पाठ 2 पौधों एवं जन्तुओं के उपयोग paudhon AVN jantuon ke upyog

पौधों एवं जन्तुओं का उपयोग

मनुष्य अनेक प्रकाश की उपयोगी वस्तुओं के लिए पौधों और जन्तुओं पर निर्भर है।

पौधों के उपयोग

पौधे हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। उनसें हमें ऑक्सीजन, भोजन, पेय पदार्थ, दवाइयाँ, कपड़ों के लिए तन्तु एवं फर्नीचर इत्यादि प्राप्त होते हैं।

ऑक्सीजन – सभी प्राणी जगत के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जो वायु हम श्वास में लेते हैं; उसमें ऑक्सीजन मिली होती है। श्वास लेने पर कुछ ऑक्सीजन कार्बन डाई-ऑक्साइड में बदल जाती है। प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में पौधे कार्बन डाई-ऑक्साइड और जल से भोजन बनाते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इस प्रकार वे
वायु में ऑक्सीजन के स्तर को एक समान बनाये रखते हैं। यही कारण है कि हम अपने घरों में या घरों के निकट
पेड-पौधे लगाते हैं।

भोजन – हरे पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। अतः वे मनुष्यों सहित सभी जन्तुओं के लिए भोजन का स्त्रोत हैं। सभी पौधों को भोजन के लिए प्रयोग नहीं किया जाता है।
जन्तु पौधे के सभी भागों को खाते हैं। हम पौधे का एक भाग या कई भाग खाते हैं। गाजर, मूली, शलजम और शकरकंद की हम जड़ें खाते हैं। गन्ने और आलू के तने को हम भोजन के रूप में प्रयोग करते हैं। पालक, सरसों, पत्तागोभी (बन्दगोभी) और मेथी की पत्तियाँ भोजन के रूप में प्रयोग की जाती हैं। टमाटर, भिण्डी, सेब, मटर और गेहूँ
भिन्न-भिन्न पौधों के फल हैं।

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गेहूँ, ज्वार, बाजरा, मक्का और चावल के पौधे के फलों को अनाज कहते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट बहुत अधिक होता है। अनाज हमारे भोजन का एक बड़ा भाग है। मटर एवं सेम इत्यादि दालें कहलाती हैं। दालों में प्रोटीन अधिक होता है। दालें शरीर का निर्माण और दूध बनाने वाला भोजन है। सेब, अमरूद, अंगूर, तरबूज, खरबूजा और आम कुछ ऐसे फल हैं, जो रसीले और स्वादिष्ट होते हैं। सब्जियाँ पौधे के खाने योग्य भाग हैं। टमाटर, आलू, भिण्डी एवं पालक आदि कुछ सब्जियाँ हैं। कुछ पौधों से तेल-बीज प्राप्त होते हैं। उनसे तेल निकाला जाता है। सरसों का तेल, मूँगफली का तेल, सोयाबीन का तेल और सूरजमुखी का तेल भोजन पकाने के लिए प्रयोग किया जाता है। मसाले भोजन को एक विशेष सुगन्ध और स्वाद प्रदान करते हैं। जीरा, धनिया, इलायची, काली मिर्च, लौंग एवं लाल मिर्च आदि सब मसाले ही हैं।
सभी मिठाइयों और पेय पदार्थों का चीनी एक आवश्यक भाग है, जिन्हें बच्चे बड़े चाव से खाते-पीते हैं। चीनी गन्ने के तने और चुकन्दर की जड़ से बनाई जाती है।

पेय पदार्थ – प्रायः सभी लोग गन्ने का रस तो पीते ही हैं – गन्ना चूसकर या गन्ने से निकला हुआ रस पीकर। फल और सब्जियों के रस स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक हैं। उनमें विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। चाय को चाय के पौधे की पत्तियों से (और कॉफी को कॉफी के पौधे के बीजों से बनाते हैं। कोको के पौधे के बीजों से कोको का पाउडर बनाते हैं, जो चाकलेट और कोका-कोला जैसे पेय पदार्थों में मिलाया जाता है।

