Sangyan atmak ya gyanatmak संज्ञानात्मक या ज्ञानात्मक / मानसिक विकास का सिद्धान्त – जीन पियाजे

जीन पियाजे के अनुसार मानसिक / ज्ञानात्मक या संज्ञानात्मक विकासका सिद्धान्तTheory of Mental or Cognitive Development According to JeanPiaget जीन पियाजे का जन्म सन् 1886 को स्विट्जरलैंड में हुआ था। प्याजे ने अपने सम्पूर्ण जीवन में मानव विकास का अध्ययन किया। आधुनिक युग में ज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक Swiss psychologist Jean … Read more

Samaji Karan समाजीकरण समाजीकरण तथा सामाजिक विकास

समाजीकरण तथा सामाजिक विकास Socialization and Social Development बालक समाज का एक अविभाज्य अंग होता है। यहाँ इस अध्याय में हम बालक के सामाजिक विकास तथा समाजीकरण का विवरण स्पष्ट रूप से करेंगे। सामाजीकरण पंसमाजीकरण से तात्पर्य है, व्यक्ति को सामाजिक प्राणी बनाना। इसके अतिरिक्त सामाजिक प्राणी बनाने का अर्थ होता है कि व्यक्ति समाज … Read more

Brunar ka sangyanatmak adhigam ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत जेरोम ब्रूनर-

जेरोम ब्रूनर का परिचय Introduction to Jerome Seymour Bruner जेरोम ब्रूनर Jerome Seymour Bruner का जन्म 1 अक्टूबर, 1915 को हुआ था, एवं मृत्यु 5 जून, 2016 को हुई थी। ब्रूनर Jerome Bruner एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होने मानव के संज्ञानात्मक मनोविज्ञान तथा संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त cognitive learning theory पर उल्लेखनीय योगदान दिया। वे न्यू … Read more

Adhigam pathar अधिगम पठार अर्थ एवं परिभाषा, समय, कारण एवं निराकरण-

अधिगम पठार का अर्थ एवं परिभाषाएँMeaning and Definitions of Learning Plateau अधिगम पठार का अर्थ जब हम कोई नयी बात सीखते हैं तब हम सीखने में लगातार उन्नति नहीं करते हैं। हमारी उन्नति कभी कम और कभी अधिक होती है। कुछ समय पश्चात् ऐसा अवसर भी आता है जब हमारी उन्नति बिल्कुल रुक जाती है। … Read more

Adhigam ka sthanantaran अधिगम का स्थानान्तरण

अधिगम का स्थानान्तरण Transfer of Learning मानव विकास में अधिगम का प्रमुख स्थान है। हम प्रत्येक नवीन कार्य को सीखने में अपने संचित ज्ञान की सहायता लेते हैं। यह संचित ज्ञान हमारे सीखने को सरल बनाता है। बी. एड. शिक्षारत छात्र-छात्राएँ पूर्व संचित गणित के ज्ञान को मस्तिष्क में जाग्रत करके सांख्यिकी को सीखने में … Read more

Bal Vikas बाल विकास Development Child in Hindi

बाल विकास की अवधारणा Concept of Child Development बाल विकास Child Development की प्रक्रिया एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इस सृष्टि में प्रत्येक प्राणी प्रकृति द्वारा प्रदत्त अनुकूलन परिस्थितियों से उत्पन्न होता है उत्पन्न होने तथा गर्भ धारण की दशाएँ सभी प्राणियों की पृथक्-पृथक हैं। बाद में मनुष्य अपने परिवार में विकास एवं वृद्धि को प्राप्त … Read more

Vyaktitva ka Vikas व्यक्तित्व Personality व्यक्तित्व का विकास, अर्थ,परिभाषा

व्यक्तित्व Personality मनोविज्ञान के विकास ने व्यक्तित्व की पुरानी धारणाओं को बदल दिया है। व्यक्तित्व का आधार क्या होना चाहिये? यह प्रश्न मनोवैज्ञानिकों के लिये जटिल बन गया था। उन्होंने विभिन्न रूपों एवं दृष्टिकोणों से व्यक्ति का अध्ययन किया और व्यक्तित्व की प्राचीन अवधारणाओं को समाप्त कर नवीन अवधारणा को स्थापित किया। गैरिसन, कार्ल सी. … Read more

कल्पना Imagination – अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ,प्रकार

कल्पनाImagination वस्तु का प्रत्यक्षीकरण मानव मस्तिष्क में प्रतिमाओं को स्थापित करता है। वह इन प्रतिमाओं में परिवर्तन करके नवीनता उत्पन्न कर देता है। इसी नवीनता का नाम कल्पना है। मकान निर्मित करने वाले आर्किटेक्ट मकान के नये डिजायन तैयार करते हैं। ये डिजायन कल्पना पर ही आधारित होते हैं। इसमें वह अपने पूर्वानुभवों का प्रत्यास्मरण … Read more

चिन्तन Thinking अर्थ एवं परिभाषा, साधन और चिंतन के प्रकार

चिंतन क्या है। चिन्तन Thinking मानवीय जीवन समस्याओं से भरा हुआ है। हम एक समस्या का हल खोज नहीं पाते, दूसरी सामने उपस्थित हो जाती है। ये समस्याएँ प्रयत्न बिना भी हल हो जाती हैं और कभी-कभी प्रयत्न चिन्तन को जन्म देता है। दैनिक जीवन में बड़े एवं बुजर्ग कहते हैं कि ‘करने से पहले … Read more

तर्क Arguments -अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार एवं तर्क वृद्धि के तरीके

तर्क क्या है. तर्क Arguments तर्क एक अभिव्यक्त क्रिया है, जिसका प्रकटीकरण समस्या समाधान व्यवहार से होता है। तर्क के द्वारा समस्या के प्रति रुचि जाग्रत होती है और समस्या के समाधान के साथ ही रुचि एवं तर्क दोनों ही समाप्त हो जाते हैं। सामान्य जीवन में तर्क शक्ति का प्रयोग स्वाभाविक रूप से होता … Read more

Vyaktigat bhinnata व्यक्तिगत विभिन्नता-अर्थ,परिभाषा, प्रकार एवं कारण वैयक्तिक विभिन्नता-

व्यक्तिगत विभिन्नता का अर्थMeaning of Individual Differences शिक्षा के अति प्राचीनकाल से आयु के अनुसार विद्यार्थियों में अन्तर किया जाता है कि आयु की विभिन्नता से बालक को भिन्न-भिन्न स्तर की शिक्षा मिलनी चाहिये। क्रमशः आयु बढ़ने के साथ पाठ्यक्रम को अधिक विस्तृत और कठिन बनाया जा सकता है। प्राचीनकाल में आयु के अतिरिक्त थोड़ा … Read more

Bal Vikas ke Aadhar बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारक

बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारकFoundations of Child Development and Factors Influence Them 1.वंशानुक्रम 2.वातावरण पारिवारिक, सामाजिक, विद्यालयी एवंसंचार माध्यम। मानव विकास की प्रक्रिया में वंशानुक्रम एवं वातावरण Heredity and Environment in Developmental Process विकास प्रक्रिया से तात्पर्य बालक में शनैः-शनैः उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के परिवर्तनों से है। यह … Read more

Adhigam sikhana paribhasha aur Siddhant Arth अधिगम सीखना परिभाषा और सिद्धान्त-अर्थ,

अधिगम Learning सीखना या अधिगम एक व्यापक सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलनेवाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म के उपरांत ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है। धीरे-धीरे वह अपने को वातावरण से समायोजित करने का प्रयत्न करता है। इस समायोजन के दौरान वह अपने अनुभवों से अधिक … Read more

धातु रूप-नश् (नष्ट होना) गण-दिवादिगण – Dhatu Roop-Nash (Nasht Hona) Gan-Diwadigan

लट् लकार (वर्तमान काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष नश्यति नश्यतः नश्यन्ति मध्यम पुरुष नश्यसि नश्यथः नश्यथ उत्तम पुरुष नश्यामि नश्याव: नश्यामः लृट लकार (भविष्यत् काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष नशिष्यति निशिष्यतः नशिष्यन्ति मध्यम पुरुष नशिष्यसि नशिष्यथः नशिष्यथ उत्तम पुरुष नशिष्यामि नशिष्याव: नशिष्यामः लङ् लकार (भूतकाल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष … Read more

