नन्ही राजकुमारी और चंद्रमा पाठ -10 nanhi Rajkumari aur chandrama chapter-10

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठ पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ में हम पढ़ेंगे नन्ही राजकुमारी और चंद्रमा

बहुत पुरानी बात है, समुद्र किनारे एक नन्हीं-सी राजकुमारी रहती थी। एक दिन उसने इतनी चटनी खा ली कि बीमार हो गई। डॉक्टर ने भी उसे देखा तो चिंता में पड़ गया। राजा ने राजकुमारी से पूछा

“बताओ, तुम्हें क्या चाहिए ?” राजकुमारी बोली – “अगर मुझको |
चंद्रमा मिल जाए तो मैं अच्छी हो जाऊँगी।”
राजा के पास एक से बढ़कर एक जानकार विद्वानों की भीड़ लगी रहती थी। वह जो माँगता वे हाजिर कर देते थे। इसलिए राजा ने कह दिया, “ठीक है, तुमको चंद्रमा मिल जाएगा।” राजा ने दरबार में पहुँचकर मंत्री को बुलाया। मंत्री तुरंत हाजिर हो गया। राजा ने कहा “मंत्री जी राजकुमारी को चंद्रमा चाहिए, तभी उसकी तबीयत ठीक होगी। आज रात या ज्यादा से ज्यादा कल तक हर हाल में चंद्रमा चाहिए।” यह सुनकर मंत्री पसीना-पसीना हो गया और बोला – “महाराज चंद्रमा लाना तो असंभव है। चंद्रमा पैंतीस हजार मील दूर है वह पिघले ताँबे का बना है और राजकुमारी के कमरे से बड़ा है।” मंत्री की बातें सुनकर राजा गुस्सा हो गया। उसने मंत्री को तुरंत जादूगर को हाजिर करने का हुक्म दिया। जादूगर ने नीले रंग का लबादा पहन रखा था। कलगीदार टोपी में चाँदी के सितारे चमक रहे थे और लबादे पर सोने के उल्लू बने थे। मगर जब राजा ने राजकुमारी की इच्छा बताई तो उसका चेहरा पीला पड़ गया। जादूगर बोला – “राजा साहब, चंद्रमा तो कोई नहीं ला सकता। चंद्रमा तो एक लाख पचास हजार मील दूर है, हरे पनीर का बना है और महल से दो गुना बड़ा है।” राजा आग बबूला हो गया। उसने कहा – “मुझे तुम्हारी बकवास नहीं सुननी । अगर चंद्रमा नहीं ला सकते तो फौरन यहाँ से रफा-दफा हो जाओ।” तब राजा ने अपने राज्य के सबसे बड़े गणितज्ञ को
बुलाया। वह गंजा था और उसके दोनों कानों में पेंसिल लगी थी। उसके काले चोंगे पर सफेद
अंक चमक रहे थे।

