पाठ 1.वन्दना Prayer

वन्दना

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।

गुरू: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।1।।


मूकं करोति वाचालम्, पङ्कं लङ्घयते गिरिम् ।

यत्कृपा तमहं वन्दे, परमानन्द – माधवम् ।। 2 ।।


विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम् ।

पात्रत्वाद् धनम् आप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्


अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।

चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ।।4।


अपूर्वः कोऽपि कोशोऽयं विद्यते तव भारति ।

व्ययतो वृद्धिमायाति क्षयमायाति सञ्चयात् ।।5।।

शब्दार्था:

तस्मै = उसके लिए। 

गुरवे = गुरू के लिए (To the teacher)

 वाचालम् = बहुत बोलने वाले-(Talkative), 

मूकम् = गूंगे को (Dumb), 

पङ्गुम् = लंगड़े को (Lame), 

गिरिम् = पर्वत को (Mountain), 

लङ्घयते=पार करवा देता है (Helps to cross), 

वन्दे = वन्दना करता हूँ (salute, bow), 

पात्रताम् = योग्यता (Competence, ability), 

(आप्नोति) = प्राप्त करता है (Obtains), 

अभिवादन-शीलस्य = नमनशील के (Of the one who habitually salutes),

 वृद्धोपसेविनः = वृद्धों की सेवा करने वाले का (of the one who habitually serves the old), 

वर्धन्ते =बढ़ते है (Increase), 

अपूर्व: = अद्भुत, अनुपम (Wonderful), 

कोश: = खजाना (Treasure), 

व्ययतः = खर्चने से (By giving), 

वृद्धिम् = वृद्धि को (An increase), 

आयाति =प्राप्त करता है (Obtains), 

क्षयम् आयाति नाश को (प्राप्त करता है) (Decays, wears away), 

सञ्चयात् = संचित करने से (By accumulating)। 

अभ्यास

1.निम्नलिखित प्रश्नों के संस्कृत में उत्तर दीजिए-
(a) मूकः कथं वाचालम् भवति ?
(b) विद्या किं ददाति ?
(c) अभिवादनशीलस्य किं वर्धते ?
(d) भारत्याः कोश: कीदृशः विद्यते ?
(e) कोश: कथं क्षयमायाति ?

2रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(a) गुरुर्ब्रह्मा…………गुरुर्देवो…….।
(b)…………करोति…………….पङ्कंगिरिम् ।
(c) पात्रत्वाद्………आप्नोति, धनाद् धर्मं ततः……..।
(d)……….तस्य…………आयुर्विद्या…….बलम्।
(e) अपूर्व:……..कोशोऽयं,……तव……।

3.निम्न शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(a) अग्निः
(b) लक्ष्मी:
(c) देवता:
(d) सूर्य:

4.संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
(a) गूँगा व्यक्ति बोलने लगता है।
(b) विद्या विनय देती है।
(c) उस गुरु को प्रणाम करता हूँ।

(d) विद्या खर्च करने से बढ़ती है।

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