विषय केन्द्रित अधिगम उपागम शिक्षण उपागम-Subject Based Learning Approach

विषय केन्द्रित अधिगम उपागम 
सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि किसी विषय की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का स्वरूप विस्तृत रूप में पाया जाता है तथा किसी विषय का संकुचित रूप में अर्थात् अधिगम प्रक्रिया में विषय का स्वरूप एवं उसकी उपयोगिता उत्तरदायी होता है।
जो विषय समाज के लिये उपयोगी होते हैं तथा समाज में जिनको महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है, उस विषय से समाज को अधिक अपेक्षाएँ होती हैं, उस विषय के उद्देश्य भी व्यापक होते हैं तथा उसमें अधिक से अधिक अनुसन्धान भी होते हैं। इस प्रकार विषय की प्रकृति के आधार पर उस विषय का पाठ्यक्रम विस्तृत हो जाता है।

Subject Based Learning Approach विषय केन्द्रित अधिगम उपागम

सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि किसी विषय की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का स्वरूप विस्तृत रूप में पाया जाता है तथा किसी विषय का संकुचित रूप में अर्थात् अधिगम प्रक्रिया में विषय का स्वरूप एवं उसकी उपयोगिता उत्तरदायी होता है।


जो विषय समाज के लिये उपयोगी होते हैं तथा समाज में जिनको महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है, उस विषय से समाज को अधिक अपेक्षाएँ होती हैं, उस विषय के उद्देश्य भी व्यापक होते हैं तथा उसमें अधिक से अधिक अनुसन्धान भी होते हैं। इस प्रकार विषय की प्रकृति के आधार पर उस विषय का पाठ्यक्रम विस्तृत हो जाता है।


उदाहरणार्थ, विज्ञान एवं गणित विषयों को वर्तमान समय में अधिक महत्त्व प्रदान किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप इन विषयों के अधिगम में व्यापकता की प्रवृत्ति पायी जाती है। इसके विपरीत जिन विषयों की समाज में उपयोगिता नहीं होती है, उन विषयों का अधिगम भी विकसित नहीं हो पाता क्योंकि उन विषयों के उद्देश्य भी सीमित होते हैं तथा उनके विषय में किये जाने वाले अनुसन्धानों का क्षेत्र भी सीमित होता है।

विषय केन्द्रित उपागम का अधिगम प्रक्रिया में योगदान

विषय केन्द्रित उपागम द्वारा अधिगम प्रक्रिया में प्रस्तुत योगदान को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता है:-

1.(Aims of subject)विषय के उद्देश्य

विषय के उद्देश्यों का निर्धारण प्रभावशाली अधिगम का मार्ग प्रशस्त करता है। जिस विषय के उद्देश्य व्यापक होंगे, उसके उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विविध उपाय सम्पन्न किये जायेंगे । परिणामस्वरूप स्वाभाविक रूप से अधिगम सम्भव होगा। इसके विपरीत जब विषय के उद्देश्य सीमित होते हैं तो उस विषय का अधिगम भी सीमित रूप में सम्पन्न होता है क्योंकि उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु किये जाने वाले उपाय भी सीमित रूप में सम्पन्न होते हैं।

2. (Nature of subject)विषय का स्वरूप


अधिगम विषयों में अनेक प्रकार के विषय ऐसे होते हैं, जिनमें तथ्यात्मक ज्ञान की अधिकता होती है तथा व्यावहारिक ज्ञान का अभाव पाया जाता है; जैसे – इतिहास विषय में तथ्यात्मक ज्ञान अधिक होता है तथा इसमें प्रयोग प्रदर्शन की सम्भावना बहुत कम होती है। इससे विषय का अधिगम नीरस और सीमित रहने की सम्भावना होती है। इसके विपरीत विज्ञान विषय में अधिगम में सिद्धान्त एवं व्यवहार का समन्वय पाया जाता है, अर्थात् विज्ञान में तथ्यात्मक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोग प्रदर्शन का आधिक्य होता है इसलिये इसका अधिगम भी व्यापक होता है।

3. (Utility of subject) विषय की उपयोगिता

विषय की उपयोगिता भी अधिगम प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। जो विषय समाज में उपयोगी सिद्ध होते हैं, उनके विकास हेतु शिक्षाशास्त्रियों एवं मनोवैज्ञानिकों द्वारा पूर्ण प्रयास किये जाते हैं तथा नवीन अधिगम विधियों की खोज की जाती है। इस प्रकार धीरे-धीरे विषय की उपयोगिता के कारण अधिगम विकसित होता है। इसके विपरीत जो विषय कम उपयोगी होते हैं, उनकी अधिगम प्रक्रिया भी पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती। अतः विषय की उपयोगिता शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

4. (Universality of subject) विषय की सार्वभौमिकता

जो विषय सार्वभौमिक स्तर के होते हैं, उनका अधिगम व्यापक स्वरूप म ह ग है। पर्यावरण विषय वर्तमान समय में सार्वभौमिक विषय है। वैश्विक स्तर पर पर्यावरण प्रदूषण रोकने एवं पर्यावरण संरक्षण के अनेक उपाय किये जा रहे हैं। इस प्रकार के विषयों का अधिगम स्वभाविक रूप से विकसित होता है।

5. (Subject related research)विषय सम्बन्धी अनुसन्धान


जिन विषयों में अनुसन्धान की सम्भावना अधिक होती है, उन विषयों का अधिगम भी व्यापक और प्रभावशीलता होता है। इन विषयों में अधिगम सम्बन्धी अनेक प्रकार के अनुसन्धान किये जाते हैं तथा इनके परिणाम का अधिगम प्रक्रिया में समावेश किया जाता है। इस प्रकार इन विषयों का अधिगम विकसित एवं व्यापक हो जाता है। विज्ञान विषय इसका प्रमुख उदाहरण माना जा सकता है क्योंकि विज्ञान विषय में अनुसन्धान की प्रबल सम्भावना रहती है।

6.(Subject related resources)
विषय सम्बन्धी संसाधन

विषय से सम्बन्धित संसाधन यदि उपलब्ध होते हैं तो अधिगम भी सार्थक एवं तीव्र गति से होता है। वर्तमान समय में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में दृश्य-श्रव्य सामग्री एवं कम्प्यूटर का प्रयोग संसाधनों की उपलब्धता पर ही निर्भर है। अतः विषय का प्रभावशाली अधिगम विषय सम्बन्धी संसाधनों की उपलब्धता पर भी निर्भर है।

7.(Learning methods)अधिगम विधियाँ

जिन विषयों की अधिगम विधियों का सम्बन्ध सिद्धान्त एवं विचारों से होता है, उनका अधिगम भी विस्तृत एवं व्यापक होता है क्योंकि इन विषयों में विचारों, कल्पनाओं एवं सिद्धान्तों का समावेश होता है। अतः ऐसे विषयों के अधिगम के लिये वर्णनात्मक एवं विस्तृत विधियों का प्रयोग जिससे अधिगम् सार्थक बन जाता है। इस प्रकार की अधिगम विधियाँ भी प्रभावशाली अधिगम का एक महत्त्वपूर्ण साधन हैं।

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