पाठ 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से संपर्क Maurya Uttar kal


हम अपने परिचितों, रिश्तेदारों आदि के घर जाते हैं। प्रायः हम इनसे रहन-सहन, तौर-तरीके, भोजन आदि सम्बन्धी अच्छी बातें सीख लेते हैं। इसी प्रकार एक देश से दूसरे देश को जाने वाले लोग भी एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख लेते हैं। भारत में भी जब विदेशी लोग आए और यहाँ शासन किया तब उनसे हमने और उन्होंने हमसे बहुत सी बातें सीखीं ।

मौर्यों के बाद लगभग 200 ई०पू० से जो काल आरम्भ होता है उसमें अधिकतर छोटे-छोटे राज्य हुए। पूर्वी भारत, मध्य भारत और दक्षिण भारत में मौर्यों के स्थान पर कई स्थानीय ब्राह्मण शासक सत्ता में आए जैसे शुंग, कण्व और सातवाहन। इनमें सातवाहन (आन्ध्र) सब से अधिक प्रसिद्ध हुए ।

शुंगवंश-मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद इसके मध्य भाग की सत्ता शुंगवंश के हाथों में आ गयी। शुंग उज्जैन प्रदेश के निवासी थे तथा इनके पूर्वज मौर्यों की सेवा में थे। इस वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था जो अन्तिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ का सेनापति था।

कण्व वंश- अन्तिम शुंग शासक देवभूति की हत्या उसके सचिव वसुदेव ने की तथा 75 ईसा पूर्व में कण्व वंश की नींव रखी। इसमें केवल चार शासक ही हुए- वसुदेव, भूमिमित्र, नारायण व सुशर्मन । अन्तिम शासक सुशर्मन की हत्या 30 ईसा पूर्व में सिमुक द्वारा कर दी गई।

सातवाहन वंश (लगभग 30 ई०पू० से 203 ई0 तक)

इस वंश का संस्थापक सिमुक था। उसके उत्तराधिकारियों ने अपने पराक्रम से एक विशाल राज्य की स्थापना की। इसके शासकों ने अभिलेखों एवं सिक्कों में अपने नाम के साथ अपनी माता का नाम भी अंकित करवाया।
इस वंश के शासक वैदिक धर्म के अनुयायी थे। इन्होंने सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाया । बौद्ध भिक्षुओं को भी भूमि तथा ग्राम दान में दिए। इसी समय पत्थर की ठोस चट्टानों को काटकर चैत्यों और विहारों का निर्माण हुआ। इनमें कार्ले का चैत्य मण्डप प्रसिद्ध है।

चैत्य बौद्ध धर्म के प्रार्थना स्थल होते थे।

पश्चिमोत्तर भारत

पश्चिमोत्तर भारत में भी मौर्यों के स्थान पर मध्य एशिया और चीन से आए कई विदेशी राजवंशों ने अपना शासन जमाया जैसे हिन्द-यूनानी, शक, पहलव और कुषाण ।

सबसे अधिक विख्यात हिन्द-यूनानी शासक मिनाण्डर हुआ। वह मिलिन्द नाम से भी जाना जाता है। उसकी राजधानी पंजाब में शाकल (आधुनिक सियालकोट) थी।

यूनानियों के बाद शक आए। शक शासकों में रुद्रदामन प्रथम सबसे अधिक विख्यात शासक था । शक के बाद पहलव (पार्थियाई) ईरान से भारत आए। वे शकों की तरह भारतीय राजतंत्र और समाज के अभिन्न अंग बन गए।

पहलवों के बाद कुषाण आए, कुषाण शासकों में कनिष्क प्रथम सर्वाधिक विख्यात शासक हुआ। वह इतिहास में दो कारणों से प्रसिद्ध हुआ। पहला- उसने 78 ई0 में एक संवत् चलाया जो शक संवत् कहलाता है और भारत सरकार द्वारा प्रयोग में लाया जाता है। दूसरा- उसने बौद्ध धर्म को अपनाकर कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति को भी आयोजित करवाया था।

