पाठ 7 मौर्य साम्राज्य Maurya samrajya

मौर्य साम्राज्य

आप आजकल के प्रचलित सिक्कों को ध्यान से देखिए । इसके एक ओर पीठ से पीठ सटाए हुए चार सिंह बैठे हैं। ये सिंह अशोक के सारनाथ स्तम्भ से लिए गए हैं। अशोक जिस वंश का शासक था वह वंश था- मौर्य वंश ।


बौद्ध स्रोतों के अनुसार नन्द वंश के शासक धननन्द द्वारा अपमानित आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) ने बालक चन्द्रगुप्त को राजकीलकम् नामक खेल खेलते हुए देखा। बालक में विलक्षण नेतृत्व प्रतिभा देखकर चाणक्य ने उसे अपना शिष्य बना लिया और अपने साथ तक्षशिला ले जाकर विविध कलाओं की शिक्षा दी
चन्द्रगुप्त ने चाणक्य की कूटनीति एवं रणकौशल द्वारा नन्दवंश के अन्तिम शासक धननन्द को पराजित कर 322 ई०पू० में मगध में मौर्य वंश की स्थापना की ।

यूनानी सेनापति सेल्यूकस ने 305 ई०पू० में पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण किया जिसे चन्द्रगुप्त ने परास्त कर दिया। सेल्यूकस को चन्द्रगुप्त से एक संधि करनी पडी जिससे चन्द्रगुप्त को हिन्दुकुश पर्वत तक के प्रान्त उपहार में मिले। सेल्यूकस ने मेगस्थनीज नामक राजदूत चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा। इस प्रकार चन्द्रगुप्त ने भारत में प्रथम बार एक केन्द्रीय शासन के अन्तर्गत विशाल साम्राज्य स्थापित कर लिया। यूनानी लेखकों ने चन्द्रगुप्त के लिए सेंड्रोकोट्स नाम का उल्लेख किया है।

मेगस्थनीज की इण्डिका और कौटिल्य (चाणक्य) के अर्थशास्त्र पुस्तकों से मौर्यों के विशाल प्रशासन तंत्र की जानकारी मिलती है। चन्द्रगुप्त सारे अधिकार अपने ही हाथों में रखे हुए था। राजा की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद गठित थी जिसके सदस्य राजा को सलाह देते थे। चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे।

IMG 20240301 090251 पाठ 7 मौर्य साम्राज्य Maurya samrajya

इतने बड़े साम्राज्य के अच्छे प्रशासन के लिए तीन स्तरों की शासन व्यवस्था थी – प्रान्त, जनपद और नगर/गाँव |

1.इस समय नौकरशाही व्यवस्था थी। वेतन राजकोष से दिया जाता था ।

2.प्रान्त से लेकर गाँव तक की वस्तुस्थिति को राजा समय-समय पर दौरा करके स्वयं भी देखता था।

3.गुप्तचर पूरे साम्राज्य की सूचना राजा को देते थे।


4.बाहरी आक्रमण व आन्तरिक विद्रोह को दबाने के लिए थल (पैदल, हाथी, घोड़े) व जल सेना राजा के पास थी।

5.इतनी बड़ी व्यवस्था चलाने के लिए धन की आवश्यकता थी जिसके लिए राजा की नीति खजाने को हमेशा भरा रखने की थी। इस समय राजस्व व्यवस्था बहुत अच्छी थी।

6.कृषिकर, सिंचाईकर, व्यवसायी संगठनों पर बिक्रीकर आय के मुख्य स्रोत थे। इन करों को बड़ी सावधानी से इकट्ठा किया जाता था। इन करों का लेखा-जोखा रखा जाता था।

7.राज्य में आने वाले जंगलों एवं खानों पर राजा का स्वामित्व होता था। राज्य अपनी सेना के लिए
हथियारों का निर्माण करता था ।

लगभग 2500 वर्ष पहले के शासन का ढाँचा, आज भी हमारे देश के शासन के ढाँचे से मिलता है।

बूझो तो जानें
मेगस्थनीज ने अपनी भारत यात्रा विवरण में उन चीजों के बारे में जिक्र किया है जो उसे आश्चर्यजनक लगी थीं। क्या आप बता सकते हैं कि उसने किनके बारे में लिखा होगा ?
1.इसकी जड़ें तनों से उगती हैं। इसकी छाया में 400 लोग एक साथ रह सकते हैं।
2.बिना मधुमक्खी के शहद निकलता है।
3.ऊन पेड़ों से उगती है।
4.पक्षी जो मनुष्य जैसे बोलते हैं।