गणितज्ञ के आते ही राजा ने कहा – “देखो, मुझे अपनी बेटी के लिए चंद्रमा चाहिए और तुम्हें इसका जुगाड़ करना है गणितज्ञ बोला महाराज! चंद्रमा तो तीन लाख मील दूर वह सिक्के की तरह गोल और चपटा है और आसमान में चिपका है, चंद्रमा को कोई भी पृथ्वी पर नहीं ला सकता।” राजा गुस्से से लाल-पीला हो गया। अब उसने सबसे ऊबकर विदूषक को बुलाने के लिए घंटी बजाई। रंग-बिरंगी कतरनों से बने कपड़े और टोपी लगाए, छलाँग मारते वह राजा के पास आ गया और बोला – “महाराज मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ।” राजा बोला – “राजकुमारी को चंद्रमा चाहिए और जब तक राजकुमारी को चंद्रमा
नहीं मिल जाता वह ठीक नहीं हो सकती।” विदूषक ने पूछा – ” विद्वानों के मुताबिक चाँद कैसा है, कितना बड़ा है और कितनी दूर है ?” राजा बोला – “मंत्री कहता है, चंद्रमा पैंतीस हजार मील दूर हैं, राजकुमारी के कमरे से बड़ा है। जादूगर कहता है, चंद्रमा एक लाख पचास हजार मील दूर है, महल से दो गुना बड़ा है और गणितज्ञ सोचता है कि चंद्रमा तीन लाख मील है और मेरे राज्य का आधा है। विदूषक बोला – “जब विद्वान ऐसा कह रहे हैं तो सच ही होगा। अब करना यह है कि राजकुमारी से भी पूछें, चंद्रमा कितना बड़ा है और कितनी दूर ह है।” यह कहकर विदूषक उछलता-कूदता राजकुमारी के कमरे में जा पहुँचा ।
विदूषक को देखकर राजकुमारी मुस्करा दी और बोली – “क्या तुम मेरे लिए चंद्रमा लाए हो ?” विदूषक बोला – “अभी तो नहीं पर हाँ जल्दी ही ले आऊँगा। अच्छा बताओ चंद्रमा कितना बड़ा है ? राजकुमारी बोली – ” अरे! तुमको नहीं पता? चंद्रमा मेरे नाखून से जरा-सा छोटा होगा, क्योंकि जब मैं अँगूठा चंद्रमा के सामने करती हूँ तो वह ढक जाता है” विदूषक बोला – “और चंद्रमा कितनी दूर होगा ?” राजकुमारी बोली – “मेरी खिड़की के बाहर जो पेड़ है उससे तो ऊँचा नहीं होगा क्योंकि वह कभी-कभी पेड़ की टहनियों में उलझ जाता है ।” “वह किस धातु का बना होगा ?”- विदूषक ने पूछा। “अरे! यह भी कोई पूछने की बात है ? चंद्रमा तो सोने का बना होता है” – राजकुमारी बोली। विदूषक बोला राजकुमारी बोली। विदूषक बोला – “अच्छी बात है। आज रात जब चंद्रमा टहनियों में उलझेगा तो मैं उसको उतार लाऊँगा।” राजकुमारी बोली – “जरूर, मुझे जल्द से जल्द सोने जैसा चंद्रमा ला दो।”

विदूषक महल से सीधा सोनार के पास गया और राजकुमारी के नाखून से जरा छोटा सोने का चंद्रमा बनवा लिया। उसे सोने के तार में पिरोकर राजकुमारी के पास ले आया। राजकुमारी खुश हो गई और सुबह बाग में चहकते हुए खेलने लगी। वह स्वस्थ हो गई थी।

राजा अब भी चिंतित था। उसे पता था रात को जब चंद्रमा निकलेगा तो बिटिया फिर बीमार होगी। उसने मंत्री को बुलाया और कहा – ” कुछ ऐसा उपाय करो कि राजकुमारी आज की रात चंद्रमा न देख पाए।” बहुत सोच विचार कर मंत्री बोला – “राजकुमारी को काला चश्मा पहना देना चाहिए तो चंद्रमा दिखेगा ही नहीं।” राजा चिडचिड़ा गया और बोला राजकुमारी काला चश्मा पहनेगी तो चीजों से टकराएगी। इससे उसे नई बीमारी हो सकती है।”
अब जादूगर को बुलाया गया। उसने सुझाया कि महल के चारों ओर काले मखमल के ऊँचे-ऊँचे परदे तान दें तो चंद्रमा हर हाल में छिप जाएगा। राजा को सुनते ही गुस्सा आया, “अरे! इससे तो बेटी का दम घुट जाएगा।” तब गणितज्ञ बुलाया गया उसने भी जोड़ घटाकर बताया कि बगीचे में जमकर रंग-बिरंगी आतिशबाजी की जाए तो इस चकाचौंध में चंद्रमा दिखाई ही नहीं देगा। राजा को इस बात पर इतना गुस्सा आया कि वह चीखने लगा, “आतिशबाजी होगी तो बिटिया सो नहीं पाएगी और सोएगी नहीं तो बीमार हो जाएगी । चले जाओ यहाँ से ।”
इन सबके जाने के बाद विदूषक आया। राजा ने कहा – “वह देखो राजकुमारी की खिड़की पर चंद्रमा चमक रहा है। अब वह देखेगी कि उसके गले में पड़ा चंद्रमा आसमान में चमक रहा है तो उस पर क्या बीतेगी।”
विदूषक चुपके से संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़कर राजकुमारी के कमरे में पहुँच गया। राजकुमारी बिस्तर पर लेटी चंद्रमा को देख रही थी। उसके हाथ में चंद्रमा का लॉकेट था। विदूषक बोला – “कितनी अजीब बात है चंद्रमा आसमान में चमक रहा है जबकि वह तो सोने की जंजीर के सहारे तुम्हारे गले में लटक रहा है।” राजकुमारी खिलखिलाकर हँस पड़ी,अरे

