पाठ 12 सौरमंण्डल saur mandal

रात्रि में आकाश का निरीक्षण

बहुत पुराने समय से ही लोग आकाश की ओर आश्चर्य, उत्सुकता तथा रुचि से देखते चले आ रहे हैं। भारत के खगोलविदों ने सूर्य, चन्द्रमा और अन्य आकाशीय पिण्डों की गति का बहुत सूक्ष्मता से निरीक्षण किया है। वे उनका वर्ष भर का निकलने (और) छिपने का समय (और ग्रहण इत्यादि को पहले से बता सकते थे।

पूर्णमासी के चार-पाँच दिन बाद से लगभग दस दिन तक चन्द्रमा देर से निकलता है और रात को शुरू के घण्टों में अंधकार रहता है। इस समय आप केवल आँखों से लगभग दो हजार तारे देख सकते हो। कुछ तारे काफी चमकदार होते हैं और कुछ मात्र दिखाई ही देते हैं।

तारामण्डल – आकाश में तारों के कुछ समूह विभिन्न नमूनों में दिखाई देते हैं। यदि तारों को काल्पनिक रेखा से मिलायें, तो वे जन्तुओं के चित्र जैसे दिखाई देते हैं। इसलिए प्राचीन लोगों ने प्रत्येक समूह को एक विशेष नाम दिया। तारों के इस समूह को तारामण्डल कहते हैं। तारामण्डल आकाश में पूरब से पश्चिम की ओर अपना रूप बदले बिना जाते हुए दिखाई देते हैं।

सर्दी की ऋतु में दिखाई देने वाले तारामण्डलों में कालपुरुष मुख्य है। इसके तीन तारों,जो आस-पास एक रेखा में स्थित हैं, से इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है। बसन्त और गर्मी की ऋतु में सप्तऋषि मण्डल, रात्रि के पहले भाग में दिखाई देता है। शरद ऋतु लिटिल डिपर आसानी से दिखाई देता है।

बहुत समय पहले खगोलविदों ने ज्ञात कर लिया था कि एक तारा हमेशा एक ही स्थान पर दिखाई देता है, यह ध्रुवतारा है। यह उत्तर दिशा में पर्याप्त चमकीला तारा है।

लिटिल डिपर में सात तारे हैं, जो एक कोने पर धागा बँधे पतंग की आकृति में हैं। धागे के अन्त में ध्रुव तारा दिखाई देता है। सप्तऋषि या बिगडिपर भी धागा बँधे पतंग की तरह दिखाई देता है। यदि हम पतंग के अन्तिम दो तारों को मिलाकर रेखा को आगे तक बढ़ायें, तो यह ध्रुव तारे की और संकेत करेगी। रात्रि में ध्रुवतारे को पहचानकर हम उत्तर दिशा ज्ञात कर सकते हैं।

इस प्रकार आकाश में सप्त ऋषि, ध्रुव तारा, काश्यपी, परशु, कालपुरुष एवं वृश्चिक आदि प्रमुख तारामण्डल हैं। सप्तऋषि तारामण्डल को रात्रि के समय आसानी से देखा जा सकता है।

रात के समय आकाश में असंख्य तारे दिखाई देते हैं। इनमें से कुछ तारे टिमटिमाते हैं कुछ तारे लगातार प्रकाश देते हैं। टिमटिमाने वाले तारों में अपना प्रकाश होता है। तारे आकाश में दिन-रात चमकते रहते हैं, परन्तु ये दिखाई रात में ही देते हैं। दिन में सूर्य का प्रकाश इतना तेज होता है कि तारों का प्रकाश दिखाई नहीं देता। तारे पृथ्वी से बहुत दूर हैं। इनसे लगातार ऊष्मा और प्रकाश निकलता रहता है। तारे एक ही स्थान पर स्थिर हैं और इनके आकार में भी परिवर्तन नहीं होता है।