दवाइयाँ – तुलसी और बनफशा की पत्तियाँ खाँसी और जुकाम को दूर करने में प्रयोग की जाती हैं। नीम की पत्तियाँ और निबौली त्वचा के रोगों के लिए प्रसिद्ध दवाई हैं। आँवले के फल से च्यवनप्राश नामक टॉनिक बनाया जाता है, जो कमजोरी दूर करता है।

मलेरिया बुखार की दवाई कुनैन सिनकौना नामक पौधे की छाल से तैयार की जाती है। पीपरमेन्ट, कपूर एवं लौंग आदि हजारों दवाइयाँ पौधों से ही प्राप्त की जाती हैं।हमारे देश भारत में प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक दवाइयों की एक प्रणाली प्रचलित है। इसके अनुसार रोगों की चिकित्सा जड़ी-बूटियों से ही जाती है, जो पौधों से ही तैयार हो जाती है। चरक, सुश्रुत, धनवन्तरी और नागार्जुन आयुर्वेद के विश्वविख्यात प्राचीन विशेषज्ञ हुए हैं। उन्होंने दवाइयों पर पुस्तकें लिखी हैं। हमारे देश में बहुत-से लोग आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग करते हैं।

तन्तु या धागे – रूई के धागों से कपड़े, चादर और तौलिये बनाये जाते हैं, इन्हें सूती वस्त्र कहते हैं। हमें रूई कपास के पौधे से प्राप्त होती है। जूट, सन, नारियल और पटुआ के धागों से थैले, चटाइयाँ, रस्सियाँ, सुतली और बोरियाँ आदि बनाई जाती हैं।

लकड़ी और कागज-सागवान, शीशम, साल और टीक की लकड़ी फर्नीचर, खेल का सामान और संगीत के यन्त्र बनाने के लिए सर्वोत्तम है। विभिन्न वृक्षों की लकड़ी से दरवाजे, खिड़कियाँ और छतें बनती हैं। पहाड़ों और जापान जैसे भूकम्पों के क्षेत्रों में मकान लकड़ी से ही बनाये जाते हैं।
घरों और खेतों पर काम करने वाले बक्से, औजार और यन्त्र आंशिक अथवा पूर्ण रूप से लकड़ी के बनाये जाते हैं। पैन्सिल, माचिस की तिलियाँ और बक्से लकड़ी से बनते हैं।

लकड़ी को ईंधन के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। यूकेलिप्टस और बाँस जैसे वृक्षों की नरम लकड़ी से कागज बनाया जाता है।

रबड़ रबड़ के वृक्ष के दूध से प्राप्त होती है। रबड़ से टायर-ट्यूब, खिलौने और जूते बनते हैं।

अन्य उपयोग

गोंद – हमें कीकर के वृक्ष से गोंद मिलता है, जिसे भोजन के रूप में और चिपकाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

तेल, राल और साबुन – वार्निश और पेंट बनाने के लिए हमें चीड़ के वृक्ष तारपीन का तेल मिलता है। अलसी का तेल भी पेंट बनाने में प्रयोग होता है। साबुन, नारियल और नीम आदि के तेलों से बनाये जाते हैं।

सुगन्धियाँ – गुलाब एवं चमेली आदि के फूलों तथा चन्दन आदि की लकड़ी से हमें सुगन्धियाँ मिलती हैं। ये प्रायः द्रव के रूप में होती हैं तथा इनसे मनमोहक सुगन्ध आती रहती है।

सजावट और सुरक्षा – गुलाब, गेंदा एवं चमेली के फूलों से विवाह आदि अवसरों पर सजावट की जाती है और मालाएँ बनाई जाती हैं। फर्न की पत्तियाँ बड़ी सुन्दर होती हैं। अत: हम अपने घरों में फर्न लगाते हैं। गर्मियों में तेज धूप से बचने के लिए हम बड़े वृक्षों की छाया में बैठते हैं। पशुओं को घुसने से रोकने के लिए बोगेनविलिया जैसे पौधों की बाड़ लगाई जाती है।

