पाठ 8 प्राथमिक चिकित्सा, prathmik chikitsa

प्राथमिक चिकित्सा

दुर्घटनाएँ किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी समय और कहीं भी हो सकती हैं। घर हो या सड़क, स्कूल हो या खेल का मैदान। यदि सावधानी रखी जाये, तो इन दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। अधिकतर दुर्घटनाएँ लापरवाही के कारण होती हैं। दुर्घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए। दुर्घटना हो जाने पर डॉक्टरी उपचार मिलने से पूर्व की जाने वाली चिकित्सा प्राथमिक चिकित्सा कहलाती है। प्राथमिक चिकित्सा से सम्बन्धित कुछ बातों का ध्यान रखने बातों का ध्यान रखने से हम किसी दुर्घटना के समय अपनी तथा दूसरों की सहायता कर सकते हैं

1.किसी भी स्थान पर दुर्घटना हो जाने पर मन को शान्त रखना चाहिए। घबराना अथवा डरना नहीं चाहिए।

2.घायल व्यक्ति के पास भीड़ नहीं लगानी चाहिए।

3.चोट लगने पर रक्त स्त्राव से घायल व्यक्ति मूर्छित भी हो सकता है। कुछ हानिकारक दुर्घटनाओं जैसे – चोट से रक्त-स्त्राव होना, मूर्छा आ जाना, कीट-पतंगों द्वारा डंक मारना, आग से जलना आदि हो जाने पर प्राथमिक सहायता इस प्रकार दी जा सकती है –

रक्तस्त्राव अधिक होने पर यदि किसी व्यक्ति को चोट लग जाये और खून लगे, तो सबसे पहले खून रोकने का उपचार करना चाहिए।, घाव छूने से पहले हाथ अच्छी है। तरह धो लेने चाहिए, क्योंकि गन्दे हाथों के कीटाणु और धूल घाव में जाने का भय रहता है ।घाव पर रुई या कोई साफ कपड़ा रखकर सीधा दबाव डालें, ताकि रक्त बहना बन्द हो जाए। यदि रक्त बन्द न हो, तो उस पर थोड़ी-सी बरफ रख दें। रक्त बहने वाले अंग को शरीर से ऊपर रखें। घायल व्यक्ति को आधे-आधे घण्टे बाद पानी पीने को दें। जब रक्त बहना बन्द हो जाए, तो घाव को किसी कीटनाशक दवा से धोकर कीटाणुनाशक मरहम लगाकर कसकर पट्टी बाँध दें।

मूर्छा आ जाने पर – यदि किसी व्यक्ति को मूर्छा आ जाये, तो रोगी को तुरन्त आराम से लिटा दीजिए। उसका सिर नीचे की ओर कर दीजिए, जिससे उसके मस्तिष्क को अतिरिक्त रक्त प्राप्त हो सके। मूर्छित व्यक्ति के पास कभी भी भीड़ मत लगाइए। उसके पास हवा अवश्य आती रहनी चाहिए।

कीट-पतंगों द्वारा डंक मारने पर – कभी-कभी अचानक मधुमक्खी, ततैया, बिच्छू और मच्छर जैसे कीट-पतंगे काट लेते हैं। कीट-पतंगों के काटने से भयंकर दर्द होता है और उस अंग पर सूजन आ जाती है। दर्द और सूजन के प्रभाव को कम करने के लिए उससे भी आराम मिलता है।

आग से जलने पर -यदि किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाए, तो उसके ऊपर कम्बल या कोई भी मोटी टाट या दरी डालकर आग को बुझाना चाहिए। उस व्यक्ति को शान्त रखिए। उस पर कभी पानी मत डालिए। गर्म पदार्थ पीने को दीजिए। यदि शरीर का तो कोई अंग गर्म तवे या प्रेस से छू जाए या हाथ पैर पर गर्म दूध, चाय या पानी गिर जाए, जले हुए स्थान को ठण्डे पानी में तब तक डुबोए रखें, जब तक जलन बन्द न हो जाए। उसके बाद उस स्थान पर कच्चा आलू पीसकर अथवा नारियल का तेल लगाएँ। इसके बाद यदि इनसे आराम न मिले अथवा अधिक जल जाए, तो बरनोल लगाएँ। वैसे कच्चा पिसा आलू भी जले हुए अंग की पीड़ा कम करता है और आराम पहुँचाता है। उस स्थान पर कभी भी पट्टी नहीं बाँधनी चाहिए।


याद रखिए-

किसी भी स्थान पर दुर्घटना हो जाने पर मन को शान्त रखना चाहिए। 

घायल व्यक्ति के पास भीड़ नहीं लगानी चाहिए।

चोट लगने पर रक्त-स्त्राव से घायल व्यक्ति मूर्छित भी हो सकता है


देखें आपने क्या सीखा ।

क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

1.दुर्घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है ?

दुर्घटना से बचने के लिए सावधानी रखनी चाहिए

2.प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं ?

दुर्घटना हो जाने पर डॉक्टरी उपचार मिलने से पूर्व की जाने वाली चिकित्सा प्राथमिक चिकित्सा कहते हैं।

3.रक्त स्त्राव अधिक होने पर क्या करना चाहिए ?

रक्त स्राव अधिक होने पर घाव पर रुई या कोई साफ कपड़ा रखकर सीधा दबाव डालें यदि रक्त बंद ना हो तो रक्त बहने वाले अंग को शरीर से ऊपर थोड़ी सी बर्फ रख दें।

4.मधुमक्खी या ततैया के काटने पर क्या उपचार करना चाहिए ?

मधुमक्खी या ततैया के काटने पर उसे अंग पर सूजन आ जाती है दर्द और सूजन के प्रभाव को कम करने के लिए उससे भी आराम मिलता है।

5.किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाने पर क्या करना चाहिए ?

यदि किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाती है तो उसके ऊपर कंबल या कोई भी मोटी टाट या दरी डालकर आग को बुझाना चाहिए।


ख. नीचे दिए गए शब्दों में से उचित शब्द छाँटकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

1. दुर्घटनाएँ .. लापरवाही …के कारण होती हैं।

2.दुर्घटनाओं से बचने के लिए.. सुरक्षा.. के नियमों का पालन करना चाहिए।

3.दुर्घटना हो जाने पर .. घबराना..नहीं चाहिए।

4.घाव पर .. कीटनाशक..दवा लगानी चाहिए।

5.किसी अंग के जल जाने पर..कच्चा आलू..लगानी चाहिए।

ग. निम्नलिखितं सही वाक्य के सामने सही () और गलत वाक्य के सामने गलत (X ) का चिह्न लगाइए –

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विद्यार्थी स्वयं दें

1.प्राथमिक चिकित्सा से दुर्घटना के समय दूसरों की सहायता कर सकते हैं।

2.अधिक रक्त-स्त्राव से व्यक्ति मूर्छित हो सकता है।

3.रक्त बहने वाले अंग को शरीर से नीचे रखना चाहिए।

4. मूर्छित व्यक्ति का सिर नीचे की और रखना चाहिए।

5. जले हुए स्थान पर कसकर पट्टी बाँध देनी चाहिए।

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