श्रुति की समझदारी अध्याय -19 Shruti ki samajhdari chapter -19

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

यह अध्याय प्राइमरी पाठशाला कक्षा 4 की हिंदी पाठय पुस्तक फुलवारी से लिया गया है इस पाठ पढ़ेंगे (श्रुति की समझदारी )

श्रुति अपनी कक्षा की मेधावी छात्रा थी। वह हमेशा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होती थी। उसके पिता पुलिस विभाग में अधिकारी थे। सरकारी आवास न मिल पाने के कारण, वे शहर के एक छोर पर, किराए के मकान में रहते थे। पास ही में झुग्गी-झोपड़ियाँ थीं, जहाँ गरीबी में रह रहे कुछ परिवार अपना जीवन-यापन कर रहे थे। अधिकांश परिवार मजदूरी पर ही निर्भर थे। उनके पास आय का कोई निश्चित साधन नहीं था। कोई किराए पर रिक्शा चला कर तो कोई ईंट-गारा ढोकर दो जून की रोटी जुटा रहा था।
श्रुति रोज सुबह जब स्कूल की ड्रेस में तैयार होकर स्कूल जाती तो झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे बच्चे, ललचाई नजरों से उसे देखा करते थे। इसी झुग्गी-झोपड़ी की एक औरत श्रुति के घर में काम करने के लिए आती थी। उसकी दस साल की बच्ची थी-अंजू । अंजू अक्सर ही अपनी माँ के साथ आ जाया करती थी । शुरू-शुरू में वह साफ-सुथरी नहीं रहती थी लेकिन श्रुति की मम्मी के बार-बार समझाने के कारण उसकी माँ उसे साफ-सुथरा रखने लगी । श्रुति जब शाम को स्कूल से वापस लौट कर आती, तो अंजू अक्सर ही आस पास खेल रही होती।धीरे-धीरे वह श्रुति के साथ
घुल-मिल गई। अब दोनों साथ ही खेला करती थीं। मम्मी
सोचतीं कि चलो अच्छा है श्रुति को खेलने के लिए एक सहेली तो मिल गई।

एक दिन श्रुति ने खेल-खेल में ही उससे पूछा, “अंजू! तुम स्कूल क्यों नहीं जाती ? क्या तुम्हारी इच्छा नहीं होती कि तुम भी पढ़-लिख कर खूब नाम कमाओ।” श्रुति के ऐसा पूछने पर अंजू उदास हो गई। उसने उत्तर दिया, “हमारे पास इतने पैसे ही नहीं हैं कि माँ-बापू मुझे स्कूल भेज सकें। मैं ही क्यों ? झुग्गी-झोपड़ी का कोई भी बच्चा पढ़ने के लिए स्कूल नहीं जाता है।” “तो फिर बच्चे क्या करते हैं ?

” श्रुति ने पूछा ।”काफी छोटे बच्चे तो गली-मोहल्ले में धमा चौकड़ी करते रहते हैं और जो कुछ बड़े बच्चे हैं, उन्हें काम पर जाना पड़ता है।” उसने आगे बताया, “शहर में पटाखे बनाने का एक कारखाना है। वहीं पर अधिकतर बच्चे काम के लिए जाते हैं। कभी-कभी विस्फोट हो जाने से कुछ बच्चे बुरी तरह से घायल भी हो जाते हैं। सोफिया और राजन ऐसी ही एक दुर्घटना में अपंग हो चुके हैं ।”
श्रुति को यह सब जानकर काफी दुःख हुआ । पढ़ने की इस उम्र में बच्चों को काम पर जाना पड़ता है और वह भी ऐसे जोखिम भरे काम के लिए। उसे मालूम था कि सरकार ने बाल मजदूरी पर प्रतिबंध लगा रखा है तथा बच्चों की पढ़ाई के लिए मुफ्त व्यवस्था भी कर रखी है। अतः उसने निश्चय किया कि वह इन बच्चों के लिए जरूर कुछ करेगी।
शाम को पापा के घर आने पर, वह उनके पास गई। पापा ने खूब प्यार करते हुए उससे पूछा, “क्यों श्रुति बिटिया ! क्या कोई विशेष बात है ?”
“हाँ, पापा जी! आप मेरे लिए एक काम करेंगे ?”
“क्यों नहीं! मैं अपनी प्यारी बिटिया के लिए कुछ भी कर सकता हूँ”, पापा ने कहा। श्रुति आगे बोली, “पापा जी! पास में वह जो झुग्गी-झोपड़ी है, इसके अधिकांश बच्चे पटाखे बनाने की फैक्ट्री में काम करते हैं। चूँकि बच्चों को मजदूरी काफी कम देनी पड़ती है,

