पाठ -4 वैदिक काल (1500 ई0 पू0 से 600 ई0पू0) Vaidik kal

वैदिक काल “पशु सदैव से हमारे लिए उपयोगी रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि भारत में पशुओं को पालने की परम्परा कब से चली आ रही है ? प्रारम्भिक आर्य भी पशुपालक थे। आर्यों के रहन-सहन के तरीके तथा परम्पराओं का पालन आज भी भारतीय समाज में देखने को मिलता है। वैदिक काल से … Read more

भारत का संविधान उद्देशिका uddeshika

उद्देशिका uddeshika हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथ-निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने केbलिए तथा उसके समस्त नागरिकों कोःसामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए,तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा औरराष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली … Read more

Geography One Liner Questions

1. भूमध्य रेखा पर दो देशान्तरों के बीच की दूरी लगभग कितनी होती है ?Ans ➺  111 KM 2. फूलों की घाटी कहाँ स्थित है ?Ans ➺  उत्तराखंड 3. ग्रेट बैरियर रीफ कहाँ स्थित है ?Ans ➺  प्रशांत महासागर में 4. अंकोरवाट मंदिर कहाँ स्थित है ?Ans ➺  कंबोडिया 5. भारत में भाखड़ा बांध किस … Read more

विटामिन के नाम और रासायनिक नाम

1. विटामिन – ए     रासायनिक नाम – रेटिनॉल 2. विटामिन – बी 1   रासायनिक नाम – थायमिन 3. विटामिन – बी 2    रासायनिक नाम – राइबोफ्लेविन 4. विटामिन – बी 3    रासायनिक नाम –  निकोटिनैमाइड 5. विटामिन – बी 5    रासायनिक नाम –   पैन्‍टोथेनिक    अम्ल 6. विटामिन – बी 6    रासायनिक नाम – पाइरीडॉक्सिन 7. … Read more

विश्व के देश और उनके राष्ट्रीय खेलों की सूची

1. भूटान का रष्ट्रीय खेल कौन-सा है ?Ans ➺ तीरंदाजी  2. स्कॉटलैंड का राष्ट्रीय खेल क्या है ?Ans ➺  रग्बी फुटबॉल  3. बुल फाइटिंग’ किस देश का राष्ट्रीय खेल है ?Ans ➺ स्पेन  4. तुर्की का राष्ट्रीय खेल क्या है ?Ans ➺ कुश्ती  5. ‘टेबल टेनिस’ किस देश का राष्ट्रीय खेल है ?Ans ➺  चीन … Read more

पाठ 13 पृथ्वी का परिक्रमण और ऋतुएंँ Prithvi ka parikraman

परिक्रमण करती पृथ्वी – पृथ्वी अपनी निश्चित कक्षा में सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है। यह एक चक्कर या परिक्रमा 365 दिनों में पूरा करती है। सूर्य के चारों ओर घूमते समय पृथ्वी की गति 30 किलोमीटर प्रति सैकण्ड होती है। इसके साथ-साथ पृथ्वी अपनी धुरी पर भी घूमती रहती है। पृथ्वी की इस … Read more

पाठ 12 सौरमंण्डल saur mandal

रात्रि में आकाश का निरीक्षण बहुत पुराने समय से ही लोग आकाश की ओर आश्चर्य, उत्सुकता तथा रुचि से देखते चले आ रहे हैं। भारत के खगोलविदों ने सूर्य, चन्द्रमा और अन्य आकाशीय पिण्डों की गति का बहुत सूक्ष्मता से निरीक्षण किया है। वे उनका वर्ष भर का निकलने (और) छिपने का समय (और ग्रहण … Read more

पाठ 11 वाष्पीरण और संघनन vashikaran aur sanghanan

वाष्पीरण हम देखते हैं कि वर्षा ऋतु में तालाबों, नदियों तथा नालों इत्यादि में काफी जल इकट्ठा हो जाता है। कुछ समय पश्चात् जल वहाँ पर दिखाई नहीं देता है। यह कहाँ चला जाता है ? इसका क्या कारण है ? हम यह सोचते हैं कि यह जल पृथ्वी में नीचे चला गया होगा। यह … Read more

पाठ 10 जल jal

जल सभी सजीव वस्तुओं को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है। जल ही जीवन है। जल के बिना कोई भी कार्य सम्भव नहीं हैं। पेड़-पौधों और सभी जीव-जन्तुओं का जीवन ही जल के ऊपर निर्भर है। पशुओं का नहाना-धोना, पानी पीना, कपड़े-धोना, खाना बनाना आदि सभी कार्य जल पर ही आधारित हैं। … Read more

पाठ -9 सूर्य और मौसम Surya aur Mausam

सूर्य और मौसम सूर्य एक ग्रह है। यह दिन में चमकता है। यह पूरब सेनिकलता है और पश्चिम में अस्त हो जाता है। यह पृथ्वी को गर्मी प्रदान करता है। सूर्य के कभी अधिक और कभी कम गर्मी प्रदान करने से हम सब सर्दी और गर्मी का अनुभव करते हैं। सूर्य की किरणें, पृथ्वी पर … Read more

पाठ 8 प्राथमिक चिकित्सा, prathmik chikitsa

प्राथमिक चिकित्सा दुर्घटनाएँ किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी समय और कहीं भी हो सकती हैं। घर हो या सड़क, स्कूल हो या खेल का मैदान। यदि सावधानी रखी जाये, तो इन दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। अधिकतर दुर्घटनाएँ लापरवाही के कारण होती हैं। दुर्घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा के नियमों का … Read more

Vigyan class 4

विषय सूची इकाई -1 संजीव जगत 1. जीवन के लिए आवश्यक तत्व 2. पौधों एवं जन्तुओं के उपयोग 3. पौधों में जन्तुओं की सुरक्षा 4. जीव जन्तुओं में प्रजनन 5. जीव जन्तुओं का वर्गीकरण एवं अनुकूलता है इकाई -2 स्वास्थ और स्वास्थ विज्ञान 6. भोजन और पाचन 7. सूक्ष्म जीव एवं संक्रामक रोग 8. प्राथमिक … Read more

इतिहास History

प्राचीन भारत का इतिहास मानव विकास का क्रम प्रागैतिहासिक काल पुरापाषाण काल मध्य पाषाण काल नव पाषाण काल ताम्र पाषाणिक संस्कृतियाँ प्रमुख मृदभाण्ड संस्कृतियाँ ■ हड़प्पा (सिंधु) सभ्यता.5-10विविध.11-17• सामान्य तथ्यात्मक विवरण प्रस्तर मूर्तियाँ, मृण्मूर्तियां, मोहरें एवं लिपि आर्थिक एवं धार्मिक जीवन शवाधान विधियाँ सिन्धु सभ्यता से प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्य • हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल … Read more

पाठ 7 सूक्ष्म जीव एवं संक्रामक रोग sukshm jeev avn sankramak Rog

सूक्ष्म जीव एवं संक्रामक रोग सूक्ष्म जीव बहुत छोटे प्राणी हैं, जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। सूक्ष्म का अर्थ है कि उन्हें केवल आँखों से नहीं देखा जा सकता। वे प्रत्येक स्थान, वायु, जल, मिट्टी, भोजन एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर और शरीर पर पाये जाते हैं। सूक्ष्म … Read more

