Daliye shikshan pravidhi uddeshy paribhashaen paksh bhed sopan Labh sujhavदलीय शिक्षण प्रविधि – उद्देश्य, परिभाषाएँ, पक्ष, भेद, सोपान,लाभ एवं सुझाव

Group TeachingTechnique दलीय शिक्षण प्रविधि दलीय शिक्षण प्रविधि का जन्म संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ और यद्यपि यह भारत के लिये नयी तकनीक है, लेकिन अमेरिका में इस तकनीक का प्रयोग इस सदी के पाँचवें दशक से ही किया जा रहा है। दलीय शिक्षण, शिक्षण संरचना का वह व्यवस्थित स्वरूप है, जिसमें दो या दो … Read more

Balodhan shikshan pravidhi visheshtaen sadhan बालोद्यान शिक्षण प्रविधि विशेषताएँ, साधन-

Child Garden Teaching Technique बालोद्यान शिक्षण प्रविधि बालोद्यान शिक्षण प्रविधि के जन्मदाता जर्मनी के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री फ्रॉबेल हैं। इन्होंने पाठशाला को एक उद्यान की संज्ञा दी है। इनके अनुसार, “जिस प्रकार पौधे के विकास के लिये खाद, पानी और उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता होती है और इन्हें पाकर पौधे में स्वयं विकास होता है, उसी … Read more

जीवों में जनन – Jeevo Me Janan

किसी जीव के जन्म से लेकर उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक अवधि का उस जीव का जीवनकाल कहते हैं। प्रत्येक जीव केवल कुछ निश्चित समय तक ही जीवित रह सकता है। जीव के जन्म से उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक का यह काल, उस जीव की जीवन अवधि को निरूपित करता है। क्या यह दोनों बातें रोचक … Read more

Montessori Technique मॉण्टेसरी प्रविधि शिक्षण प्रविधि-

Montessori Technique मॉण्टेसरी प्रविधि मॉण्टेसरी पद्धति की प्रवर्तिका इटली की महिला डॉ. मॉण्टेसरी हैं। उन्होंने मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण को शिक्षा में बड़ा महत्त्व दिया है। उनके मतानुसार छात्र स्वेच्छा से उठे – बैलें, खेले एवं कार्य करें। उसे आदेश देना अथवा बन्धित करना उपयुक्त नहीं है। उन्होंने ज्ञानेन्द्रियों की शिक्षा पर भी बल दिया है। मॉण्टेसरी … Read more

Dalton pravidhi ya prayogshala Yojana shikshan pravidhi डाल्टन प्रविधि या प्रयोगशाला योजना – शिक्षण प्रविधि

Dalton Technique डाल्टन प्रविधि डाल्टन प्रविधि अथवा प्रयोगशाला योजना का प्रवर्तन अमेरिका की मिस पार्क हर्स्ट के द्वारा किया गया। इस शिक्षण प्रविधि में विद्यालय का संगठन बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। छात्रों को पाठ निर्देश दिये जाते हैं। उन्हें आवश्यक सुझाव एवं निर्देश भी दिये जाते हैं एवं ज्ञानार्जन हेतु पुस्तकों की जानकारी भी दे … Read more

Play Technique खेल प्रविधि -शिक्षण प्रविधि

Play Technique खेल प्रविधि खेल प्रविधि के जन्मदाता यूरोप के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री श्री काल्डवेल कुक हैं। सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक मैक्डूगल ने खेल को एक सामान्य स्वाभाविक प्रवृत्ति कहा है और लिखा है कि “खेल एक स्वाभाविक आनन्ददायक एवं जन्मजात शक्ति है । “ अत: पाठशालाओं में खेल का बड़ा महत्त्व है। खेल से शारीरिक विकास, सामाजिक … Read more

Teaching-Micro सूक्ष्म शिक्षण प्रविधि

Micro Teaching Technique सूक्ष्म शिक्षण – प्रविधि यह शिक्षण प्रक्रिया का संकुचित रूप होता हैं। सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching) में छात्रों की संख्या एवं समय की अधिकता को कम कर दिया जाता हैं। इसका निर्माण छात्रों में शिक्षण कौशल को विकसित करने के लिए गया गया था। जब छात्राध्यापक शिक्षण के दौरान शिक्षण कार्य करते … Read more

RAS KE PRAKAR रस के प्रकार स्थायी भाव, रस और-भाव

रस नौ प्रकार के होते हैं – वात्सल्य रस को दसवाँ एवं भक्ति रस को ग्यारहवाँ रस भी माना गया है, वत्सलता तथा भक्ति इनके स्थायी भाव हैं। भरतमुनी ने केवल रस के आठ प्रकार का वर्णन किया है। परंतु आज के समय में हमारे syllabus में 11 प्रकार के रसों का अध्ययन किया जाता … Read more

Badal Ka Paryayvachi

बादल’ शब्द का पर्यायवाची ‘जलद’ होता है। ‘बादल’ के अन्य पर्यायवाची- अभ्र, मेघ, धर, जलधर, वारिधर badal ka paryayvachi shabd hindi megh badal ka paryayvachi बादलजलदपर्जन्यजगजीवनअंबुदअंबुधरअब्रअभ्रघटाघनश्यामजीमूततोयदतोयधरपयोधरधरघनवारिदनीरदधराधरवारिवाहपयोदिसारंगधाराधरनीरधरपयोदबलाधरबदलीबलाहकवारिधरघनमालामेघमालामेघावलीकादंबिनीजलधर badal ka paryayvachi shabd 3 मेघमाला, मेघावली, कादंबिनी badal ka paryayvachi shabd nahin hai बादल का पर्यायवाची शब्द badal badal ka paryayvachi shabd बादल का पर्यायवाची शब्द क्या है … Read more