मिट्टी का कटाव रोकना – पौधे अपने चारों ओर की उपजाऊ मिट्टी को बाँधे रखते हैं। जब पौधे नहीं होते, तो हवा उपजाऊ मिट्टी को उड़ाकर ले जाती है और बाढ़ का पानी बहाकर ले जाता है।

प्राकृतिक खाद – पौधों का कूड़ा-करकट भी उपयोगी होता है। इसे गड्ढे में दबाकर सड़ाने से कम्पोस्ट नामक सर्वोत्तम खाद बनती है। यह खाद अन्य पौधों को उनके बढ़ने के लिए खनिज प्रदान करती है।

जन्तुओं के उपयोग

मनुष्य ने कुछ जन्तुओं को पालतू बनाया है और उनकी देखभाल भी करता है। इन्हें घरेलू जन्तु या पालतू जन्तु कहते हैं। जंगली जन्तु वनों और पर्वतों में स्वतन्त्र घूमते हैं। दोनों प्रकार के जन्तु हमारे लिए लाभदायक हैं।

जन्तु प्रकृति में ऑक्सीजन और कार्बन डाई-ऑक्साइड का सन्तुलन बनाये रखते हैं। वे पौधों को कार्बन डाई-ऑक्साइड देते हैं, जिससे वे अपना भोजन बनाते हैं। पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं। जन्तुओं से हमें दूध तथा अन्य उपयोगी पदार्थ मिलते हैं और हमारे लिए सेवा-कार्य करते हैं।

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भोजन – हमें गाय, भैंस और बकरियों से दूध मिलता है। दूध में प्रोटीन और वसा (चिकनाई) की पर्याप्त मात्रा होती है। इसे सम्पूर्ण भोजन भी कहते हैं, क्योंकि नन्हें शिशु पूर्ण रूप से दूध पर ही निर्भर रहते हैं। दूध से दही, पनीर, मक्खन, घी और आइसक्रीम बनाई जाती है। व्यक्ति जन्तुओं का माँस और अण्डे भी खाते हैं, किन्तु आधुनिक वैज्ञानिक खोजें इनके विरुद्ध हैं। अण्डे और माँस बहुत जल्दी सड़ते हैं, जिससे वे विषाक्त हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त वे जन्तु तथा वातावरण से कीटाणु संक्रमण द्वारा रोग फैलाते हैं।


ऊन हम भेड़, याक और अंगोरा खरगोश के रोएँदार बालों से ऊन प्राप्त करते हैं।ऊनी कपड़े हमें सर्दियों में गर्म रखते हैं।

शहद और मोम शहद एक मीठा द्रव है। यह मधुमक्खियों द्वारा बनाया जाता है। मधुमक्खियाँ मोम भी बनाती हैं। वे इस मोम का प्रयोग अपना घर बनाने में करती हैं। इस मोम का प्रयोग मोमबत्तियाँ एवं औषधियाँ आदि बनाने में भी किया जाता है।

निगरानी और सुन्दरता – कुत्ता हमारे घरों, खेतों और पशुओं की निगरानी करता है। यह एक अच्छा साथी भी है। लोग बिल्ली, खरगोश और कबूतर आदि को उनकी सुन्दरता (और शिष्टता के कारण पालते हैं। तोता एक सुन्दर पक्षी है, जो मनुष्यों की भाँति बात कर सकता है।

खाद – पशुओं के गोबर को लोग खाद और ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं। अब गोबर से गोबर गैसें बनाई जाती हैं तथा बचा हुआ गोबर का अंश खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह खाद, भूमि के उपजाऊपन को बनाये रखने में हमारी सहायता करती है।