मेगस्थनीज की नजर में

लोग सभ्य थे। वे अपने घरों में ताला नहीं लगाते थे

वे अपनी कही बातों का पालन करते थे।

वे झूठी गवाही नहीं देते थे।

उनके महल सोने-चाँदी से बने थे।

मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र का क्षेत्रफल 9 मील लम्बा डेढ़ मील चौड़ा था ।

तक्षशिला से पाटलिपुत्र तक की सड़कों के दोनों ओर छायादार वृक्ष तथा जगह-जगह पर कुएँ थे। चन्द्रगुप्त के बाद, उनका बेटा बिन्दुसार, मगध की गद्दी पर बैठा। बिन्दुसार के बाद उसका बेटा अशोक मगध का सम्राट बना। चन्द्रगुप्त मौर्य ने जो साम्राज्य स्थापित किया था उसमें से कलिंग स्वतंत्र हो गया था अतः उत्तराधिकार प्राप्त करने के बाद अशोक के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कलिंग की विजय।

अशोक ने ऐसा फैसला किया जो आमतौर पर कोई राजा नहीं करता उसने कालिंग को युद्ध में हराने के बाद तय किया वह भविष्य में कोई युद्ध नहीं लड़ेगा।

अशोक का धम्म (धर्म को पालि भाषा में धम्म कहते हैं ।)

अशोक स्वयं राज्य में दूर-दूर की जगहों का दौरा करता था। अशोक ने अपने राज्य में जगह-जगह चट्टानों पर लम्बे, सुन्दर, चमकाए हुए पत्थरों से बने खम्भे गड़वाए। इन खम्भों पर वहाँ के अधिकारियों व लोगों के लिए अपने संदेश भी खुदवाए ताकि लोग उसकी बातों पर ध्यान दे सकें। उसने यह संदेश लोगों की बोलचाल की भाषा यानि प्राकृत भाषा में लिखवाए। चट्टानों व खम्भों पर खुदे उसके संदेशों से हम अशोक के समय की कई बातें जान सकते हैं।


‘हर किस्म के लोगों पर युद्ध का बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मैं बहुत दुःखी हूँ। इस युद्ध के बाद मैंने मन लगाकर धर्म का पालन किया है और दूसरों को यही सिखाया है।
*मैं मानता हूँ कि धर्म से जीतना युद्ध से जीतने से बेहतर है। मैं यह बातें खुदवा रहा हूँ ताकि मेरे पुत्र और पौत्र भी युद्ध करने की बात न सोचें और धर्म फैलाने की बात सोचें।

उसने जीवन के बारे में प्रजा को सही राह दिखाने के लिए अलग से अधिकारी रखे जिन्हें धम्म महामात्र कहा गया। उनका काम था कि वे गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर लोगों को सही व्यवहार की बातें बताएं ।

आइए अशोक का संदेश पढ़ें :

“यहाँ किसी जीव को मारा नहीं जाएगा और उसकी बलि नहीं चढ़ाई जाएगी।”
“लोग तरह-तरह के अवसरों पर तरह-तरह के संस्कार करते हैं।”

“ऐसे धार्मिक संस्कारों को करना तो चाहिए पर इनसे मिलने वाला लाभ कम ही है। कुछ संस्कार ऐसे होते हैं जिनसे ज्यादा फल मिलता है । वे क्या हैं ? वे हैं, दास और मजदूरों से नम्रता का व्यवहार करना, बड़ों का आदर करना, जीव-जन्तुओं पर दया करना, गरीबों को दान देना आदि ।”

आपको यह भी जानना चाहिए
अशोक प्राचीन भारत का एक महान शासक है। अशोक को इसलिए महान नहीं कहा जाता है कि उसने प्राचीन भारत के सबसे बड़े साम्राज्य पर शासन किया था बल्कि विश्व को शांति, अहिंसा का संदेश देने एवं उसकी जनकल्याण की भावना के कारण ही उसे महान कहा गया है।