पाठ 6 भोजन और पाचन bhojan aur pachan

भोजन और पाचन जिस प्रकार भोजन हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है, उसी प्रकार भोजन का पाचन शारीरिक क्रियाओं में एक महत्वपूर्ण क्रिया है। हम जो भोजन खाते हैं, उसे उसी रूप में शरीर उपयोग में नहीं ला सकता है। पाचन द्वारा भोजन का सही उपयोग होता है। शरीर के विभिन्न अंग भोजन को … Read more

पाठ 5 जीव जंतुओं का वर्गीकरण एवं अनुकूलताएं jeev jantuon ka vargikaran

जीव जंतुओं का वर्गीकरण एवं अनुकूलताएं हमारे ग्रह पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जन्तु रहते हैं। हमारे देश भारत में 70000 जातियों के जन्तु पाये जाते हैं। ये जन्तु भिन्न-भिन्न वातावरण में रहते हैं। कुछ भूमि पर रहते हैं, कुछ वृक्षों पर और कुछ जल में। अन्य कुछ परजीवी हैं। उन्हें अपने वातावरण में निवास, … Read more

Jeev jantuon mein prajanan जीव जन्तुओं में प्रजनन पाठ 4

जीव जन्तुओं में प्रजनन प्रकृति का नियम है कि कोई भी जीवधारी सदैव जीवित नहीं रहता है। वह संसार में जैसा आता है, एक दिन वैसा ही चला जाता है। सभी जीवधारियों में अपने वंश को बढ़ाने की क्षमता होती है। सभी प्राणी अपनी जाति की निरन्तरता बनाये रखने के लिए प्रजनन करते हैं। मनुष्य … Read more

Paudhon Jantuon ki Suraksha पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ 3

पौधों एवं जंतुओं की सुरक्षा पाठ -3 सुरक्षा की आवश्यकता – इस आश्चर्यचकित जीव संसार को पैदा और विकसित होने में लाखों वर्ष लगे हैं। घरों, खेतों और वनों में अनेक प्रकार के पौधे और जन्तु पाये जाते हैं। उनसे हमें बहुत-सी उपयोगी वस्तुएँ मिलती हैं। यही कारण है कि वे हमारी प्राकृतिक सम्पत्ति कहलाते … Read more

पाठ 2 पौधों एवं जन्तुओं के उपयोग paudhon AVN jantuon ke upyog

पौधों एवं जन्तुओं का उपयोग मनुष्य अनेक प्रकाश की उपयोगी वस्तुओं के लिए पौधों और जन्तुओं पर निर्भर है। पौधों के उपयोग पौधे हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। उनसें हमें ऑक्सीजन, भोजन, पेय पदार्थ, दवाइयाँ, कपड़ों के लिए तन्तु एवं फर्नीचर इत्यादि प्राप्त होते हैं। ऑक्सीजन – सभी प्राणी जगत के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता … Read more

पाठ 1 जीवन के लिए आवश्यक तत्व jivan ke liye avashyak tatv

सजीव-वर्ग में सभी पेड़-पौधे, जीव-जन्तु एवं मनुष्य आदि सभी जीवित प्राणी आते हैं। हमारे सौरमण्डल में केवल पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन है। जीवन के लिए निम्नलिखित आठ तत्वों का होना अत्यन्त आवश्यक है; जिनमें से किसी भी एक तत्व के बिना जीवन असम्भव है -हैं। 1.ऑक्सीजन 2.नाइट्रोजन 3.ऊष्मा 4.खनिज … Read more

Buddhi ki prakriti बुद्धि की प्रकृति या स्वरूप बुद्धि एवं योग्यता

बुद्धि की प्रकृति या स्वरूपNature of Intelligence मनोविज्ञान की उत्पत्ति से लेकर आज तक ‘बुद्धि का स्वरूप निश्चित नहीं हो पाया है। समय-समय पर जो परिभाषाएँ विद्वानों द्वारा प्रस्तुत की जाती रहीं, वह इसके एक पक्ष या विशेषता या क्षमता से सम्बन्धित थीं। अत: आज तक उपलब्ध सामग्री के अधार पर बुद्धि का स्वरूप तथा … Read more

Buddhi ke Siddhant बुद्धि के सिद्धांत

बुद्धि के सिद्धांतTheories of Intelligence विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि को निश्चित करने और इसकी पर्याप्त व्याख्या करने के विभिन्न प्रयत्न किये हैं, लेकिन हम यहाँ पर गणितीय विश्लेषण कर सर्वमान्य सिद्धान्तों का वर्णन करेंगे। इससे पहले बुद्धि किन बातों पर निर्भर करती है? यह देखना होगा। बुद्धि का निर्धारण Assessment of intelligence शिक्षाशास्त्री मन(Munn ने … Read more

Mansik Aayu मानसिक आयु

मानसिक आयु बिने Binet ने बुद्धि परीक्षा के आधार पर मानसिक आयु की सार्थकता को स्पष्ट किया है। उनके कथनानुसार – मानसिक आयु किसी व्यक्ति के द्वारा विकास की सीमा की वह अभिव्यक्ति है, जो उसके कार्यों द्वारा जानी जाती है तथा किसी आयु विशेष में उसकी अपेक्षा होती है। बुद्धि परीक्षा के आधार पर … Read more

Buddhi labdhi – बुद्धि लब्धि एवं बुद्धि का मापन

इस लेख के माध्यम से आज हम जानेंगे बुद्धि लब्धि क्या है? एवं बुद्धि का मापन कैसे होता है?, बुद्धि का विभाजन, बुद्धि का मापन और बिने के बुद्धि-लब्धि परीक्षा प्रश्न आदि के बारे में | Buddhi Labdhi निकालने के लिये मानसिक आयु को वास्तविक आयु से भाग दिया जाता है। बुद्धि लब्धि एवं बुद्धि … Read more

Srijanatmak Arth सृजनात्मकता – अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ,विकास, पहचान एवं मापन

{सृजनात्मकता/रचनात्मकता} सृजनात्मकता Creativity सामान्य रूप से जब हम किसी वस्तु या घटना के बारे में विचार करते हैं तो हमारे मन-मस्तिष्क में अनेक प्रकार के विचारों का प्रादुर्भाव होता है। उत्पन्न विचारों को जब हम व्यावहारिक रूप प्रदान करते हैं तो उसके पक्ष एवं विपक्ष, लाभ एवं हानियाँ हमारे समक्ष आती हैं। इस स्थिति में … Read more

Vyaktitva ke Vikas व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करने वाले कारक

व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करने वाले कारकFactors Influencing to, Development of Personality रैक्स एवं नाइट Rex and Knight के शब्दों में, मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करने वाले कारकों से भी है। इनमें से कुछ कारक शारीरिक रचना सम्बन्धी और जन्मजात एवं दूसरे पर्यावरण सम्बन्धी है। Psychology is also concerned with … Read more