Veer Ras वीर रस – परिभाषा,-भेद और उदाहरण :हिन्दी व्याकरण

Veer Ras वीर रस वीर रसः वीर रस का स्थाई भाव उत्साह है। श्रृंगार के साथ स्पर्धा करने वाला वीर रस है। श्रृंगार, रौद्र तथा वीभत्स के साथ वीर को भी भरत मुनि ने मूल रसों में परिगणित किया है। वीर रस से ही अदभुत रस की उत्पत्ति बतलाई गई है। वीर रस का ‘वर्ण’ … Read more

Vatsalya Ras -वात्सल्य रस परिभाषा, भेद और उदाहरण : हिन्दी व्याकरण

वात्सल्य रस : इसका स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है। वात्सल्यता वात्सल्य रस … Read more

Nij Vachak Sarvanam : निजवाचक सर्वनाम हिन्दी व्याकरण

निजवाचक सर्वनाम वह सार्वनामिक शब्द जो स्वयं के लिए प्रयोग करते हैं जैसे आप अपना आदि जिससे स्वयं का बोध हो वह निजवाचककहलाते हैं।अथवाजो सर्वनाम तीनों पुरुषों (उत्तम, मध्यम और अन्य) में निजत्व का बोध कराता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं खुद लिख लूँगा। तुम अपने आप चले जाना। वह स्वयं गाडी … Read more

Anishchay Vachak Sarvanam अनिश्चयवाचक सर्वनाम : हिन्दी व्याकरण

अनिश्चयवाचक सर्वनाम जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति या पदार्थ का बोध नहीं होता, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- बाहर कोई है। मुझे कुछ नहीं मिला।अथवाजो सर्वनाम शब्द किसी निश्चित व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान का बोध नहीं करवाता वह अनिश्चय वाचक कहलाते हैं। अनिश्चयवाचक सर्वनाम के उदाहरण कोई’, ‘कुछ’ सर्वनाम शब्दों में किसी घटना … Read more

Sambandh Vachak Sarvanam संबंधवाचक सर्वनाम : हिन्दी व्याकरण

संबंधवाचक सर्वनाम वह सर्वनाम शब्द जो किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा अथवा सर्वनाम के संबंध का बोध कराएं उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं जैसे- ‘जो’, ‘सो’, ‘उसी’ आदि।अथवाजो सर्वनाम किसी दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से संबंध दिखाने के लिए प्रयुक्त हो, उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- जो करेगा सो भरेगा। इस वाक्य में जो … Read more

Nishchay Vachak Sarvanam : हिन्दी व्याकरण निश्चयवाचक या संकेतवाचक सर्वनाम

निश्चयवाचक/ संकेतवाचक सर्वनामजो सर्वनाम निकट या दूर की किसी वस्तु की ओर संकेत करे, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह लड़की है। वह पुस्तक है। ये हिरन हैं। वे बाहर गए हैं।अथवाजो सर्वनाम किसी व्यक्ति, वस्तु आदि को निश्चयपूर्वक संकेत करें वह निश्चयवाचक कहलाता है। निश्चयवाचक / संकेतवाचक सर्वनाम के उदाहरण यह’, ‘वह’, ‘वह’ … Read more

Prashn Vachak Sarvanam प्रश्नवाचक सर्वनाम : हिन्दी-व्याकरण

प्रश्नवाचक सर्वनाम वाक्य में प्रयुक्त वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान के विषय में प्रश्न उत्पन्न हो, उसे प्रश्नवाचक कहते हैं। जैसे- क्या, कौन, कहां, कब, कैसे आदि ।अथवाजिस सर्वनाम से किसी प्रश्न का बोध होता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- तुम कौन हो? तुम्हें क्या चाहिए? इन वाक्यों में कौन … Read more

Purush Vachak Sarvanam पुरुषवाचक सर्वनाम हिन्दी व्याकरण

पुरुषवाचक सर्वनाम जो सर्वनाम वक्ता (बोलनेवाले), श्रोता (सुननेवाले) तथा किसी अन्य के लिए प्रयुक्त होता है, उसे पुरूषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – मैं, तू, वह आदि।अथवाजिन सर्वनाम का प्रयोग वक्ता श्रोता या अन्य के लिए किया जाता है वह पुरुषवाचक कहलाता है। पुरुषवाचक सर्वनाम के उदाहरण उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से देखने पर पता … Read more

Conjuction In hindi समुच्चय बोधक – परिभाषा भेद और उदाहरण,

समुच्चय बोधक समुच्चय बोधक (Conjuction): दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चय बोधक कहते हैं।जिन शब्दों की वजह से दो या दो से ज्यादा वाक्य, शब्द, या वाक्यांश जुड़ते हैं उन्हें समुच्चयबोधक कहा जाता है। जहाँ पर तब और, वरना, किन्तु, परन्तु, इसीलिए, बल्कि, ताकि क्योंकि, या, अथवा, एवं, तथा, अन्यथा … Read more

Pratyay in Hindi Grammar प्रत्यय परिभाषा, भेद और उदाहरण : हिन्दी व्याकरण,

प्रत्यय प्रत्यय वे शब्द होते हैं जो दूसरे शब्दों के अन्त में जुड़कर, अपनी प्रकृति के अनुसार, शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं। प्रत्यय शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – प्रति + अय । प्रति का अर्थ होता है साथ में, पर बाद में और अय का अर्थ होता है ‘चलने … Read more

Interjection in hindi विस्मयादिबोधक – परिभाषा, भेद और उदाहरण

विस्मयादिबोधक की परिभाषा Interjection – विस्मयादिबोधक जिन वाक्यों में आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा आदि के भाव व्यक्त हों, उन्हें विस्मय बोधक वाक्य कहते है। इन वाक्यों में सामान्यतः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का उपयोग किया जाता है।जो शब्द वक्ता या लेखक के हर्ष, शोक, नफरत,विस्मय,ग्लानी आदि भावो का बोध कराता है उसे विस्मयादिबोधक कहते हैं। इसका … Read more