अशोक की बातें आज भी कहाँ तक सार्थक हैं। चर्चा कीजिए ।

अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र और बेटी संघमित्रा को अपने संदेश के प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा। अशोक ने बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों में एकरूपता लाने के लिए पाटलिपुत्र में एक बड़ी सभा की जिसे तीसरी बौद्ध संगीति (सभा) भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त अशोक ने बौद्ध स्तूपों (धार्मिक स्मारक) एवं बौद्ध विहारों (भिक्षुओं के रहने का स्थान) का निर्माण कराया। साँची स्तूप के निर्माण की शुरुआत उसी ने कराई थी। पीठ से पीठ सटाकर बैठे हुए चार सिंह हमारा राजचिह्न है
इसे अशोक के सारनाथ स्तम्भ से लिया गया है। विश्व के इतिहास में अशोक के समान उदार व मानवतावादी सम्राट आज तक नहीं हुआ है ।

मौर्य साम्राज्य का पतन

वंशानुगत साम्राज्य तभी तक बने रहते हैं जब तक योग्य शासकों की कड़ी बनी रहती है। अशोक के दुर्बल उत्तराधिकारियों के कारण दूरस्थ प्रान्त स्वतंत्र होने लगे। देश में विदेशी आक्रमण होने लगे। धीरे-धीरे साम्राज्य की शक्ति कमजोर होती गई। पुष्यमित्र शुंग जो मौर्य साम्राज्य में सेनापति था, ने अन्तिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ की हत्या कर मौर्य साम्राज्य पर कब्जा कर लिया। इस प्रकार मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया।

संगम साहित्य
मौर्य साम्राज्य के समकालीन सुदूर दक्षिण में तीन राज्य चोल (कारोमण्डल तट), चेर (केरल) एवं पांड्य (दक्षिण छोर) थे। इन राज्यों के इतिहास की जानकारी तमिल भाषा के प्राचीनतम साहित्य “संगम साहित्य” में मिलती है, जो प्रथम शताब्दी में लिखा गया था। इससे इन राज्यों के जीवन एवं संस्कृति का पता चलता है।

शब्दावली

राजदूत – राजा का दूत

अभ्यास

1.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) चन्द्रगुप्त मौर्य कौन था ?

चन्द्रगुप्त मौर्य वंश का प्रथम शासक था।

(ख) चाणक्य और मेगस्थनीज की पुस्तकों के नाम लिखिए ?

चाणक्य के प्रसिद्ध रचना अर्थशास्त्र और मेगास्थनीज की प्रसिद्ध पुस्तक इंण्डिका है।


(ग) अशोक ने कौन सा युद्ध लड़ा ? युद्ध का क्या परिणाम हुआ ?

अशोक ने कलिंग का युद्ध लड़ा और वह युद्ध में सफल हुआ।

(घ) अशोक ने बौद्ध धर्म क्यों अपनाया ? इस धर्म के प्रसार के लिए उसने क्या किया ?

कलिंग युद्ध में भारी रक्तपात को देखकर अशोक के मन परिवर्तन हुआ और बौद्ध धर्म अपनाया इस धर्म के प्रसार के अधिकारियो को रखा।

(ड.) हमारा राज चिह्न क्या है ?

हमारा राज चिन्ह अशोक स्तंभ है।

(च) मौर्यों के प्रशासन का वर्णन करिए ।

मौर्य वंश के बड़े साम्राज्य के प्रशासन के लिए तीन स्तरों की शासन व्यवस्था थी प्रान्त,जनपद, और नगर/गाँव।

2.सही (V) और गलत (x) का निशान लगाइए

(क) अशोक ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए कई युद्ध किए ।

(ख) चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्युकस को हराया ।

(ग) अशोक का उत्तराधिकारी उसका पुत्र बिन्दुसार था।

(घ) चन्द्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य को अपना मुख्यमंत्री नियुक्त किया।

3.सही जोड़े बनाइए-

पाटिलपुत्र नगरछ: परिषद के द्वारा शासित था
धम्म महामात्य प्रजा को सही राह दिखने वाले अधिकारी
चाणक्य ने चंद्रगुप्त को प्रशिक्षित कियानंद वंश के शासको को परास्त करने के लिए
अशोक ने अपने पुत्र पुत्री को श्रीलंका भेजा बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए
पाठ -4 वैदिक काल (1500 ई0 पू0 से 600 ई0पू0)
पाठ 5 छठी शताब्दी ई0 पू0 का भारत धार्मिक आन्दोलन
पाठ 6 महाजनपद की ओर


Leave a Comment