मलेथा की गूल पाठ-7 maletha ki Gul chapter -7

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे मलेथा की गूल (कहानी) –

मध्य गढ़वाल की घाटियों में एक गाँव है – मलेथा । गाँव के दक्षिण-पश्चिम की ओर पहाड़ की एक श्रृंखला अलकनंदा नदी तक चली गई है। दूसरी ओर एक पहाड़ी नदी चंद्रभागा तीव्र वेग से बहती हुई अलकनंदा में मिल जाती है।
विचित्र बात यह थी कि दोनों ओर नदियाँ रहने पर भी मलेथा गाँव में सिंचाई का कोई साधन न था क्योंकि इन नदियों और गाँव के बीच पहाड़ खड़े थे। पानी के अभाव में सारे खेत बंजर पड़े रहते थे ।
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मलेथा गाँव में एक युवक था माधो सिंह । उसके मन में सदैव एक सपना उभरता रहता था कि यदि नदी का पानी किसी प्रकार हमारे खेतों तक आ जाता तो हमारे खेत भी हरी-भरी फसलों से लहलहा उठते ।
एक दिन उसने अपनी पत्नी से कहा, “यदि हम जी-जान से कोशिश करें तो हमारे गाँव में पानी आ सकता है ।”

पत्नी ने बड़ी उत्सुकता से पूछा, “कैसे ?”
माधो सिंह ने कहा, “नदी के किनारे जो पहाड़ है, वही इस ओर पानी आने में बाधक है। पहाड़ की तलहटी में भीतर ही भीतर यदि एक सुरंग बना ली जाए तो उस ओर से नदी का पानी इस ओर आ सकता है । “
पत्नी बोल उठी, “इतना विशाल पहाड़ .. काटकर सुरंग बनाना क्या संभव है ?”
माधो सिंह ने कहा, “कार्य कठिन तो है लेकिन असंभव नहीं। सोचो, ऐसा होने पर हमारे गाँव का कितना भला होगा ?”
पत्नी ने कहा, “मैं इस महान कार्य में
आपके साथ हूँ ।”

माधो सिंह ने प्रतिज्ञा की – ‘जब तक मेरे शरीर में रक्त की एक भी बूँद रहेगी, मैं अपने गाँव मलेथा तक गूलं निकालकर पानी लाने का प्रयास करूँगा। मैं तब तक चैन की नींद नहीं सोऊँगा, जब तक मलेथा के एक-एक खेत तक पानी नहीं आ जाता ।’
अपने सपना को साकार करने के लिए माधो सिंह गैंती- फावड़ा लेकर इस भगीरथ प्रयास
में जुट गया। कार्य अत्यंत दुष्कर था, लेकिन उसको विश्वास था कि उसका सपना अवश्य पूरा होगा।

माधो सिंह चट्टान पर गैंती जमाता और उस पर हथौड़े की चोट से चट्टान के टुकड़े जमीन पर आ गिरते । हफ्ते – डेढ़ हफ्ते में ही उसने काफी गहरी सुरंग खोद दी। इससे उसका उत्साह और भी बढ़ गया। माधो सिंह के साहस और धैर्य को देखकर गाँव के अन्य व्यक्ति भी इस कार्य में आ जुटे। उसने दिन-रात एक करके कठोर पहाड़ को छेदकर गूल का निर्माण पूरा कर दिखाया । मलेथा की प्यासी धरती पर पानी बहने लगा।

आज भी मलेथा के शाक-सब्जियों से भरे खेत माधो सिंह के असीम धैर्य और कठोर श्रम की गवाही दे रहे हैं।

यह भी जानिए –

बिहार राज्य के गया जिले में गेहलौर गाँव है। वहाँ के एक व्यक्ति दशरथ मांझी ने इसी प्रकार पर्वत काटकर अपने गाँव के लिए रास्ता बनाया है। इस रास्ते को ‘दशरथ मांझी पथ’ के नाम से जाना जाता है।

अभ्यास

शब्दार्थ –

शब्दअर्थ
श्रृंखलाकतार
तीव्रतेज
साकारपूर्ण होना
प्रयासकोशिश
दुष्करबहुत कठिन
गूलपानी की नाली

1-बोध प्रश्न उत्तर लिखिए-

(क) मलेथा के खेत बंजर क्यों पड़े रहते थे ?