पारस्परिक आदान-प्रदान

तकनीकी
भारतीयों ने हिन्द-यूनानी व कुषाणों से सोना व चाँदी को पिघलाकर सिक्के बनाने का नया तरीका सीखा। यह विधि, पूर्व प्रचलित चाँदी की चादर के कटे हुए टुकड़ों में लगे ठप्पों के सिक्कों से अधिक सुंदर व स्पष्ट थी। इन सिक्कों में राजाओं के चित्र व लिपि बहुत ही सुन्दर व स्पष्ट थी ।


इन सिक्कों से वर्तमान सिक्कों की तुलना करें और चर्चा करें कि वर्तमान सिक्कों से ये किस प्रकार और कितने भिन्न हैं ।

पहनावा

शक व कुषाण पगड़ी, कुर्ती, पजामा, लम्बे जूते और भारी लम्बे कोट (शेरवानी) को प्रचलन में लाए

व्यापार

मध्य एशिया व रोमन साम्राज्य से सम्पर्क होने से भारी मात्रा में सोना प्राप्त हुआ । काँच के बने बर्तन को बनाने की तकनीक में भी प्रगति हुई।
इस काल में नगरीकरण चोटी पर पहुँच गया था। कनिष्क ने तक्षशिला, पुरुषपुर नगर का सुन्दरीकरण किया और कश्मीर में कनिष्कपुर नगर (आधुनिक कांजीपुर श्रीनगर के पास) बसाया ।
कुषाणों ने चीन से मध्य एशिया होते हुए रोमन साम्राज्य को जाने वाले प्रख्यात रेशम मार्ग पर नियंत्रण कर लिया था जिससे भारतीय व्यापार के लिए नए अवसर मिले और भारतीय व्यापार में वृद्धि हुई ।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

हिन्द यूनानियों के सम्पर्क से खगोल एवं ज्योतिष शास्त्र में प्रगति हुई। सप्ताह के हर दिन को सूर्य, चन्द्रमा एवं अन्य ग्रहों के नाम से पुकारते हैं जैसे - रवि, सोम, मंगल, शनि। यह हमने यूनानियों से सीखा। यूनानी औषधि पद्धति के विषय में जानकारी हुई ।

कनिष्क के समय चरक नामक चिकित्सक हुए। इन्होंने चरकसंहिता नाम की एक पुस्तक लिखी जिसमें लगभग 600 से ज्यादा औषधियों के बारे में लिखा है। यह संहिता निर्देश देती है कि चिकित्सक को अपने मरीजों से विश्वासघात नहीं करना चाहिए।

मूर्तिकला


कुषाणकाल की कला के दो प्रमुख केन्द्र मथुरा एवं गान्धार थे। माना जाता है कि बुद्ध की प्रतिमा की कल्पना एवं निर्माण सर्वप्रथम गान्धार मूर्ति शैली के मूर्तिकारों द्वारा की गयी। इन मूर्तियों में बुद्ध को आध्यात्मिक मुद्रा एवं लहराते बालों के साथ सिर पर जटा या उभार को दिखाया गया है। इस शैली की मूर्तियों में स्लेटी या नीले धूसर बलुआ पत्थर का प्रयोग किया जाता था ।

मथुरा मूर्ति शैली के मूर्तिकारों द्वारा निर्मित
की पद्मासन में बैठी मूर्ति प्राप्त हुई है। सिर के
पीछे प्रभा मण्डल है तथा चेहरे पर प्रसन्नता का भाव है। ये मूर्तियाँ लाल बलुआ पत्थर में बनाई गई हैं।

राज्य व्यवस्था

राजा में देवत्व की भावना की प्रणाली शकों एवं कुषाणों से प्राप्त हुई। “शाहानुशाही” की अवधारणा कुषाणों की देन है।

उन्होंने भारत से क्या सीखा ?

विदेश से आए आक्रमणकारियों ने इस देश की संस्कृति को आत्मसात कर लिया। यहाँ के धर्म एवं संस्कृति से वे अत्यधिक प्रभावित हुए। भारत में विदेशी प्रभाव से एक मिली-जुली संस्कृति का विकास हुआ। चीन ने बौद्ध चित्रकला भारत से सीखी।