इसलिए फैक्ट्री का मालिक केवल बच्चों को ही काम पर रखता है।” “लेकिन बच्चों से काम लेना तो अपराध है”, पापा ने कहा। “हाँ पापा जी! मैं भी तो यही कहना चाहती हूँ। आप इन बच्चों के लिए कुछ करते क्यों नहीं ? मेरी तरह उनकी भी तो खेलने और पढ़ने की उम्र है,” श्रुति ने कहा ।
पापा को अपनी बेटी की समझ पर गर्व हो आया। फैक्ट्री पर छापा मार कर, उन्होंने वहाँ काम कर रहे सभी बच्चों को मुक्त कराया तथा बालश्रम कानून के उल्लंघन में फैक्ट्री मालिक पर भी कार्यवाही कराई। इतना ही नहीं, उन्होंने समीप के सरकारी स्कूल में सभी बच्चों का दाखिला भी करा दिया। झुग्गी-झोपड़ी के सारे बच्चे खुशी-खुशी पढ़ने के लिए स्कूल जाने लगे । श्रुति की खुशी का कोई ठिकाना न था क्योंकि उसकी प्यारी सहेली अंजू स्कूल जो जाने लगी थी।

अभ्यास

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
मेधावी बुद्धिमान
जोखिमखतरा
आवासघर
प्रतिबंधरोक

1-बोध प्रश्न उत्तर लिखिए-

(क) श्रुति के घर के आस-पास के गरीब लोग रोजी-रोटी के लिए क्या काम करते थे?

उत्तर-श्रुति के घर के आसपास के गरीब लोगअधिकांश परिवार मजदूरी पर ही निर्भर थे कोई किराए पर रिक्शा चलाता तो कोई ईट धारा ढोकर दो जून की रोटी के लिए काम करते थे |


(ख) श्रुति की मम्मी ने अंजू की माँ को बार- बार क्या समझाया ?

उत्तर-श्रुति की मम्मी ने अंजू की मां को बार-बार यह समझाया कि अंजू की साफ सफाई और कपड़े साफ सुथरा का ध्यान रखा करो |

(ग) एक दिन श्रुति ने खेल-खेल में ही अंजू से क्या पूछा?

उत्तर-श्रुति ने अंजू से खेल-खेल में पूछा तुम स्कूल क्यों नहीं जाती क्या तुम्हारी इच्छा नहीं है कि तुम पढ लिखकर तुम नाम कमाओ|

(घ) श्रुति ने शाम को पापा से किस काम के बारे में बात की?

उत्तर-बाल श्रम कानून उल्लंघन के बारे में श्रुति ने शाम को पापा से बात की|

(ङ) किस बात से श्रुति की खुशी का ठिकाना न रहा ?

उत्तर-श्रुति के पापा ने पटाखे की फैक्ट्री में छापा मार कर हो रहे बाल श्रम कानून उल्लंघन के विरुद्ध कार्यवाही की और वहां से सभी बच्चों को मुक्त कराया और एक सरकारी स्कूल में दाखिला भी करा दिया इससे श्रुति का खुशी का ठिकाना ना रहा |

2-नीचे लिखे शब्दों में से सही शब्द छांटकर वाक्य को पूरा कीजिए-

(क) धीरे-धीरे वह श्रुति के साथ..घुल-मिल…गई
(ख) अंजू अब .. साफ-सुथरी..रहने लगी।
(ग) बच्चे गली-मोहल्ले में.. धमा-चौकड़ .करते रहते हैं।…

(घ) तुम भी …पढ़-लिखकर….कर खूब नाम कमाओ ।

3-कथनों को कहानी के क्रम में लिखिए-

  1. श्रुति जब स्कूल से वापस लौटकर आती, तो अंजू आस-पास खेल रही होती।
  2. धीरे-धीरे वह श्रुति के साथ घुल-मिल गई। अब दोनों साथ ही खेला करती थीं।
  3. मम्मी सोचतीं चलो अच्छा है श्रुति को खेलने के लिए एक सहेली तो मिल गई।
  4. एक दिन श्रुति ने खेल-खेल में उससे पूछा – “अंजू ! तुम स्कूल क्यों नहीं जाती ?”
  5. अंजू उदास हो गई। उसने उत्तर दिया, “हमारे पास इतने पैसे ही नहीं हैं कि माँ-बापू मुझे स्कूल भेज सकें।।

4-सोच विचार बताइए-

(क) आप स्कूल क्यों जाते हैं ?
(ख) आप स्कूल जाते समय तैयार होने के लिए क्या-क्या करते हैं ?
(ग) स्कूल न जाने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं ?
(घ) श्रुति के गाँव में अधिकांश परिवार मजदूरी पर निर्भर थे। आपके गाँव में अपना
गुजारा करने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं?
(ङ) श्रुति ने अपने आस-पास एक समस्या देखी और अपने बड़ों की मदद से इसका समाधान कर लिया।

1-आपके आसपास क्या समस्या है?