उत्तर-मलेथा गांव में सिंचाई का कोई साधन नहीं था पानी के अभाव में वहां का खेत बंजर पड़े रहते थे |


(ख) पानी लाने के लिए माधो सिंह ने अपने पत्नी को क्या उपाय बताया ?

उत्तर-पानी लाने के लिए माधव सिंह ने अपने पत्नी से कहा कि पहाड़ की तलहटी में भीतर ही भीतर यदि एक सुरंग बना ली जाए तो उस ओर से नदी का पानी इस ओर आ सकता है |

(ग) माधो सिंह के मन में क्या सपना उभरता था ?

उत्तर-माधव सिंह के मन में सदैव यह सपना उभरता रहता था कि यदि नदी का पानी हमारे खेतों तक आ जाता तो हमारे खेत भी हरी-भरी फसलों से लहलहा उठाते |


(घ) सपना पूरा करने के लिए माधो सिंह ने क्या प्रतिज्ञा ली ?

उत्तर-सपना पूरा करने के लिए माधव सिंह ने प्रतिज्ञा की जब तक मेरे शरीर में रक्त की एक भी बूंद रहेगी मैं अपने गांव मलेथा तक गूल निकाल कर पानी लाने का प्रयास करूंगा


(ङ) माधो सिंह ने अपनी प्रतिज्ञा कैसे पूरी की ?

उत्तर-माधव सिंह ने अपने प्रतिज्ञा को पूरी करने के लिए गैंती फावड़ा लेकर इस भगीरथ प्रयास में जुट गया हफ्ते डेढ़ हफ्ते में उसने काफी गहरी सुरंग खोद दी इससे उसका उत्साह और भी बढ़ गया माधव सिंह के साहस और धैर्य को देखकर गांव के अन्य व्यक्ति भी इस कार्य में आ जुटे उसने दिन-रात एक करके कठोर पहाड़ को छेड़ कर गूल का निर्माण पूरा कर दिखाया और मलेथा की प्यासी धरती पर पानी बहने लगा |


(च) माधो सिंह की दृढ़ प्रतिज्ञा और कठोर श्रम का क्या परिणाम निकला ?

उत्तर-माधव सिंह की दृढ़ प्रतिज्ञा और कठोर श्रम का परिणाम मलेथा गांव की प्यासी धरती पर पानी बहने लगा और खेतों में फसले लहलहाने लगी |

2-सोच -विचार बताइए-

(क) आप मलेथा गाँव के बच्चे होते तो पहाड़ में सुरंग बनाने में क्या सहयोग करते ?

उत्तर-अगर मैं भी मलेथा गांव के बच्चे होते तो पहाड़ में सुरंग बनाने में गांव के अन्य व्यक्ति की तरह हम भी सहायता करते |

(ख) आपके आस-पास कहाँ-कहाँ जल बरबाद हो रहा है ? सोचिए और जल की बरबादी रोकने के उपाय भी बताइए।

उत्तर-विद्यार्थी सोच विचार कर अपने अनुभव से लिखें |


3-भाषा के रंग

बरबादा राकन क
बताइए ।

3. भाषा के रंग

(क) पाठ में एक वाक्य आया है, ‘मैं तब तक चैन की नींद नहीं सोऊँगा जब तक मलेथा
के एक-एक खेत तक पानी नहीं आ जाता।’ ऐसे तीन वाक्यों की रचना करें जिनमें ‘तब तक’ और ‘जब तक’ शब्दों का प्रयोग हुआ हो ।

1-जब तक मेरे शरीर में रक्त की एक भी बूंद रहेगी मैं अपने गांव मलेथा तक गूल ल निकाल कर पानी लाने का प्रयास करूंगा |

2-जब तक खेत में पानी नहीं आ जाता|

3-तब तक चैन की नींद नहीं सोऊंगा|

(ख)-नीचे लिखे शब्दों को उदाहरण के अनुसार लिखिए-

उत्साह= उत्साही
साहस =साहसी
बलिदान =बलिदानी
पराक्रम= पराक्रमी
परिश्रम =परिश्रमी
उद्यम =उद्यमी