परिश्रम – घोड़े, गधे, खच्चर और ऊँट हमारा बोझा ढोते हैं और गाड़ियाँ खींचते हैं। ऊँट रेगिस्तान का जहाज हैं। बैल खेतों को जोतने और गाड़ियाँ खींचने के काम आते हैं। हाथी गहरे जंगलों में लकड़ी के भारी लट्ठों को उठाने और ढोने का कार्य करते हैं। याक पहाड़ों पर सामान ढोते हैं।

पशुओं के प्रति क्रूरता – कुछ लोग फर प्राप्त करने के लिए खरगोशों को मारते हैं। खरगोश के कोमल बालों वाली खाल को फर कहते हैं। इससे कोट और टोपियाँ बनाई जाती हैं। इसी प्रकार रेशम के कीड़ों, लाख के कीड़ों और सीपियों को क्रमशः रेशम के कपड़ों, लाख की चूड़ियों और मोती की मालाओं के लिए मारा जाता है।

मनोरंजन और सजावट के लिए पशुओं को मारना एक क्रूरता है। मनुष्य सबसे अधिक विकसित जन्तु हैं। पौधे, जन्तु और मनुष्य सभी एक ही बड़े परिवार के सदस्य हैं। अत: हमें अपने साथी सदस्यों को नहीं मारना चाहिए। मारे गये जन्तुओं के शरीर के सड़ने-गलने से रोग फैल जाते हैं।

याद रखिए-

पौधे हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं।

पौधे मनुष्य सहित सभी जन्तुओं का भोजन हैं।

जन्तु पौधे के सभी भागों को खाते हैं।

अनाज हमारे भोजन का एक बड़ा भाग है।

 चीनी गन्ने के तने और चुकन्दर की जड़ से बनायी जाती है।

कोको के पौधे के बीजों से कोको का पाउडर बनाते हैं।

तुलसी एवं बनफशा की पत्तियाँ खाँसी और जुकाम को दूर करने में प्रयोग की जाती हैं। 

• मलेरिया बुखार की दवाई कुनैन सिनकौना नामक पौधे की छाल से तैयार की जाती है


देखें आपने क्या सीखा ?

क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1.जन्तु अपने भोजन के लिए हरे पौधों पर क्यों निर्भर हैं ?

जन्तु हरे पौधे से अपना भोजन ग्रहण करते हैं इसलिए जन्तु हरे पौधों पर निर्भर रहते हैं।

2.पौधों से प्राप्त हमारे भोजन का अधिकतर भाग कौन-सा है ? –

पौधों से प्राप्त हमारे भोजन का अधिकतर भाग गाजर मूली शलजम सरकंद आलू है।

3.कागज बनाने के लिए कौन-से पौधे प्रयोग किये जाते हैं ?

कागज बनाने के लिए यूकेलिप्टस पौधे का प्रयोग किया जाता है।

4. चीनी हमें कौन से पौधों से मिलती है ?

चीनी हमें गाने के पौधे से प्राप्त होती है।

3.कपड़े के लिए तन्तु हमें कौन-से पौधों से मिलता है ?

कपड़े के लिए तंतु रुई और कपास के पौधे से प्राप्त होती है

ख. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए


1.फल और सब्जियों में विटामिन और.. खनिज… भरपूर होते हैं।

2.चाकलेट… कोका कोला…के कारण मीठा होता है।

3.दालें…. शरीर…का निर्माण करने वाला भोजन है।


.4…रेशम कीड़े…के रेशों से कपड़े बनाये जाते हैं।

5.दुग्धशाला के पशुओं का चारा..से मिलता है।


निम्नलिखित सत्य कथन के आगे सही () और गलत कथन के आगे गलत (X) का
चिह्न लगाइए –

1.ज्वार, बाजरा एक स्वादिष्ट भोजन है।

2.गोंद हमें एक कीट से प्राप्त होता है।

3.लकड़ी केवल ईंधन के रूप में काम आती है।

4. पौधों के मृत भागों का कोई उपयोग नहीं है।

5. ऊन हमें भैंसों से मिलती है।

उपरोक्त प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं दें

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