Purush in hindi पुरुष परिभाषा, भेद एवं उदाहरण : हिन्दी व्याकरण

पुरुष की परिभाषा: वे व्यक्ति जो संवाद के समय भागीदार होते हैं, उन्हें पुरुष कहा जाता है। • जैसे: मेरा नाम सचिन है। इस वाक्य में वक्ता (सचिन) अपने बारे में बता रहा है। वह इस संवाद में भागीदार है एवं श्रोता भी । पुरुष के प्रकार हिन्दी में तीन पुरुष होते हैं- * एकवचन … Read more

णिजन्त प्रकरण -संस्कृत में प्रेरणार्थक क्रिया संस्कृत व्याकरण regent prakaran Sanskrit mein prernarthak kriya Sanskrit vyakaran

prernarthak kriya प्रेरणार्थक क्रिया तट्प्रयोजको हेतुश्च – प्रेरणार्थक में धातु के आगे ‘णिच्’ प्रत्यय का प्रयोग होता है। जब कर्त्ता किसी क्रिया को स्वयं ना करके किसी अन्य को करने के लिए प्रेरित करता है तब उस क्रिया को ‘प्रेरणार्थक क्रिया’ कहते है। प्रेरणार्थक क्रिया का उदाहरण: यहाँ पर प्रवर स्वयं घर ना जाकर प्रखर … Read more

मानव स्वास्थ्य और रोग (Human Health And Disease)

एक लंबे समय तक स्वास्थ्य को शरीर और मन की ऐसी स्थिति माना गया, जिसमें देह के कुछ तरलों (ह्यूमर) का संतुलन बना रहता था। प्राचीन यूनानवासी जैसे कि हिप्पोक्रेटीज और चिकित्सा का भारतीय आयुर्वेद तंत्र भी यही दावा करते थे। ऐसा माना जाता था कि ‘काले पित्त’ (ब्लैक बाइल) वाले व्यक्ति गरम व्यक्तित्व वाले … Read more

Vilom shabd in Hindi विपरीतार्थक शब्द Antonyms in Hindi 

विलोम शब्द किसे कहते हैं? हिन्दी भाषा में विलोम शब्द या विपरीतार्थक  शब्द या विपरीतार्थी शब्द उन शब्दों को कहते हैं जिनका अर्थ एक-दूसरे से उलट या विपरीत होता है। विलोम शब्द के उदाहरण हैं:  घर का विलोम शब्द- बाहर, राजा का विलोम शब्द- रंक, सुंदर का विलोम शब्द- कुरूप, प्रेम का विलोम शब्द- घृणा,आदि का … Read more

Tatsam-Tadbhav तत्सम -तद्भव शब्द,परिभाषा,पहचानने के नियम और उदाहरण :हिन्दी व्याकरण

तत्सम-तद्भवः संस्कृत भाषा के कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो हिंदी में भी बिना परिवर्तन के प्रयुक्त होते हैं। उन शब्दों को तत्सम शब्द कहते हैं। तद्भव शब्द वे शब्द हैं जिनमे थोडा सा परिवर्तन करके हिंदी में प्रयुक्त किया जाता हैं। तत्सम-तद्भवसंस्कृत भाषा के कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो हिंदी में भी बिना … Read more

बहुकक्षा एवं बहुस्तरीय शिक्षण- शिक्षण उपागम Multi Grade and Multi ClassTeaching

Multi Grade and Multi ClassTeaching बहुकक्षा एवं बहुस्तरीय शिक्षण बहुस्तरीय स्थितियों में शिक्षण की तकनीकी बहुश्रेणी शिक्षण सम्बन्धित होती है क्योंकि विभिन्न प्रकार की स्थितियों में छात्रों को उनकी आवश्यकता के अनुसार शिक्षा प्रदान करना भी बहुश्रेणी शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है । बहुस्तरीय स्थितियों में शिक्षण की आवश्यकता एवं महत्त्व को निम्नलिखित रूप में … Read more

दक्षता आधारित अधिगम उपागम-शिक्षण उपागम Efficiency Based Learning Approach

Efficiency Based Learning Approach दक्षता आधारित अधिगम उपागम आधुनिक युग प्रतिस्पर्धा एवं प्रतियोगिता का युग है। इसमें बालकों को ज्ञान प्राप्ति के साथ ही समाज में अपना विशिष्ट स्थान बनाने के लिये किसी क्षेत्र में विशिष्ट दक्षता प्राप्त करना होती है।दक्षता मानसिक एवं भौतिक दोनों क्षेत्रों में हो सकती है। दक्षता प्राप्त करने के बाद … Read more

अनुवाद हेतु भाषा, शब्द तथा व्याकरण के ज्ञान की आवश्यकता Translation of simple sentences of Sanskrit language into Hindi

किसी भी भाषा का ज्ञान होना, उस व्यक्ति के ज्ञान संग्रह की अपरिमित परिधि में आता है। “जिन खोजा तिन पाइया गहरे पानी पैठ हों बौरी ढूंढन चली रही किनारे बेट।” जो जानता है सो तम्बू तानता है। किसी भी भाषा का सम्पूर्ण ज्ञान उस भाषा के अथाह ज्ञान से परिचित होने का परिणाम है। … Read more

संस्कृत साहित्य काव्य, रचनाएं,कवि, रचनाकार, इतिहास Sanskrit sahitya rachna kavi rachanakar itihas.