भारतीय संस्कृति में अन्य देशों की संस्कृतियों को मिला लेने की अपूर्व क्षमता रही है। यही कारण है कि विदेशी आक्रमणकारी भी भारतीय समाज के अभिन्न अंग बन गए। भारतीय संस्कृति में सहिष्णुता, सामाजिक मेलजोल, लचीलापन, उदारवादिता व वसुधैव कुटुम्बकम् (पृथ्वी के सभी निवासी एक ही परिवार के सदस्य हैं) को ही आदर्श माना गया है। इस कारण यह संस्कृति आज भी विद्यमान है जबकि अन्य समकालीन प्राचीन सभ्यताएं जैसे- मेसोपोटामिया, मिस्र, यूनान एवं रोम विलुप्त हो चुके हैं और उनके भौतिक अवशेष ही बचे हैं ।


और भी जानो

सबसे पहले भारत में सोने का सिक्का कुषाण शासक बिमकैडफिसस ने जारी किए।

कुषाण शासकों ने भारत में सर्वाधिक शुद्ध सोने के सिक्के चलाए ।

इसी समय बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायों में बँट गया- हीनयान और महायान । कनिष्क महायान का संरक्षक था।

अभ्यास


1.शुंगवंश का संस्थापक कौन था?

शुंगवंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था।

2.कण्व वंश के अन्तिम शासक का नाम बताइए।

कण्व वंश का अंतिम शासक सुशर्मन था

3.सिमुक किस वंश का शासक था?

सिमुक सातवाहन वंश का शासक था

4.सातवाहन कालीन धर्म की क्या विशेषता थी?

सातवाहन कालीन धर्म की मुख्य विशेषता इन्होंने सभी धर्म के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाया बौद्ध भिक्षुओं को भी भूमि तथा ग्राम दान में दिया।

5.भारत के विदेशों से सम्पर्क के कारण व्यापार, पहनावा, ज्ञान विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में क्या बदलाव आया ?

मध्य एशिया एवं रोमन साम्राज्य से संपर्क होने से भरी मात्रा में सोना प्राप्त हुआ और पहनावे में पगड़ी, कुर्ता लंबे जूते भारी कोट, शेरवानी प्रचलन में आए तथा यूनानी औषधि पद्धति के विषय में जानकारी हुई।


6.कुषाण कालीन कला की विशेषता का उल्लेख करिए ।

कुषाण काल की कला के दो प्रमुख केंद्र मथुरा एवं गन्धार थे बुद्धकी प्रतिमा की कल्पना एवं निर्माण सर्वप्रथम गंधार मूर्ति शैली के मूर्तिकारों द्वारा की गई।

7.विदेशियों ने भारत से क्या सीखा ? लिखिए ।

भारत में विदेशी प्रभाव से एक मिली जुली संस्कृत का विकास हुआ चीन ने बौद्ध चित्रकला भारत से सीखी।

8.भारतीय संस्कृति की ऐसी क्या विशेषताएँ हैं, जिससे कि वह अन्य प्राचीन सभ्यताओं से भिन्न है?

भारतीय संस्कृत में अन्य देशों की संस्कृतियों को मिला लेने की अपुर्व क्षमता रही है। यही कारण है कि विदेशी आक्रमणकारी भी भारतीय समाज के अभिन्न अंग बन गए।

9.सही कथन के सामने (1) तथा गलत कथन पर (x) का निशान लगाइए

अ.कार्ले का चैत्य मण्डप कुषाणों ने बनवाया ।
ब.मिनाण्डर शक शासक था।


स.भारत में सोने के सिक्के सबसे पहले कुषाण राजा ने चलाए ।

द. मथुरा एवं गान्धार कुषाण काल की कला के प्रमुख केन्द्र थे ।

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए ।

अ.सातवाहन वंश के शासक.. वैदिक..धर्म के अनुयायी थे।

ब.कनिष्क ने…शक …संवत् चलाया ।

स.कण्व वंश के संस्थापक …वासुदेव……थे

द.शक शासकों में…रुद्रदामा प्रथम…..सबसे अधिक विख्यात शासक था।

प्रोजेक्ट वर्क


गान्धार शैली एवं मथुरा शैली की किन्हीं दो-दो मूर्तियों के चित्र अपनी पुस्तिका में चिपकाएँ और उनकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।

पाठ 5 छठी शताब्दी ई0 पू0 का भारत धार्मिक आन्दोलन
पाठ 6 महाजनपद की ओर
पाठ 7 मौर्य साम्राज्य

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