धातु रूप-दा (देना) गण-जुहोत्यादिगण – Dhatu Roop-Da (Dena) Gan-Juhotyaadigan

लट् लकार (वर्तमान काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष ददाति दत्तः ददत्ति मध्यम पुरुष ददासि दत्थः दत्थ उत्तम पुरुष ददामि दद्वः दद्म: लृट लकार (भविष्यत् काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष दास्यति दास्यतः दास्यन्ति मध्यम पुरुष दास्यसि दास्यथः दास्यथ उत्तम पुरुष दास्यामि दास्यावः दास्यामः लङ् लकार (भूतकाल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष … Read more

धातु रूप-बू (कहना) गण-अदादिगण – Dhatu Roop-boo (Kahana) Gan-Adadigan

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष ब्रवीति, आह ब्रूतः, आहतु ब्रुवन्ति, आहुः मध्यम पुरुष ब्रवीषि, आत्थ ब्रूथ, आहथुः ब्रूथ उत्तम पुरुष ब्रवीमि ब्रूवः ब्रूमः लृट लकार (भविष्यत् काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष वक्ष्यति वक्ष्यतः वक्ष्यन्ति मध्यम पुरुष वक्ष्यसि वक्ष्यथः वक्ष्यथ उत्तम पुरुष वक्ष्यामि वक्ष्यावः वक्ष्यामः लङ् लकार (भूतकाल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम … Read more

धातु रूप (Conjugation) – परिशिष्ट वीथिका – तृतीयः – भागः) – धातु रूप-वस् (रहना) गण-भ्वादिगण – parishisht vithika – dhatu roop-was (rahana)Gan-Bhwdigan

लट् लकार (वर्तमान काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष वसति वसतः वसन्ति मध्यम पुरुष वससि वसथः वसथ उत्तम पुरुष वसामि वसावः वसामः लृट लकार (भविष्यत् काल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष वत्स्यति वत्स्यतः वत्स्यन्ति मध्यम पुरुष वत्स्यसि वत्स्यथः वत्स्यथ उत्तम पुरुष वत्स्यामि वत्स्यावः वत्स्यामः लङ् लकार (भूतकाल) पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष … Read more

नारी-शिक्षा (Women-Education) – सप्तदशः पाठः

गृहस्थ-शटकस्य ‘नर-नारी’ इति चक्रद्वयं स्तः । तत्र शिक्षैव चक्रयोः गतिः अक्षुण्णा समतया निर्बाधं भवति । किन्तु यदि चक्रमेकं पर्याप्त-स्निग्ध भवतु द्वितीयञ्च सर्वथा स्नेहरहितं भवेत् तर्हि तस्य शटकस्य गति न सम्यक्तया भवितुं शक्नोति। तत्र सर्वदा बाधैव समुपस्थिता भवति। एवमेव शिक्षितस्य पुरुषस्य शिक्षा-विहीनाया: नार्याः संयोगे भवति। अतएव यथा पुरुषाणां कृते वर्तते शिक्षाया आवश्यकता एवमेव नारीणां कृतेऽपि वर्तते … Read more

Abhiprerna अभिप्रेरणा-or अभिप्रेरण Or प्रेरणा Motivation

अभिप्रेरणा का अर्थ Meaning of Motivation प्रेरणा या अभिप्रेरणा या अभिप्रेरण शब्द का प्रचलन अंग्रेजी भाषा के मोटीवेशन Motivation के समानार्थी के रूप में होता है। ‘मोटीवेशन’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के मोटम धातु से हुई है, जिसका अर्थ मूव या इन्साइट टु ऐक्सन होता है। अतः प्रेरणा एक संक्रिया है, जो जीव को … Read more

raat ka paryayvachi shabd

रात’ शब्द का अन्य पर्याय है- रात्रि, रैन, रजनी, यामिनी, तमी, निशि, यामा, विभावरी raat ka paryayvachi shabd raat ka paryayvachi shabd in hindi raat ka paryayvachi shabd hindi mein संख्या  संस्कृत शब्द English Word 1. रात्रि  Ratri 2. निशा  Nisha 3. रजनी  Rajni 4. यामा  Yama 5. निशि  Nishi 6. कादंबरी  Kadambari 7. त्रियामा  Triyama … Read more

Abhiprerit karne ki vidhiyanअभिप्रेरित करने की विधियाँ अभिप्रेरणा की विधियाँ

अभिप्रेरणा की विधियाँ Methods ofMotivating कक्षा शिक्षण में अभिप्रेरणा का अत्यन्त महत्त्व है। कक्षा में पढ़ने के लिये विद्यार्थियों को निरन्तर प्रेरित किया जाना चाहिये। प्रेरणा की प्रक्रिया में वे अनेक कार्य करते हैं, जिसके फलस्वरूप विभिन्न छात्रों का व्यवहार भिन्न होता जाता है; उदाहरणार्थ- सामाजिक तथा आर्थिक अवस्थाएँ, पूर्व अनुभव, आयु तथा कक्षा का … Read more

सुभाषितानि (Eloquently) – षोडशः पाठः (16)

मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुनिश्चितम्।दाम्पत्योः कलहो नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।। 1 ।। कुग्रामवासः कुलहीनसेवा कुभोजनं क्रोधमुखी च भार्या।पुत्रश्च मूर्खो विधवा च कन्या विनाऽग्निना षट् प्रदहन्ति कायम् ॥12॥ अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यावबान्धवः ।मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्या दरिद्रता ||3|| अभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम् ।दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम् ॥4॥ त्यजेद्धर्म दयाहीनं … Read more

Abhiprerna ke Siddhant अभिप्रेरणा के सिद्धान्त Principles of Motivation

अभिप्रेरणा के सिद्धान्त अभिप्रेरणा एक लक्ष्य आधारित व्यवहार का उत्प्रेरण या ऊर्जाकरण है। प्रेरणा या अभिप्रेरणा या अभिप्रेरण आंतरिक या बाह्य दो प्रकार की हो सकती है। विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार, बुनियादी ज़रूरतों में शारीरिक दुःख-दर्द को कम करने और जीवन को आनंदमय बनाने के मूल में अभिप्रेरणा हो सकती अभिप्रेरणा में खान-पान, भोग-विलास और … Read more

Sikhane ki prakriya सीखने की प्रक्रिया में अभिप्रेरणा की भूमिका

सीखने की प्रक्रिया में अभिप्रेरणा की भूमिका अभिप्रेरणा सीखने की प्रक्रिया का एक सशक्त माध्यम है। अधिगम प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति जीवन के सामाजिक, प्राकृतिक एवं वैयक्तिक क्षेत्र में अभिप्रेरणा द्वारा ही सफलता की सीढ़ी तक पहुँच पाता है। यदि उसके लिये उपयुक्त परिस्थितियों का निर्माण नहीं हो पाता तो अभिप्रेरणा का उत्पन्न होना सन्देहप्रद रह … Read more

ज्ञान-मंदाकिनी (Knowledge Bank) – पञ्चदश: पाठः

पुस्तके चित्रेषु, दूरवीक्ष्पपटलेषु चित्रपटेषु वा वयं वनगर्दभं पश्यामः। अयं गर्दभः कृष्णश्वेतश्च पट्टिकासु दृश्यते। वस्तुतः वनगर्दभः श्वेतवर्णः भवति। अस्य वर्णस्योपरि कृष्णपट्टिकाः विराजन्ति । अनेन कारणेन सः कृष्णश्वेतवर्णो दृश्यते।उष्ट्रकुक्कुटस्य अण्ड: अनुमानतः त्रिपौण्ड परिमितं भवति । अंडस्खलिते यदा तस्मात् शावकः निर्गच्छति तस्मिन् काले स कुक्कुयाकृतिः इव भवति । सामान्यतः त्रिवर्षोपरान्ते सः स्वपूर्णावस्थां प्राप्नोति ।मशकाः अन्योन्याः वर्णोंपेक्षा नीलवर्णं प्रति … Read more

