मोहम्मद साहब अध्याय -18 Mohammed Sahab chapter-18

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे (मोहम्मद साहब)


हजरत मोहम्मद साहब का जन्म अरब के प्रसिद्ध नगर मक्का में हुआ था। उनकी माता का नाम आमिना तथा पिता का नाम अब्दुल्लाह था। जन्म से दो माह पूर्व उनके पिता का निधन हो गया था। छह वर्ष की अवस्था में उनकी माता भी चल बसीं। उनकी माता के देहांत के बाद उनका पालन-पोषण उनके दादा अब्दुल मुत्तलिब ने और चाचा अबूतालिब ने किया।
मोहम्मद साहब बचपन से ही बडे नेक और शांत स्वभाव के थे। बड़े होने पर वे अपने चाचा के साथ व्यापार के लिए आस-पास के देशों में जाने लगे थे। वे बड़ी लगन से काम करते थे। उनकी मेहनत और ईमानदारी की प्रशंसा दूर-दूर तक फैल गई। इसीलिए बाहर जाते समय लोग अपने आभूषण और बहुमूल्य सामान उनके पास रख जाते थे और वापस आकर ले लिया करते थे।
उन दिनों अरब देश में बहुत-सी कुरीतियाँ प्रचलित थीं । अरब निवासी अनेक किस्म के अंधविश्वासों में जकड़े हुए थे। वे जादू-टोने में विश्वास करते थे, जुआ खेलते थे और मदिरा पीकर आपस में लड़ते-झगड़ते थे। छोटी-छोटी बातों पर अकड़ दिखाते और एक दूसरे के प्राणों के प्यासे हो जाते थे। ऊँची-ऊँची दरों पर सूद पर पैसा उधार देते थे। इन बुराइयों को देखकर मोहम्मद साहब को बहुत दुःख होता था। उनका मन अशांत हो उठता था। मक्का के पास की पहाड़ियों में ‘हिरा’ नाम की एक गुफा थी। वे प्रायः उस गुफा में जाकर चिंतन करते और ध्यान लीन हो जाते। वे समाज की बुराइयों को दूर करके उसे समृद्धि और सहयोग के रास्ते पर बढाना चाहते थे।
उन्होंने लोगों को बताया कि सभी मनुष्य बराबर हैं, कोई ऊँचा या नीचा नहीं है। उनका कहना था कि मनुष्य की वह रोजी सबसे पवित्र है, जो उसने अपने हाथ से मेहनत करके कमायी है। वे बदला लेने से क्षमा कर देना अच्छा समझते थे । वे कहते थे कि पड़ोसी को कष्ट देने वाला
आदमी कभी जन्नत में नहीं जा सकता ।