Vyaktitva nirdharan व्यक्तित्व निर्धारण – तत्त्व एवं सिद्धान्त, विधियाँ

व्यक्तित्व के निर्धारक तत्त्व एवं सिद्धान्तTraits and Theories of Personality व्यक्ति का बाह्य आचरण उसकी जन्मजात तथा अर्जित वृत्तियाँ, उसकी आदतें और स्थायी भाव, उसके आदर्श और जीवन के मूल्य,ये सभी मिलकर एक ऐसे प्रमुख स्थायी भाव Master sention या ‘आदर्श-स्व’ Ideal-self को जन्म देते हैं, जो मानव के व्यक्तित्व का प्रमुख आधार है।इस प्रकार … Read more

Raksha tantra kavach रक्षातन्त्र कवच या रक्षा युक्ति – परिभाषा, प्रकार एवं कारक- विविध समायोजन

विविध समायोजन /,रक्षातन्त्र कवच या रक्षा युक्तिDifferent Adjustment , Deffence Mechanism मैन, 1976 Coleman, 1976 के अनुसार– यह व्यक्तियों की प्रतिक्रिया के वह विचार हैं, जिनसे व्यक्ति में उपयुक्तता की भावना बनी रहती है तथा इनकी सहायता से व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से दबावपूर्ण परिस्थितियों से सामना करता है, बहुधा परिक्रियाएं चेतन तथा वास्तविकता को विकृत … Read more

भग्नाशा या कुण्ठा Frustration – परिभाषा, अर्थ और कारण

भग्नाशा या कुण्ठा Frustration संसार के समस्त प्राणी दिन-रात क्रियाशील रहते हैं। मनुष्य, बौद्धिकता में श्रेष्ठ होते के कारण अधिक चिन्तनशील क्रियाओं को मानता है। उसकी सहज क्रियाओं को छोड़कर अन्य सभी क्रियाएँ प्रेरकों पर आधारित होती हैं। प्रेरक व्यक्ति की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करने में संलग्न हो जाता है। वह जब विभिन्न रुकावटों … Read more

Mansik tanav मानसिक तनाव परिभाषा और‌ अर्थ, लक्षण, बचने के उपाय

मानसिक तनाव Mental Tension मानसिक तनाव, शारीरिक एवं मानसिक असामान्यता के कारण उत्पन्न होता है। तनाव की परिस्थिति में व्यक्ति इतना अधिक उत्तेजित हो जाता है कि वह परिस्थिति का सामना उचित प्रकार से नहीं कर पाता है। जैसे- थॉर्नडाइक ने बिल्ली को भूखा रखा तो उसमें क्रिया के प्रति उत्तेजना बढी और शीघ्रातिशीघ्र लक्ष्य … Read more

Mansik Sangharsh मानसिक संघर्ष परिभाषा और अर्थ, प्रकार

मानसिक संघर्ष Mental Conflict मानसिक संघर्ष को मानसिक द्वन्द्व के नाम से भी पकारा जाता है। यह संघर्ष पूर्ण रूप से मानसिक होता है और व्यक्ति जब तक किसी निश्चित उद्देश्य का चुनाव नहीं कर लेता यह मानसिक या विचारों का संघर्ष समाप्त नहीं होता। मानसिक संघर्ष विरोधी भावनाओं के कारण उत्पन्न होता है; जैसे- … Read more

Samayojan समायोजन – समायोजन का अर्थ, परिभाषा, कारण, प्रकार एवं विकास

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अन्त समय तक समाज में ही रहना चाहता है । वह उसी समय अधिक प्रसन्न दिखायी देता है, जबकि वह स्वयं की रुचि, पसन्द और अभिवृत्तियों वाले समूह को प्राप्त कर लेता है। इस व्यावहारिक गतिशीलता का ही नाम समायोजन है। जब व्यक्ति अप्रसन्न दिखायी देता है तो यह … Read more

Adhigam chakra अधिगम वक्र – अर्थ, विशेषताएँ, प्रकार – सीखने के वक्र

अधिगम वक्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ Meaning and Definitions of Learning Curves अधिगम वक्र का अर्थ हम अपने जीवन में अनेक नयी बातें, नये कार्य एवं नये विषय सीखते हैं; जैसे कार चलाना, अंग्रेजी पढ़ना तथा चित्र बनाना आदि। किन्तु हमारी इन सबको सीखने की गति आरम्भ से अन्त तक एक सी नहीं होती। वह … Read more

Adhigam sikhane ke niyam अधिगम /सीखने के नियम –

अधिगम (सीखने) के नियम Laws of Learning विभिन्न खोजकर्ताओं ने सीखने को सरल और प्रभावशाली बनाने के लिये कुछ बातों पर बल दिया है। इनके पालन से अधिगम में शीघ्रता होती है और अपेक्षाकृत समय एवं शक्ति की बचत होती है। अतः हम अधिगम / सीखने के नियमों एवं प्रभावशाली कारकों को निम्न रूप में … Read more

Sikhane ke niyam सीखने के नियमों का शैक्षिक महत्त्व -अधिगम

सीखने के नियमों का शैक्षिक महत्त्वEducational Importance of Laws of Learning सीखने या अधिगम से सम्बन्धित सभी प्रयोगों से स्पष्ट होता है कि मानव बार-बार प्रयत्न करके एवं भूलों में सुधार करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। बालक जैसे-जैसे बड़ा होता है, सीखने के क्षेत्र में उन्नति करता है। विद्वानों ने सीखने की क्षमता … Read more

Thorndike ke sikhane ke niyam थार्नडाइक के सीखने के नियम और सिद्धान्त

थार्नडाइक के सीखने के नियम Learning Laws of Thorndike प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोगों के आधार पर सीखने में उत्पन्न होने वाले परिवर्तनों के प्रति कुछ निष्कर्ष निकाले, जिन्हें सीखने के नियम माना जाता है।थॉर्नडाइक का मत है कि जब उद्दीपक और प्रतिचार सीखने वाला और क्रिया के बीच सम्बन्ध उत्पन्न होने लगता है … Read more

Janmjaat prerak जन्मजात प्रेरक अर्थ, परिभाषा और प्रकार – अधिगम

जन्मजात प्रेरक Innate Motives या जैविकीय प्रेरकPhysiological या शारीरिक प्रेरक या प्राथमिक प्रेरकये प्रेरक मनुष्य में जन्म से ही पाये जाते हैं। इसी कारण इनको जैविकीय प्रेरक Physiological या शारीरिक प्रेरक या प्राथमिक प्रेरक भी कहते हैं। मनुष्य जीवित रहने के लिये इन प्रेरकों की पूर्ति करता है। यह कहना उचित ही है कि जन्मजात … Read more

Arijit prerak अर्जित प्रेरक – अर्थ, परिभाषा और प्रकार – अधिगम

अर्जित प्रेरक Acquired Motives वे प्रेरक जो बालक में जन्मजात नहीं होते हैं, वरन् वातावरण के सम्पर्क में आने पर वह अर्जित करता है, अर्जित प्रेरक कहलाते हैं। अर्जित प्रेरक दो प्रकार के होते हैं- 1 व्यक्तिगत प्रेरक 2 सामान्य सामाजिक प्रेरक व्यक्तिगत प्रेरकPersonal motives प्रत्येक व्यक्ति की रुचियाँ, उसके उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। उसमें … Read more