चतुर्दशः पाठः

समाश्वसितुं समाश्वसितु भट्टिनी! सहदेवः – [Possibilities आत्मगतम्] अये, कथं याज्ञसेनीमुहुरुपपचीयमानः वाष्पपटलस्थगितनयना आर्य समीपमुपसर्पति। तत् कष्टतरामापतितम्।[ततः प्रविशति यथानिर्दिष्टा द्रोपदी चेटी च][ द्रोपदी साम्रं निःश्वसि ] चेटी – समाश्वसितुं समाश्वसितुं भट्टिनी। अपनेष्यति ते मन्यु नित्यानुबद्धकुरुबैर: कुमारो भीमसेन:। द्रौपदी – हञ्जे बुद्धिमतिके! भवेत्येतद्यदि महाराजः प्रतिकुलो न भवेत्। तन्नाथं प्रशितुं त्वरते में हृदयम्। दादेशय मे नाथस्य वासभवनम् । [इति … Read more

शत्रुतायाः रहस्यम् (Secret of Enmity) – त्रयोदश: पाठः (13)

इयं कथा तस्य समयस्यासीत् यदा सर्वे पशवः मैत्रीपूर्वकं अवसन्। एकदा चैकस्मिन्नवसरे कुक्कुरश्चान्यनगस्थान् कुक्कुरान् आमन्त्रितम् अकुर्वन्। जातिगतसंबंधेन कुक्कुराणां तत्र गमनमावश्यकं सञ्जातं किन्तु तेषां पार्श्वे महत्त्वपूर्णानि कर्गजान्यासन्। सुरक्षिते स्थाने निक्षिप्य ते गन्तुमैच्छन् परं कुत्रास्ति तत् सुरक्षित स्थानम्? सर्वे विचारमग्ना संजाताः । कश्चित् कुक्कुरोऽवदत्-” वयमस्मिनजीर्णे मन्दिरे कर्गजानि निक्षिप्य गच्छामः।” अन्ये प्रोचुः–“नैतत्कर्तुं शक्यते यत्कोऽपि रहस्यमेतद् विजानीयात्?” द्वितीयः अवदत्-” श्रेष्ठिन् … Read more

Maslo ka pyramid मास्लो का पिरामिड मानव आवश्यकताएँ Maslow’s Pyramid

‘मास्लो का पिरामिड’ अब्राहम मास्लो द्वारा प्रतिपादित एक मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त है जो उन्होने ‘A Theory of Human Motivation’ नामक अपने ग्रन्थ में 1954 में प्रस्तुत किया था। मैसलो वह प्रथम मनोवैज्ञानिक है, जिसने आत्मसिद्धि प्रत्यय का अध्ययन किया। मास्लो के सिद्धान्त न केवल मनोविज्ञान के क्षेत्र में, बल्कि अध्यापन के क्षेत्र में भी प्रसिद्ध हुए … Read more

Dhyan avdharna ध्यान-अवधारणा, परिभाषा,अर्थ, विशेषताएँ, प्रक्रिया

ध्यान Meditation ध्यान एक ऐसी मानसिक प्रक्रिया है जिसमें आध्यात्मिक एवं भौतिक विकास हेतु मन की स्थिरता एवं एकाग्रता का विकास किया जाता है जिससे व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ दृष्टिगोचर होता है। प्राथमिक स्तर पर ध्यान की अवधारणा Concept of Meditation at Primary Level मन के द्वारा व्यक्ति अनेक प्रकार के मोह … Read more

Ruchi ki arth paribhasha रुचि – रुचि का अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार, कारक

रुचि का अर्थ एवं परिभाषाएँMeaning and Definitions of Interest ‘रुचि’ शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘INTEREST’ का हिन्दी समानान्तर शब्द है। Interest की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘INTERESSE’ से हुई है। इसका तात्पर्य है – अन्तर स्थापित करना, महत्त्वपूर्ण होना और लगाव होना । अत: शब्दार्थ के आधार पर हम कह सकते हैं कि रुचि … Read more

Vibhinn samitiyon ke sadasyon ka abhipreran विभिन्न समितियों के सदस्यों का अभिप्रेरण

सीखने-सिखाने तथा विद्यालयी व्यवस्था के सन्दर्भ में समुदाय, ग्राम शिक्षा समिति, विद्यालय प्रबन्ध समिति तथा अन्य विद्यालयी समितियों के सदस्यों का अभिप्रेरण. विभिन्न समितियों के सदस्यों का अभिप्रेरण वर्तमान समय में सरकार द्वारा शिक्षा में सुधार एवं अभिभावकों की सन्तुष्टि हेतु शिक्षा समिति एवं विद्यालय प्रबन्ध समितियों का गठन किया है। इन समितियों के गठन … Read more

सर्वनाम शब्द रूप-किम् (क्या/कौन) sarvnaam shabd roop-kim (kya/kaun)

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा क: कौ के द्वितीया कम् कौ कान् तृतीया केन काभ्याम् कै: चतुर्थी कस्मै काभ्याम् केभ्यः पञ्चमी कस्मात् काभ्याम् केभ्यः षष्ठी कस्य कयो: केषाम् सप्तमी कस्मिन् कयो: केषु सर्वनाम शब्द रूप-किम् (क्या/कौन) – लिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा का के का: द्वितीया काम् के का: तृतीया कया काभ्याम् काभिः चतुर्थी … Read more

सर्वनाम शब्द रूप – तत् (वह) – Sarvnaam Shabd Roop – Tat (vah)

विभक्ति एकवचन द्वितीया बहुवचन प्रथमा सः तौ ते द्वितीया तम् तौ तान् तृतीया तेन ताभ्याम् तै: चतुर्थी तस्मै ताभ्याम् तेभ्यः पञ्चमी तस्य ताभ्याम् तेभ्यः षष्ठी तस्य तयोः तेषाम् सप्तमी तस्मिन् तयोः तेषु सर्वनाम शब्द रूप – तत् ( वह ) – लिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा सा ते ता: द्वितीया ताम् ते ता: तृतीया … Read more

सर्वनाम शब्द रूप- अस्मद् (मैं) – लिङ्ग-तीनों लिंगों में – Sarvnaam Shabd Roop-Asmad (mai) lingd-teeno lingo me

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा अहम् आवाम् वयम् द्वितीया माम्, मा आवाम्,नौ अस्मान्,नः तृतीया मया आवाभ्याम् अस्माभिः चतुर्थी मह्यम,मे आवाभ्याम्, नौ अस्मभ्यम्, नः पञ्चमी मत् आवाभ्याम् अस्मत् षष्ठी मम,मे आवयोः,नौ अस्माकम्, नः सप्तमी मयि आवयोः अस्मासु

सर्वनाम शब्द रूप- युष्मद् (तू) – Sarvnaam Shabd Roop Yushmad (Tu) – लिङ्ग-तीनों लिङ्गों में

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा त्वम् युवाम् यूयम् द्वितीया त्वाम्,त्वा युवाम्, वाम् युष्मान्, वः तृतीया त्वया युवाभ्याम् युष्माभिः चतुर्थी तुभ्यम्, ते युवाभ्याम्, वाम् युष्मभ्यम्, वः पञ्चमी त्वत् युवाभ्याम् युष्मत् षष्ठी तव, ते युवायोः, वाम् युष्माकम्, वः सप्तमी त्वयि युवायोः युष्मासु

आत्मन् (आत्मा) अन्नन्त का शब्द रूप – Aatman (aatma) annant ka Shabd Roop

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा आत्मा आत्मानौ आत्मानः द्वितीया आत्मानम् आत्मानौ आत्मनः तृतीया आत्मना आत्मभ्याम् आत्मभिः चतुर्थी आत्मने आत्मभ्याम् आत्मभ्यः पञ्चमी आत्मनः आत्मभ्याम् आत्मभ्यः षष्ठी आत्मनः आत्मनोः आत्मनाम् सप्तमी आत्मनि आत्मनोः आत्मसु सम्बोधन हे आत्मन्! हे आत्मनौ! हे आत्मानः!