संस्कृत के प्रमुख साहित्य एवं साहित्यकार संस्कृत भाषा का साहित्य अनेक अमूल्य ग्रंथरत्रों का सागर है, इतना समृद्ध साहित्य किसी भी दूसरी प्राचीन भाषा का नहीं है और न ही किसी अन्य भाषा की परम्परा अविच्छिन्न प्रवाह के रूप में इतने दीर्घ काल तक रहने पाई है। अति प्राचीन होने पर भी इस भाषा की … Read more

Maheswar Sutra माहेश्वर सूत्र – जनक, विवरण और इतिहास – संस्कृत व्याकरण

पाणिनी के माहेश्वर सूत्र माहेश्वर सूत्र (शिवसूत्राणि या महेश्वर सूत्राणि) को संस्कृत व्याकरण का आधार माना जाता है। पाणिनि ने संस्कृत भाषा के तत्कालीन स्वरूप को परिष्कृत एवं नियमित करने के उद्देश्य से भाषा के विभिन्न अवयवों एवं घटकों यथा ध्वनि-विभाग (अक्षरसमाम्नाय), नाम (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण), पद, आख्यात, क्रिया, उपसर्ग, अव्यय, वाक्य, लिङ्ग इत्यादि तथा … Read more

बाल केन्द्रित अधिगम उपागम शिक्षण उपागम Child Centered Learning Approach

Child Centered Learning Approach बाल केन्द्रित अधिगम उपागम एक समय था जब बालक की अपेक्षा पाठ्यक्रम को अधिक महत्त्व दिया जाता था परन्तु शिक्षण अधिगम में मनोविज्ञान के प्रवेश से अब बालक को महत्त्व दिया जाने लगा है। अब बालक की क्षमताओं, रुचियों तथा रुझानों को विशेष महत्त्व दिया जाता है और उसकी अधिगम प्रक्रिया … Read more

क्रियापरक या गतिविधि आधारित अधिगम उपागम – शिक्षण उपागम Activity Based Learning Approach

क्रियापरक या गतिविधि आधारित अधिगम उपागम क्रियापरक एवं शिक्षण अधिगम का प्रवर्तक रूसो को माना जाता है। रूसो का कथन है, “यदि आप अपने बालक की बुद्धि का विकास करना चाहते हैं तो उस शक्ति का विकास करना चाहिये, जिसे इसको नियन्त्रित करना है । उसको बुद्धिमान और तर्कपूर्ण बनाने के लिये उसे हष्ट-पुष्ट और … Read more

रुचिपूर्ण अथवा आनन्दायी अधिगम उपागम – शिक्षण उपागम Interest Based Learning Approach

रुचिपूर्ण अथवा आनन्दायी अधिगम उपागम रुचिपूर्ण अधिगम एक समयबद्ध कार्यक्रम तथा सुविचारित रणनीति है। यह बालकों के अधिगम हेतु आकर्षक एवं बाल केन्द्रित प्रणाली है, जिसमें बालकों को आनन्दित करने वाले क्रियाकलाप एवं शाला में बालकों के प्रति शिक्षक का हेय रहित, मित्र रहित तथा आत्मीय व्यवहार है। यह गीतों, कहानियों तथा खेलों द्वारा सरल … Read more

विषय केन्द्रित अधिगम उपागम शिक्षण उपागम-Subject Based Learning Approach

विषय केन्द्रित अधिगम उपागम सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि किसी विषय की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का स्वरूप विस्तृत रूप में पाया जाता है तथा किसी विषय का संकुचित रूप में अर्थात् अधिगम प्रक्रिया में विषय का स्वरूप एवं उसकी उपयोगिता उत्तरदायी होता है। जो विषय समाज के लिये उपयोगी होते हैं तथा … Read more

व्यापक क्षेत्र अधिगम उपागम शिक्षण उपागम Broad Field Approach

व्यापक क्षेत्र उपागम विस्तृत क्षेत्र उपागम से आशय अधिगम प्रक्रिया की व्यापकता से है। किसी भी अधिगम प्रक्रिया को क्रियान्वित करने से पूर्व समाज की स्थिति, मानवीय समाज की विशेषता एवं उपलब्ध संसाधनों पर विचार किया जाता है। इससे यह निश्चित हो जाता है जो भी अधिगम विषय अथवा क्रिया एक निश्चित क्षेत्र के लिये … Read more

सामाजिक समस्या केंद्रित उपागम-शिक्षण उपागम Social Problems Centered Approach

सामाजिक समस्या केंद्रित उपागम सामाजिक समस्या केन्द्रित उपागम का आशय सामाजिक आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं से है जो कि बालकों की अधिगम प्रक्रिया को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। दूसरे शब्दों में समाज में उत्पन्न होने वाली अनेक प्रकार की सामाजिक समस्याओं का समाधान शिक्षा और ज्ञान के ही माध्यम से सम्पन्न होता … Read more

संज्ञानात्मक अधिगम उपागम शिक्षण उपागम-

संज्ञानात्मक उपागम संज्ञानात्मक उपागम प्रमुख रूप से मानव व्यवहार के मनोवैज्ञानिक पक्ष से सम्बन्धित है। इसके अन्तर्गत अनुसन्धान करते समय प्रत्यक्ष ज्ञान, संकल्पना निर्माण, भाषा प्रयोग, चिन्तन, बोध, समस्या समाधान, अवधान एवं स्मृति जैसे क्रियाकलापों को ध्यान में रखा जाता है। इस प्रकार संज्ञानात्मक उपागम व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक क्रिया- व्यापार से सम्बन्धित अधिगम की संकल्पना … Read more

निदानात्मक शिक्षण एवं उपचारात्मक -शिक्षण अधिगम उपागम Diagnostic Teaching and Remedial Teaching

| निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण यदि कोई छात्र लगातार किसी विषय में अनुत्तीर्ण होता है या पढ़ने में कमजोर होता है तो छात्र की असफलता की जानकारी प्राप्त करना निदान कहलाता है। छात्र की असफलता के कारणों की जाँच कर इनके निराकरण के लिये उपाय किये जाते हैं तो यह उपचार कहलाता है। निदानात्मक परीक्षण … Read more