Prerak प्रेरक – अर्थ, परिभाषा, वर्गीकरण एवं प्रकार अधिगम-

प्रेरक और इसका अर्थMotive and Its Meaning प्रेरक क्या है इस विषय में सभी विद्वान् एक मत नहीं हैं। कुछ विद्वान् इनको जन्मजात या अर्जित शक्तियाँ मानते हैं। कुछ विद्वान् इनको व्यक्ति की शारीरिक या मनोवैज्ञानिक दशाएँ मानते हैं। यहाँ पर हम प्रेरक का अर्थ तथा इसकी प्रमुख परिभाषाएँ प्रस्तुत करेंगे। प्रेरक का अर्थ Meaning … Read more

Vishay vastu विषय-वस्तु विश्लेषण के सिद्धांत, शिक्षण बिन्दुओं का निर्धारण

विषय-वस्तु विश्लेषण के सिद्धान्त Principles of Contents Matter Analysis विषय-वस्तु का निर्माण करते समय सामान्यतया शिक्षक, शिक्षार्थी से सम्बन्धित मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना आवश्यक है। इन्हीं बिन्दुओं से सम्बन्धित कतिपय सिद्धान्तों का विवरण इस प्रकार से है- पर्यावरण केन्द्रीयता का सिद्धान्त Principle of environment centredness समाज केन्द्रीयता का सिद्धान्त … Read more

Vishay vastu ya vishay samagri विषय-वस्तु या विषय – सामग्री स्वरूप, विश्लेषण एवं सिद्धांत

विषय – सामग्री का स्वरूप Form of Subject Matter पाठ्य-वस्तु विश्लेषण में प्रमुखतः दो शब्द हैं- पाठ्य-वस्तु एवं विश्लेषण। यहाँ पाठ्य-वस्तु से अभिप्राय उस पठनीय सामग्री से है, जो लिखित रूप में हमारे सामने है तथा कक्षा में जिसका शिक्षण करना है। यह लिखित इकाई एक सम्पूर्ण पाठ के रूप में हो सकती है, इकाई … Read more

Thakan थकान – परिभाषा, प्रकार, लक्षण, सीखने पर प्रभाव, कारण और दूर करने के उपाय

थकान जब बालक आवश्यकता से अधिक कार्य करने लगता है तो वह थकान का अनुभव करने लगता है। थकान के आने पर वह पाठ को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाता और उसकी क्षमता भी अवरुद्ध हो जाती है। और उसका अधिगम प्रभावित होता है। थकान की परिभाषाएँ ड्रेवर के अनुसार, थकान का अर्थ है … Read more

Karke sikhana vidhi करके सीखना – विधि, प्रभाव शीलता, दोष, शिक्षक एवं विद्यालय की भूमिका

करके सीखना Learning by doing सामान्यतः यह देखा जाता है कि छोटा बालक अपने हाथों द्वारा विविध प्रकार के कार्यों को सम्पन्न करता है जो कि सार्थक एवं निरर्थक दोनों रूपों में होते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो कार्य करके सीखा जाता उसका अधिगम स्थायी रूप से बना रहता है। यह विधि अधिगम … Read more

Anukaran dwara sikhana अनुकरण – अनुकरण द्वारा सीखना, विधि, प्रभावशीलता, दोष

अनुकरण शब्द यूनानी भाषा के Mimesis मिमेसिस के समानार्थी रूप में प्रयुक्त हुआ है। मिमेसिस का अंग्रेजी अनुवाद है – Imitation’ | हिन्दी में अनुकरण अंग्रेजी के Imitation शब्द से रूपान्तर होकर आया है। अनुकरण का सामान्य अर्थ है- नकल या प्रतिलिपि या प्रतिछाया, जबकि अधिगम के सन्दर्भ में अनुकरण का अर्थ है- किसी पाठ … Read more

Nirikshan vidhi निरिक्षण विधि – निरीक्षण द्वारा सीखना, प्रभावशीलता,गुण, दोष

निरीक्षण विधि Observation Method निरीक्षण विधि को भी एक प्रभावशाली अधिगम विधि के रूप में स्वीकार किया जाता है। बालक में जितनी अधिक गहन एवं व्यापक निरीक्षण की क्षमता होगी बालक उतनी ही तीव्र गति से सीखने का प्रयास करेगा। जैसे- जेम्सवाट ने चाय की केतली के ढक्कन के ऊपर-नीचे गिरने की प्रक्रिया का गहन … Read more

Parikshan vidhi परीक्षण विधि – परीक्षण करके सीखना, प्रभावशीलता गुण, लाभ, दोष

परीक्षण विधि Experiment Method परीक्षण विधि का आशय उस विधि से लिया जाता है, जिसमें विविध प्रयोगों एवं खोजों के माध्यम से किसी नियम या सिद्धान्त की सत्यता का मापन किया जाता है। सामान्य रूप से बालक भी परीक्षण का कार्य अपने प्रारम्भिक जीवन से ही कर देता है। वह अपनी माता के प्रति अधिक … Read more

Samuhik vidhiyon dwara sikhana सामूहिक विधियों द्वारा सीखना, प्रमुख सामूहिक विधियाँ -अधिगम

सामूहिक विधियों द्वारा सीखना Learning by group methods सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि छात्रों को समूह में कार्य करने में आनन्द का अनुभव होता है। बालक को अपने साथियों के साथ खेलना अच्छा लगता है। कक्षा में पढ़ते समय भी छात्र अपने साथियों से बातें करते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि … Read more

Sammelan pravidhi dwara sikhana सम्मेलन प्रविधि सम्मेलन विधि द्वारा सीखना या अधिगम

आधुनिक समय में सम्मेलन प्रविधि का महत्व प्रत्येक क्षेत्र में व्याप्त है। सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा शैक्षिक आदि क्षेत्रों में सम्मेलन प्रविधि का उपयोग किया जाता है। प्रजातन्त्र के मूल्यों तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये सम्मेलन प्रविधि का विशेष महत्त्व है। अंग्रेजी में सम्मेलन को अनेक शब्दों से सम्बोधित किया जाता है। जैसे- कॉन्फ्रेन्स … Read more

Vichar goshthi pravidhi विचार गोष्ठी प्रविधि विचारगोष्ठी विधि द्वारा सीखना

विचार गोष्ठी प्रविधि Seminar Technique विद्यालय एवं महाविद्यालयों का शिक्षण तथा अनुदेशन स्मृति स्तर तक ही सीमित रहता है, अधिक से अधिक बोध स्तर पर सम्भव हो पाता है जबकि महाविद्यालयों तथा शोध संस्थाओं में अनुदेशनात्मक परिस्थितियाँ ऐसी होनी चाहिये, जो चिन्तन स्तर की अधिगम परिस्थितियों को प्रोत्साहित कर सकें। ऐसी परिस्थितियों में मानवी अन्तः … Read more

