पाठ-2 पाषाण काल(आखेटक संग्राहक एवं उत्पादक मानव) pashan kal

पाषाण काल

घर हमें जाड़े से, गर्मी से, तथा बारिश से सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें रहकर हम अपने सभी कार्यों को भली-भाँति कर लेते हैं किन्तु एक समय ऐसा भी था जब मनुष्य घर बनाना नहीं जानते थे। तब वे जंगलों में रहते थे। जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा तथा उनका शिकार करने के लिए उनके पास केवल पत्थर के ही औजार थे।


मानव में परिवर्तन

मानव शास्त्रियों के अनुसार आज से लगभग 2 करोड़ वर्ष पूर्व मानव विकास की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। इस समय उसमें कुछ महत्वपूर्ण शारीरिक परिवर्तन हुए। जैसे-
दोनों पैरों पर खड़े होकर सीधे चलना ।
अँगूठे के कारण वस्तुओं को पकड़ने की क्षमता का विकास होना जिससे महत्वपूर्ण कार्यों को कर लेना ।

मस्तिष्क के आकार एवं क्षमता में विस्तार
मनुष्य में लम्बाई, चौड़ाई और गहराई या ऊँचाई को देखने की क्षमता (त्रिपार्श्वदर्शी दृष्टि) का होना ।
मानव के विकास, विभेद आदि की जानकारी देने वाले मानव-शास्त्री कहलाते हैं।
मानव के शारीरिक विकास की यह प्रक्रिया चलती रही तथा उसमें धीरे-धीरे विकास होता गया जैसा कि नीचे के चित्र से स्पष्ट होता है-

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इन महत्वपूर्ण बदलावों के कारण मानव अपने आस-पास के वातावरण एवं परिस्थितियों के साथ सामंजस्य करने लगा। अब उसने हाथ एवं मस्तिष्क का अधिक प्रयोग करना सीख लिया था और वह अपनी जरूरतों के लिए पत्थर के औजारों या उपकरणों का निर्माण करने लगा। इन्हीं पत्थर के उपकरणों से हमें उसके होने का पता चलता है।

पाषाण काल

पाषाण अर्थात् पत्थर, काल अर्थात् समय। मानव ने अपनी रक्षा और अपनी भूख मिटाने के लिए सर्वप्रथम पत्थर के औजारों का ही सबसे अधिक उपयोग किया इसलिए इस युग को पाषाण काल कहते हैं। पत्थर से बने औजारों में समय-समय पर परिवर्तन हुए हैं। इसलिए पाषाण युग को तीन भागों में बाँटा गया है।

1.पुरापाषाण काल

2. मध्यपाषाण काल

3.नवपाषाण फाल

पुरापाषाण काल

पुरापाषाण काल में मानव पहले खुले आकाश के नीचे, नदियों के किनारे या झील के पास रहता था। इससे उसे शिकार करने में आसानी होती थी। वह पत्थर के औजारों से पशुओं का शिकार करता था। शिकार से प्राप्त माँस ही उसका मुख्य भोजन था। कन्दमूल तथा फल भी उसके भोजन में सम्मिलित थे। थोड़े समय बाद मानव ने गुफाओं में रहना प्रारम्भ कर दिया क्योंकि उसे तब तक घर बनाना नहीं आता था। शिकार की खोज में वह लगातार घूमता रहता था। इस प्रकार उसका कोई स्थाई आवास नहीं था। इसी समय उसे आग की जानकारी प्राप्त हुई। साथ ही अब उसने अपने मृतकों को कब्र में दफनाना प्रारम्भ कर दिया। पुरापाषाण काल के आखिरी दौर में उसने चित्र बनाना भी सीख लिया। उस समय की गुफाओं में उसके द्वारा बनाए गए चित्र मिलते हैं। इन चित्रों में शिकार के दृश्य बनाए गए हैं। इसी समय मानव ने हड्डी के औजार भी बनाना प्रारम्भ किया। यह औजार उसके ज्ञान में विकास को दर्शाते हैं।

इस युग में मानव झुण्ड बनाकर ही शिकार करते थे। जिसे वह आपस में बाँटकर खाते थे। मानव यह समझ चुका था कि वह तभी जीवित रह सकता है जब वह दूसरों के साथ मिलकर चले। इस प्रकार एक दूसरे का सहयोग करने की भावना इस युग में विकसित हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में मिली कुछ गुफाओं से पता चलता है कि मानव समूह में रहते थे।

कैसे करते थे शिकार ?