उद्दीपन परिवर्तन कौशल – अर्थ,परिभाषा एवं घटक Stimulus Variation Skill

उद्दीपन परिवर्तन कौशल यदि शिक्षण को प्रभावी तथा अधिगम को अधिकतम बनाना है तो शिक्षक को चाहिये कि वह जिन शब्दों अथवा अशाब्दिक शारीरिक क्रियाओं का उपयोग विद्यार्थियों की पाठ को समझने हेतु जिन भावनाओं एवं क्रियाओं को उद्दीप्त करने हेतु कर रहा है, उनमें यान्त्रिकता या अभ्यस्त शब्दों के अधिकतम प्रयोग से यथासम्भव दूर … Read more

प्रश्न कौशल-अर्थ, परिभाषा,उद्देश्य एवं प्रकार

प्रश्न कौशल शिक्षण प्रक्रिया की शुरुआत आदि काल से ही प्रश्न-उत्तर के रूप में शुरू हुई थी और आज भी जिज्ञासु छात्र प्रश्न पूछता है तथा शिक्षक उसका उत्तर देता है। शिक्षक छात्र अधिगम की जाँच हेतु अथवा पाठ्यवस्तु के विषय में जिज्ञासा उत्पन्न करने हेतु प्रश्न पूछता है। प्रश्न पूछना एक आवश्यक शिक्षण कौशल … Read more

श्यामपट्ट कौशल -अर्थ,आवश्यकता, उपयोग, विशेषताएँ, सावधानियाँ Black Board Skill

श्यामपट्ट कौशल श्यामपट्ट शिक्षण एवं शिक्षक का घनिष्ठ मित्र होता है। यह अध्यापक के शिक्षण का अभिन्न अंग होता है। हम किसी ऐसे कक्षा-कक्ष की कल्पना भी नहीं कर सकते जहाँ पर श्याम पट्ट न हो| प्रो. स्टक के अनुसार, “इसे शिक्षक और छात्रों द्वारा प्रयुक्त विद्या समझना चाहिये क्योंकि | शिक्षक इसकी सहायता से … Read more

पाठ प्रस्तावना कौशल परिभाषा,मूल्यांकन प्रस्तावना,-अर्थ,लक्षण,Skill of Introducing a Lesson

पाठ प्रस्तावना कौशल प्रस्तावना कक्षा में प्रथम कार्य है। पढ़ाने के लिये अध्यापक की प्रस्तावना अच्छी रही तो पाठ की सफलता सुनिश्चित हो जाती है। विद्यार्थियों द्वारा पूर्वार्जित ज्ञान या जानकारी के माध्यम से नवीन या अनजानी जानकारी को जोड़ना ही पाठ की प्रस्तावना कहलाती है। शिक्षक पाठ पढ़ाने के पूर्व छात्रों का ध्यान पाठ … Read more

मानव जनन (Human Reproduction)

जैसा कि आप जानते हैं मानव लैंगिक रूप से जनन करने वाला और सजीव प्रजक या जरायुज प्राणी है। मानवों में जनन घटना के अंतर्गत युग्मकों की रचना ( युग्मकजनन) अर्थात् पुरुष में शुक्राणुओं तथा स्त्री में अंडाणु का बनना, स्त्री जनन पथ में शुक्राणुओं का स्थानांतरण पुरुष तथा स्त्री के युग्मकों का संलयन (निषेचन … Read more

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and coordination )

पिछले अध्याय हमने सजीवों में अनुरक्षण (अथवा रख-रखाव ) कार्य में संलग्न जैव प्रक्रमों के बारे में पढ़ा था। हमने इस बात पर विचार करना प्रारंभ किया था कि यदि कोई वस्तु गतिशील है तो वह सजीव है। पादपों में इस तरह की कुछ गतियाँ वास्तव में वृद्धि का परिणाम हैं। एक बीज अंकुरित होता … Read more

छंद chhand

छन्द का अर्थ एवं परिभाषा ‘छन्द’ शब्द की उत्पत्ति ‘छिदि धातु से हुई है, जिसका अर्थ है- ढकना अथवा आच्छादित करना। छन्द उस पद-रचना को कहते हैं, जिसमें अक्षर, अक्षरों की संख्या एवं क्रम, मात्रा, मात्रा की गणना के साथ-साथ यति (विराम) एवं गति से सम्बद्ध नियमों का पालन किया गया हो। छन्द के अंग … Read more

मनोविज्ञान के सिद्धांत और उनके जनक

मनोविज्ञान के सिद्धांत और उनके जनक मनोविज्ञान का सिद्धांत मनोविज्ञान अनुभव का विज्ञान है, इसका उद्देश्य चेतनावस्था की प्रक्रिया के तत्त्वों का विश्लेषण, उनके परस्पर संबंधों का स्वरूप तथा उन्हें निर्धारित करनेवाले नियमों का पता लगानाहै। Manovigyan Ke Siddhant (मनोविज्ञान के सिद्धांत), Pedagogy Siddhant, मनोविज्ञान के सिद्धांत मनोविज्ञान के जनक ( विकास के सिद्धांत एवं … Read more

रस – Ras in hindi

रस का अर्थ रस का शाब्दिक अर्थ आनन्द है। संस्कृत में वर्णन आया है-‘रस्यते आस्वाद्यते इति रस: अर्थात् जिसका आस्वादन किया जाए, वह रस है, किन्तु साहित्यशास्त्र में काव्यानन्द अथवा काव्यास्वाद के लिए रस शब्द प्रयुक्त होता है।काव्य को पढ़ने, सुनने अथवा नाटक देखने से सहृदय पाठक, श्रोता अथवा दर्शक को प्राप्त होने वाला विशेष … Read more