भगवत् (भगवान) का शब्द रूप – तकारान्त – लिङ्ग-पुंल्लिङ्ग – Bhagwat (Bhagwan) ka shabd roop – Takarant – Ligd Punllindg

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा भगवान् भगवन्तौ भगवन्तः द्वितीया भगवन्तम् भगवन्तौ भगवन्तः तृतीया भगवता भगवद्भ्याम् भगवद्भिः चतुर्थी भगवते भगवद्भ्याम् भगवद्भ्यः पञ्चमी भगवतः भगवद्भ्याम् भगवद्भ्यः षष्ठी भगवत भगवतो: भगवताम् सप्तमी भगवति भगवतो: भगवत्सु सम्बोधन हे भगवन्! हे भगवन्तौ! हे भगवन्तः !

कर्तृ (करने वाला) का शब्द रूप – (ऋकारान्त) – लिङ्ग-पुल्लिङ्ग – Karit (karne wala) ka shabd roop – (Rikarant) – Ligd-pulligd

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा कर्ता कर्तारौ कर्तरि: द्वितीया कर्तारम् कर्तारौ कर्तृन् तृतीया कर्त्रा कर्तृभ्याम् कर्तृभिः चतुर्थी कर्त्रे कर्तृभ्याम् कर्तृभ्यः पञ्चमी कर्तुः कर्तृभ्याम् कर्तृभ्यः षष्ठी कर्तुः कर्त्रीः कर्तृणाम् सप्तमी कर्तरि कर्त्रीः कर्तृषु सम्बोधन हे कर्त:! हे कतरौ! हे कर्तारः!

गुरु का शब्द रूप (उकारान्त) – लिङ्ग-पुंल्लिङ्ग – Guru Ka Shabd Roop Ukarant Ligd Pullingd

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा गुरु: गुरू गुरवः द्वितीया गुरुम् गुरू गुरून् तृतीया गुरुणा गुरूभ्याम् गुरुभिः चतुर्थी गुरवे गुरूभ्याम् गुरुभ्यः पञ्चमी गुरो: गुरूभ्याम् गुरुभ्यः षष्ठी गुरो: गुवः गुरूणाम् सप्तमी गुरौ गुवः गुरुषु सम्बोधन हे गुरो ! हे गुरू ! हे गुरवः !

पितृ (पिता) का शब्द रूप (ऋकारान्त) – Pitr Ka Shabd Roop – Rikarant – लिङ्ग-पुँल्लिङ्ग

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा पिता पितरौ पितरः द्वितीया पितरम् पितरौ पितॄन् तृतीया पित्रा पितृभ्याम् पितृभिः चतुर्थी पित्रे पितृभ्याम् पितृभ्यः पञ्चमी पितुः पितृभ्याम् पितृभ्यः षष्ठी पितुः पित्रोः पितॄणाम् सप्तमी पितरि पित्रोः पितृषु सम्बोधन हे पितः! हे पितरौ ! हे पितरः !

नदी का रूप-शब्द (ईकारान्त) – लिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग – Nadi Ka Shabd Roop (Ikarant) – Lindg- Strilidg

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहवचन प्रथमा नदी नद्यौ नद्यः द्वितीया नदीम् नद्यौ नदी तृतीया नद्या नदीभ्याम् नदीभिः चतुर्थी नद्यै नदीभ्याम् नदीभ्यः पञ्चमी नद्या: नदीभ्याम् नदीभ्यः षष्ठी नद्या: नद्योः नदीनाम् सप्तमी नद्याम् नद्योः नदीषु सम्बोधन हे नदि! हे नद्यौ ! हे नद्यः!

मति (बुद्धि) का शब्द रूप – (इकारान्त) – लिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग Mati (Budhhi) Ka shabd roop (Ikarant) – Lingd-strilid

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा मतिः मती मतयः द्वितीया मतिम् मती मतीः तृतीया मत्या मतिभ्याम् मतिभिः चतुर्थी मत्यै,मतये मतिभ्याम् मतिभ्यः पञ्चमी मत्याः,मते मतिभ्याम् मतिभ्यः षष्ठी मत्याः,मते मत्योः मतीनाम् सप्तमी मत्याम्,मतौ मत्योः मतिषु सम्बोधन हे मते! हे मती! हे मतयः!

Smriti Arth paribhasha स्मृति – अर्थ एवं परिभाषा, प्रकार, अंग, विशेषताएँ, नियम

Meaning and Definitions of Memory स्मृति का अर्थ एवं परिभाषाएँ स्मृति एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है। हमारे व्यावहारिक जीवन में अनेक प्रकार की घटनाएँ घटित होती हैं, जब हम किसी वस्तु को छूते, देखते, सुनते या सूंघते हैं तब ‘ज्ञानवाहक तन्तु’ उस अनुभव को मस्तिष्क के ज्ञान केन्द्र में पहुँचा देते हैं। ‘ज्ञान केन्द्र’ में … Read more

सखि (मित्र) का शब्द रूप – इकारान्त Sakhi (Mitr) ka shabd roop – Ikarant – लिङ्ग-पुंल्लिङ्ग

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा सखा सखायौ सखायः द्वितीया सखायम् सखायौ सखीन् तृतीया सख्या सखिभ्याम् सखिभिः चतुर्थी सख्ये सखिभ्याम् सखिभ्यः पञ्चमी सख्युः सखिभ्याम् सखिभ्यः षष्ठी सख्युः सखायोः सखीनाम् सप्तमी सख्यौ सखायोः सखिषु सम्बोधन हे सखे! हे सखायौ! हे सखायः! सूचना-सखि शब्द के तुल्य और कोई शब्द नहीं चलता है।

हरि (विष्णु) का शब्द रूप (इकारान्त) – Hari (Vishnu) ka shabd roop (Ikarant) लिङ्ग-पुंल्लिङ्ग

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा हरि: हरी हरयः द्वितीया हरिम् हरी हरीन तृतीया हरिणा हरिभ्याम् हरिभिः चतुर्थी हरये हरिभ्याम् हरिभ्यः पञ्चमी हरे: हरिभ्याम् हरिभ्यः षष्ठी हरे: हर्योः हरीणाम् सप्तमी हरौ हर्योः हरिषु सम्बोधन हे हरे ! हे हरी ! हे हरयः!

शिक्षा का शब्द-रूप (आकारान्त) – Shiksha ka Shabd roop (Aakarnt) – लिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा शिक्षा शिक्षे शिक्षा: द्वितीया शिक्षाम् शिक्षे शिक्षा: तृतीया शिक्षया शिक्षाभ्याम् शिक्षाभिः चतुर्थी शिक्षायै शिक्षाभ्याम् शिक्षाभ्यः पञ्चमी शिक्षायाः शिक्षाभ्याम् शिक्षाभ्यः षष्ठी शिक्षायाः शिक्षयोः शिक्षानाम् सप्तमी शिक्षायाम् शिक्षयोः शिक्षासु सम्बोधन हे शिक्षे! हे शिक्षे! हे शिक्षा: !

फल का शब्द रूप (अकारान्त) – Fal ka Shabd roop (Akarant) – लिङ्ग-नपुंसकलिङ्ग

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा फलम् फले फलानि द्वितीया फलम् फले फलानि तृतीया फलेन फलाभ्याम् फलैः चतुर्थी फलाय फलाभ्याम् फलेभ्यः पञ्चमी फलात् फलाभ्याम् फलेभ्यः षष्ठी फलस्य फलयोः फलानाम् सप्तमी फले फलयोः फलेषु

शब्द रूप (Word form) – द्वितीयः भागः परिशिष्ठ वीथिका

सज्जन का शब्द-रूप –(अकारान्त) – लिङ्ग-पुंल्लिङ्ग विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा सज्जन: सज्जनौ सज्जना: द्वितीया सज्जनम् सज्जनौ सज्जनान् तृतीया सज्जनेन सज्जनाभ्याम् सज्जनैः चतुर्थी सज्जनाय सज्जनाभ्याम् सज्जनेभ्यः पञ्चमी सज्जनात् सज्जनाभ्याम् सज्जनेभ्यः षष्ठी सज्जनस्य सज्जनयोः सज्जनानाम् सप्तमी सज्जने सज्जनयोः सज्जनेषु सम्बोधन हे सज्जन ! हे सज्जनौ ! हे सज्जनाः!