तारे सूर्य की भाँति बहुत गर्म और चमकीले हैं। सूर्य एक छोटा तारा है। ऐसे करोड़ों-अरबों सूर्य और तारे हैं। सूर्य पृथ्वी के निकट का तारा है। अत: हम इसकी ऊष्मा और प्रकाश का अनुभव करते हैं। तारों से आने वाला प्रकाश बहुत हल्का दिखाई देता है, नहीं के बराबर होता है; क्योंकि वे सूर्य की अपेक्षा बहुत अधिक दूर हैं।
जो तारे टिमटिमाते हैं; क्योंकि उनका अपना स्वयं का प्रकाश है। आकाश में तारे जैसे कुछ अन्य पिण्ड नहीं टिमटिमाते हैं। उनका प्रकाश स्थिर रहता है। वे ग्रह कहलाते हैं। ग्रह तारों की अपेक्षा छोटे हैं। उनका अपना प्रकाश नहीं होता है। वे तभी चमकते हैं, जब सूर्य का प्रकाश उन पर पड़ता है। ऐसे तारे जो सूर्य के चारों ओर घूमते हैं और उससे प्रकाश (और ऊष्मा ग्रहण करते हैं, ग्रह कहलाते हैं।

सौरमण्डल – सूर्य के विभिन्न आकार वाले आठ ग्रहों का एक परिवार है। बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण। यह एक परिवार है; क्योंकि परिवार

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के सभी सदस्य सूर्य के चारों ओर निश्चित कक्षा में रहकर परिक्रमा करते हैं। प्रत्येक ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा निश्चित समय में पूरी करता है। वे अपनी-अपनी धुरी पर भी एक लट्टू की भाँति घूमते रहते हैं। सूर्य और इसके आठ ग्रह, ग्रहिकाएँ और उपग्रह मिलकर सौरमण्डल कहलाते हैं।

सूर्य एक बहुत बड़ा गोला है; जिसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। ग्रह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से खिंचे हुए सूर्य की परिक्रमा करते हैं। वे अपनी-अपनी कक्षा में रहते हैं। न तो वे कक्षा से दूर जाते हैं और न ही आपस में टकराते हैं।

सभी ग्रहों का आकार भिन्न-भिन्न होता है। बुध सबसे छोटा बल्कि सबसे तेज चलने वाला ग्रह है। बुध सूर्य के सबसे पास और सबसे गर्म ग्रह है। बुध सबसे छोटा और बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है। शनि भी बहुत ठण्डा ग्रह है (और) इसके चारों ओर वलय हैं।

सूर्य – सूर्य भी एक ग्रह है। यह अन्य तारों की
भाँति आकाश में स्थिर है। सूर्य से हमें लगातार ऊष्मा और प्रकाश प्राप्त होता है। सूर्य पृथ्वी से 148.80 करोड़ किलोमीटर दूर है। सूर्य पूरब से पश्चिम की ओर घूमता प्रतीत होता है।

चन्द्रमा या उपग्रह
चन्द्रमा या उपग्रह छोटे आकाशीय पिण्ड हैं, जो ग्रहों के चारों और चक्कर लगाते हैं। ग्रहों की भाँति इनमें अपना
प्रकाश नहीं होता है; परन्तु ये सूर्य के प्रकाश को
परावर्तित करते हैं। चन्द्रमा द्वारा परावर्तित प्रकाश
चन्द्रमा का प्रकाश कहलाता है। शनि के 23,
बृहस्पति के 16, अरुण के 15, वरुण के 2, मंगल के 2 और पृथ्वी का केवल एक चन्द्रमा है। बुध और शुक्र का कोई चन्द्रमा नहीं है।

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चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। चन्द्रमा को पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में 291⁄2 दिन
लगते हैं। चन्द्रमा पृथ्वी से 3 लाख 84 हजार किलोमीटर दूर है। चन्द्रमा की आकृति बदलती रहती है। चन्द्रमा की आकृतियों की एक महीने में पुनरावृत्ति होती रहती है। प्रत्येक पूर्णिमा के पश्चात् अमावस्या(और फिर पूर्णिमा आती है। चन्द्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह हैं।