बाल केन्द्रित शिक्षा or बाल केंद्रित शिक्षण

बाल केन्द्रित शिक्षा Child Cantered Educationor बाल केन्द्रित शिक्षण Child Centred Teaching बाल केन्द्रित शिक्षा / शिक्षण में शिक्षण का केन्द्र बिन्दु बालक होता है। इसके अन्तर्गत बालक की रुचियों, प्रवृत्तियों तथा क्षमताओं को ध्यान में रखकर शिक्षण प्रदान किया जाता है। बाल केन्द्रित शिक्षा में व्यक्तिगत शिक्षण को महत्त्व दिया जाता है। बाल केंद्रित … Read more

शिक्षण अधिगम के प्रमुख अभिकरण – शिक्षा विज्ञान

(Main Agencies of TeachingLearning) शिक्षण अधिगम के प्रमुख अभिकरण शिक्षण का अर्थ है किसी ज्ञान को सिखाना एवं शिक्षण अधिगम का संयुक्त अर्थ है कि उचित शिक्षण किस प्रकार किया जाए अर्थात शिक्षण से संबंधित नियम तथा शिक्षण के सिद्धांत; और शिक्षण अधिगम के अभिकरण से तात्पर्य है कि शिक्षण प्रक्रिया को सुचारु रूप से … Read more

शब्द – विचार

प्रत्येक भाषा की अपनी ध्वनि-व्यवस्था, शब्द – रचना एवं वाक्य का निश्चित संरचनात्मक ढाँचा तथा एक सुनिश्चित अर्थ प्रणाली होती है । भाषा की सबसे छोटी और सार्थक इकाई ‘शब्द’ है । ध्वनि – समूहों की ऐसी रचना जिसका कोई अर्थ निकलता हो उसे शब्द कहते हैं । परिभाषा – “एक या एक से अधिक … Read more

वर्ण – विचार एवं आक्षरिक खंड

भाषा की वह छोटी से छोटी इकाई जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते हों, वर्ण कहलाते हैं, जैसे एक शब्द है-पीला । पीला शब्द के यदि टुकड़े किए जाएँ तो वे होंगे-पी + ला। अब यदि पी और ला के भी टुकड़े किए जाएँ तो होंगे – प् + ई तथा ल् + आ। अब … Read more

भाषा-व्याकरण एवं लिपि का परिचय

मानव जाति के विकास के सुदीर्घ इतिहास में सर्वाधिक महत्त्व सम्प्रेषण के माध्यम का रहा है और वह माध्यम है – भाषा । मनुष्य समाज की इकाई होता है तथा मनुष्यों से ही समाज बनता है। समाज की इकाई होने के कारण परस्पर विचार, भावना, संदेश, सूचना आदि को अभिव्यक्त करने के लिए मनुष्य भाषा … Read more

स्वतंत्रता एवं समानता अध्याय -2(LIBERTY AND EQUALITY)

स्वतंत्रता किसी अन्य व्यक्ति की प्राप्ति का साधन नहीं वरना सर्वोच्च साथ है| डॉ. राधाकृष्णन स्वतंत्रता की आवश्यकता है या उसका महत्व- मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के लिए अधिकारों का अस्तित्व नितान्त आवश्यक है और व्यक्ति के विविध अधिकारों में स्वतन्त्रता का स्थान निश्चित रूप में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। बर्ट्रेण्ड रसैल कहते हैं … Read more

अलंकार Alankar

अलंकार का अर्थ एवं परिभाषा प्रसिद्ध संस्कृत आचार्य दण्डी ने अपनी रचना ‘काव्यादर्श’ में अलंकार को परिभाषित करते हुए लिखा है-‘अलंकरोतीति अलंकार:’ अर्थात् शोभाकारक पदार्थ को अलंकार कहते हैं। हिन्दी में रीतिकालीन कवि आचार्य केशवदास ने ‘कविप्रिया’ रचना में अलंकार की विशेषताओं का विवेचन प्रस्तुत किया है। वस्तुतः भाषा को शब्द एवं शब्द के अर्थ … Read more

राज्यों के कार्यों के सिद्धांत अध्याय-2 THEORIES OF THE FUNCTIONS OF STATES CHAPTER-2

कौटिल्य के अनुसार राज्य का कार्य क्षेत्र आती विस्तृत होना चाहिए प्रजा को सुशिक्षित करने समृद्ध बनाने और उसके हित संपादन हेतु राज्य द्वारा सभी संभव प्रयत्न किए जाने चाहिए| एन.सी. बंधोपाध्याय राज शब्द है या साधन- नागरिक शास्त्र के अध्ययन में यह प्रश्न बहुत अधिक विवादग्रस्त रहा है कि राज्य अपने आप में साध्य … Read more

Balak ke Roop. बालक शब्द का रूप

बालक शब्द : अकारांत पुल्लिंग संज्ञा, सभी पुल्लिंग संज्ञाओ के रूप इसी प्रकार बनाते है जैसे -देव, बालक, राम,मोहन, सोहन,वृक्ष, सूर्य, सुर, असुर, मानव, अश्व, गज, ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र, छात्र, शिष्य, दिवस, लोक, ईश्वर, भक्त आदि बालक के शब्द रूप – Balak Shabd Roop Balak Shabd Roop In Sanskrit: विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा बालकः … Read more

बाल गंगाधर तिलक पाठ -11 Bal Gangadhar Tilak chapter-11

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे बाल गंगाधर तिलक (जीवनी) एक बार अध्यापक ने कक्षा में छात्रों को गणितके कुछ प्रश्न हल करने के लिए दिए। कक्षा के सभी छात्र तल्लीन होकर अपना कार्य कर … Read more

ग्राम श्री पाठ -9 gram Shri chapter-9

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे -ग्राम श्री ( कविता) 2-नीचे बाई ओर कविता की कुछ पंक्तियां लिखी गई है दाएं और उनसे संबंधित भाव व्यक्त करने वाली पंक्तियां गलत क्रम में लिखी गई है … Read more

