पाठ 11 वाष्पीरण और संघनन vashikaran aur sanghanan

वाष्पीरण

हम देखते हैं कि वर्षा ऋतु में तालाबों, नदियों तथा नालों इत्यादि में काफी जल इकट्ठा हो जाता है। कुछ समय पश्चात् जल वहाँ पर दिखाई नहीं देता है। यह कहाँ चला जाता है ? इसका क्या कारण है ? हम यह सोचते हैं कि यह जल पृथ्वी में नीचे चला गया होगा। यह बात कुछ हद तक ही ठीक है; क्योंकि सारा पानी पृथ्वी में नहीं जाता। यदि हम पानी को एक बड़े सीमेंट के बने पक्के हौज में भर दें, तो हम देखेंगे कि यह भी कुछ दिनों में सूख जाता है। अब हम सोचते हैं कि यह जल कहाँ चला गया? इससे स्पष्ट है कि पानी वाष्प बनकर वायु में मिल गया। इस प्रकार पानी का वाष्प में बदलना वाष्पीकरण कहलाता है।

वाष्पीकरण वायुमण्डल में कम या ज्यादा हर समय होता रहता है। वाष्पीकरण कभी तेज हो जाता है और कभी धीमा, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह अधिक होता है।

1. वायु की तेज गति – जब वायु चल रही होती है, तो कपड़े जल्दी सूख जाते हैं अर्थात् वायु की गति जितनी अधिक होगी उतना ही वाष्पीकरण जल्दी होगा।

प्रयोग 1 – एक गीले कपड़े से कमरे के फर्श पर पोंछा लगाइए और पंखा चला दीजिए। आप देखेंगे कि फर्श बहुत जल्दी सूख जाता है। अब फिर पोंछा लगाइए। अब पंखा बन्द कर दीजिए। अब आप देखेंगे कि फर्श देर से सूखता है। इससे सिद्ध होता है कि वायु तेज चलती है, तो वाष्पीकरण भी तेज होता है।

2.शुष्क वायु का होना – उच्च तापमान में वायु बहुत शुष्क हो जाती है। ग्रीष्म ऋतु में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं; क्योंकि वायु शुष्क होती है। वर्षा ऋतु में वायु में नमी होती है, इसलिए कपड़े देर से सूखते हैं। शुष्क वायु कपड़ों के जल को शीघ्रता से वाष्प के रूप में ले लेती है। नम वायु कपड़ों के जल को धीमी गति से वाष्प के रूप में बदल लेती है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शुष्क वायु में वाष्पीकरण शीघ्र और नम वायु वाष्पीकरण देर से होता है।

3.उच्च तापमान – जब तापमान अधिक होता है, तो वाष्पीकरण की गति तेज हो जाती में है। सूर्य की गर्मी से और पानी की गर्म करने से जल वाष्प में बदलता है। जलवाष्प वायु मिल जाती है। गर्मियों में तापमान अधिक होने के कारण वाष्पीकरण तेजी से होता है, इसलिए गर्मी के मौसम में तालाब एवं नदी का अधिकांश जल सूख जाता है।

IMG 20240219 115159 पाठ 11 वाष्पीरण और संघनन vashikaran aur sanghanan

प्रयोग 2 एक प्याली में पानी भरकर उसे धूप में रखिए आप देखेंगे की प्याली का पानी कुछ कम हो गया पानी सूर्य की गर्मी से वाष्प में बदल गया।

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4.पानी का तल चौड़ा होना

प्रयोग 3- दो विभिन्न तल वाले बर्तन लो; जिनमें से एक का तल चौड़ा तथा दूसरे का तल कम चौड़ा हो। दोनों बर्तनों में समान पानी डालकर धूप में रख दो। हम देखते हैं कि चौड़े तल वाले बर्तन का जल जल्दी वाष्प में बदल जाता है।

संघनन क्रिया

जलवाष्प जब किसी ठण्डी सतह से टकराती है, तो वे ठण्डे होकर पानी की बूँदों में बदल जाते हैं; जलवाष्प के ठण्डा होकर पानी में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