चन्द्रमा प्रकाश में सबसे अधिक चमकने वाला दूसरा आकाशीय पिण्ड है। चन्द्रमा में अपना प्रकाश नहीं होता है। चन्द्रमा का व्यास 3218 किलोमीटर है। इसका व्यास पृथ्वी के व्यास के एक चौथाई से थोड़ा अधिक है। चन्द्रमा का भार पृथ्वी के भार का लगभग आठवाँ भाग है। चन्द्रमा पर वायु, पानी और कोई भी जीवित पदार्थ नहीं है। चन्द्रमा की सतह ऊबड़-खाबड़ है। वहाँ पर ऊँचे पहाड़, गड्ढे और समतल मैदान है।

मानव की चन्द्रमा पर विजय मानव प्राचीन काल से ही आकाश में चमकते आकाशीय पिण्डों की जानकारी प्राप्त करने को उत्सुक रहा है। सबसे पहले वैज्ञानिकों ने चन्द्रमा को दूरबीन से देखने का प्रयास किया। गैलीलियो गैलीली नामक वैज्ञानिक को अपने बनाये हुए दूरदर्शी की सहायता से चन्द्रमा को देखने में सहायता मिली। इस सफलता के बाद चन्द्रमा पर अनेक राकेट भेजे गये, जिनसे मानव ने
चन्द्रमा की सतह के अनेक नमूने प्राप्त किए।

इन सफलताओं के बाद चन्द्रमा के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के जिज्ञासा बढ़ती गई। मानव चन्द्रमा पर जाने का प्रयत्न करने लगा। सर्वप्रथम 21 जुलाई 1969 को अमेरिका ने नील आर्मस्ट्राँग और एडविन एल्ड्रिन नामक अन्तरिक्ष यात्री चन्द्रमा पर गये। अब तक चन्द्रमा पर अनेक यात्री पहुँच चुके हैं। आज भी वैज्ञानिक चन्द्रमा की अनेक विशेषताओं का अध्ययन करने का प्रयत्न कर रहे हैं।

रात को आकाश में ग्रहों को देखना – आठ ग्रहों में से पाँच ग्रह दूरबीन के बिना केवल आँख से देखे जा सकते हैं। रात में चन्द्रमा को छोड़कर शुक्र ग्रह सबसे चमकीला है। यह प्रात:काल से पहले पूरब में अथवा रात के पहले भाग में पश्चिम की ओर आकाश में दिखाई देता है। बुध भी काफी चमकीला है। यह सूर्य के छिपने के तुरन्त बाद पश्चिम में अथवा सूर्य निकलने के तुरन्त पहले पूरब में दिखाई देता है। शुक्र और बुध को भोर का तारा या संध्या का तारा भी कहते हैं।

मंगल कुछ लाल रंग का दिखाई देता है। बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है। यह भी चमकीला हैं। शनि इतना चमकीला नहीं है किन्तु अपने आकार के कारण दिखाई दे जाता है। ग्रहों की तारों से अलग पहचान यह है कि तारे टिमटिमाते हैं, ग्रह नहीं।

पृथ्वी हमारा घर – हमारी पृथ्वी सौरमण्डल के आठ ग्रहों में से एक है। चन्द्रमा से देखने पर यह नीले रंग की सुन्दर चमकदार गेंद दिखाई पड़ती है। यह सूर्य के चारों ओर की एक परिक्रमा 365» दिन में पूरा करती है, इसे सौर वर्ष कहते हैं।

सूर्य पृथ्वी से लगभग दस लाख गुना बड़ा है। यदि सूर्य नहीं होता, तो पृथ्वी पर न जाने क्या होता? सूर्य के प्रकाश के बिना हर समय अन्धेरा होता, पृथ्वी बहुत ठण्डी होती, पौधे अपना भोजन नहीं बना पाते। तब हम और अन्य जन्तु क्या खाते ? अर्थात् सब मर जाते।

सूर्य सब ग्रहों को ऊष्मा और प्रकाश देता है, किन्तु जीवन केवल पृथ्वी पर ही पाया जाता है; क्योंकि जीवन के लिए आवश्यक मुख्य तत्व जल और वायु केवल इसी ग्रह पर उपस्थित हैं।

