पाठ 10 पुष्यभूति वंश Pushyabhuti vansh


संगम नगरी इलाहाबाद (प्रयागराज) में माघ के महीने में माघ मेला, कुम्भ एवं महाकुम्भ का पर्व मनाया जाता है। इसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पूर्व हर्षवर्धन नाम के राजा भी यहाँ प्रति पाँचवें वर्ष आकर धर्म सभा करवाते थे। यहाँ वह अपनी पाँच वर्ष की संचित सम्पत्ति का दान करते थे


गुप्तकाल से लगभग सौ वर्षों के बाद उत्तर भारत में एक नई शक्ति का उदय हुआ, जो पुष्यभूति वंश या वर्धनवंश के नाम से प्रसिद्ध था। उसकी राजधानी थानेश्वर (वर्तमान अंबाला जिला) थी। इस वंश का प्रथम राजा प्रभाकरवर्धन था, जिन्होंने हूणों को उत्तर-पश्चिम भारत से बाहर खदेड़ दिया था। प्रभाकरवर्धन के दो पुत्र राज्यवर्धन, हर्षवर्धन तथा पुत्री राज्यश्री थी ।

हर्षवर्धन 606-647 ई0

हर्षवर्धन 16 वर्ष की आयु में 606 ई0 में गद्दी पर बैठा। हर्ष की प्रारम्भिक राजधानी थानेश्वर थी। बाद में उन्होंने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया।
हर्षवर्धन स्वयं विद्वान थे तथा वह विद्वानों के आश्रयदाता भी थे। हर्ष ने संस्कृत में तीन नाटकों- नागानन्द, रत्नावली और प्रियदर्शिका की रचना की है। बाणभट्ट हर्ष के दरबारी कवि थे जिन्होंने ‘हर्षचरित’ लिखा।

चीनी यात्री श्वैन त्सांग (ह्वेनसांग) उनके शासन काल में आया। हवेनसांग 15 वर्षों तक भारत में रहा । वर्धनकाल, श्वैन त्सांग (ह्वेनसांग) की नजर से
हर्षवर्धन एक प्रजापालक एवं उदार शासक थे। उन्होंने जिन राज्यों पर विजय प्राप्त की थी, उन राजाओं ने हर्ष की अधीनता स्वीकार कर ली। हर्षवर्धन ने अपने सम्पूर्ण साम्राज्य की व्यवस्था के लिए उसे भुक्तियों (प्रांतों), विषयों (जिलों) तथा ग्रामों में विभाजित किया। उसके शासन में अपराध कम होते थे। अपराध करने वाले को कठोर दण्ड दिया जाता था।

हर्ष का बौद्ध धर्म से लगाव था। उन्होंने कन्नौज में एक विशाल धर्म सभा बुलाई। वह बहुत दानी भी थे। वह हर पाँच साल में प्रयाग के मेले में दान करते थे।

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नालन्दा का विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय हर्ष के राज्य में था । यहाँ धर्म के अतिरिक्त व्याकरण, तर्क, चिकित्सा, विज्ञान, शिल्प और उद्योग की भी शिक्षा दी जाती थी। धार्मिक सद्भाव था। लोगों के विचारों में मतभेद नहीं था । श्वैन त्सांग ने यहाँ शिक्षा ग्रहण की तथा शिक्षण का कार्य भी किया।

647 ई0 में हर्षवर्धन की मृत्यु हो गई उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया। उनकी मृत्यु के बाद केन्द्रीय शासन सत्ता छिन्न-भिन्न हो गई और उत्तर तथा दक्षिण भारत में छोटे-छोटे राजवंशों की स्थापना हुई।

अभ्यास


1.हर्षवर्धन की बहन का क्या नाम था?

हर्षवर्धन की बहन का नाम राज्यश्री था।

2.हर्षवर्धन की राजधानी कहाँ-कहाँ थी ?

हर्षवर्धन की राजधानी थानेश्वर तथा कन्नौज थी।

3.श्वैन त्सांग ने हर्ष के विषय में क्या लिखा है ?

हर्षवर्धन एक प्रजापालक एवं उदार शासक थे। उन्होंने जिन राज्यों पर विजय प्राप्त की थी, उन राजाओं ने हर्ष की अधीनता स्वीकार कर ली।

4.निम्नलिखित का उत्तर दो वाक्यों में लिखिए –
(अ) हर्षवर्धन और बौद्ध धर्म
(ब) शिक्षा के संरक्षक के रूप में हर्षवर्धन

5. सत्य और असत्य बताइए

(अ) हर्षकालीन इतिहास जानने का मुख्य स्रोत चीनी यात्री फाह्यान का विवरण है।

(ब) हर्षवर्धन के दरबारी कवि बाणभट्ट थे ।

(स) हर्षवर्धन की राजधानी कन्नौज थी ।
(द) हर्षवर्धन के भाई का नाम राज्यवर्धन था ।

6.रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-


(अ) वर्धनवंश का प्रथम शासक…प्रभाकर वर्धन….था

(ब) हर्षवर्धन ने तीन नाटक (1).. नागानंद..2.प्रियदर्शिका..3..रत्नावली ..की रचना की।

(स) हर्षचरित के लेखक…बाणभट्ट……हैं।

(द) हर्षवर्धन की मृत्यु…647….ई० में हुई।

प्रोजेक्ट वर्क


उत्तर प्रदेश में स्थित विश्वविद्यालयों की सूची बनाइए। ये विश्वविद्यालय किस जिले में है। मानचित्र में अंकित कीजिए ।
नदियाँ हमारे लिए अत्यन्त उपयोगी हैं। नदियों का जल साफ एवं स्वच्छ रहे इस हेतु आप क्या-क्या सुझाव देगें ? सूची बनाइए।

पाठ 7 मौर्य साम्राज्य
पाठ 8 मौर्योत्तर काल में भारत की स्थिति व विदेशियों से संपर्क
पाठ 9 गुप्तकाल

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