Sahpathi samuh adhigam सहपाठी समवयस्क समूह अधिगम सहयोगी अधिगम

सहपाठी समूह अधिगम समवयस्क या सहयोगी अधिगम के अन्तर्गत सीखने वालों को विभिन्न समवयस्कबाँट लिया जाता है। समवयस्क शब्द के शाब्दिक अर्थ से ही स्पष्ट होता है कि इसमें सीखने वाले अपने स्तर पर समान योग्यता एवं आयु वर्ग के समूहों में सम्मिलित होकर स्वतन्त्र रूप से प्रजातान्त्रिक वातावरण में परस्पर समस्याओं का निवारण करते … Read more

Prayatn aur bhul ka Siddhant प्रयत्न और भूल का सिद्धांत

प्रयत्न और भूल का सिद्धांत Theory of Trial and-Error किसी कार्य को हम एकदम से नहीं सीख पाते हैं सीखने की प्रक्रिया में हम प्रयत्न करते हैं और बाधाओं के कारण भूलें भी होती हैं। लगातार प्रयत्न करने से सीखने में प्रगति होती है और भूलें कम होती जाती हैं। अतः किसी क्रिया के प्रति … Read more

Adhigam ki prabhavshali vidhiyan अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ –

अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ Effective Methodsof Learning बालक के सीखने की प्रक्रिया निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। इसको बालक द्वारा विविध रूपों में सम्पन्न किया जाता है। बालक विद्यालय में आने से पूर्व बहुत सी बातें जानता है, जिन्हें वह अपने परिवार एवं परिवेश से सीखकर आता है।जैसे- शिक्षक की आज्ञा का पालन करना, शिक्षक … Read more

Sambaddh pratikriya ka Siddhant सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत –

सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत Conditioned ResponseTheoryl साहचर्य के द्वारा अधिगम में सम्बद्ध सहज क्रिया सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। जब हम अस्वाभाविक उद्दीपक के प्रति स्वाभाविक प्रतिचार करने लगते हैं, तो वहाँ पर सम्बद्ध प्रतिक्रिया के द्वारा सीखना उत्पन्न होता है।जब खाने को देखने पर कुत्ते के मुँह में लार आ जाती है या … Read more

Kriya prasoot anubandhan ऑपरेंट कंडीशनिंग या स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत

ऑपरेंट कंडीशनिंग या स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन Skinner’s Operant Conditioning उत्तेजक प्रतिक्रिया अधिगम सिद्धांतों की कोटि में बी. एफ. स्किनर ने सन् 1938 में क्रिया प्रसूत अधिगम प्रतिक्रिया को विशेष आधार देकर महान् योगदान दिया। स्किनर ने इस प्रक्रिया को प्रमाणित करने के लिये मंजूषा का निर्माण किया, जिसे स्किनर बॉक्स या स्किनर मंजूषा … Read more

Anukaran ka Siddhant अनुकरण का सिद्धांत

अनुकरण का सिद्धांत अनुकरण के सिद्धांत के प्रतिपादक मनोवैज्ञानिक हैगार्ट को माना जाता है। अनुकरण एक सामान्य प्रवृत्ति है, जिसका प्रयोग मानव दैनिक जीवन की समस्याओं के सुलझाने में करता है। अनुकरण में हम दूसरों को क्रिया करते हुए देखते हैं और वैसा ही करना सीख लेते हैं मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है … Read more

Shoes ya antarDrishti सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत-

अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धांत सूझ का अधिगम सिद्धांत गैस्टाल्टवादियों की देन है। वे लोग समग्र में विश्वास करते हैं, अंश में नहीं। जैसा कॉलसनिक ने लिखा है, ‘अधिगम व्यक्ति के वातावरण के प्रति सूझ तथा आविष्कार के सम्बन्ध को स्पष्ट करने वाली प्रक्रिया है। Learning is to the field theorists a process of discovering … Read more

Mansik Vikas ki avasthaen पियाजे की मानसिक विकास की अवस्थाएँ

आज तक ज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में जितने शोध एवं अध्ययन किये गये हैं, उनमें सबसे अधिक विस्तृत, वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अध्ययन जीन प्याजे ने किया। यही कारण है कि जीन प्याजे को मनोविज्ञान के क्षेत्र में तृतीय शक्ति third force के रूप में जाना जाता है। पियाजे के ज्ञानात्मक सिद्धान्त में ज्ञानात्मक प्रकिया Cognition … Read more

Sangyan atmak ya gyanatmak संज्ञानात्मक या ज्ञानात्मक / मानसिक विकास का सिद्धान्त – जीन पियाजे

जीन पियाजे के अनुसार मानसिक / ज्ञानात्मक या संज्ञानात्मक विकासका सिद्धान्तTheory of Mental or Cognitive Development According to JeanPiaget जीन पियाजे का जन्म सन् 1886 को स्विट्जरलैंड में हुआ था। प्याजे ने अपने सम्पूर्ण जीवन में मानव विकास का अध्ययन किया। आधुनिक युग में ज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक Swiss psychologist Jean … Read more

Samaji Karan समाजीकरण समाजीकरण तथा सामाजिक विकास

समाजीकरण तथा सामाजिक विकास Socialization and Social Development बालक समाज का एक अविभाज्य अंग होता है। यहाँ इस अध्याय में हम बालक के सामाजिक विकास तथा समाजीकरण का विवरण स्पष्ट रूप से करेंगे। सामाजीकरण पंसमाजीकरण से तात्पर्य है, व्यक्ति को सामाजिक प्राणी बनाना। इसके अतिरिक्त सामाजिक प्राणी बनाने का अर्थ होता है कि व्यक्ति समाज … Read more

Brunar ka sangyanatmak adhigam ब्रूनर का संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत जेरोम ब्रूनर-

जेरोम ब्रूनर का परिचय Introduction to Jerome Seymour Bruner जेरोम ब्रूनर Jerome Seymour Bruner का जन्म 1 अक्टूबर, 1915 को हुआ था, एवं मृत्यु 5 जून, 2016 को हुई थी। ब्रूनर Jerome Bruner एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होने मानव के संज्ञानात्मक मनोविज्ञान तथा संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त cognitive learning theory पर उल्लेखनीय योगदान दिया। वे न्यू … Read more

Adhigam pathar अधिगम पठार अर्थ एवं परिभाषा, समय, कारण एवं निराकरण-

अधिगम पठार का अर्थ एवं परिभाषाएँMeaning and Definitions of Learning Plateau अधिगम पठार का अर्थ जब हम कोई नयी बात सीखते हैं तब हम सीखने में लगातार उन्नति नहीं करते हैं। हमारी उन्नति कभी कम और कभी अधिक होती है। कुछ समय पश्चात् ऐसा अवसर भी आता है जब हमारी उन्नति बिल्कुल रुक जाती है। … Read more

Adhigam ka sthanantaran अधिगम का स्थानान्तरण

अधिगम का स्थानान्तरण Transfer of Learning मानव विकास में अधिगम का प्रमुख स्थान है। हम प्रत्येक नवीन कार्य को सीखने में अपने संचित ज्ञान की सहायता लेते हैं। यह संचित ज्ञान हमारे सीखने को सरल बनाता है। बी. एड. शिक्षारत छात्र-छात्राएँ पूर्व संचित गणित के ज्ञान को मस्तिष्क में जाग्रत करके सांख्यिकी को सीखने में … Read more