उन्होंने कहा कि आदमी को अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा गरीबों की मदद में लगाना चाहिए। दूसरों की अमानत की रक्षा करनी चाहिए। सभी धर्मों का आदर करना चाहिए। सूदखोरी नहीं करनी चाहिए। बुरी आदतों जैसे शराब पीना, जुआ खेलना आदि से दूर रहना चाहिए ।
आरंभ में मक्का वालों को मोहम्मद साहब की बातें पसंद न आईं। वे उन्हें तरह-तरह से कष्ट देने लगे। वे उन्हें और उनके साथियों को बुरा-भला कहते और उन पर पत्थर बरसाते। एक वृद्ध स्त्री तो उनसे इतनी रुष्ट थी कि जब वे रास्ते से निकलते तो उन पर कूड़ा फेंकती और रास्ते में काँटे बिखेर देती लेकिन मोहम्मद साहब उस रास्ते से चुपचाप निकल जाते और उस बुढ़िया से कुछ न कहते। एक दिन वे उसी रास्ते से जा रहे थे तो न उन पर कूड़ा फेंका गया और न काँटे ही बिखेरे गए। उन्होंने पड़ोसियों से पूछा तो मालूम हुआ कि वह स्त्री बीमार है। मोहम्मद साहब उसका हाल पूछने गए। इस बात का उस स्त्री पर अच्छा प्रभाव पड़ा और उनका बहुत आदर करने लगी।
मक्का वालों के विरोध के बाद भी मोहम्मद साहब बराबर उपदेश देते रहे। मक्का वालों का विरोध बढ़ता ही गया और मोहम्मद साहब ने समझ लिया कि अब उनका यहाँ रहना कठिन है। अतः उन्होंने मदीना जाने का निश्चय किया।
उन्होंने अपने पास रखी हुई दूसरों की धरोहर को अपने चचेरे भाई हजरत अली को सौंप दिया और उनको यह समझाया, “लोगों को उनकी धरोहर लौटाकर तुम भी मदीना चले आना।”
अब मोहम्मद साहब अपने मित्र अबूबक्र के साथ मदीना की ओर चल दिए। वे पहले शहर के बाहर एक गुफा में रुके। मक्का वाले जब उनके घर में घुसे तो मोहम्मद साहब वहाँ न मिले। वे ढूँढ़ते-ढूँढ़ते शहर के बाहर गुफा की ओर चले। लोगों को अपनी ओर आते देखकर अबूबक्र घबराए, मगर मोहम्मद साहब ने कहा, “अबूबक्र ! घबराओ नहीं, खुदा हमारे साथ है। वह हमारी रक्षा करेगा।” कहा जाता है कि उसी समय मकड़ी ने गुफा के मुँह पर जाला बुन दिया। जब मोहम्मद साहब के विरोधी उन्हें ढूँढ़ते-ढूँढ़ते गुफा के पास पहुँचे, तब उन्होंने गुफा के द्वार पर मकड़ी का जाला तना हुआ पाया। इससे उन्होंने समझा कि गुफा में कोई नहीं है। वे आगे बढ़ गए और मोहम्मद साहब को न पा सके ।

तीन दिन गुफा में रहने के बाद मोहम्मद साहब ऊँटनी पर चढ़कर मदीना की ओर चल पड़े। मक्का से मदीना की यात्रा ‘हिजरत’ कहलाती है और इसी से हिजरी सन् शुरू होता है।
कुछ दिन बाद मोहम्मद साहब ने एक मस्जिद बनाने की बात सोची। मस्जिद बनाने के लिए जो जमीन पसंद की गई, वह दो अनाथ बच्चों की थी। ये बच्चे जमीन मुफ्त में देना चाहते थे, किंतु मोहम्मद साहब ने मुफ्त की जमीन लेने से मना कर दिया। एक अन्सारी ने इस जमीन का मूल्य चुका दिया। इस जमीन पर मोहम्मद साहब ने एक मस्जिद बनवाई। वे मस्जिद से मिले हुए कमरे में रहने लगे, कुछ समय बाद यह मस्जिद ‘मस्जिद-ए-नब्वी’ के नाम से प्रसिद्ध हुई।
धीरे-धीरे मोहम्मद साहब के समर्थकों की संख्या बढ़ती गई और उनका यश चारों ओर फैल गया मगर मक्का वाले उनसे झगड़ा करते ही रहे। अंत में मोहम्मद साहब ने मक्का पर विजय प्राप्त कर ली। मक्का वाले बहुत घबराए कि अब मोहम्मद साहब उनसे बदला लेंगे, किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने घोषणा की, “मक्का वालो ! डरो नहीं। मैं किसी से बदला लेने नहीं आया हूँ। मैं उन सबको माफ करता हूँ, जिन्होंने मेरे साथियों और संबंधियों को मार डाला और मुझे मारना चाहा। मक्का वालो, नेकी के रास्ते पर चलो।”
मोहम्मद साहब के इस व्यवहार का मक्का वालों पर बहुत असर पड़ा। उन्होंने मोहम्मद साहब से क्षमा माँगी और प्रार्थना की कि आप अब यहीं रहें। मोहम्मद साहब ने कहा, “आज मैं तुम लोगों से बहुत खुश हूँ परंतु जिन लोगों ने संकट में मेरा साथ दिया था, मैं उन्हें कैसे छोड़ दूँ? वैसे मैं हज करने हर साल मक्का आता रहूँगा।” यह कहकर मोहम्मद साहब मदीना लौट गए और वहीं रहने लगे। जब उनका देहांत हुआ तो उनकी कब्र मस्जिद से सटे में बनाई गई, जिसमें वे रहते थे।
मोहम्मद साहब के संदेश हदीस की किताबों में संकलित
हुए हैं ।