Vismrit avdharna विस्मृति-अवधारणा, अर्थ.परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार

विस्मृति की अवधारणा एवं अर्थ Concept and Meaning of Forgetting किसी सीखी हुई वस्तु को स्मरण न कर सकना, विस्मृति कहलाती है। हमारे जीवन में अनेक ऐसी बातें हैं जिन्हें हम भूल जाते हैं। मनुष्य के सफल जीवन के लिये स्मृति जितनी आवश्यक है विस्मृति भी उतनी ही आवश्यक है।हम बता चुके हैं कि अच्छी … Read more

दुर्जनलक्षणानि (Signs of the Vicious) – द्वादश: पाठ (12)

साधकतमं करणम् जिसकी सहायता से कोई कार्यकिया जाता है वहाँ तृतीया विभक्ति प्रयोग होती है। पाठ में पञ्चहस्तेन, दशहस्तेन आदि का प्रयोग दूरी नापने में हाथ परिमाण किया है। अतः यहाँ तृतीया विभक्ति का प्रयोग है। शकटं पञ्चहस्तेन दशहस्तेन वाजिनम्। हस्तिनं शतहस्तेन देशत्यागेन दुर्जनम्।।1।। हस्ती अंकुशहस्तेन वाजी हस्तेन ताडयते। श्रृंगी लगुडहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः।।2।। तुष्यन्ति भोजने … Read more

Chhatra shikshak tatha shikshan mein sambandh छात्र, शिक्षक तथा शिक्षण में सम्बन्ध

छात्र, शिक्षक तथा शिक्षण में सम्बन्ध शिक्षण की प्रकृति, प्रक्रिया तथा उद्देश्यों को समझने की दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि वास्तव में शिक्षण क्या है और क्या नहीं?किसी बात को जानने मात्र से व्यवहार में वांछित परिवर्तन कभी भी नहीं आता, क्योंकि सीखते तो पशु-पक्षी भी हैं। उनके भी देखने, सुनने आदि से … Read more

Shikshan ki visheshtaen शिक्षण की विशेषताएँ Characteristics of Teaching

शिक्षण की विशेषताएँ शिक्षण की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं। इनमें अनेक का वर्णन योकम तथा सिम्पसन ने अपनी पुस्तक Modern and Techniques of Teaching .में भी किया है- 1.वांछनीय सूचना देना Providing of desirable information. सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव का ज्ञान भी निरन्तर बढ़ता जा रहा है। यह सब कुछ हमने प्रयास और त्रुटि … Read more

निर्धनस्य पणः (Wealth of the Poor) – दशमः पाठः (10)

काठिन्य निवारणम् (क) विभिन्नधातु निर्मिताऽऽसीत् विभिन्नानां धात्वानां निर्मिता आसीत्(ख) मूर्तेबक्षस्थलोपरि मूर्ते: वक्षस्थलस्य उपरि(ग) स्वशिष्यानाहू यस्वान् शिष्यान् आहय चीनदेशे चांग चू नामकश्चैकः प्रदेशोऽस्ति।तस्मिन् प्रदेशे ताओलिन हसिनःविभिन्नानां धात्वानां निर्मिता आसीत् नामकमेकं स्थानम् अस्ति। अस्मिन् स्थाने परिचीनदेशस्यभगवतः बुद्धस्य विशालमेकंमूर्तिरिय मन्दिरमस्ति । सुरम्ये मन्दिरे भगवतो मूर्ति: सुन्दरतरा, विभिन्नधातुर्निर्मितासीत्। यदा कोऽपि दर्शनार्थम् आगच्छति मूर्ते हस्तयो: पुष्पाणि समर्पयति स्म।लघुतमः पुण: ‘कैश’स्पष्ट-रूपेणांकित: … Read more

मानवतायाः परिचयः (Introduction to Humanity) – एकादशः पाठः (11)

काठिन्य निवारणम्किञ्चिदकालान्तरम् – वृद्धश्चाश्चर्यचकिताः – वृद्धः च आश्चर्यचकिता किञ्चित्कालानन्तरं – किंचित् कालस्य अनन्तरम् तददर्शनानतरमेवाहम् – तत् दर्शनस्य अनन्तरम् एवं अहम्पितरमतिथेरिच्छा विषये – पित्रस्य अतिथिम् इच्छायाः विषये। सक्खरनामके नगरे धनिकश्चैको अवसत्। तस्य पार्श्वे वहवः प्रसादाः सेवार्थं भृत्याश्चासन्। तज्जीवने कस्यापि वस्तुना न्यूनता नासीत्। अश्वमारुह्य सः प्रासादात्प्रासाद व्यचरत् एकदा रात्रौ यदा सः प्रासादपार्श्वे पर्यटन्नास्ते तदा समागच्छतं वृद्धमेकं ददर्श … Read more

दीपमालिकोत्सवः (Festival of Deepawali) – नवम: पाठ: (9)

समुद्रमंथने लोक के कल्याण के लिए सुर और असुरों ने शेष नाग को रस्सी बनाकर, मंदारपर्वत को मथनी बनाकर समुद्र का मंथन किया था। जिससे विष, लक्ष्मी, अमृत आदि चौदह रत्न निकले थे जिससे इस श्लोक से जाना जा सकता है- लक्ष्मी: कौस्तुभ पारिजातकसुरा, धनवन्तरिश्च चन्द्रमा ।गावः कामदुधा सुरेश्वरगजो, रम्भादि देवांगना।अश्व सप्तमुखो विषं हरिधनुः शंखोऽमृतं … Read more

नीतिवचनानि(Moral Behaviour) – अष्टमः पाठः (8)

परिशिष्टसंबंध कारक-कोकिलानां स्वरो रूपं (भवति) – संबंध – पष्ठी विभक्तिGenitive caseसंबंध-जो वाक्य में आई दो संज्ञाओं संबंध बताइये। ( That which denotes relationship betweentwo nouns in a sentence.) यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिः च बान्धवाः ।न च विद्यागमः कश्चित् तं देशं परिवर्जयेत्।।1।। आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसंकटे ।राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः ।।2।। … Read more

Shiksha aur shikshan mein antar शिक्षा और शिक्षण में अन्तर Distinction-between Education and Teaching

शिक्षा का व्यापक अर्थ विकास की प्रक्रिया से लिया जाता है। यह प्रक्रिया शैशवावस्था से प्रौढ़ावस्था तक चलती रहती है। शिक्षा एक ऐसे अनुकूलन की क्रिया समझी जाती जो शारीरिक तथा मानसिक रूप से विकसित मानव का ईश्वर के साथ व्यवस्थापन करने में उसकी सहायता करती है किन्तु शिक्षा Education शिक्षण Teaching से भिन्न है। … Read more

Shikshan prakriya sopan शिक्षण प्रक्रिया सोपान,द्विध्रुवीय, त्रिध्रुवीय, सफल शिक्षण

शिक्षण प्रक्रिया Teaching Process हम यह भलीभाँति जानते हैं कि कार्य कोई भी क्यों न हो उसे पूर्ण करने की एक अपनी ही विधि या विधियाँ होती हैं। चूँकि शिक्षण भी एक कार्य है। अतः उसे सम्पन्न करने की भी विद्यार्थियों की आयु तथा वातावरणीय परिस्थितियों आदि को ध्यान में रखते हुए एक नहीं कई … Read more

Shikshan prakriya ke sopan शिक्षण प्रक्रिया के सोपान Steps of Teaching Process

शिक्षण प्रक्रिया के सोपान Steps of Teaching Process समूची शिक्षण प्रक्रिया के अग्रलिखित तीन सोपान हो सकते हैं- .1.शिक्षण पूर्व चिन्तन एवं तैयारी . इसके अन्तर्गत निम्नलिखित बातें आती हैं:- 1 उद्देश्य निर्धारण Deciding the objectives 2.विषयवस्तु का चयन यदि पूर्व निर्धारित नहीं है तोDeciding the contents, if not pre-decided 3.शिक्षण-विधि, युक्तियों तथा तकनीकों का … Read more