Bal Vikas बाल विकास Development Child in Hindi

बाल विकास की अवधारणा Concept of Child Development बाल विकास Child Development की प्रक्रिया एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इस सृष्टि में प्रत्येक प्राणी प्रकृति द्वारा प्रदत्त अनुकूलन परिस्थितियों से उत्पन्न होता है उत्पन्न होने तथा गर्भ धारण की दशाएँ सभी प्राणियों की पृथक्-पृथक हैं। बाद में मनुष्य अपने परिवार में विकास एवं वृद्धि को प्राप्त … Read more

Vyaktitva ka Vikas व्यक्तित्व Personality व्यक्तित्व का विकास, अर्थ,परिभाषा

व्यक्तित्व Personality मनोविज्ञान के विकास ने व्यक्तित्व की पुरानी धारणाओं को बदल दिया है। व्यक्तित्व का आधार क्या होना चाहिये? यह प्रश्न मनोवैज्ञानिकों के लिये जटिल बन गया था। उन्होंने विभिन्न रूपों एवं दृष्टिकोणों से व्यक्ति का अध्ययन किया और व्यक्तित्व की प्राचीन अवधारणाओं को समाप्त कर नवीन अवधारणा को स्थापित किया। गैरिसन, कार्ल सी. … Read more

कल्पना Imagination – अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ,प्रकार

कल्पनाImagination वस्तु का प्रत्यक्षीकरण मानव मस्तिष्क में प्रतिमाओं को स्थापित करता है। वह इन प्रतिमाओं में परिवर्तन करके नवीनता उत्पन्न कर देता है। इसी नवीनता का नाम कल्पना है। मकान निर्मित करने वाले आर्किटेक्ट मकान के नये डिजायन तैयार करते हैं। ये डिजायन कल्पना पर ही आधारित होते हैं। इसमें वह अपने पूर्वानुभवों का प्रत्यास्मरण … Read more

चिन्तन Thinking अर्थ एवं परिभाषा, साधन और चिंतन के प्रकार

चिंतन क्या है। चिन्तन Thinking मानवीय जीवन समस्याओं से भरा हुआ है। हम एक समस्या का हल खोज नहीं पाते, दूसरी सामने उपस्थित हो जाती है। ये समस्याएँ प्रयत्न बिना भी हल हो जाती हैं और कभी-कभी प्रयत्न चिन्तन को जन्म देता है। दैनिक जीवन में बड़े एवं बुजर्ग कहते हैं कि ‘करने से पहले … Read more

तर्क Arguments -अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार एवं तर्क वृद्धि के तरीके

तर्क क्या है. तर्क Arguments तर्क एक अभिव्यक्त क्रिया है, जिसका प्रकटीकरण समस्या समाधान व्यवहार से होता है। तर्क के द्वारा समस्या के प्रति रुचि जाग्रत होती है और समस्या के समाधान के साथ ही रुचि एवं तर्क दोनों ही समाप्त हो जाते हैं। सामान्य जीवन में तर्क शक्ति का प्रयोग स्वाभाविक रूप से होता … Read more

Vyaktigat bhinnata व्यक्तिगत विभिन्नता-अर्थ,परिभाषा, प्रकार एवं कारण वैयक्तिक विभिन्नता-

व्यक्तिगत विभिन्नता का अर्थMeaning of Individual Differences शिक्षा के अति प्राचीनकाल से आयु के अनुसार विद्यार्थियों में अन्तर किया जाता है कि आयु की विभिन्नता से बालक को भिन्न-भिन्न स्तर की शिक्षा मिलनी चाहिये। क्रमशः आयु बढ़ने के साथ पाठ्यक्रम को अधिक विस्तृत और कठिन बनाया जा सकता है। प्राचीनकाल में आयु के अतिरिक्त थोड़ा … Read more

Bal Vikas ke Aadhar बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारक

बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारकFoundations of Child Development and Factors Influence Them 1.वंशानुक्रम 2.वातावरण पारिवारिक, सामाजिक, विद्यालयी एवंसंचार माध्यम। मानव विकास की प्रक्रिया में वंशानुक्रम एवं वातावरण Heredity and Environment in Developmental Process विकास प्रक्रिया से तात्पर्य बालक में शनैः-शनैः उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के परिवर्तनों से है। यह … Read more

Adhigam sikhana paribhasha aur Siddhant Arth अधिगम सीखना परिभाषा और सिद्धान्त-अर्थ,

अधिगम Learning सीखना या अधिगम एक व्यापक सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलनेवाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म के उपरांत ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है। धीरे-धीरे वह अपने को वातावरण से समायोजित करने का प्रयत्न करता है। इस समायोजन के दौरान वह अपने अनुभवों से अधिक … Read more

Abhiprerna अभिप्रेरणा-or अभिप्रेरण Or प्रेरणा Motivation

अभिप्रेरणा का अर्थ Meaning of Motivation प्रेरणा या अभिप्रेरणा या अभिप्रेरण शब्द का प्रचलन अंग्रेजी भाषा के मोटीवेशन Motivation के समानार्थी के रूप में होता है। ‘मोटीवेशन’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के मोटम धातु से हुई है, जिसका अर्थ मूव या इन्साइट टु ऐक्सन होता है। अतः प्रेरणा एक संक्रिया है, जो जीव को … Read more

raat ka paryayvachi shabd

रात’ शब्द का अन्य पर्याय है- रात्रि, रैन, रजनी, यामिनी, तमी, निशि, यामा, विभावरी raat ka paryayvachi shabd raat ka paryayvachi shabd in hindi raat ka paryayvachi shabd hindi mein संख्या  संस्कृत शब्द English Word 1. रात्रि  Ratri 2. निशा  Nisha 3. रजनी  Rajni 4. यामा  Yama 5. निशि  Nishi 6. कादंबरी  Kadambari 7. त्रियामा  Triyama … Read more

Abhiprerit karne ki vidhiyanअभिप्रेरित करने की विधियाँ अभिप्रेरणा की विधियाँ

अभिप्रेरणा की विधियाँ Methods ofMotivating कक्षा शिक्षण में अभिप्रेरणा का अत्यन्त महत्त्व है। कक्षा में पढ़ने के लिये विद्यार्थियों को निरन्तर प्रेरित किया जाना चाहिये। प्रेरणा की प्रक्रिया में वे अनेक कार्य करते हैं, जिसके फलस्वरूप विभिन्न छात्रों का व्यवहार भिन्न होता जाता है; उदाहरणार्थ- सामाजिक तथा आर्थिक अवस्थाएँ, पूर्व अनुभव, आयु तथा कक्षा का … Read more

Abhiprerna ke Siddhant अभिप्रेरणा के सिद्धान्त Principles of Motivation

अभिप्रेरणा के सिद्धान्त अभिप्रेरणा एक लक्ष्य आधारित व्यवहार का उत्प्रेरण या ऊर्जाकरण है। प्रेरणा या अभिप्रेरणा या अभिप्रेरण आंतरिक या बाह्य दो प्रकार की हो सकती है। विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार, बुनियादी ज़रूरतों में शारीरिक दुःख-दर्द को कम करने और जीवन को आनंदमय बनाने के मूल में अभिप्रेरणा हो सकती अभिप्रेरणा में खान-पान, भोग-विलास और … Read more

