पाठ 13 पृथ्वी का परिक्रमण और ऋतुएंँ Prithvi ka parikraman

परिक्रमण करती पृथ्वी – पृथ्वी अपनी निश्चित कक्षा में सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है। यह एक चक्कर या परिक्रमा 365 दिनों में पूरा करती है। सूर्य के चारों ओर घूमते समय पृथ्वी की गति 30 किलोमीटर प्रति सैकण्ड होती है। इसके साथ-साथ पृथ्वी अपनी धुरी पर भी घूमती रहती है। पृथ्वी की इस क्रिया को परिभ्रमण कहते हैं। धुरी पर एक बार परिभ्रमण 24 घण्टे में पूरा होता है। पृथ्वी के परिभ्रमण करते समय पृथ्वी का प्रत्येक आधा भाग क्रमश: सूर्य के प्रकाश की और होता है तथा शेष भाग उससे दूर होता है। इससे रात और दिन होते हैं। पृथ्वी के केन्द्र से होते हुए उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को इसकी धुरी कहते हैं। पृथ्वी की धुरी झुकी हुई है। भूमध्य रेखा एक और काल्पनिक रेखा है, जो पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है। पृथ्वी का भूमध्य रेखा से ऊपर का भाग उत्तरी गोलार्द्ध और भूमध्य रेखा से नीचे का भाग दक्षिणी गोलार्द्ध कहलाता है।

ऋतुओं का परिवर्तन
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है और सूर्य के चारों ओर अण्डाकार कक्षा में परिक्रमा भी करती है। जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है, तो पृथ्वी की धुरी एक दिशा में झुकी रहती है।

भारत की ऋतुएँ – भारत के अधिकांश भागों में वर्ष का अधिक भाग गर्म रहता है और थोड़ा-सा भाग ठण्डा। यहाँ मानसून के साथ वर्षा ऋतु भी होती है। मानसून वह पवन है जो अपने साथ बहुत-से बादलों को वर्षा के साथ लाती है। वर्षा ऋतु में कई दिन तक लगातार वर्षा होती रहती है।
पृथ्वी अपने अक्ष पर थोड़ी-सी झुकी हुई है। पृथ्वी जब सूर्य के चारों और चक्कर लगाती है, तब पृथ्वी उसी दिशा में झुकी रहती है। वर्ष के एक विशेष समय में उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर झुका रहता है, उस पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं। किरणें सीधी पड़ने से गोलार्द्ध गर्म रहता है,

इसलिए इस गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है। इस ऋतु में इस गोलार्द्ध में दिन रातों की अपेक्षा बड़े होते हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध जो कि सूर्य से दूर रहता है, उस पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं। किरणें तिरछी पड़ने से गोलार्द्ध ठण्डा रहता है। इसलिए इस गोलार्द्ध में शरद ऋतु होती है। इस गोलार्द्ध में दिन छोटे और रातें बड़ी होती हैं।

भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ने से वहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है। उपरोक्त कारणों के परिणामस्वरूप पृथ्वी की परिक्रमण गति में 6 महीने उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर झुका रहता है और दूसरे 6 महीने दक्षिणी गोलार्द्ध की ओर सूर्य झुका रहता है।

गर्मी की ऋतु – 21 जून को पृथ्वी की स्थिति देखने से ज्ञात होता है कि इस स्थिति में उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर झुका रहता है, जिस कारण सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। उत्तरी गोलार्द्ध का अधिक भाग प्रकाश में तथा थोड़ा-सा भाग अन्धेरे में रहता है। उत्तरी गोलार्द्ध में दिन बड़े तथा रात छोटी होती है। इसलिए इस गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है।

इस ऋतु में मनुष्य तथा अन्य जन्तुओं के जीवन पर गर्मी का प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस ऋतु में मनुष्य किसी ठण्डे इलाके में या घरों में पंखे के नीचे अपना समय बिता लेता है, किन्तु कुछ जीव-जन्तु ग्रीष्म की ऋतु में पेड़-पौधों के नीचे अपना समय बिता लेते हैं।


