Yan Sandhi Ki Paribhasha Udaharan यण् सन्धि की परिभाषा व उदाहरण

यण् सन्धि की परिभाषा व उदाहरण

यण् सन्धि की परिभाषा- यदि हस्व / दीर्घ इ, उ, ऋ, लृ के पश्चात कोई विजातीय स्वर हो तो हृस्व/ दीर्घ इ, उ, ऋ, लृ के स्थान पर क्रमशः य्, व्, र्, ल् आदेश होगा |
इस संधि में पूर्व पद के अन्तिम स्वर के स्थान पर ही परिवर्तन होगा


विशेष :- यहाँ पर पूर्व वर्ण के बाद सजातीय वर्ण नहीं होना चाहिये यदि सजातीय होगा तो दीर्घ सन्धि हो जाएगी | अर्थात् इ के बाद कोई भी इ नहीं होना चाहिये और इसी तरह उ के बाद एंव ऋ के बाद उसी जाति का स्वर नहीं होना चाहिए |

यण् संधि के चार नियम होते हैं –

इ / ई + भिन्न स्वर = य्

उ / ऊ + भिन्न स्वर =व्

ऋ+ भिन्न स्वर= र्

लृ + भिन्न स्वर  = ल्

उदाहरण-
इ+ अ = य्

अति + अल्प = अत्यल्प

इ + आ = य्

अति + आदि = इत्यादि

उ + अ = व्

सु+ आगत = स्वागत

ऊ + आ = व्

वधू + आगमन = वध्वागमन

ऋ + अ = र्

पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

लृ + भिन्न स्वर == ल्

लृ + आकृति: = लाकृति:

इन उदाहरणों में पूर्व पद के अंतिम स्वर में ही परिवर्तन हुआ है ( + ) के बाद भिन्न स्वर होने के कारण कोई परिवर्तन नही करना है ।

यण् सन्धि के उदाहरण

यदि + अपि=यद्यपि
इति + अपि= इत्यपि
इति + आदि= इत्यादि
अति + आवश्यकम् = अत्यावश्यकम्
प्रति + आगच्छति = प्रत्यागच्छति
इति + आह= इत्याह
अपि + एवम्=: अप्येवम्
प्रति + एकम्= प्रत्येकम्
 नदी+ अत्र= नद्यत्र
सुधी + उपास्य = सुद्युपास्य
देवी + अपि=देव्यपि
अनु + अर्थः= अन्वर्थः
अनु + अय:= अन्वयः
सु + आगतम्= स्वागतम्
धेनु + ऐक्यम्=धेन्वैक्यम्
तनु+ अंगी= तन्वंगी
वधू + आज्ञा= वध्वाज्ञा
मधु + अरिः= मध्वरिः
वधू + आदेश:=- वध्वादेश:
वधू + आगमनम् = वधवागमनम्
र्पितृ + अर्थम्=पित्रर्थम्
मातृ+ आदेश:=मात्रादेश:
पितृ + आज्ञा=पित्राज्ञा
भ्रातृ + आज्ञा= भ्रात्राज्ञा
मातृ + आ= मात्रा
पितृ + आदेश:=पित्रादेश:
 लाकृति = लृ + आकृति:
लानुदेश: = लृ + अनुदेश:
लादेश: = लृ+ आदेश:
लाकारः = लृ+ आकारः

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