आदि मानव के पास न ही जंगली जानवरों जैसे पैने नाखून थे, न ही नुकीले दाँत, न जबड़े और न ही सींग । उसकी बड़ी समस्या अपने से ज्यादा ताकतवर जंगली जानवरों से रक्षा करने व उनका शिकार करने की थी। इसके लिए उसने पत्थर के औजारों का निर्माण व प्रयोग किया, क्योंकि उसे पत्थर आसानी से प्राप्त हो जाते थे। यह मानव की आखेटक अवस्था थी ।
इस युग के पत्थर के औजार आकृति में सुडौल नहीं थे। ये बेडौल एवं भौड़ी आकृति वाले थे।

कैसे जाना, आग जलाना

औजार बनाने के लिए वे एक पत्थर पर दूसरे पत्थर से चोट मारते थे। एक पत्थर से दूसरा पत्थर टकराने पर चिनगारी निकली। निकलने वाली चिनगारी से उन्हें आग का ज्ञान हुआ। इससे वह सूखी पत्तियों, लकडी की टहनियों आदि को जलाने लगे।

सोचिए और लिखिए कि आग का ज्ञान होने के बाद उनके जीवन में क्या परिवर्तन आया होगा ?

आग की खोज इस युग की महान उपलब्धि थी।

मध्यपाषाण काल

मध्यपाषाण काल के औजार (उपकरण) पुरापाषाण काल की अपेक्षा आकार में छोटे हो गए। इस समय प्रकृति में अनेक परिवर्तन हुए जिसका प्रभाव मानव जीवन पर पड़ा। नई परिस्थिति से तालमेल बैठाने के लिए उसने छोटे उपकरण बनाना प्रारम्भ किया। जलवायु पहले की अपेक्षा गर्म हुई फलस्वरूप जहाँ-जहाँ बर्फ जमी थी वह पिघल गई। पृथ्वी की उर्वरक शक्ति का विकास हुआ तथा घास एवं वनस्पतियों के मैदान विकसित हुए। घास को खाने वाले छोटे जानवर जैसे हिरण, खरगोश, भेड़, बकरी आदि पैदा हुए। मानव अपने आप उगी घासों को एकत्र करने लगा। इन घासों में कई आज के अनाजों की पूर्वज थीं। इनका प्रयोग मानव ने अपने भोजन में किया। इस प्रकार वह अब ‘संग्राहक’ बन गया। मानव ने इसी समय कुत्ते को पालतू बनाया। कुत्ता मानव का प्रथम पालतू पशु है।

कैसे हुआ खेती का ज्ञान

पुरातत्ववेत्ताओं का मत है कि अपने आप उगे हुए अनाजों को मानव ने एकत्रित करना शुरू किया। अनाज के कुछ दाने गीली मिट्टी में अथवा इधर-उधर गिरे होंगे। इन स्थानों पर फिर से वही अनाज उगे। जब मानव ने इसे देखा तब उसे ज्ञात हुआ कि इन अनाज के दानों से बार-बार अनाज उगाया जा सकता है। अपने इस ज्ञान का उसने परीक्षण भी किया। तब जाकर उसे खेती का ज्ञान हुआ।

आप गेहूँ के कुछ दानों को गीली मिट्टी या गोबर के ढेर में डालिए कुछ दिन बाद देखिए क्या होता है?


नवपाषाण काल

पुरातत्वविदों का यह मानना है कि मानव ने जब से भलीभाँति खेती करना प्रारम्भ कर दिया तभी से नवपाषाण काल प्रारम्भ होता है। यह मानव सभ्यता के इतिहास का सबसे बड़ा परिवर्तन था। खेती के कारण मानव अब भोजन संग्राहक से भोजन उत्पादक बन गया। इस समय उसके पत्थर के उपकरण अधिक उपयोगी एवं सुडौल थे क्योंकि उन्हें अधिक कुशलता से बनाया गया था। यह उपकरण घिसकर चमकदार बनाए गए थे। हत्थेदार कुल्हाड़ी एवं हँसिया इस समय के महत्वपूर्ण औजार थे। खेती के साथ पशुपालन भी प्रारम्भ हुआ। पशुओं का प्रयोग मांस व दूध प्राप्त करने में किया जाता था।

मानव अब अपने खेतों के आसपास मिट्टी के घरों एवं घास फूस के छप्पर वाले घरों में रहने लगा धीरे-धीरे यह बस्तियां गांव बन गए।

अब ये मिट्टी के बर्तन बनाना भी जान गए थे। बर्तनों पर नक्काशी एवं चित्रकारी में रंगो का प्रयोग होने लगा। इसी समय मानव ने पहिए का आविष्कार किया। इसका प्रयोग चाक के रूप में मिट्टी से बर्तन बनाने तथा सामान ढोने के लिए गाड़ी के पहिए के रूप में किया गया।
खेती के कारण लोग एक ही जगह रहने लगे। फलस्वरूप नए-नए कौशल विकसित हुए जैसे-मूँज की टोकरी व चटाइयाँ बनाना, कताई करना, जानवरों के बालों से कपड़ा बनाना आदि। अब उनमें सामुदायिक जीवन का विकास हुआ।