सर्दी की ऋतु – दक्षिणी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं। इस ऋतु में आधे से कम भाग में ही सूर्य का प्रकाश पड़ता है। इसलिए यहाँ दिन छोटे तथा रातें बड़ी होती हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध में शीत ऋतु होती है। 22 दिसम्बर को पृथ्वी की स्थिति देखने से ज्ञात होता है कि 21 जून की स्थिति में यह बिल्कुल विपरीत होती है। इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु होती है। इस ऋतु में पक्षी अपने घोंसलों में तथा अन्य जीव अपने घरों में, मनुष्य गर्म वस्त्र पहनकर अपना सर्दी का मौसम बिताता है।

21 मार्च और 23 सितम्बर की स्थिति को देखने से ज्ञात होता है कि इन दोनों स्थितियों में कोई ध्रुव सूर्य की ओर नहीं झुका है। मध्यकालीन सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर सीधी पड़ती हैं। दोनों गोलार्द्धां के ठीक आधे भाग पर सूर्य का प्रकाश सीधा पड़ता है। इसलिए इन दोनों स्थितियों में पृथ्वी के सभी स्थानों पर दिन-रात बराबर होते हैं। सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर सीधी पड़ने और पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर दिन-रात बराबर होने के कारण दोनों ही गोलार्द्ध में ऋतुएँ लगभग एक समान होती हैं। 21 मार्च की स्थिति में उत्तरी गोलार्द्ध में बसन्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में भी बसन्त ऋतु होती है। बसन्त की ऋतु में चारों ओर वातावरण सुन्दर तथा मनमोहक होता है। पतझड़ की ऋतु में वृक्ष अपने पत्तों को त्याग देते हैं।


याद रखिए-

पृथ्वी अपनी निश्चित कक्षा में सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है।

 पृथ्वी के केन्द्र से होते हुए उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को इसकी धुरी कहते हैं।

उत्तरी गोलार्द्ध में दिन बड़े तथा रात छोटी होती है।

22 दिसम्बर को पृथ्वी की स्थिति देखने से ज्ञात होता है कि 21 जून की स्थिति में यह बिल्कुल विपरीत होती है।

देखें आपने क्या सीखा l


क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1.पृथ्वी का परिक्रमण क्या है ?

पृथ्वी अपनी निश्चित कक्षा में सूर्य के चारों ओर चक्कर है लगती है उसे परिक्रमण कहते हैं।

2.ऋतु परिवर्तन के कौन-कौन से कारण हैं ?

पृथ्वी के परिक्रमण गति के कारण ऋतु परिवर्तन होते हैं

3. पृथ्वी की ऋतुएँ किस प्रकार बदलती हैं ?

पृथ्वी के परिक्रमण गति के कारण ऋतुएं बदलती है।

4.भूमध्य रेखा पर ऋतु परिवर्तन क्यों होता है ?

भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरण सीधी पड़ती है इसलिए अत्यधिक गर्मी पड़ती है और ऋतु में परिवर्तन होता है।

5.ऋतु परिवर्तन किन-किन बातों पर निर्भर करता है ?

पृथ्वी अपने अक्ष पर थोड़ी सी झुकी हुई है पृथ्वी जब सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है तब पृथ्वी इस दिशा में झुकी रहती है और भी ऋतु परिवर्तन परिक्रमण गति पर निर्भर है।


ख. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

1.पृथ्वी की .…उत्तर से दक्षिण ध्रुव को मिलने वाली..काल्पनिक रेखा..को धुरी है।

2.सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के घूमने को ..परिक्रमण.. कहते हैं।

3….भू मध्य रेखा.. पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है। ई

4.भूमध्य रेखा के नीचे पृथ्वी का आधा भाग ..दक्षिणी गोलार्द्ध ..कहलाता है।

5.जब उत्तरी गोलार्द्ध में शिशिर ऋतु होती है, तब दक्षिणी गोलार्द्ध में… शरद..ऋतु होगी।

ग. नीचे लिखें कथनों में सही कथन के सामने सही () और गलत के सामने गलत (X) का चिह्न लगाइए

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी स्वयं दें।

1.एक वर्ष में 12 मास होते हैं।

2.पृथ्वी अपने अक्ष पर झुकी हुई है।

3.सूर्य के पृथ्वी के चारों ओर घूमने से दिन-रात बनते हैं।

4.तारों और ग्रहों में कोई अन्तर नहीं है।

5.सूर्य भी एक तारा है।

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