Sikhane ki prakriya सीखने की प्रक्रिया में अभिप्रेरणा की भूमिका

सीखने की प्रक्रिया में अभिप्रेरणा की भूमिका अभिप्रेरणा सीखने की प्रक्रिया का एक सशक्त माध्यम है। अधिगम प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति जीवन के सामाजिक, प्राकृतिक एवं वैयक्तिक क्षेत्र में अभिप्रेरणा द्वारा ही सफलता की सीढ़ी तक पहुँच पाता है। यदि उसके लिये उपयुक्त परिस्थितियों का निर्माण नहीं हो पाता तो अभिप्रेरणा का उत्पन्न होना सन्देहप्रद रह … Read more

Maslo ka pyramid मास्लो का पिरामिड मानव आवश्यकताएँ Maslow’s Pyramid

‘मास्लो का पिरामिड’ अब्राहम मास्लो द्वारा प्रतिपादित एक मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त है जो उन्होने ‘A Theory of Human Motivation’ नामक अपने ग्रन्थ में 1954 में प्रस्तुत किया था। मैसलो वह प्रथम मनोवैज्ञानिक है, जिसने आत्मसिद्धि प्रत्यय का अध्ययन किया। मास्लो के सिद्धान्त न केवल मनोविज्ञान के क्षेत्र में, बल्कि अध्यापन के क्षेत्र में भी प्रसिद्ध हुए … Read more

Dhyan avdharna ध्यान-अवधारणा, परिभाषा,अर्थ, विशेषताएँ, प्रक्रिया

ध्यान Meditation ध्यान एक ऐसी मानसिक प्रक्रिया है जिसमें आध्यात्मिक एवं भौतिक विकास हेतु मन की स्थिरता एवं एकाग्रता का विकास किया जाता है जिससे व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ दृष्टिगोचर होता है। प्राथमिक स्तर पर ध्यान की अवधारणा Concept of Meditation at Primary Level मन के द्वारा व्यक्ति अनेक प्रकार के मोह … Read more

Ruchi ki arth paribhasha रुचि – रुचि का अर्थ एवं परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार, कारक

रुचि का अर्थ एवं परिभाषाएँMeaning and Definitions of Interest ‘रुचि’ शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘INTEREST’ का हिन्दी समानान्तर शब्द है। Interest की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘INTERESSE’ से हुई है। इसका तात्पर्य है – अन्तर स्थापित करना, महत्त्वपूर्ण होना और लगाव होना । अत: शब्दार्थ के आधार पर हम कह सकते हैं कि रुचि … Read more

Vibhinn samitiyon ke sadasyon ka abhipreran विभिन्न समितियों के सदस्यों का अभिप्रेरण

सीखने-सिखाने तथा विद्यालयी व्यवस्था के सन्दर्भ में समुदाय, ग्राम शिक्षा समिति, विद्यालय प्रबन्ध समिति तथा अन्य विद्यालयी समितियों के सदस्यों का अभिप्रेरण. विभिन्न समितियों के सदस्यों का अभिप्रेरण वर्तमान समय में सरकार द्वारा शिक्षा में सुधार एवं अभिभावकों की सन्तुष्टि हेतु शिक्षा समिति एवं विद्यालय प्रबन्ध समितियों का गठन किया है। इन समितियों के गठन … Read more

Smriti Arth paribhasha स्मृति – अर्थ एवं परिभाषा, प्रकार, अंग, विशेषताएँ, नियम

Meaning and Definitions of Memory स्मृति का अर्थ एवं परिभाषाएँ स्मृति एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है। हमारे व्यावहारिक जीवन में अनेक प्रकार की घटनाएँ घटित होती हैं, जब हम किसी वस्तु को छूते, देखते, सुनते या सूंघते हैं तब ‘ज्ञानवाहक तन्तु’ उस अनुभव को मस्तिष्क के ज्ञान केन्द्र में पहुँचा देते हैं। ‘ज्ञान केन्द्र’ में … Read more

Vismrit avdharna विस्मृति-अवधारणा, अर्थ.परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार

विस्मृति की अवधारणा एवं अर्थ Concept and Meaning of Forgetting किसी सीखी हुई वस्तु को स्मरण न कर सकना, विस्मृति कहलाती है। हमारे जीवन में अनेक ऐसी बातें हैं जिन्हें हम भूल जाते हैं। मनुष्य के सफल जीवन के लिये स्मृति जितनी आवश्यक है विस्मृति भी उतनी ही आवश्यक है।हम बता चुके हैं कि अच्छी … Read more

Chhatra shikshak tatha shikshan mein sambandh छात्र, शिक्षक तथा शिक्षण में सम्बन्ध

छात्र, शिक्षक तथा शिक्षण में सम्बन्ध शिक्षण की प्रकृति, प्रक्रिया तथा उद्देश्यों को समझने की दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि वास्तव में शिक्षण क्या है और क्या नहीं?किसी बात को जानने मात्र से व्यवहार में वांछित परिवर्तन कभी भी नहीं आता, क्योंकि सीखते तो पशु-पक्षी भी हैं। उनके भी देखने, सुनने आदि से … Read more

Shikshan ki visheshtaen शिक्षण की विशेषताएँ Characteristics of Teaching

शिक्षण की विशेषताएँ शिक्षण की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं। इनमें अनेक का वर्णन योकम तथा सिम्पसन ने अपनी पुस्तक Modern and Techniques of Teaching .में भी किया है- 1.वांछनीय सूचना देना Providing of desirable information. सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव का ज्ञान भी निरन्तर बढ़ता जा रहा है। यह सब कुछ हमने प्रयास और त्रुटि … Read more

Shiksha aur shikshan mein antar शिक्षा और शिक्षण में अन्तर Distinction-between Education and Teaching

शिक्षा का व्यापक अर्थ विकास की प्रक्रिया से लिया जाता है। यह प्रक्रिया शैशवावस्था से प्रौढ़ावस्था तक चलती रहती है। शिक्षा एक ऐसे अनुकूलन की क्रिया समझी जाती जो शारीरिक तथा मानसिक रूप से विकसित मानव का ईश्वर के साथ व्यवस्थापन करने में उसकी सहायता करती है किन्तु शिक्षा Education शिक्षण Teaching से भिन्न है। … Read more

Shikshan prakriya sopan शिक्षण प्रक्रिया सोपान,द्विध्रुवीय, त्रिध्रुवीय, सफल शिक्षण

शिक्षण प्रक्रिया Teaching Process हम यह भलीभाँति जानते हैं कि कार्य कोई भी क्यों न हो उसे पूर्ण करने की एक अपनी ही विधि या विधियाँ होती हैं। चूँकि शिक्षण भी एक कार्य है। अतः उसे सम्पन्न करने की भी विद्यार्थियों की आयु तथा वातावरणीय परिस्थितियों आदि को ध्यान में रखते हुए एक नहीं कई … Read more