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
सूदखोरीब्याज लेने का काम
समृद्धिखुशहाली
जन्नतस्वर्ग
उपासनापूजा
रोजीकमाई, जीविका
धरोहरअमानत में रखी वस्तु
हिजरतमोहम्मद साहब की मक्का से मदीने की यात्रा
प्ररालोभनलालच
कलामकथध

1-बोध प्रश्न उत्तर लिखिए-

(क) मोहम्मद साहब के जन्म के समय अरब में क्या-क्या बुराइयाँ फैली थीं ?

उत्तर-उन दिनों अरब देश में बहुत सी कुरीतियों प्रचलित थी अरब निवासी अनेक अंधविश्वासों में जकड़े हुए थे वह जादू टोना और जुआ खेलते थे और मदिरा पीकर के आपस में लड़ते झगड़ते थे इसी प्रकार की अनेक बुराइयां फैली हुई थी|


(ख) मोहम्मद साहब अपने विरोधियों से गुफा में कैसे बचे ?

उत्तर-कहा जाता है कि जब विरोधियों ने उनके गुफा की तरफ बढ़ रहे थे तभी एक मकड़ी ने गुफा के मुंह पर जाला बुंन दिया और विरोधियों ने समझा की गुफा में कोई नहीं है और वह आगे बढ़ गए इस तरह मोहम्मद साहब बच गए |


(ग) हिजरत किसे कहते हैं ?

उत्तर-मक्का से मदीना की यात्रा को हजरत कहते हैं|


(घ) मोहम्मद साहब ने मानवता को क्या संदेश दिया ?

उत्तर-मोहम्मद साहब ने मानवता का संदेश इसलिए दिया कि अरब में प्रचलित कुरीतियां समाप्त हो कर समृद्धि और सहयोग के रास्ते पर अग्रसर हो|

2-भाषा के रंग-

(क) नीचे लिखे शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए-

शब्द
प्रासिद्ध
अवस्था
प्रशंसा
एकांत
चिंतन
समृद्धि
हिजरत
घोषणा
क्षमा
प्रार्थना
विद्यार्थी स्वयं करें?

(ख) देश और अंत मिलकर शब्द बनता है देह + अंत= देहांत इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाइए-

सुख + अंत= सुखान्त

दुख + अंत =दुखान्त

सीमा + अंत = सीमान्त

वेद + अंत = वेदांत

(ग) पालन पोषण में दो शब्दों का योग है इस तरह दो शब्दों के मेल से बने शब्द को युग में शब्द कहते हैं पाठ में आए इस युग्म शब्दों को ढूंढ कर लिखिए-

आस-पास, जादू टोने, लड़ाई झगड़ा , भला-बुरा|

(घ) साधारण शब्दों का विलोम बनाने के लिए उसके पहले अ जोड़ देते हैं और शब्द बन जाता है असाधारण इसी प्रकार इन शब्दों के पूर्व अ लगाकर उनके विलोम शब्द बनाइए-

शब्दशब्द के आगे अ लगाने पर
सहयोगअसहयोग
निश्चयअनिश्चय
धर्मअधर्म
शांतिअशांति
भूतपूर्वअभूतपूर्व
विश्वस्तअविश्वस्त
(ङ)नीचे बने चक्र में क्रमशः दो, तीन,चार, और पांच अक्षरों वाले दो-दो शब्द उदाहरण के लिए दिए गए हैं इसी प्रकार पुस्तक से ढूंढ कर पांच पांच शब्द प्रत्येक चक्र में लिखिए-