2-आप उसे कैसे और किसकी मदद से हल करेंगे?

दिए गए उपरोक्त प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी अपने अनुभव से स्वयं करें?

5-भाषा के रंग –

(क) नीचे लिखे शब्दों में ‘खाना’ व ‘तम’ में से सही प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाएं-


कार+ खाना कारखाना
मुसाफिर+खानामुसाफिरखाना
उच्च + तमउच्चतम
मेहमान + तममेहमानतम
तह + खाना तहखाना
श्रेष्ठ + तमश्रेष्ठतम
तोप + खाना तोपखाना
सर्वोच्च + तम सर्वोच्चतम

(ख) श्रुति अपनी कक्षा की मेधावी छात्रा थी वह हमेशा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होती थी उसके पिता पुलिस विभाग में अधिकारी थे|

ऊपर लिखे वाक्यों में हुआ है उसके शब्द का प्रयोग श्रुति के लिए किया गया है एक ही संज्ञा के बार-बार प्रयोग के बजाय उसकी जगह है कुछ खास शब्दों का प्रयोग किया जाता है ऐसे शब्द को सर्वनाम कहते हैं नीचे लिखे वाक्यों में कोष्टक में दिए गए सर्वनाम का सही रूप प्रयोग कीजिए,?

1-एक दिन श्रुति ने पूछा- अंजू ! क्या.. तुम्हारी.. इच्छा नहीं होती कि पढ़-लिखकर खूब नाम कमाओ । (तुम)

2-अंजू उदास हो गई ..उसने.. उत्तर दिया मेरे पास इतने पैसे ही नहीं हैं। (वह, मैं )

3-श्रुति के पिता बोले- मैं ..उस ..प्यारी बिटिया के, लिए कुछ भी कर सकता हूँ। (वह)

4-श्रुति की खुशी का कोई ठिकाना न था | ..उसकी.. सहेली अंजू स्कूल जाने लगी। (वह)

6-अब करने की बारी-

(क) पोस्ट को देखिए और उत्तर दीजिए -किस बारे में जागरूक किया गया है?

1-पोस्ट एक में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ|

2-पोस्टर दो में स्वच्छ भारत

(ख) आप दूसरों को कैसे जागरूक करेंगे?

पोस्ट एक में लिखो संदेश के प्रति-इसके महत्व को बात कर|

पोस्ट दो में लिखो संदेश के प्रति-स्वतंत्रता के फायदे बताकर|

(ग) अब आप भी पोस्ट बनाकर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए-

1-वृक्ष के महत्व पर-

2-यातायात सुरक्षा पर-

उपरोक्त प्रश्न का प्रयोग विद्यार्थी स्वयं करें?

7-मेरे दो प्रश्न पाठ के आधार पर दो सवाल बनाइए-

1-श्रुति को किस बात पर दुख हुआ?

2-श्रुति ने अपने पापा से क्या कहा?

8-इस पाठ से-

(क) मैंने सीखा-.. स्वयं लिखें?

(ख) मैं करूंगी/करूंगा.. स्वयं लिखें?

यह भी जानिए-

बाल अधिकार – संविधान द्वारा बच्चों को प्रदत्त अधिकारों को बाल अधिकार कहा जाता है। इन्हें प्रमुख चार भागों में बाँटा गया है –

1. जीवन जीने का अधिकार,

2. संरक्षण का अधिकार,

3. सहभागिता का अधिकार,

4. विकास का अधिकार
शिक्षा का अधिकार – हमारे देश में 6-14 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 बनाया गया है। यह पूर देश में अप्रैल 2010 से लागू किया गया है।

बालश्रम उन्मूलन – 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मजदूरी/ काम पर रखना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है । बालश्रम अधिनियम (निषेध एवं नियमन) 1986, 14 साल से कम आयु के बच्चों का जीवन जोखिम में डालने वाले व्यवसायों जिन्हें कानून द्वारा निर्धारित की गई
सूची में शामिल किया गया है, में काम करने से रोकता है।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ -पाँच वर्ष के आयु वर्ग में घटते लिंग अनुपात की प्रवृत्ति की पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने एक नई योजना- ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ‘ शुरू की है जिसका उद्देश्य न केवल लिंग अनुपात में सुधार लाना है बल्कि लड़कियों को शिक्षित करना भी है।


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