तुम तो एकदम बुद्ध हो! इसमें अजीब बात क्या है। जब मेरा कोई दाँत टूट जाता है तो उसी जगह दूसरा नहीं उग आता और पिरोकर ?” विदूषक बोला – ” अरे हाँ! जानवर की सींग झड़ जाती है तो वह भी फिर से आ जाती है । इतनी सी बात मेरी अक्ल में क्यों नहीं आई।”राजकुमारी बोली- “ऐसा दिन, रात, रोशनी, चंद्रमा सबके साथ होता है ।”विदूषक ने देखा कि धीमे-धीमे बुदबुदाते हुए राजकुमारी खुशी-खुशी सो गई है।विदूषक मुस्कुराता हुआ कमरे से बाहर आ गया।

यह भी जानिए


चंद्रमा पृथ्वी का इकलौता प्राकृतिक उपग्रह है। यह पृथ्वी से लगभग 3,84,400 किमी. (तीन लाख चौरासी हजार चार सौ किमी.) दूर है और यह बहुत छोटा दिखाई देता है।
चंद्रमा की परिस्थितियाँ जीवन के लिए अनुकूल नहीं है। यहाँ न पानी है और न वायु। इसकी सतह पर पर्वत, मैदान एवं गड्ढे हैं जो चंद्रमा की सतह पर छाया बनाते हैं। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पर इनकी छाया को देखा जा सकता है।

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
विदूषकअपने भाव-भाव द्वारा किसी की नकल करके हंसने वाला व्यक्ति
लबादाभारी और लंबा पहनावा

1-बोध प्रश्न उत्तर लिखिए-

(क) राजकुमारी किस कारण से बीमार हो गई ?

उत्तर-राजकुमारी चंद्रमा को पाने की चिंता में बीमार हो गई|


(ख) मंत्री ने पहली बार बुलाने पर राजा से क्या कहा ?

उत्तर-मंत्री ने कहां महाराज चंद्रमा लाना तो असंभव है 35000 मील दूर है वह पिघले तांबे का बना है और राजकुमारी के कमरे से बड़ा है |


(ग) विदूषक क्या पहने था ?

उत्तर-विदूषा के रंग बिरंगी कडरनो से बने कपड़े और टोपी लगाए हुआ था|


(घ) राजकुमारी की बीमारी कैसे ठीक हुई ?

उत्तर-राजकुमारी से विदूषक ने बात किया और जैसा राजकुमारी ने चंद्रमा का आकार बताया उसी प्रकार का चन्द्रमा लाकर उसे दे दिया | इस प्रकार राजकुमारी ठीक हो गई |


(ङ) राजकुमारी के ठीक होने के बाद राजा क्यों चिंतित था ?

उत्तर-राजकुमारी के ठीक होने के बाद राजा इसलिए चिंतित था कि रात को जब चंद्रमा निकलेगा तो चांद को देखकर राजकुमारी बिटिया फिर बीमार हो जाएगी इसीलिए वह चिंतित था|


(च) राजकुमारी ने विदूषक से क्या कहा जिससे राजा की चिंता दूर हो गई ?

. उत्तर-राजकुमारी ने विदूषक से कहा कि जैसे मेरे दांत टूटते हैं तो नए निकल आते हैं| उसी प्रकार चाँद भी निकल आया होगा यह सुनकर राजा की चिंता दूर हो गई ✓

2. सोच-विचार : बताइए –

(क) चित्र को देखकर सवालों के उत्तर दीजिए –

1- यह किस बीमारी की दवा है ?