पृथ्वी गोल है। यह कभी स्थिर नहीं होती। पृथ्वी लट्टू की भाँति अपनी धुरी (कीली/अक्ष) पर पश्चिम से पूरब की और घूमती है। पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना परिभ्रमण कहलाता है। पृथ्वी अपनी धुरी का एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे का समय लेती है।

दिन और रात – पृथ्वी के घूमने से दिन और रात बनते हैं। पृथ्वी के सूर्य के आस-पास चक्कर लगाने पर पृथ्वी के जिस भाग पर प्रकाश नहीं पड़ता, वहाँ रात होती है। इस प्रकार पृथ्वी के घूमने से प्रकाश वाला भाग अंधकार में और अंधकार वाला भाग प्रकाश में बदलता रहता है।

कृत्रिम उपग्रह – मनुष्य में अन्तरिक्ष की जानकारी प्राप्त करने के लिए मानव-निर्मित उपग्रह अन्तरिक्ष में भेजे हैं, इन्हें कृत्रिम उपग्रह कहते हैं। इन कृत्रिम उपग्रहों से मौसम की भविष्यवाणी की जाती है और वैज्ञानिक प्रयोग किये जाते हैं। भारत द्वारा भेजे गये कृत्रिम उपग्रहों में आर्यभट्ट, रोहिणी, एप्पल और इनसैट-1 बी महत्वपूर्ण हैं।

याद रखिए-

 भारत के खगोलविदों ने सूर्य, चन्द्रमा और अन्य आकाशीय पिण्डों की गति का बहुत  सूक्ष्मता से निरीक्षण किया है


तारों के इस समूह को तारामण्डल कहते हैं।

शरद ऋतु में लिटिल डिपर आसानी से दिखाई देता है।

एक तारा हमेशा एक ही स्थान पर दिखाई देता है, यह ध्रुवतारा है।

रात के समय आकाश में असंख्य तारे दिखाई देते हैं।

तारे सूर्य की भाँति बहुत गर्म और चमकीले हैं।

तारे टिमटिमाते हैं; क्योंकि उनका अपना स्वयं का प्रकाश है।

देखें आपने क्या सीखा ?


क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. दिन में आकाश में तारे क्यों नहीं दिखाई देते ?

सूर्य के प्रकाश तेज होने के कारण है दिन में तारे दिखाई नहीं देते।

2.सौरमण्डल में कितने ग्रह हैं?

सौरमंडल में कुल आठ ग्रह हैं।

3.ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते हैं?

ग्रह के पास अपना कोई प्रकाश नहीं होता इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते हैं।

4. सौर-मण्डल क्या है ?

ग्रह और उपग्रह के समूह को सौर्य मंडल कहते हैं।

5.ग्रह अपनी कक्षाओं में कैसे टिके रहते हैं ?

सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण है ग्रह अपने कक्षाओं में टिके रहते हैं।

6. पृथ्वी चन्द्रमा से कैसी दिखाई देती है ?

चंद्रमा से पृथ्वी गेद की तरह नीली रंग की दिखाई देती है।

7.प्रमुख तारामण्डलों के नाम लिखिए।

सप्त ऋषि, ध्रुव तारा ,कश्यपी, परशु ,काल पुरुष एवं वृश्चिक आदि प्रमुख तारामंडल है।

ख. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजि

1.तारे पृथ्वी से बहुत ..दूर ..हैं।

2. बुध ग्रह सबसे अधिक ..छोटा .. है।

3.चन्द्रमा ..पृथ्वी..का चक्कर लगाता है।

4.पृथ्वी अपनी धुरी पर.. पश्चिम …से पूरब की ओर घूमती है।

5.भूमध्य रेखा पर अत्यधिक …तिरछी.. पड़ती है।

सही उत्तर के सामने सही () और गलत के सामने (X) का चिह्न लगाइए –

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी स्वयं दे।

1.तारों से ऊष्मा और प्रकाश मिलता है।

2.तारों के समूह तारामण्डल कहलाते हैं।

3.बुध सबसे बड़ा और बृहस्पति सबसे छोटा ग्रह है।

4.उपग्रह ग्रहों के चारों ओर चक्कर लगाते हैं।

5.पृथ्वी हमेशा स्थिर रहती है।

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