पहला चक्र- कुछ ,दिन ,गुफा, तीन ,चलो|
दूसरा चक्र
-नगर, उनकी ,अमीना ,पोषण,नगर|

तीसरा चक्र,-हजरत, मेहनत, बचपन, प्रचलित, बराबर |

चौथा चक्र-मलयालम,मोहम्मद,अबूतालिब, ईमानदारी ,व्यवहार|

(च) कुछ मुहावरे और उनके अर्थ दिए गए हैं इन मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

मुहावराअर्थवाक्य
अकड़ दिखानाघमंड करनापैसा अधिक हो जाने पर लोग आकर दिखाने लगते हैं
पुराने का प्यासा होनामार डालने पर ऊतारू होनासुरेश रमेश के प्राण के प्यासे हो गए हैं
बुरा भला कहनाबुराई करनाआज विकास ने अभिषेक को भला बुरा कहा
अपनी बात पर जमे रहनादृढ़ होनाविकास के बार-बार पूछने पर भी अभिषेक अपनी बात पर जमा रहा
(छ) नीचे के अंश में दो ऐसे वाक्य हैं जो बाकी वाक्य से मेल नहीं खाते उन्हें ढूंढ कर अलग कीजिए और बाकी अंश का सुलेख अपनी कॉपी में कीजिए-

एक खरगोश के दो बच्चे थे। एक काला और एक सफेद । दोनों बच्चे बड़े सुंदर थे। एक दिन मेरी सहेली गेंद से खेल रही थी, तो सफेद खरगोश को गेंद लग गई। मुझे बहुत गुस्सा आया । मैं सफेद खरगोश को अपने घर ले आई। उसको दवा लगाई। । थोड़ी देर बाद वह दौड़ने लगा तो मैं उसको फिर बागीचे में छोड़ आई । अब वह अक्सर हमारे घर आता है।

दुकानदार ने कहा- एक टोपी का मूल्य पाँच रुपये हैं।

पैसे दो और टाफी लो

उपरोक्त वाक्य में मेल नहीं खाने वाले वाक्य को हटा दिया गया है छात्र स्वयं सुलेख में लिखे?

3-आपकी कलम से-

पांच बातें लिखिए जो मोहम्मद साहब ने मानवता की भलाई के लिए कहीं?

मोहम्मद साहब ने मानवता की भलाई के लिए दिए गए पांच संदेश निम्नलिखित है-

1. सभी मनुष्य बराबर हैं, कोई ऊँचा या नीचा नहीं है ।

2. पड़ोसी को कष्ट देने वाला आदमी कभी जन्नत में नहीं जा सकता ।

3. मनुष्य की वह रोजी सबसे पवित्र है, जो उसने/अपने हाथ से मेहनत करके कमाई है ।

4. बदला लेने से क्षमा कर देना अच्छा है ।

5. आदमी को अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा गरीबों की मदद में लगाना चाहिए ।

4-अब करने की बारी-

(क) गौतम बुद्ध ,ईसा मसीह, और गुरु नानक की जीवनियों अपने बड़ों से सुनिए?

विद्यार्थी इस कार्य को स्वयं करें?

(ख) अपनी कॉपी में प्रथम अनुच्छेद का सुलेख कीजिए-

विद्यार्थी स्वयं करें?

5-मेरे दो प्रश्न पाठ के आधार पर दो सवाल बनाइए-

1-मोहम्मद साहब का जन्म कहां हुआ था?

2-मोहम्मद साहब के संदेश किन किताबों में उल्लेखित है?

6-इस पाठ से-

(क) मैंने सीखा…………. स्वयं लिखें|

(ख) मैं करूंगी/ करूंगा……. स्वयं लिखें|

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