Shikshan prakriya ke sopan शिक्षण प्रक्रिया के सोपान Steps of Teaching Process

शिक्षण प्रक्रिया के सोपान Steps of Teaching Process समूची शिक्षण प्रक्रिया के अग्रलिखित तीन सोपान हो सकते हैं- .1.शिक्षण पूर्व चिन्तन एवं तैयारी . इसके अन्तर्गत निम्नलिखित बातें आती हैं:- 1 उद्देश्य निर्धारण Deciding the objectives 2.विषयवस्तु का चयन यदि पूर्व निर्धारित नहीं है तोDeciding the contents, if not pre-decided 3.शिक्षण-विधि, युक्तियों तथा तकनीकों का … Read more

Shikshan ki prakriti शिक्षण की प्रकृति – Nature of Teaching

Nature of Teaching शिक्षण की प्रकृति शिक्षण की अवधारणा तथा अर्थ के सम्बन्ध में जो कुछ भी कहा गया, उसे ध्यान में रखते हुए शिक्षण की प्रकृति (Nature) के सम्बन्ध में यही कहा जा सकता है कि:- 1.शिक्षण एक कला An Art है तो विज्ञान Science भी यह बात सुनने में थोड़ी अटपटी अवश्य लगती … Read more

Bi-polar orTripolar Teaching द्विध्रुवीय अथवा त्रिध्रुवीय शिक्षण

द्विध्रुवीय अथवा त्रिध्रुवीय शिक्षण जॉन एडम्स John Adams के अनुसार, “Education is a bi-polar system.” अर्थात् शिक्षा एक द्विध्रुवीय प्रक्रिया है। एडम्स के अनुसार शिक्षा के ये दो ध्रुव हैं- शिक्षक The teacher तथा शिक्ष्य अथवा शिक्षार्थी The educand Iमाना कि शिक्षा के सजीव ध्रुव ये दो ही हैं, परन्तु साथ ही इस बात पर … Read more

Sampreshan ke uddeshy सम्प्रेषण का उद्देश्य – Aims of Communication

सम्प्रेषण का उद्देश्य सम्प्रेषण मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं, उद्वेगों और अर्न्तद्वन्द्वों को प्रकाशित न कर सके तो वह मानसिक सन्तुलन खो बैठता है। अतः सम्प्रेषण मानसिक सन्तुलन और शान्ति के लिये भी आवश्यक है। सम्प्रेषण के उद्देश्य निम्नलिखित हैं: 1. सम्प्रेषण का उद्देश्य है भावों के आदान-प्रदान द्वारा … Read more

Sampreshan ke Siddhant सम्प्रेषण के सिद्धांत Principles of Communication

सम्प्रेषण के सिद्धांत कोई भी व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं या किसी सम्प्रत्यय को किसी दूसरे व्यक्ति से व्यक्त करता है। अतः सम्प्रेषण द्विपक्षीय प्रक्रिया Two way process है। सम्प्रेषण के मुख्य सिद्धान्त निम्नलिखित हैं:- 1.सजगता का सिद्धान्त Principle and activeness सम्प्रेषण कर्त्ता Communicator और सम्प्रेषण ग्रहण करने वाला व्यक्ति Receiver सम्प्रेषण क्रिया के समय सजग … Read more

Sampreshan ki prakriya tatv AVN sampreshan ke madhyam सम्प्रेषण की प्रक्रिया, तत्त्व एवं सम्प्रेषण के माध्यम

सम्प्रेषण की प्रक्रिया Process ofCommunication मानव एक सामाजिक प्राणी है जो समाज में रहकर अपना जीवन व्यतीत करता है। सम्प्रेषण भी एक सामाजिक प्रक्रिया है। सम्प्रेषण की प्रक्रिया एक पक्षीय न होकर दो पक्षीय या बहुपक्षीय प्रक्रिया है। इसमें एक पक्ष अपने विचारों तथा भावों का दूसरे पक्ष को आदान-प्रदान करता है। अतः सम्प्रेषण की … Read more

Sampreshan ka mahatva sampreshan ki prakriti सम्प्रेषण का महत्त्व, सम्प्रेषण की प्रकृति एवं विशेषताएँ

Importance of Communication सम्प्रेषण का महत्त्व सम्प्रेषण प्रशासन का महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है। किसी संगठन का कार्य करने के लिये सम्प्रेषण होना आवश्यक है। यदि संगठन की पूरी जानकारी होगी तो उसमें रुचि होगी और लगाव भी होगा। शोध कार्य से पता चलता है कि संगठन का सफल संचालन तभी होता है जब उसमें काम करने … Read more

Sampreshan ki vidhiyan सम्प्रेषण की विधियाँ – शाब्दिक सम्प्रेषण, अशाब्दिक सम्प्रेषण

सम्प्रेषण की विधियाँ Methods of Communication सम्प्रेषण मुख्यतः दो प्रकार का होता है:- 1 शाब्दिक सम्प्रेषण Verbal communication 2 अशाब्दिक सम्प्रेषण Non verbal communication 1.शाब्दिक सम्प्रेषण Verbal communication शाब्दिक सम्प्रेषण में सदैव भाषा का प्रयोग किया जाता है। यह सम्प्रेषण दो प्रकार का होता है: 1 मौखिक सम्प्रेषण Oral communication 2 लिखित सम्प्रेषण Written communication … Read more

Shaikshik prashasan AVN sangathan शैक्षिक प्रशासन एवं संगठन में सम्प्रेषण और इसकी उपयोगिता -शैक्षिक सम्प्रेषण

शैक्षिक प्रशासन में सम्प्रेषण Communication in Educational Administration मानव एक सामाजिक प्राणी है, जो समाज में रहकर अपना जीवन व्यतीत करता है। सम्प्रेषण भी एक सामाजिक प्रक्रिया है। सम्प्रेषण एक पक्षीय न होकर दो पक्षीय या बहुपक्षीय प्रक्रिया है। इसमें एक पक्ष अपने विचारों तथा भावों का दूसरे पक्ष को आदान-प्रदान करता है। यही प्रक्रिया … Read more

Shikshan adhigam mein sampreshan ki upyogita शिक्षण अधिगम में सम्प्रेषण की उपयोगिता

शिक्षण अधिगम में सम्प्रेषण की उपयोगिताUtility of Communication in Teaching Learning विद्यालय प्रशासन में शिक्षण एवं अधिगम के प्रमुख रूप देखने को पाये जाते हैं जिनके विकास का आधार सम्प्रेषण ही माना जाता है क्योंकि विद्यालय प्रशासन वर्तमान समय में ऐसा रूप धारण कर चुका है, जिसमें सम्प्रेषण साधनों का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। … Read more

Vyaktigat sampreshan व्यक्तिगत सम्प्रेषण अर्थ, गुण, दोष एवं प्रयोग

कक्षा में जो भी क्रियाएँ होती हैं वे सभी सम्प्रेषण में आती हैं तथा शिक्षण का पूर्ण करती है। कक्षा सम्प्रेषण के प्रकारों के लिये शिक्षा में वैयक्तिक शिक्षण के अर्थ, गुण-दोष एवं प्रयोग आदि पर प्रकाश डालेंगे। वैयक्तिक सम्प्रेषण Individual Communication Meaning of individual communication वैयक्तिक सम्प्रेषण का अर्थ जब शिक्षक प्रत्येक बालक को … Read more