Paudhon Jantuon ki Suraksha पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ 3

पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ -3

सुरक्षा की आवश्यकता – इस आश्चर्यचकित जीव संसार को पैदा और विकसित होने में लाखों वर्ष लगे हैं। घरों, खेतों और वनों में अनेक प्रकार के पौधे और जन्तु पाये जाते हैं। उनसे हमें बहुत-सी उपयोगी वस्तुएँ मिलती हैं। यही कारण है कि वे हमारी प्राकृतिक सम्पत्ति कहलाते हैं।

जैसे-जैसे हमारी जनसंख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे नये-नये नगरों और उद्योगों के स्थान के लिए वन काट डाले गये। भोज्य पदार्थों की फसलें उगाने के लिए और आर्थिक दृष्टि से भूमि की आवश्यकता पड़ी। वनों से प्राप्त होने वाली लकड़ी और अन्य वस्तुओं की माँग बढ़ी। इसके कारण प्रति वर्ष लाखों वृक्ष काटे जा रहे हैं। जन्तुओं को माँस, चमड़े, फर एवं सींग इत्यादि के लिए मारा जा रहा है।

वनों के विनाश ने पशुओं को बुरी तरह से प्रभावित किया है। उनके प्राकृतिक आश्रय छिन गये हैं और भोजन नष्ट हो गया है। इस प्रकार ऑक्सीजन और कार्बन डाई-ऑक्साइड के स्तरों का सन्तुलन प्रभावित हुआ। इसके फलस्वरूप हमारी भोजन- शृंखला और ऑक्सीजन की पूर्ति में बाधा पड़ती है।।

इस प्रकार पौधों और जन्तुओं के विनाश से मानव जाति के अस्तित्व को एक भयंकर खतरा पैदा हो गया है। इस खतरे के लिए मानव स्वयं उत्तरदायी है।

इसलिए हमें घरों, खेतों और वनों के जन्तुओं और पौधों की सुरक्षा करनी चाहिए। यह सुरक्षा न केवल हमारे वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण


खेतों और घरों के पौधों की सुरक्षा

1.उचित प्रकार की मिट्टी – भिन्न-भिन्न प्रकार की फसलें भिन्न-भिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगती हैं। उदाहरणार्थ काला चना दोमट मिट्टी में अच्छा उगता है। चावल चिकनी मिट्टी में अच्छी तरह उगता है। अतः बीजों को उचित प्रकार की मिट्टी में ही उगाना चाहिए।

2. समय पर सिंचाई – पौधों को मौसम के अनुसार उचित समय पर नियमित रूप से जल से सींचते रहना चाहिए।

3.खाद – प्राकृतिक खाद में ह्यूमस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिससे पौधों को खनिज मिलते हैं। रासायनिक खादों से भी पौधों को खनिज मिलते हैं।

4.सूर्य का पर्याप्त प्रकाश और उचित तापक्रम – पौधों को सूर्य का प्रकाश और ऊष्मा चाहिए, किन्तु वे अधिक गर्मी से सूख जाते हैं। गमलों के ऊपर घास की छत बना देनी चाहिए। खेतों में खड़ी फसलों को ओर अधिक पानी देना चाहिए। पौधों को ठण्ड से बचाने के लिए खेतों में पानी भरा जाता है और सूखी पत्तियाँ जलाकर वायु में धुआँ किया जाता है। ठण्डे देशों में पौधों को काँच से बने ग्रीन हाउस में रखा जाता है। काँच सूर्य की ऊष्मा को अन्दर तो आने देता है; परन्तु इसे वापिस नहीं जाने देता। इसलिए सूर्य छिपने के बाद भी ग्रीन हाउस गर्म बने रहते हैं।

5.रोगों और विनाशकों से सुरक्षा – कुछ जीवाणु और फफूँदी पौधों पर आक्रमण करते हैं, जिससे पत्तियाँ छोटी और पीली हो जाती हैं तथा उन पर धब्बे दिखाई देने लगते हैं। रोग शीघ्र ही पूरे पौधों को नष्ट कर देता है। कुछ कीट और छोटे जन्तु भी पौधों को खा जाते हैं।