कहां रहेगी चिड़िया पाठ-5 kahan rahegi chidiya chapter-5

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे कहां रहेगी चिड़िया-कविता | आँधी आई जोर-शोर से, डालें टूटी हैं झकोर से।उड़ा घोंसला, अंडे फूटे,किससे दुःख की बात कहेगी!अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी ? पंक्ति का भावार्थ-कविता के … Read more

जब मैं पढ़ता था पाठ -3 jab main padhta tha chapter- 3

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे जब मैं पढ़ता था कहानी | मेरे पिता करमचंद गांधी राजकोट के दीवान थे । वे सत्यप्रिय, साहसी और उदार व्यक्ति थे। वे सदान्याय करते थे।मेरी माता जी का … Read more

भक्ति नीति माधुरी पाठ-12 bhakti neet Madhuri chapter- 12

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे भक्ति गीत माधुरी दोहा– कबीर साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप । जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप ।। वृच्छ कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै … Read more

सत्यवादी हरिश्चंद्र satyavadi Harishchandra

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक भारत वर्ष में ऐसे अनेक महान व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने जीवन आदर्शों से संपूर्ण मानवता के समक्ष अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व थे राजा हरिश्चंद्र । वह अपनी प्रजा में सत्यवादिता, दान और परोपकार जैसे गुणों के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी पत्नी तारामती … Read more

हौसला पाठ -13 Hosala chapter -13

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे हौसला पाठ 13 जुलाई का दूसरा सप्ताह । पंद्रह जुलाई सन् उन्नीस सौ उन्यासी। अपनी माँ के साथ हमारी कक्षा में एक बच्चा आया । उसका उसी दिन दाखिला … Read more

ओणम पाठ -14 Onam chapter,- 14

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे ओणम प्रमुख त्योहार – भारत को ‘त्योहारों का देश’ कहा जाता है। यहाँ वर्ष भर त्योहारों की धूम रहती है। ये त्योहार जन-जीवन में चेतना, उत्साह और एकता का संचार करते … Read more

वीर अभिमन्यु अध्याय-15 Veer Abhimanyu chapter -15

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे वीर अभिमन्यु महाभारत का युद्ध चल रहा था। महाराज युधिष्ठिर के लिए यह दुविधा से भरा समय था, जिसमें वह कोई निर्णय नहीं ले पा रहे थे। कौरवों के सेनापति गुरु … Read more

बच्चो का पूछताछ केंद्र अध्याय -16 bachchon ka poochhtaachh Kendra chapter-16

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे बच्चो का पूछताछ केंद्र – सड़क के नुक्कड़ पर लकड़ी की एक छोटी-सी दुकान थी। उस पर पूछताछ केंद्र लिखा हुआ था। पूछताछ केंद्र में एक महिला बैठती थी। वह लोगों … Read more

टेसू राजा अध्याय -17 tesu Raja chapter -17

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे टेसू राजा (कविता)- टेसू राजा अड़े खड़े माँग रहे हैं दही बड़े ।बड़े कहाँ से लाऊँ मैं, पहले खेत खुदाऊँ मैं,उसमें उड़द उगाऊँ मैं,फसल काट घर लाऊँ मैं । छान फटक रखवाऊँ … Read more

मोहम्मद साहब अध्याय -18 Mohammed Sahab chapter-18

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे (मोहम्मद साहब) हजरत मोहम्मद साहब का जन्म अरब के प्रसिद्ध नगर मक्का में हुआ था। उनकी माता का नाम आमिना तथा पिता का नाम अब्दुल्लाह था। जन्म से दो माह पूर्व … Read more

श्रुति की समझदारी अध्याय -19 Shruti ki samajhdari chapter -19

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे (श्रुति की समझदारी ) श्रुति अपनी कक्षा की मेधावी छात्रा थी। वह हमेशा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होती थी। उसके पिता पुलिस विभाग में अधिकारी थे। सरकारी आवास न मिल पाने … Read more

चाचा का पत्र अध्याय -20 chacha ka Patra chapter-20

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे (चाचा का पत्र) मेरे प्यारे बच्चों ! मुझे तुम्हारे साथ रहना, तुम्हारे साथ हँसना-बोलना और तुम्हारे साथ खेलना बहुत पसंद है। मैं जब भी तुम्हें देखता हूँ, अपना बुढ़ापा भूल जाता हूँ। … Read more

सबसे उजला अध्याय -21 sabse ujala chapter- 21

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे(सबसे उजला) सम्राट अकबर का दरबार लगा हुआ था। दरबार के आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने के बाद अकबर ने दरबारियों से प्रश्न किया, “क्या आप बता सकते हैं कि दुनिया में … Read more

बोलने वाली गुफा-पाठ-4 bolane wali gufa chapter 4

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे बोलने वाली गुफा| (पंचतंत्र की कथा) सुंदरवन में एक खूँखार शेर रहता था। वह वन के सभी जीवों के लिए मुसीबत था। जंगल के जानवर उससे इतना डरते थे … Read more

हाँ में हाँ पाठ-6 han main han chapter-6

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे हाँ में हाँ-(बुंदेलखंड की एक लोक कथा)–एक राजा थे। राज-काज से थक गए थे। एक दिन दरबार में मंत्री से बोले- “मंत्री जी,सोचता हूँ, हम लोग गंगा-स्नान कर आएँ … Read more

मलेथा की गूल पाठ-7 maletha ki Gul chapter -7

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे मलेथा की गूल (कहानी) – मध्य गढ़वाल की घाटियों में एक गाँव है – मलेथा । गाँव के दक्षिण-पश्चिम की ओर पहाड़ की एक श्रृंखला अलकनंदा नदी तक चली … Read more

टोकरी में क्या है? पाठ-8 tokri mein kya hai chapter- 8

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे टोकरी में क्या है (कहानी)

UP Board of High School & Intermediate Education Class 4-chapter 1-फुलवारी

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक भावार्थ –  कवि ने ईश्वर की प्रसंशा करते हुए कहता है कि हे प्रभु ! आपके प्रकाश, सूर्य बनकर पूरे संसार को प्रकाशित कर रहा है, और आपका यश, श्वेत प्रकाश की किरणों के रूप में चारों तरफ फैल रहा है? भावार्थ – कवि ने ईश्वर का गुणगान करते … Read more

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

पाठ विषय सूची 1. हे जग के स्वामी 2. प्यासी मैना 3. बोलने वाली गुफा 4. बोलने वाली गुफा 5. कहां रहेगी चिड़िया 6. हाँ में हाँ 7. मलेथा की गूल 8. टोकरी में क्या है? 9. ग्राम श्री 10. नन्ही राजकुमारी और चंद्रमा 11. बाल गंगाधर तिलक 12. भक्ति नीति माधुरी 13. हौसला 14. … Read more

राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांत- theories of origin of state.