व्याकरणम् (Grammar) – परिशिष्ट वीथिका प्रथमः भागः

कारक विभक्ति कारक कारक चिन्ह प्रथमा कर्त्ता ने द्वितीया कर्म को तृतीया करण से, के द्वारा चतुर्थी सम्प्रदान के लिए, को पञ्चमी अपादान से(अलग होने में) षष्ठी संबंध का, की, के, रा, री, रे, ना, नी, ने सप्तमी अधिकरण में, पर, ऊपर सम्बोधन संबोधन हे, अरे, भो प्रत्ययबोध क्त्वा, तुमुन् और ल्यप् प्रत्यय धातुओं में … Read more

मनसश्चेन्द्रजालम् (द्वितीयो भागः )(Magic of Mind -Part II) – सप्तमः पाठः (7)

[पूर्वकथा–पेरुदेशस्य नृपेन हुलाचीं संदेशप्रेषणे विलम्बेन कारणेन देशात् निर्वासनं कृतम्। बुभुक्षितः हुलाची उटजमेकमपश्यत्। सः तम् उटजे ताम् वृद्धाम् अपश्यत् यस्याः अवसरमेकं सहायतां कृतम्। सा वृद्धा तां भोजनं प्रेषयत्।] परिशिष्ट अधिकरण कारक- विलम्बे संजाते नृपः तम् अदण्डयत्। अधिकरण – सप्तमी विभक्तिLocative case अधिकरण – वाक्य में आई क्रिया का आधार (That which forms the location of the … Read more

मनसश्चेन्द्रजालम् (प्रथमो भागः )(Magic of Mind (Part-1) – षष्ठ: पाठ: (6)

परिशिष्ट – सम्प्रदान कारक – राजा तस्मै बहुक्रोधम् कृतः सम्प्रदान → चतुर्थी विभक्तिDative case सम्प्रदान- जिसके लिए क्रिया उत्पन्न हो। (That for which/whom the action is done.) पुरा पेरूदेशे एकः शक्तिशाली राजा राज्यमकरोत्। सुदूरं यावत् तस्य साम्राज्यं प्रसृतमासीत्। सन्देशवाहकाः राजद्वारमागत्य सर्वं वृत्तमसूचयन्। हुलाचीनामकश्चरो राज्ञो विश्वासपात्रमासीत्। वीरोऽयं हुलाची दयालुश्चासीत्। मार्गे सः यदा दीनान् अपश्यत् तदा तेषां … Read more

एकेनापि (Only one) – पञ्चमः पाठः (5)

परिशिष्ट करण कारक- एकेनापि सपत्रेण सिंही निर्भयं स्वपिति।करण (साधन) – तृतीया विभक्तिInstrumental caseकरण– वह साधन जिसकी सहायता से क्रिया सम्पन्न हो (That which helps in the accomplishment of action.) एकेनापि सुपुत्रेण सिंही स्वपति निर्भयम्।ततस्तु दशभिः पुत्रैः भारं वहति रासभी।।1।। वरमेको गुणीपुत्रो न च मूर्ख शतान्यपि । एकश्चन्द्रः तमो हन्ति न च तारागणोऽपि ।।2।। एकेनापि सुवृक्षेण … Read more

Shikshan ki prakriti शिक्षण की प्रकृति – Nature of Teaching

Nature of Teaching शिक्षण की प्रकृति शिक्षण की अवधारणा तथा अर्थ के सम्बन्ध में जो कुछ भी कहा गया, उसे ध्यान में रखते हुए शिक्षण की प्रकृति (Nature) के सम्बन्ध में यही कहा जा सकता है कि:- 1.शिक्षण एक कला An Art है तो विज्ञान Science भी यह बात सुनने में थोड़ी अटपटी अवश्य लगती … Read more

Bi-polar orTripolar Teaching द्विध्रुवीय अथवा त्रिध्रुवीय शिक्षण

द्विध्रुवीय अथवा त्रिध्रुवीय शिक्षण जॉन एडम्स John Adams के अनुसार, “Education is a bi-polar system.” अर्थात् शिक्षा एक द्विध्रुवीय प्रक्रिया है। एडम्स के अनुसार शिक्षा के ये दो ध्रुव हैं- शिक्षक The teacher तथा शिक्ष्य अथवा शिक्षार्थी The educand Iमाना कि शिक्षा के सजीव ध्रुव ये दो ही हैं, परन्तु साथ ही इस बात पर … Read more

नारिकेल कृषिः (Farming of Coconut) – चतुर्थः पाठः (4)

एकदा कैलासवासी भगवान् शिवश्चाम्बया पार्वत्या सह समुद्रयात्रां कुर्वन् द्वावेव द्वीपतटे विहरन् लोमोलोमोद्वीपमनुप्राप्तः । द्वीपेऽस्मिन्-कश्चिदनाथो युवको अवसत् तिमोदी नाम। सोऽतीव निर्धनश्चासीत्। समुद्रात् मत्स्यानानीय पर्वतेभ्यः कन्दमूलफलान्यादाय सः स्वोदरं प्रपूरयति स्म। तिमोदी गभीरे समुद्रे महता कौशलेन नावमचालयत्। फिजीद्वीपस्य न कोऽपि नाविकः नावसंचालने तत्समः । परिशिष्ट→कर्म कारक- सः स्वोदरं प्रपूरयति स्म। कर्म -द्वितीया विभक्ति Accusative case कर्म – जिस … Read more

हास्यकथा (The Story of Mirth) तृतीयः पाठः (3)

परिशिष्टकर्ता कारक अजां दृष्ट्वा व्यवहारी आश्चर्यचकिताः अभवत्।कर्ता-प्रथमा विभक्ति →Nominative case कर्ता – वाक्य में आई क्रिया को करने वाला। That who is doing the saction.एकदा वोहारिया नाम कश्चिन्नरो यात्रां कुर्वन् कूपपार्श्वमगच्छत्। जलमानेतुं यावत्सः कूपसमीपमागच्छति तावत्सः कूपाभ्यन्तरात् अजाशब्दम श्रृणोत्। यावत् सः कूपेअजां दृष्ट्वा व्यवहारी दृष्टिपातमकरोत्तावदजामेकामपश्यत्। शुष्कप्रायऽस्मिन् कूपे यत्किञ्चिज्जलमास्ते । वोहारिया अजाकटिप्रदेशे रज्जुमायोज्य बहिर्निष्कासनाय यत्नमकरोत्। तदैव कश्चित् … Read more

रात्रिभोजम् (The Supper) – द्वितीयः पाठः (2)

(अधुना अष्टवादनसमयम् अस्ति, इदम् रात्रिभोजस्य समयम् अस्ति।) माता – सामी रिया च आगच्छताम् । इदं रात्रिभोजसमयम्। प्रक्षाल्यतु स्वहस्तान् शीघ्रमेव । सामी – मातुः अद्यः त्वं किं पच ? माता – अत्रैव तत् वस्तु यत् युवाभ्यां रोचते। भवन्तौ अनुमान्यताम् ? सामी – पनीरम् मुण्डचणकः वा । रिया – भर्जतः कारवेल्लकः वा। पिता – इमे द्वै अपि। … Read more

वंदना – (Prayer) – प्रथम: पाठ: (1)

यस्मिन् देशे य आचार: पारम्पर्यक्रमागतः। वर्णानां सान्तरालानां स सदाचार उच्चते।।1।। प्रातःकाले त्यजेच्छय्यामीश्वरं प्रथमं स्मरेत्। नित्यकर्माणि कृत्वा च कुर्यादध्ययनं ततः।।2।। सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः।।3।। सर्वदा व्यवहारे स्यात् औदार्यं सत्यता तथा। ऋजुता मृदुता चापि कौटिल्यं न कदाचन ।।4।। श्रेष्ठं जनं गुरुं चापि मातरं पितरं तथा। मनसा कर्मणा … Read more