प्रयोग 4- एक केतली लीजिए। उसमें पानी भरकर उबालिए। टोंटी से निकली भाप के ऊपर एक प्लेट रखिए। प्लेट पर पानी की बूँदें इकट्ठी हो जायेंगी। भाप पानी में संघनित हो जाती है। ठण्डी होने पर जलवाष्प पानी की बूँदों में बदल जाती है। वाष्पीकरण और संघनन क्रियाएँ साथ-साथ चलती हैं।

संघनन की प्रक्रिया प्रकृति में हर समय होती रहती है, जैसे – ओस, धुंध, कोहरा एवं हिम आदि संघनन के विभिन्न उदाहरण हैं। आइए, तुम्हें इनके विषय में जानकारी प्राप्त करायें।

1. ओस जलवाष्प का ठण्डी चीजों पर संघनित होना ही ओस बनना है। ठंडी वस्तुओं के सम्पर्क में आने से जलवाष्प संघनित होकर ओस बन जाती है। सर्दियों में सुबह और शाम

को पेड़-पौधों पर दिखाई देने वाली बूँदें ओस होती है। रात के समय वायु ठण्डी हो जाती है। यह ठण्डी वायु बहुत भारी हो जाती है तथा जलवाष्प ठण्डी वस्तुओं पर जम जाते हैं और पानी की बूँदों के रूप में दिखाई देती हैं। इसे ओस कहते हैं। बादलों वाली रात में तथा छायादार स्थानों पर ओस अधिक नहीं पड़ती।

2.पाला – अत्यधिक ठण्ड में पृथ्वी की वस्तुएँ ठण्डी हो जाती हैं। जब तापमान शून्य डिग्री सेल्सियम से भी नीचे चला जाता है, तब वायु में उपस्थित जलवाष्प पाले के रूप में जम जाता है। वस्तुओं पर पड़ी ओस की बूँदें ही बर्फ के रूप में जमकर पाला बन जाती हैं। पाले से फसलें नष्ट हो जाती हैं, इसलिए यह फसलों के लिए हानिकारक होता है। यदि फसलों में पाला से पहले पानी लगा हुआ होता है, तो पाले का प्रभाव कम हो जाता है।

3. धुँध या कोहरा – सर्दियों में तापमान बहुत कम होता है। अतः वायु में उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर बहुत गाढ़े हो जाते हैं तथा वायु में उपस्थित धूल-कणों पर जम जाते हैं। इस प्रकार वायुमण्डल धुंधला तथा सफेद-सा हो जाता है। इस अवस्था में जल-कण लगभग आधे जमे हुए प्रतीत होते हैं, जिसे हम धुँध कहते हैं। धुँध प्राय: बहुत गाढ़ी होती है। ऐसी स्थिति में आस-पास की वस्तुएँ दिखाई नहीं देती हैं। धुँध जब पृथ्वी के समीप आ जाती है, तो कोहरा बन जाती है। जब सर्दियों में कई बार धुँध अधिक गहरी नहीं होती है, तो इस अवस्था को कोहरा कहते हैं। वायु में धूल के कण तैरते रहते हैं। जलवाष्प इन धूल के कणों पर संघनित हो जाती है, जिससे कोहरा बन जाता है। सूर्य निकलने पर उसकी गर्मी से धूल पर संघनित पानी वाष्पित हो जाता है और कोहरा खत्म हो जाता है।

4.बादल तथा वर्षा – सूर्य की गर्मी से समुद्रों, झीलों और नदियों का जल वाष्पित होता रहता है। जलवाष्प वायु में मिलकर ऊपर उठती है। ऊपर जाकर जलवाष्प ठण्डी होकर पानी की छोटी-छोटी बूँदों में बदल जाती है। ये बूँदें हवा में तैरती रहती हैं। जब ये बूँदें एक-दूसरे के सम्पर्क में आती हैं, तो बादल का रूप धारण कर लेती हैं।, बादल जैसे-जैसे ऊँचा उठता है, वह ठण्डा होता चला जाता है। उसमें बनी पानी की बूँदों का आकार बड़ा हो जाता है और वे इतनी भारी हो जाती हैं कि हवा में तैर नहीं पाती और वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरने लगती हैं।


