों का गहरा प्रभाव पड़ा।

5.भारतीय सिक्कों पर यूनानी सिक्कों की निर्माण शैली का प्रभाव दिखाई देता है।


अभ्यास


उत्तर लिखो-

1.महाजनपद कैसे बने ?

जनपद अपनी शक्ति और सामर्थ्य के आधार पर अधिक महत्वपूर्ण हो गए और महाजनपद के रूप में स्वयं को स्थापित कर लिया।

2.सोलह महाजनपदों में से प्रमुख चार महाजनपदों के नाम लिखिए।

सोलह महाजनपदों में मगध कौशल वत्स अवंन्ति यही चार प्रमुख महाजनपद थे।

3.राजतंत्र एवं गणतंत्र में अन्तर बताइए ?

गणतंत्र राज्य में सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाला व्यक्ति वंशानुगत नहीं होता है अपितु उसे जनता द्वारा चुना जाता है। राजतंत्र में सर्वोच्च शक्ति किसी राजा में निहित होती है, और पद वंशानुगत होता है।


4.अपने राज्य को शक्तिशाली बनाने के लिए राजाओं ने क्या प्रयास किया ?

अपने राज्य को शक्तिशाली बनाने के लिए राजाओं ने सैन्य शक्ति बढ़ाया और दूसरे राज्यों के साथ मित्रता, वैवाहिक संबंध स्थापित किया।

5.सिकंदर ने राजा पुरू के साथ कैसा व्यवहार किया।

सिकंदर ने राजा पुरू के साथ वैसा ही व्यवहार किया जैसे एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।

रिक्त स्थान भरिए-

अ. राज्य की सीमा का अत्यधिक विस्तार करने वाले राज्य को.. सम्राज्य..कहा जाता है।

ब. महाजनपद काल में राजा..जन ..का रक्षक था ।

स…धननंद के शासनकाल …के समय सिकन्दर भारत आया।

द. आम्भी…. तक्षशिला ..का राजा था ।

गतिविधि

शिक्षक की सहायता से अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए कि निम्न महाजनपद वर्तमान के किस राज्य में स्थित थे

मगध
अंग
काशी शूरसेन
मत्स्य
मल्ल

प्रोजेक्ट वर्क

1.आप जिस स्थान में रहते हैं पता करें कि 16 महाजनपदों में से आपका क्षेत्र किससे सम्बन्धित था।

2.वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल कितने जिले हैं, सूची बनाइए ।

पाठ 3 नदी घाटी की सभ्यता- हड़प्पा सभ्यता
पाठ -4 वैदिक काल (1500 ई0 पू0 से 600 ई0पू0)
पाठ 5 छठी शताब्दी ई0 पू0 का भारत धार्मिक आन्दोलन

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