श्लोक संस्कृत की पाठ्यपुस्तक – कक्षा-8 – Shlok Sanskrit ki Pathypustak – Class -8

विषय-सूची प्रथमः पाठः वंदना (Prayer) द्वितीयः पाठः रात्रिभोजम् (The Supper) तृतीयः पाठः हास्यकथा (The Story of Mirth) चतुर्थः पाठः नारिकेल- कृषि: (Farming of Coconut) पंञ्चमः पाठः एकेनापि (Only One) षष्ठः पाठ: मनसश्चैन्द्रजालम् (प्रथमो भागः) (Magic of Mind (Part I) सप्तमः पाठः मनसश्चेन्द्रजालम (द्वितीयो भागः)(Magic of Mind (Part II) परिशिष्ट-वीथिका-प्रथमः भागः व्याकरणम् (Grammar) अष्टमः पाठः नीतिवचनानि … Read more

Sampreshan ke uddeshy सम्प्रेषण का उद्देश्य – Aims of Communication

सम्प्रेषण का उद्देश्य सम्प्रेषण मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं, उद्वेगों और अर्न्तद्वन्द्वों को प्रकाशित न कर सके तो वह मानसिक सन्तुलन खो बैठता है। अतः सम्प्रेषण मानसिक सन्तुलन और शान्ति के लिये भी आवश्यक है। सम्प्रेषण के उद्देश्य निम्नलिखित हैं: 1. सम्प्रेषण का उद्देश्य है भावों के आदान-प्रदान द्वारा … Read more

Sampreshan ke Siddhant सम्प्रेषण के सिद्धांत Principles of Communication

सम्प्रेषण के सिद्धांत कोई भी व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं या किसी सम्प्रत्यय को किसी दूसरे व्यक्ति से व्यक्त करता है। अतः सम्प्रेषण द्विपक्षीय प्रक्रिया Two way process है। सम्प्रेषण के मुख्य सिद्धान्त निम्नलिखित हैं:- 1.सजगता का सिद्धान्त Principle and activeness सम्प्रेषण कर्त्ता Communicator और सम्प्रेषण ग्रहण करने वाला व्यक्ति Receiver सम्प्रेषण क्रिया के समय सजग … Read more

Sampreshan ki prakriya tatv AVN sampreshan ke madhyam सम्प्रेषण की प्रक्रिया, तत्त्व एवं सम्प्रेषण के माध्यम

सम्प्रेषण की प्रक्रिया Process ofCommunication मानव एक सामाजिक प्राणी है जो समाज में रहकर अपना जीवन व्यतीत करता है। सम्प्रेषण भी एक सामाजिक प्रक्रिया है। सम्प्रेषण की प्रक्रिया एक पक्षीय न होकर दो पक्षीय या बहुपक्षीय प्रक्रिया है। इसमें एक पक्ष अपने विचारों तथा भावों का दूसरे पक्ष को आदान-प्रदान करता है। अतः सम्प्रेषण की … Read more

Sampreshan ka mahatva sampreshan ki prakriti सम्प्रेषण का महत्त्व, सम्प्रेषण की प्रकृति एवं विशेषताएँ

Importance of Communication सम्प्रेषण का महत्त्व सम्प्रेषण प्रशासन का महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है। किसी संगठन का कार्य करने के लिये सम्प्रेषण होना आवश्यक है। यदि संगठन की पूरी जानकारी होगी तो उसमें रुचि होगी और लगाव भी होगा। शोध कार्य से पता चलता है कि संगठन का सफल संचालन तभी होता है जब उसमें काम करने … Read more

Sampreshan ki vidhiyan सम्प्रेषण की विधियाँ – शाब्दिक सम्प्रेषण, अशाब्दिक सम्प्रेषण

सम्प्रेषण की विधियाँ Methods of Communication सम्प्रेषण मुख्यतः दो प्रकार का होता है:- 1 शाब्दिक सम्प्रेषण Verbal communication 2 अशाब्दिक सम्प्रेषण Non verbal communication 1.शाब्दिक सम्प्रेषण Verbal communication शाब्दिक सम्प्रेषण में सदैव भाषा का प्रयोग किया जाता है। यह सम्प्रेषण दो प्रकार का होता है: 1 मौखिक सम्प्रेषण Oral communication 2 लिखित सम्प्रेषण Written communication … Read more

Shaikshik prashasan AVN sangathan शैक्षिक प्रशासन एवं संगठन में सम्प्रेषण और इसकी उपयोगिता -शैक्षिक सम्प्रेषण

शैक्षिक प्रशासन में सम्प्रेषण Communication in Educational Administration मानव एक सामाजिक प्राणी है, जो समाज में रहकर अपना जीवन व्यतीत करता है। सम्प्रेषण भी एक सामाजिक प्रक्रिया है। सम्प्रेषण एक पक्षीय न होकर दो पक्षीय या बहुपक्षीय प्रक्रिया है। इसमें एक पक्ष अपने विचारों तथा भावों का दूसरे पक्ष को आदान-प्रदान करता है। यही प्रक्रिया … Read more

Shikshan adhigam mein sampreshan ki upyogita शिक्षण अधिगम में सम्प्रेषण की उपयोगिता

शिक्षण अधिगम में सम्प्रेषण की उपयोगिताUtility of Communication in Teaching Learning विद्यालय प्रशासन में शिक्षण एवं अधिगम के प्रमुख रूप देखने को पाये जाते हैं जिनके विकास का आधार सम्प्रेषण ही माना जाता है क्योंकि विद्यालय प्रशासन वर्तमान समय में ऐसा रूप धारण कर चुका है, जिसमें सम्प्रेषण साधनों का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। … Read more

Vyaktigat sampreshan व्यक्तिगत सम्प्रेषण अर्थ, गुण, दोष एवं प्रयोग

कक्षा में जो भी क्रियाएँ होती हैं वे सभी सम्प्रेषण में आती हैं तथा शिक्षण का पूर्ण करती है। कक्षा सम्प्रेषण के प्रकारों के लिये शिक्षा में वैयक्तिक शिक्षण के अर्थ, गुण-दोष एवं प्रयोग आदि पर प्रकाश डालेंगे। वैयक्तिक सम्प्रेषण Individual Communication Meaning of individual communication वैयक्तिक सम्प्रेषण का अर्थ जब शिक्षक प्रत्येक बालक को … Read more

Samuhik sampreshan Arth सामूहिक सम्प्रेषण अर्थ, गुण, दोष एवं प्रयोग

कक्षा में जो भी क्रियाएँ होती हैं वे सभी सम्प्रेषण में आती हैं तथा शिक्षण का पूर्ण करती है। कक्षा सम्प्रेषण के प्रकारों के लिये शिक्षा में सामूहिक शिक्षण के अर्थ, गुण-दोष एवं प्रयोग आदि पर प्रकाश डालेंगे। Collective Communication सामूहिक सम्प्रेषण सामूहिक सम्प्रेषण का अर्थ सामूहिक सम्प्रेषण का अर्थ कक्षा शिक्षण है। विद्यालय में … Read more

Kaksha kaksh mein sampreshan कक्षाकक्ष में सम्प्रेषण – सम्प्रेषण प्रक्रिया के तरीके, उपयोगी बनाने के सम्प्रेषण

कक्षाकक्ष में सम्प्रेषण Communication in the Classroom कक्षाकक्ष में शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिये शिक्षक और छात्रों के बीच सम्प्रेषण होना अति आवश्यक है। शिक्षक और छात्र के मध्य सम्प्रेषण ‘शाब्दिक एवं अशाब्दिक सम्प्रेषण’ दोनों प्रकार का होता है। कक्षाकक्ष में बैठकर छात्र व्यवस्थित तथा उद्देश्यपूर्ण शिक्षा प्राप्त करता है। शिक्षण को सफल एवं … Read more

Sampreshan prakriya ko prabhavit karne Wale karak सम्प्रेषण प्रक्रिया को प्रभावित करनेवाले घटक या कारक