IMG 20240214 092647 Paudhon Jantuon ki Suraksha पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ 3


केवल स्वस्थ बीजों को ही बोना चाहिए। रोगों से बचाने के लिए बीज को उचित रसायन से धो देना चाहिए। पौधों के रोगग्रस्त भाग को देखते ही काट देना चाहिए। मजबूत बाड़ बनाकर फसल को गाय एवं बकरी आदि से बचाया जा सकता है।

डी०डी०टी० और गैमेक्सीन जैसे कीटनाशकों के प्रयोग का विश्व स्वास्थ्य संगठनों ने विरोध किया है, क्योंकि ये कीटनाशक अनाज, फलों और सब्जियों के साथ मनुष्य के शरीर में पहुँच जाते हैं, जिसके कारण विभिन्न प्रकार के रोग फैल जाते हैं। फसलों के लिए लाभदायक जन्तु भी इन कीटनाशकों को खाकर मर जाते हैं। अत्यन्त आवश्यकता पड़ने पर जीवाणु और फफूँदी को नष्ट करने के लिए कीटाणुनाशक के बहुत पतले घोल का छिड़काव किया जा सकता है।

वनों और सड़क के किनारे के पौधों की सुरक्षा – वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई को रोकना चाहिए। वनों को आग लगाने से बचाया चाहिए। वनों के पौधों के रोगों की जाँच और रोकथाम करनी चाहिए। नये वृक्ष लगाए जाने चाहिएँ।
हमारे देश में वृक्ष लगाने की एक योजना प्रारम्भ की गई है, जिसे वन-महोत्सव या वन-सप्ताह कहते हैं। इसमें हम स्कूलों, घरों, सड़क के किनारों, खाली पड़ी जमीन और खेतों के चारों और वृक्ष लगाते हैं। हमें इन नन्हें पौधों को समय पर खाद-पानी देकर उनकी सुरक्षा करनी चाहिए।

वनों के वृक्ष वर्षा कटाने में सहायक होते हैं। वनों की कटाई से सूखा पड़ता है। वन बाढ़ और मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। वनों से वातावरण में प्रसन्नता, नमी और सहनीय तापक्रम बना रहता है। इनसे हमें साँस लेने के लिए ताजी हवा मिलती है, जिसमें पर्याप्त ऑक्सीजन होती है। उनसे हमें बहुत-सी लाभदायक वस्तुएँ भी मिलती हैं।

पालतू जन्तुओं की सुरक्षा – गाय, भैंस और बकरियों से हमें दूध मिलता है। बैल, खच्चर, घोड़े एवं ऊँट आदि जन्तु हमारे लिए परिश्रम करते हैं। खरगोश, बिल्ली के बच्चे, तोते और पिल्ले हमारा मनोरंजन करते हैं। कुत्ते हमारे घरों और खेतों की सुरक्षा भी करते हैं।

पशुओं को सूखे तथा पर्याप्त स्थान वाले बाड़े में रखना चाहिए, जिससे गर्मी की खुली धूप, सर्दियों की खुली हवा, वर्षा और दूसरे जन्तुओं से उनकी सुरक्षा हो। उन्हें तथा उनके बाड़े को नियमित रूप से साफ करते रहना चाहिए।
पशुओं को ताजा और स्वच्छ भोजन और पीने के लिए शुद्ध जल उचित मात्रा में देना चाहिए। जन्तुओं से प्रेम और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। हमें उन पर काम का अधिक बोझ नहीं लाद देना चाहिए।

जंगली जन्तुओं की सुरक्षा – बहुत-से जन्तु प्रकृति से स्वछन्दचारी होते हैं, जो जंगली जन्तु हैं, वे वनों, मरुस्थलों, झीलों और समुद्रों में पाये जाते हैं। वे भी हमारे लिए इसलिए लाभदायक हैं; क्योंकि वे प्रकृति में ऑक्सीजन और कार्बन डाई-ऑक्साइड का सन्तुलन बनाये रखते हैं।