5.ओला – जब वर्षा की बूँदें अधिक ठण्डी वायु से होकर गुजरती हैं, तो वह जम जाती हैं और ओले के रूप में पृथ्वी पर गिरने लगती हैं।

6.हिमपात – कभी-कभी (अत्यधिक ठण्ड के कारण वाष्प जल की बूँद में परिवर्तित होने से पहले ही जम जाती है। ये जमी हुई बूँदें हिम के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं। हिम बहुत हल्की होती है। इसे ही बर्फ का गिरना या हिमपात कहते हैं। शीत ऋतु में अत्यधिक ठण्ड पड़ने पर पर्वतों पर हिमपात होता है। इस प्रकार, वाष्पीकरण एवं संघनन मौसम पर बहुत प्रभाव डालते हैं।

याद रखिए-

  • पानी का वाष्प में बदलना वाष्पीकरण कहलाता है।
  • वाष्पीकरण वायुमण्डल में कम या ज्यादा हर समय होता रहता है।
  • जब वायु चल रही होती है, तो कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
  • वायु तेज चलती है, तो वाष्पीकरण भी तेज होता है।
  • शुष्क वायु में वाष्पीकरण शीघ्र और नम वायु में वाष्पीकरण देर से होता है।
  • जल वाष्प के ठण्डा होकर पानी में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

देखें आपने क्या सीखा l

क. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


1.वाष्पीकरण किसे कहते हैं ?

पानी को वाष्प में बदलना ही वाष्पीकरण कहते हैं।


2.खुले धरातल पर वाष्पीकरण तेजी से क्यों होता है ?

खुले धरातल पर सूर्य की किरण और वायु तेज चलती है जिससे खुले धरातल पर वाष्पीकरण तेजी से होता है

3.संघनन किसे कहते हैं ?

जल वाष्प के ठंडा होकर पानी में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

4.ओस कैसे बनती है ?

जलवाष्प का ठंडी चीजों पर संघनित होना ही ओस है।

5.हिमपात किसे कहते हैं ?

अत्यधिक ठंड के कारण वाष्प जल की बूंद में परिवर्तित होने से पहले ही जम जाती है यह जमी हुई बुँदे हिम के रूप में पृथ्वी पर गिरती है जिसे हिमपात कहते हैं।

6.बादल बनने की क्या प्रक्रिया है ?

सूर्य की गर्मी से समुद्र और नदियों का जलवाष्पित होता रहता है जलवाष्प वायु में मिलकर ऊपर उठती हैं और बादल का रूप धारण कर लेती हैं ।

ख. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –


1.जलवाष्प का पानी में बदलना ..संघनन .. कहलाता है।

2. वाष्पीकरण शुष्क वायु में… शीघ्र नम ..होता है

3…गर्मी.. वाली रात में ओस अधिक नहीं पड़ती है।

4.सर्दियों में तापमान बहुत …कम….होता है।

5.पानी का वाष्प में बदलना.. वाष्पीकरण ..कारण कहलाता है।

6.धुंध के पृथ्वी के …समीप… कोहरा बन जाता है।

ग. निम्नलिखित कथनों में सही कथन के सामने () और गलत कथन के सामने (X) का चिह्न लगाइए

निम्नलिखित प्रश्नों को विद्यार्थी स्वयं हल करें-

1.प्रकृति में जल का सदैव वाष्पीकरण होता है।

2.शीत ऋतु में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
है।

3.ठंडी होकर जलवाष्प पानी की बूँदों में बदल जाती है।

4. भारी होने के कारण ठण्डी वायु नीचे की ओर आती है।

5. वर्षा ऋतु में पर्वतों पर हिमपात होता है।

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