UP Board of High School & Intermediate Education Class 4-chapter 1-फुलवारी

फुलवारी कक्षा-4 की हिंदी पाठ्य पुस्तक

  • चमक रहा है तेज तुम्हारा,
  • फैल रही है कीर्ति तुम्हारी,
  • बन कर लाल सूर्य-मंडल,
  • बन करके चाँदनी धवल ।

भावार्थ –  कवि ने ईश्वर की प्रसंशा करते हुए कहता है कि हे प्रभु ! आपके प्रकाश, सूर्य बनकर पूरे संसार को प्रकाशित कर रहा है, और आपका यश, श्वेत प्रकाश की किरणों के रूप में चारों तरफ फैल रहा है?

  • चमक रहे हैं लाखों तारे,
  • बन तेरा शृंगार अमल,
  • चमक रही है किरण तुम्हारी,
  • चमक रहे हैं सब जल-थल

भावार्थ – कवि ने ईश्वर का गुणगान करते हुए बताया है कि लगता है कि आसमान में लाखों तारे जैसे प्रभु का स्वच्छ श्रृंगार करने के लिए चमक रहे हैं और आपके प्रकाश से जग का सारा जल-थल चमक रहा है ?

  • हे जग के प्रकाश के स्वामी!
  • जब सब जग दमका देना,
  • मेरे भी जीवन के पथ पर,
  • कुछ किरणें चमका देना

भावार्थ – कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे जग के प्रकाश के स्वामी! अगर आपने पूरे संसार को अपने प्रकाश से प्रकाशित कर चुके हो तो मेरे जीवन रुपी मार्ग में भी कुछ उजाला कर देना|?

  • सोहन लाल द्विवेदी

शब्दार्थ

तेज= प्रकाश
धवल =श्वेत, सफेद
कीर्ति = यश
थल = स्थल, भूमि का भाग
सूर्य-मंडल = सूर्य के चारो ओर का लाल घेरा

अमल= निर्मल, स्वच्छ
दमका देना= प्रकाशित कर देना

सोहन लाल द्विवेदी का जीवन परिचय

सोहन लाल द्विवेदी का जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी नामक कस्बे में हुआ कवि सोहन लाल द्विवेदी (सन् 1906 ई. – सन् 1988 ई.) की कविताओं में राष्ट्र-प्रेम तथा राष्ट्रीय जागरण का स्वर मुखर है। ‘दूधबतासा’ तथा ‘शिशु-भारती’ इनके प्रसिद्ध बालगीतों के संग्रह हैं।

(1)जग के स्वामी कविता के प्रश्न उत्तर सहित

प्रश्न(क)-कविता में प्रकाश के स्वामी से क्या प्रार्थना की गई है

उत्तर– कविता में जग के प्रकाश के स्वामी से यही प्रार्थना की गई है कि जब सब जग धमका देना मेरे भी जीवन के पथ पर कुछ किरणे चमक देना,

प्रश्न (ख) ईश्वर को जग के प्रकाश का स्वामी क्यों कहा गया है

उत्तर-प्रस्तुत कविता में सूर्य चंद्रमा और तारों को ईश्वर का रूप माना है इसलिए ईश्वर को जग के प्रकाश का स्वामी कहा गया है

प्रश्न (ग) कविता के आधार पर ईश्वर की महिमा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए

उत्तर , प्रस्तुत कविता में कवि ने बताया है कि सूर्य और चंद्रमा अपने प्रकाश से पूरे संसार को प्रकाशित कर रहे हैं साथ ही उन्होंने अपने जीवन रूपी पथ पर भी प्रकाश फैलाने की कामना करते हैं वो

(2) कविता की पंक्तियों को सही क्रम में लिखिए

  • फैल रही है कीर्ति तुम्हारी
  • बन करके चांदनी धवल
  • चमक रहे हैं लाखों तारे
  • बन तेरा श्रृंगार अमल
  • चमक रही है किरण तुम्हारी
  • चमक रहे हैं सब जल थल

(3) निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

हे जग के प्रकाश के स्वामी

जब सब जग दमका देना

मेरे भी जीवन के पथ पर

कुछ किरणे चमका देना

उत्तर प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहता है कि हे जगत के प्रकाश के  स्वामी ! आप संसार को अपने प्रकाश से प्रकाशमान कर चुके हों तब मेरे भी जीवन रुपी मार्ग में भी कुछ उजाला कर देना |

(4)सोच: विचार: बताइए !

(क) हमें प्रकाश किन-किन चीजों से मिलता है

उत्तर हमें प्रकाश सूर्य और चंद्रमा से मिलता है

(ख) प्रकृति के किन-किन रूपों को देखकर ईश्वर की याद आती है

उत्तर – जीवन को सरल बनाने हेतु प्रकृति ने सभी प्रकार की वस्तुएं ईश्वर ने बना करके रखी हैं | ये कार्य ईश्वर के अलावा कोई नहीं कर सकता है | जैसे वह प्रकाश के देवता सूरज के रूप में , जल देवता के रूप में अग्नि देवता के रूप में या यह कहें कि वह कण-कण में व्याप्त है ?

(5) भाषा के रंग

(क) जिन शब्दों के अर्थ समान होते हैं उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं नीचे लिखे गए शब्दों में से जल और सूर्य के पर्यायवाची शब्दों को चुनकर लिखिए

  • (रवि, नीर ,वारि ,भानु ,अंम्बु ,भास्कर ,पानी ,दिनकर)
  • जल- नीर,वारि, अंम्बु, पानी
  • सुर्य-रवि, भानु भास्कर दिनकर

(ख) कविता में जल थल और जब सब जैसे समान ध्वनि वाले शब्द आए हैं इस तरह के शब्दों को तुकांत शब्द कहते हैं इसी प्रकार के नीचे लिखे शब्दों के तीन-तीन तुकांत शब्द लिखिए

  • लाल-गाल,माल शाल
  • तेरा-फेरा मेरा
  • दमक-चमक,महक

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