(ग) नीचे लिखे शब्दों में से संज्ञा शब्द छाँटिए-

तीव्र, हावड़ा, माधव सिंह,खेत ,गढ़वाल, गैती, सुंदर ,सिंचाई ,पहाड़ ,हम|

फावड़ा , माधो सिंह , खेत , गढ़वाल , गैंती, पहाड़,|

(घ)-नीचे लिखे शब्दों के दो दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-

शब्दपर्यायवाची
पवनसमीर, हवा
जलनीर, पानी
पृथ्वीधरा वसुधा
कमलपंकज,जलज
घरगृह, मकान
(ङ)-अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

पहाड़ ,विचलित, तीव्र , बंजर ,उत्साहक्ष, निश्चय ,पानी

माधव सिंह के घर के पूर्व पहाड़ है |

कठिनाइयों से हमें विचलित नहीं होना चाहिए |

पानी तीव्र गति से आ रही है |

पानी के अभाव के कारण खेत बंजर पड़े हैं|

खेत में पानी आने के कारण लोग उत्साहित हैं|

खेतों में पानी लाने के लिए निश्चय किया |

खेतों में पानी पहुंच गया |

(च)-उचित स्थान पर विराम चिन्हो का प्रयोग कीजिए-

माधव प्रातः काल सैर करने जाता है | जलपान के बाद विद्यालय जाता है| वहां खूब मेहनत से पढ़ता है | सभी उसकी प्रशंसा करते हैं|

4 आपकी कलम से-

(क) आपके पास पड़ोस में भी ऐसी घटनाएं घटी होगी जब किसी ने कठिन समझे जाने वाले कार्य को कर दिखाया होगा वह घटना कैसे घटी अपने शब्दों में लिखिए

इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं दे |

(ख)-मलेथा की गूल कहानी को संक्षेप में अपने शब्दों में लिखिए-

मलेथा गाँव में माधो सिंह नाम का एक युवक अपनी पत्नी के साथ रहता था| गाँव के दोनों ओर नदी बहती थी, किन्तु गांव और नदी के बीच पहाड़ होने के कारण पानी के अभाव में खेत बंजर पड़े रहते थे |माधो सिंह के मन में सपना उभरता कि किसी प्रकार नदी का पानी खेतों तक आ जाए और खेतों में फसल उगाई जा सके | यह बात उसने अपनी पत्नी को बताई |माधो सिंह ने निश्चय किया यदि पहाड़ की तलहटी से होकर एक सुरंग बनाई जाय तो खेतों तक नदी का पानी लाया जा सकता है |यह बात अपनी पत्नी से कहा पत्नी ने कार्य में साथ देने का वादा किया | उसने पहाड़ से सुरंग बनाना प्रारम्भ कर दिया | हफ्ते डेढ़ हफ्ते में काफी गहरी सुरंग बन गई | उसकी लगन और परिश्रम को देखकर गाँव वालों ने भी उसका साथ दिया इस प्रकार माधो सिंह ने कठिन कार्य को पूरा कर दिखाया पानी पाकर बंजर भूमि भी फसलों से लहलहा उठी |

5-अब करने की बारी-

यहाँ एक सूचना है जो
नवीन के गाँव में एक दिन
सूचना-पट्ट पर लगाई
गई –
आप भी ऐसी सूचना बना
सकते हैं । – अपने
विद्यालय के किसी
कार्यक्रम के विषय में एक
सूचना बनाइए और उसे
सूचना- पट्ट पर लगाइए ।

6-मेरे दो प्रश्न पाठ के आधार पर दो सवाल बनाया-

1-माधव सिंह ने क्या करने के सपने देखता था?

2-माधव सिंह ने क्या करने की प्रतिज्ञा की?

7-इस कहानी से-

(क)-मैंने सीखा-कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अपने लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है|

(ख)-मैं करूंगी/ करूंगा-किसी भी कार्य के लिए कठोर परिश्रम दृढ़ संकल्प|

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