शवों को दफनाने के ढंग से इनके धार्मिक विश्वास के विषय में जानकारी मिलती है। शवों (मृत व्यक्तियों) के साथ खाने-पीने की चीजें, बर्तन, हथियार आदि भी दफनाए जाते थे। इन लोगों का विश्वास था कि मरने के बाद भी व्यक्ति इनका उपयोग करेगा।

धातुकाल

नवपाषाण युग का अन्त होते-होते पत्थर के साथ-साथ धातुओं का इस्तेमाल शुरू हो गया। धातुओं में सबसे पहले ताँबे का प्रयोग हुआ जिसके कारण इस युग को ताम्र-पाषाण युग कहा गया।

मानव ने ताँबे की खानों का पता लगाकर, उससे ताँबा खोदकर निकालना शुरू किया। उच्च तापमान में ताँबे को पिघलाना तथा साँचे की सहायता से धातु-द्रव को विविध रूप देना भी उन्होंने सीख लिया। यह मानव विकास की एक और महत्वपूर्ण खोज थी।
धीरे-धीरे मानव ने ताँबे व टिन को मिलाकर मिश्रित धातु काँसा बनाना सीख लिया। मानव जीवन उसकी प्रगति एवं संघर्ष की कहानी है। प्रारम्भिक मानव ने अपनी समस्याओं से जूझते हुए अपने को जीवित रखा, अपनी उन्नति की एवं अपने को सभ्य बनाया ।

अभ्यास

1.रिक्त स्थान भरिए

(क) आग की खोज …. पुरापाषाणकाल..युग में हुई।
(ख) पुरापाषाण कालीन पत्थर के औजार…बेडौल एवं भौड़ी आकृति…..वाले थे।
(ग) पहिए का आविष्कार…नवपाषाण…काल में हुआ ।

2.उत्तर लिखिए-

(क) पाषाण युग को किसकी विशेषताओं के आधार पर बाँटा गया है ?

पाषाण अर्थात् पत्थर काल अर्थात् समय मानव ने अपनी रक्षा और भूख मिटाने के लिए पत्थर के औजारों का ही प्रयोग किया करते थे इसलिए इस युग को पाषाण काल कहते हैं।


(ख) मानव ने आग जलाना कैसे सीखा ?

मानव ने जब औजार बनाने के लिए पत्थर से पत्थर को रगड़ा तो उससे निकलने वाली चिंगारी से आग जलना सीखा।


(ग) पुरातत्वविद् नवपाषाण काल का प्रारम्भ कब से मानते है ?

पुरातत्वविदों का मानना है कि मानव ने जब भली भांति खेती करना प्रारंभ कर दिया तभी से नवपाषाण काल प्रारंभ होता है।


(घ) पाषाण युगीन मानव अपने औजार किन-किन वस्तुओं से बनाते थे

पाषाण युगीन में मानव अपने औजार पत्थर से बनाते थे जिसे पाषाण काल कहा गया।

(ड.) प्रारम्भिक मानव अपना भोजन किस प्रकार प्राप्त करते थे ?

प्रारंभिक मानव अपना भोजन शिकार के द्वारा अपना भोजन प्राप्त करते थे।

(च) मध्यपाषाण काल में हुए प्राकृतिक परिवर्तन का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?

मध्य पाषाण काल में मानव अपने आप उगी घास को एकत्र करने लगा इन घासो में कई आज के अनाज की पूर्वज थी इसका प्रयोग मानव ने अपने भोजन के रूप में किया ।


3.सही कथन के आगे सही (V) का और गलत कथन के आगे गलत (x) का निशान लगाएँ-



(क) मानव ने अपनी जरूरतों के लिए पत्थर के औजारों का निर्माण नहीं किया।

(ख) पाषाण युग को तीन भागों में बाँटा गया है।
(ग) मध्यपाषाण कालीन पत्थर के औजार आकार में बड़े थे

(घ) कुत्ता मानव का प्रथम पालतू पशु है ।

(ङ) हत्थेदार कुल्हाड़ी एवं हँसिया नवपाषाण काल के महत्त्वपूर्ण औजार नहीं थे।

(च) मानव ने ताँबे व टिन को मिलाकर मिश्रित धातु काँसा बनाना सीख लिया।

4.मानव ने इधर-उधर घूमने के बजाय एक ही स्थान पर रहना प्रारम्भ कर दिया क्योंकि-

(क) उन्हें एक ही स्थान पर जरूरत भर का पानी उपलब्ध था ।
(ख) उनके पशुओं के लिये चारा पर्याप्त था।

(ग) उन्होंने खेती करना शुरू कर दिया था।

(घ) जंगली जानवर पर्याप्त मात्रा में मिलने लगे।

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