सम्प्रेषण प्रक्रिया को प्रभावित करने वालेघटक या कारक Factors Affecting to Communication Process सम्प्रेषण को प्रभावित करने वाले निम्नलिखित कारक या घटक हैं:- 1.छात्र आज के बाल केन्द्रित शिक्षण में प्रमुख तत्त्व छात्र स्वयं है। अतः छात्र/छात्राओं की आयु, मूल आकांक्षाएँ, बौद्धिक स्तर तथा आदतें या मनोभावनाएँ शिक्षण – सम्प्रेषण को प्रभावित करते हैं। 2.शिक्षण … Read more

sampreshan ki rukavaten सम्प्रेषण की रुकावटें

Obstructions of Communication सम्प्रेषण की रुकावटें सम्प्रेषण की प्रभावशीलता में सम्प्रेषण परिस्थितियों तथा वातावरण का बहुत महत्त्वपूर्ण हाथ होता है; जैसे – यदि कक्षा में पढ़ाते समय बिजली चली जाती है तो परेशानी होती है तथा सम्प्रेषण की प्रभावशीलता कम हो जाती है। इसी प्रकार यदि वातावरण शोरगुल युक्त होता है तो सम्प्रेषण की प्रभावशीलता … Read more

Sampreshan ki badhaen samasyaen सम्प्रेषण की बाधाएँ या समस्याएँऔर उनके निराकरण के उपाय

सम्प्रेषण की बाधाएँ या समस्याएँBarriers or Problems of Communication संचार प्रक्रिया को अप्रभावी या विरूपित करने वाली बाधाओं को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:- 1.पर्यावरणीय बाधा विद्यालय के बाहर व्यावसायिक सिनेमा या रेडिया एवं टी.वी. के कार्यक्रम विद्यालय के अन्दर हो रही कक्षा-कक्ष की संचार प्रक्रिया से अधिक मनोरंजक एवं विविध होते … Read more

Types of Communication सम्प्रेषण के प्रकार sampreshan ke prakar

सम्प्रेषण के प्रकार सम्प्रेषण की उपयोगिता को देखते हुए सम्प्रेषण को दो भागों में बाँटा गया है- 1 शैक्षिक सम्प्रेषण Educational communication 2 लोक सम्प्रेषण Public communication व्यक्तिगत एवं सामूहिक सम्प्रेषणKinds of Communication :Individual andCollective Communication 1 व्यक्तिगत सम्प्रेषण2 सामूहिक सम्प्रेषण 1.शैक्षिक सम्प्रेषण 1.यह सम्प्रेषण शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये किया गया सम्प्रेषण है। … Read more

Shikshan adhigam mein prabhavshali sampreshan शिक्षण अधिगम में प्रभावशाली सम्प्रेषण

Effective Communication in Teaching Learning शिक्षण अधिगम में प्रभावशाली सम्प्रेषण शिक्षण एवं अधिगम की प्रक्रिया के लिये प्रभावशाली सम्प्रेषण हेतु मानवीय संसाधन की महत्त्वपूर्ण भूमिका है जिसे निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है:- 1.प्रधानाचार्य की भूमिका Role of principal शिक्षण अधिगम की सफलता के लिये अत्यधिक आवश्यक है उपयुक्त विषयों का चुनाव। इन … Read more

Pathya pustak pravidhi shikshan pravidhiपाठ्य-पुस्तक प्रविधि शिक्षण प्रविधि

Text Book Technique पाठ्य-पुस्तक प्रविधि शिक्षण की प्रविधियों में पाठ्य-पुस्तक प्रविधि सबसे अधिक प्रचलित प्रविधि है। अन्य शब्दों में, “यह प्रविधि पाठ्य-पुस्तक को आधार मानती है, जैसे कोई अन्य प्रविधि किसी समस्या या योजना को आधार मानकर चलती है।” इस प्रविधि का प्रयोग भाषा-शिक्षण में किया जाता है। आजकल कुछ विद्वान् इस प्रविधि को ‘तू … Read more

चिन्तय‌ धातु – विधिलिङ् लकार – Chintay Dhatu – Vidhilid Lakaar lakaarh

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष चिंतयेत् चिंतयेताम् चिंतयेयुः मध्यम पुरुष चिंतये: चिंतयेतम् चिंतयेत उत्तम पुरुष चिंतयेयम् चिंतयेव चिंतयेम

चिन्तय धातु – लङ् लकार (भूतकाल) Chintay Dhatu – Lad Lakaar (Bhutakaal)

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष अचिंतयत् अचिंतयताम् अचिंतयन् मध्यम पुरुष अचिंतयः अचिंतयतम् अचिंतयत उत्तम पुरुष अचिंतयम् अचिंतयाव अचिंतयाम

चिन्तय धातु – लृट् लकार (भविष्यत् काल) Chintay Dhatu – Lrit Lakaar (Bhavishyat kaal)

पुरुष एकवचन द्विवचन बहवचन प्रथम पुरुष चिंतयिष्यति चिंतयिष्यतः चिंतयिष्यन्ति मध्यम पुरुष चिंतयिष्यसि चिंतयिष्यथः चिंतयिष्यथ उत्तम पुरुष चिंतयिष्यामि चिंतयिष्यावः चिंतयिष्यामः

(चिंतय् = चिंतन करना, सोचना) – लट् लकार (वर्तमान काल) – (Chintay = Chintan Karna, Sochana) – Lat Lakaar (Vartaman Kaal)

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष चिंतयति चिंतयत: चिंतयन्ति मध्यम पुरुष चिंतयसि चिंतयथः चिंतयथ उत्तम पुरुष चिंतयामि चिंतयावः चिंतयामः

पालय् धातु – विधिलिङ् लकार – Palay Dhatu – Vidhilid Lakaar

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष पालयेत् पालयेताम् पालयेयुः मध्यम पुरुष पालये: पालयेतम् पालयेत उत्तम पुरुष पालयेयम् पालयेव पालयेम

पालय् धातु – लङ् लकार (भूतकाल) – Palay Dhati – Lad Lakaar (Bhutakaal)

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष अपालयत् अपालयताम् अपालयन् मध्यम पुरुष अपालयः अपालयतम् अपालयत उत्तम पुरुष अपालयम् अपालयाव अपालयाम

पालय् धातु – लृट् लकार (भविष्यत् काल) Palay Dhatu – Lrit Lakaar (Bhavishayt kaal)

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथम पुरुष पालयिष्यति पालयिष्यतः पालयिष्यन्ति मध्यम पुरुष पालयिष्यसि पालयिष्यथः पालयिष्यथ उत्तम पुरुष पालयिष्यामि पालयिष्यावः पालयिष्यामः

Time in Sanskrit समय सम्बन्धी नियम

समय सम्बन्धी नियम आज हम सीखेंगे कि संस्कृत में समय कैसे बताया व लिखा जाता है। क्योंकि हम पहले से यह जानते हैं कि Sanskrit में संख्याओं की गणना 01 से 100 तक कैसे की जाती है, यह हमारे एक लेख में आपको मिल जाएगी | एक दिन-रात में केवल 24 घंटे होते हैं लेकिन … Read more

ktavatu Pratyay क्तवतु प्रत्यय की परिभाषा व उदाहरण

क्तवतु प्रत्यय की परिभाषा व उदाहरण क्तवतु प्रत्यय की परिभाषा :- क्तवतु प्रत्यय कृदंत प्रत्यय कहलाता है । इस प्रत्यय का प्रयोग केवल कर्तृवाच्य में ही किया जाता है | कर्तृवाच्य……अर्थात् कर्ता में प्रथमा विभक्ति और कर्म में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है तथा क्रिया में लिंग और वचन कर्ता के लिंग और वचन … Read more

Vegetables name in Sanskrit सब्जियों के नाम Sanskrit

सब्जियों के नाम संस्कृत में सब्जियों के नाम सब्जी के गुणों या विशेषताओं पर आधारित है | सब्जियां स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होती है | अत: हम सभी भोजन में सब्जियों का उपभोग करते हैं । सब्जी भोजन का एक महत्वपूर्ण अंग हैं | Sanskrit में सब्जी को “शाकम्” कहते है | उदाहरण … Read more