मनुष्य वर्षों से इनका शिकार करता चला आ रहा है। माँस और खाल के लिए उनका शिकार किया जाता है। बाघ, हिरन, खरगोश और साँप की खाल बहुत अधिक मूल्य में बिकती है। खरगोश की रोएँदार खाल फर कोट बनाने के लिए उतार ली जाती हैं। इसी कारण जन्तुओं की बहुत-सी जातियाँ हमेशा के लिए समाप्त हो गई हैं।

हमारे वन्य जीवन की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव शरण स्थली बनवाये हैं। कोई भी व्यक्ति इन क्षेत्रों में न तो किसी वृक्ष को काट सकता है और न ही किसी जन्तु का शिकार कर सकता है।

चीता हमारा राष्ट्रीय पशु है। मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है। ये दोनों संरक्षित जन्तु हैं। कोई भी, कहीं भी चीता या मोर को नहीं मार सकता। इन दोनों को सताना या मारना कानूनी अपराध है, क्योंकि ये हमारे राष्ट्र की शान हैं।

हमें जन्तुओं को मनोरंजन, माँस या खाल के लिए नहीं मारना चाहिए। संरक्षित वन क्षेत्र को फसलें उगाने या बाँध बनाने के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

याद रखिए-

सभी जीवों को सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

वनों से प्राप्त होने वाली लकड़ी एवं अन्य पदार्थों की माँग बढ़ी है। 

 पर्यावरण के प्रदूषण के लिए मानव स्वयं उत्तरदायी है।

 बीजों को उचित प्रकार की मिट्टी में ही उगाना चाहिए।


देखें आपने क्या सीखा l


क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1.वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के दो हानिकारक परिणाम लिखिए।

वृक्षों की अंधाधुंध तक कटाई के दो परिणाम 1 ऑक्सीजन की कमी, 2. पशुओं के लिए प्राकृतिक आश्रय छिन गया।

2. खेत के पौधों की सुरक्षा के दो उपाय लिखिए।

खेत की पौधों की सुरक्षा के लिए दो उपाय 1. समय-समय पर पानी देना 2. पौधों पर लगने वाले रोग की रोकथाम के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव करना।

3.वन हमारी सहायता किस प्रकार करते हैं ?

वन हमारे वायुमंडल को स्वच्छ बनाते हैं और आक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे मनुष्य सांस लेकर जीवित रहता है और बानो द्वारा लकड़िया प्राप्त की जाती है ।

4.हमें अपने घरों के निकट वृक्ष क्यों लगाने चाहिएँ ।

हमें अपने घरों के निकट पेड़ पौधे इसलिए लगानी चाहिए क्योंकि पौधे से ऑक्सीजन मिलता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है।

5 जन्तुओं की सुरक्षा के तीन मुख्य उपाय लिखिए।

जंतुओं की सुरक्षा के तीन उपाय 1. पशुओं को सुख तथा पर्याप्त स्थान वाले बारे में रखना चाहिए। 2. पशुओं को ताजा और स्वच्छ भोजन और पीने के लिए शुद्ध जल उचित मात्रा में देना चाहिए। 3. भारत सरकार ने राष्ट्रीय उद्यान वन्य जीव शरण स्थली बनवाया है जिससे उनका शिकार ना किया जा सके।

ख. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1.रोगी…..पशुओ…..की चिकित्सा पशु चिकित्सक द्वारा की जाती है।

2.पौधों की ….रोगों….से सुरक्षा की जानी चाहिए।

3.राष्ट्रीय उद्यान और वन्य शरण स्थली ऐसे स्थान हैं; जहाँ जन्तुओं को.. जन्तुओं का देखभाल किया.… जाता है।

4….मोर…हमारा राष्ट्रीय पक्षी है।

5…..बाघ…हमारा राष्ट्रीय पशु है।


ग. सही वाक्य पर सही () और गलत पर (X) का चिह्न लगाइए –

1.ग्रीन हाउस इसलिए बनाये जाते हैं कि वे पौधों को गर्म रखते हैं।

2.सिंचाई और खाद फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक हैं।

3.हमें पौधों और जन्तुओं की सुरक्षा और संरक्षण करना चाहिए; क्योंकि वे हमें भोजन देते हैं।

4.जन्तुओं से हमें अनेक लाभ हैं।

5.पौधों से हमें अनेक लाभ हैं।

Leave a Comment