उत्तर -पेट की बीमारी

2 -यह कौन-कौन सी चीजें मिलाकर बनाई गई है ?

उत्तर– आँवला, काली मिर्च,

हर्र, बहेड़ा|

3- इस दवा के बनने की तारीख और वर्ष क्या है ?

उत्तर -20.10.2017|

4- कितने समय बाद यह दवा उपयोग करने लायक नहीं रहेगी ?

उत्तर –12 माह बाद|

5- इसका मूल्य कितना है ?

उत्तर -25 रूपये|

6 -इसके रख-रखाव हेतु क्या सावधानी लिखी है ?

उत्तर -अत्यधिक गर्मी और सूर्य के प्रकाश से दूर रखें|

(ख) हर बीमारी के कुछ शुरुआती लक्षण होते हैं जैसे – खांसी होने पर गले में दर्द होने लगता है, बार-बार खांसी आने लगती है | सोचो और बताओ इन बीमारियों को तुम किन लक्षणों से पहचानोगे

बुखार ज़ुकाम पीलिया होने के लक्षण-

बुखार-शरीर का तापमान बढ़ता है और दर्द होता है|

जुकाम-गले में खराश और खांसी आना|

पीलिया-शरीर पीला पड़ना, खून की कमी|

(ख) नीचे दिए मुहावरों का अर्थ बताते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए

  1. पसीना-पसीना होना मुहावरा का अर्थ=बहुत थक जाना
  2. आग बबूला होना मुहावरा का अर्थ=क्रोधित होना
  3. चेहरा पीला पड़ जाना मुहावरे का अर्थ=भयभीत होना शेर को देखकर मोटू का चेहरा पीला पड़ गया
  4. दफा हो जाना. मुहावरे का अर्थ=भाग जाना

4-आपकी कलम से –

(क) आप अथवा आपके घर में कभी न कभी कोई बीमार पड़े होंगे ? बताइए
कौन बीमार पड़ा?
कब बीमार पड़े?

क्या बीमारी थी?
कैसे ठीक हुए?

ऊपर लिखे गए प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी स्वयं दें

(ख) किसी के बीमार हो जाने पर बहुत सारे लोग जो कि डॉक्टर नहीं होते हैं फिर भी तमाम तरह के इलाज बताने लगते हैं | सोचिए और लिखिए –

(1) बीमार होने पर हमें क्या-क्या करना चाहिए|

उत्तर-बीमार होने पर हमें तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा देनी चाहिए|

(2) क्या नहीं करना चाहिए ?

उत्तर-बीमार होने पर अपने मन से दवा नहीं लेनी चाहिए डाक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए|

(ग) जब हम बीमार पड़ जाते हैं तो स्कूल से छुट्टी लेनी होती है | वह चिठ्ठी कैसे लिखी जाती है ? लिखिए|

प्रधानाचार्य

…(अपने स्कूल का नाम लिखें)…

महोदय,

निवेदन है कि प्रार्थी ……..(अपना नाम )….. कक्षा -4 का छात्र है | आज रात में बुखार से पीड़ित होने के कारण विद्यालय आने में असमर्थ है|

अतः श्रीमान जी से निवेदन है कि प्रार्थी को आज दिनांक …………….. का एक दिन का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें|

प्रार्थी

कक्षा का नाम

पिता का नाम

माता का नाम

मो०न०

5-अब करने की बारी-

(क) रेडियो/टीवी से -भारतीय सिनेमा में चंद्रमा पर बहुत से गाने बने है | कुछ गानों के बारे में पता करके उनके मुखड़े (स्थायी) लिखिए

उत्तर -विद्यार्थी स्वयं करें

(ख) इस कहानी का कक्षा में मंचन कीजिए-

उत्तर– स्वयं करें |

6. मेरे दो प्रश्न : पाठ के आधार पर दो सवाल बनाइए –

1 . मंत्री, जादूगर, गणितज्ञ और विदूषक में से कौन होशियार था ?

2. राजकुमारी ने चन्द्रमा का कितना बड़ा आकार बताया ?

7. इस कहानी से :

(क) मैंने सीखा –

(ख) मैं करूंगी / करूंगा –

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