राज्य नागरिकशास्त्र में अध्ययन का एक मुख्य विषय है। विभिन्न विद्वानों ने राज्य की उत्पत्ति व स्वरूप के बारे में विस्तृत विचार प्रस्तुत किये। यह प्रश्न विद्वानों के बीच विवाद का विषय रहा है कि राज्य किस प्रकार अस्तित्व में आया। राज्य की उत्पत्ति के बारे में विद्वानों द्वारा कई सिद्धान्त प्रस्तुत किये गये हैं। … Read more

विशेषण के प्रकार

विशेषण- कार्य और भेद जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए, उसे ‘विशेषण’ कहते हैं। जिसकी विशेषता बताई जाए, वह ‘विशेष्य’ कहलाता है। दूसरे शब्दों में विशेषण एक ऐसा विकारी शब्द है, जो हर हालत में संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। इसका अर्थ यह है कि विशेषण रहित संज्ञा से जिस वस्तु का … Read more

सिविल सेवा प्रारम्भिक परीक्षा हेतु सामान्य अध्ययन पेपर- I

सिविल सेवा परीक्षा भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण परीक्षा मानी जाती है। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी न केवल एक उच्च पद, प्रतिष्ठा, मान, सम्मान अन्य भौतिक सुविधाएँ प्राप्त करता है, बल्कि एक सिविल सेवक के रूप में देश एवं समाज के विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। यह प्रतिष्ठित … Read more

नन्ही राजकुमारी और चंद्रमा पाठ -10 nanhi Rajkumari aur chandrama chapter-10

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे नन्ही राजकुमारी और चंद्रमा बहुत पुरानी बात है, समुद्र किनारे एक नन्हीं-सी राजकुमारी रहती थी। एक दिन उसने इतनी चटनी खा ली कि बीमार हो गई। डॉक्टर ने भी … Read more

मात्रक और इकाई भौतिक राशियां (भौतिक विज्ञान)

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किसी भी भौतिक राशि को मापने के लिए उस भौतिक राशि के एक निश्चित परिमाण को मानक मान लेते हैं | और इस मानक को ही कोई नाम दे देते हैं, इसी नाम को उस राशि का मात्रक Unit कहते हैं। मात्रक और इकाई भौतिक राशियां भौतिक विज्ञान एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं | भौतिक राशियों … Read more

पाषाण काल-प्राचीन भारत का‌ इतिहास

इतिहास में जिस काल के बारे में कोई लिखित साक्ष्य या प्रमाण नहीं मिलता है, उस काल को प्रागैतिहासिक काल कहते हैं। जबकि आद्य-ऐतिहासिक काल में लिपि के साक्ष्य एवं प्रमाण हैं, लेकिन ये साक्ष्य अपठ्य और दुर्बोध होने के कारण उनसे कोई निष्कर्ष नहीं निकलता। इतिहास में जब से लिखित विवरण मिलते हैं , … Read more

UPPSC RO ARO Syllabus 2023 यूपी आरओ/एआरओ – पाठयक्रम (Syllabus) प्रारम्भिक परीक्षा

(1) समान्य विज्ञान 1 मात्रक / इकाई (भौतिक विज्ञान) 2 मापक यंत्र एवं पैमाने(भौतिक विज्ञान) 3 यांत्रिकी(भौतिक विज्ञान) 4 गुरुत्व के अधीन गति(भौतिक विज्ञान) 5 स्थूल पदार्थों के गुण(भौतिक विज्ञान) 6 प्रकाश(भौतिक विज्ञान) 7 ऊष्मा एवं ऊष्मा गतिकी(भौतिक विज्ञान) 8 तरंग गति ध्वनि – विद्युत धारा(भौतिक विज्ञान) 9 चालकता(भौतिक विज्ञान) 10 नाभिकीय भौतिकी (भौतिक विज्ञान) … Read more

UPSSSC PET SYLLABUS के भारतीय इतिहास में सिंधु घाटी की सभ्यता का सम्पूर्ण अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Sindhu ghati sabhyata

UPSSSC PET SYLLABUS में भारतीय इतिहास के अंतर्गत एक चैप्टर सिंधु घाटी की सभ्यता को भी सामिल किया गया है| सिंधु घाटी की सभ्यता चैप्टर से एक प्रश्न या दो प्रश्न पूछे जाते हैं| इस चैप्टर को तैयार करने के बाद यूपी एसएसएससी पीईटी परीक्षा में एक या दो नंबर आप को अवश्य मिल जाएगा … Read more

UPSSSC PET Syllabus.उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग PET Exam का सम्पूर्ण पाठ्यक्रम |

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UPSSSC PET Syllabus 2023: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 1 अगस्त 2023 को अपनी आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in के माध्यम से आधिकारिक तौर पर यूपीएसएसएससी पीईटी पाठ्यक्रम 2023 जारी कर दिया है। UPSSSC PET परीक्षा को ग्रुप B और C पदों की भर्ती के लिए पात्रता परीक्षा के रूप में तैयार किया गया … Read more